पूर्व ओलंपियन और भारतीय हॉकी कप्तान परगट सिंह को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया है। 2012 से जालंधर कैंट के विधायक रहे सिंह खेल से राजनीति तक लंबा सफर तय कर चुके हैं।
चंडीगढ़, पंजाब | 3 अक्टूबर 2026
By Mohd Haris
परगट सिंह कौन हैं?
भारतीय हॉकी टीम की कप्तानी से लेकर पंजाब की राजनीति में संगठन की कमान संभालने तक परगट सिंह का सफर कई अलग-अलग पड़ावों से होकर गुजरा है। अंतरराष्ट्रीय हॉकी में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले परगट सिंह अब पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हैं। कांग्रेस ने उन्हें अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के स्थान पर यह जिम्मेदारी सौंपी है। नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू हुई।
राजनीतिक जिम्मेदारी मिलने के समय परगट सिंह जालंधर कैंट विधानसभा सीट से विधायक हैं। पंजाब विधानसभा के उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार वह 2012, 2017 और 2022 में इसी सीट से निर्वाचित हुए। उनका जन्म जालंधर के मिट्ठापुर में हुआ था और उनका सार्वजनिक जीवन हॉकी से शुरू होकर खेल प्रशासन, पुलिस सेवा और फिर चुनावी राजनीति तक पहुंचा।
हॉकी के मैदान से बनी पहचान
परगट सिंह का नाम भारतीय हॉकी के उन खिलाड़ियों में शामिल रहा है जिन्होंने लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। वह डिफेंडर के रूप में खेले और भारतीय टीम की कप्तानी भी की।
उपलब्ध खेल रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने 1983 में अंतरराष्ट्रीय हॉकी में पदार्पण किया। वह 1988 के सियोल ओलंपिक में भारतीय टीम का हिस्सा रहे। इसके बाद 1992 के बार्सिलोना ओलंपिक और 1996 के अटलांटा ओलंपिक में उन्होंने भारतीय टीम की कप्तानी की।
अटलांटा ओलंपिक के दौरान वह भारतीय दल के ध्वजवाहक भी रहे। अंतरराष्ट्रीय हॉकी में उनके योगदान के लिए उन्हें 1989 में अर्जुन पुरस्कार और 1998 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। पंजाब विधानसभा के आधिकारिक प्रोफाइल में महाराजा रणजीत सिंह पुरस्कार का भी उल्लेख है।
उनका खेल करियर केवल ओलंपिक तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने विश्व कप और एशियाई प्रतियोगिताओं में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया। अंतरराष्ट्रीय खेल से संन्यास के बाद उनका जुड़ाव हॉकी और खेल प्रशासन से बना रहा।
खेल के बाद प्रशासनिक भूमिका
हॉकी से दूरी बनाने के बाद परगट सिंह ने खेल प्रशासन और सार्वजनिक सेवा में भी जिम्मेदारियां निभाईं। पंजाब विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक वह पंजाब पुलिस और भारतीय रेलवे से जुड़े रहे तथा पंजाब के खेल निदेशक के पद पर भी रहे।
उनका प्रशासनिक अनुभव आगे चलकर राजनीतिक जीवन में भी दिखाई दिया। राजनीति में आने से पहले वह पंजाब पुलिस में अधिकारी के तौर पर भी कार्य कर चुके थे। उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड में उनके पुलिस सेवा से जुड़े रहने और बाद में चुनावी राजनीति में आने का उल्लेख मिलता है।
2012 में चुनावी राजनीति में प्रवेश
परगट सिंह ने 2012 में सक्रिय चुनावी राजनीति में कदम रखा। उन्होंने जालंधर कैंट विधानसभा सीट से शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
यह उनके राजनीतिक सफर का पहला बड़ा पड़ाव था। हॉकी के मैदान पर राष्ट्रीय पहचान बनाने के बाद वह सीधे विधानसभा की राजनीति में पहुंचे।
2016 में उन्होंने अकाली दल से अलग होने का फैसला किया। इसके बाद पंजाब की राजनीति में उनका अगला महत्वपूर्ण पड़ाव कांग्रेस से जुड़ाव रहा।
2017 में कांग्रेस के साथ नई राजनीतिक पारी
2017 के विधानसभा चुनाव से पहले परगट सिंह कांग्रेस के साथ आए। उन्होंने जालंधर कैंट से कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और सीट बरकरार रखी।
इस चुनाव के साथ उनकी राजनीतिक पहचान का एक नया चरण शुरू हुआ। एक तरफ उनके पास पूर्व ओलंपियन और हॉकी कप्तान की सार्वजनिक पहचान थी, दूसरी तरफ वह विधानसभा के निर्वाचित सदस्य के तौर पर राज्य की सक्रिय राजनीति का हिस्सा बन चुके थे।
कांग्रेस संगठन में भी उन्हें जिम्मेदारी मिली। 2021 में नवजोत सिंह सिद्धू के पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद परगट सिंह को प्रदेश कांग्रेस संगठन में महासचिव की जिम्मेदारी दी गई।
चरणजीत सिंह चन्नी सरकार में मंत्री
सितंबर 2021 में परगट सिंह पंजाब की तत्कालीन कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। पंजाब विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने 26 सितंबर 2021 से 11 मार्च 2022 तक मंत्री के तौर पर काम किया।
उनके पास शिक्षा, खेल और युवा सेवाओं से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी रही। एनआरआई मामलों से जुड़ा विभाग भी उनके पास रहा।
यह भूमिका उनके सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण इसलिए रही क्योंकि इससे पहले उनकी पहचान मुख्य रूप से हॉकी और विधायक के तौर पर थी। मंत्री पद के दौरान उनका दायरा राज्य सरकार की नीतियों और प्रशासनिक फैसलों तक बढ़ा।
2022 में भी जालंधर कैंट से जीत
2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को राज्य में बहुमत मिला। कांग्रेस को पिछले चुनाव की तुलना में बड़ा नुकसान हुआ। इसके बावजूद परगट सिंह ने जालंधर कैंट सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा में अपनी जगह बनाए रखी।
इस जीत के साथ वह इस विधानसभा क्षेत्र से लगातार 3 बार विधायक चुने जाने वाले नेताओं में शामिल हो गए। पंजाब विधानसभा के रिकॉर्ड में 2012, 2017 और 2022 के चुनावों में उनकी जीत दर्ज है।
यह राजनीतिक सफर उनके लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों में अपनी विधानसभा सीट बरकरार रखी।
कांग्रेस संगठन में बढ़ती भूमिका
विधानसभा की राजनीति के साथ परगट सिंह की भूमिका कांग्रेस संगठन में भी बढ़ती रही। वह पंजाब से जुड़े राजनीतिक मुद्दों पर सक्रिय रहे और संगठनात्मक गतिविधियों में भाग लेते रहे।
2026 में पंजाब कांग्रेस के भीतर नेतृत्व में बदलाव के बीच उनका नाम प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए सामने आया। 2 अक्टूबर 2026 को अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया। इसके बाद कांग्रेस ने परगट सिंह को नई जिम्मेदारी सौंप दी। आधिकारिक कांग्रेस रिकॉर्ड में अब उनका नाम पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के तौर पर दर्ज है।
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष बनने का घटनाक्रम
पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन 2027 के विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले हुआ है। उपलब्ध आधिकारिक सूचना के अनुसार कांग्रेस अध्यक्ष ने परगट सिंह को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया और यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू हुई।
निवर्तमान अध्यक्ष राजा वड़िंग ने पद से इस्तीफा देने के बाद परगट सिंह को नई जिम्मेदारी मिलने पर शुभकामनाएं दीं।
कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया कि पंजाब में चुनाव से संबंधित विभिन्न समितियों के कार्यकारी अध्यक्षों तथा अध्यक्ष और सह-अध्यक्षों की जिम्मेदारियां यथावत रहेंगी।
इसका मतलब यह है कि प्रदेश अध्यक्ष का बदलाव संगठन के शीर्ष स्तर पर हुआ है, जबकि चुनावी ढांचे की दूसरी जिम्मेदारियों में तत्काल व्यापक बदलाव की घोषणा नहीं की गई।
परगट सिंह के सामने क्या जिम्मेदारी है?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का पद पंजाब में पार्टी संगठन के लिहाज से महत्वपूर्ण है। 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी के दौरान बूथ स्तर के संगठन, जिला इकाइयों, पार्टी कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं के बीच समन्वय इस भूमिका का हिस्सा होगा।
हाल के समय में पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व और संगठन को लेकर मतभेद सार्वजनिक चर्चा का विषय रहे हैं। इसलिए नए प्रदेश अध्यक्ष के सामने संगठनात्मक तालमेल बनाए रखने की जिम्मेदारी भी रहेगी।
हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि नए अध्यक्ष के नेतृत्व में चुनावी नतीजे किस दिशा में जाएंगे। चुनावी परिणाम मतदाताओं के फैसले, उम्मीदवारों, स्थानीय मुद्दों, राजनीतिक गठबंधनों और चुनावी परिस्थितियों समेत कई कारकों पर निर्भर करते हैं।
खेल की पहचान और राजनीति की जिम्मेदारी
परगट सिंह की राजनीतिक पहचान को उनके खेल करियर से अलग करके देखना मुश्किल है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय हॉकी में भारत का प्रतिनिधित्व किया, कप्तानी की और बाद में खेल प्रशासन तथा राजनीति में प्रवेश किया।
उनका राजनीतिक सफर भी सीधा नहीं रहा। शुरुआत अकाली दल से हुई, फिर कांग्रेस से जुड़ाव हुआ। 2012 से 2022 तक जालंधर कैंट से लगातार 3 विधानसभा चुनाव जीतना उनके चुनावी रिकॉर्ड का प्रमुख हिस्सा है।
अब उनके सामने जिम्मेदारी का दायरा विधानसभा क्षेत्र से बढ़कर पूरे पंजाब तक पहुंच गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर उन्हें पार्टी संगठन को राज्य स्तर पर संचालित करना होगा।
परगट सिंह की राजनीतिक शैली पर क्या तस्वीर सामने आती है?
परगट सिंह की सार्वजनिक राजनीति में शिक्षा, खेल, प्रशासन और पंजाब से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे हैं। मंत्री के तौर पर उन्हें शिक्षा और खेल जैसे विभाग मिले। विधायक के तौर पर वह अपने विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे।
उनकी राजनीतिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि उन्होंने पार्टी बदली और अलग-अलग राजनीतिक मंचों से गुजरते हुए कांग्रेस में अपनी जगह बनाई। इसलिए उनकी वर्तमान भूमिका को समझने के लिए केवल उनके हॉकी करियर को देखना पर्याप्त नहीं है।
उनका राजनीतिक सफर 2012 के विधानसभा चुनाव से शुरू होकर 2017 और 2022 की चुनावी जीत, मंत्री पद, कांग्रेस संगठन में जिम्मेदारी और अब प्रदेश अध्यक्ष पद तक पहुंचा है।
ओलंपियन से प्रदेश अध्यक्ष तक की टाइमलाइन
1983 में परगट सिंह ने भारतीय हॉकी टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदार्पण किया।
1988 में उन्होंने सियोल ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
1992 में बार्सिलोना ओलंपिक में उन्होंने भारतीय हॉकी टीम की कप्तानी की।
1996 में अटलांटा ओलंपिक में भी वह भारतीय टीम के कप्तान रहे।
1989 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार मिला।
1998 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
2012 में उन्होंने जालंधर कैंट से विधानसभा चुनाव जीतकर सक्रिय चुनावी राजनीति में प्रवेश किया।
2016 में अकाली दल से अलग हुए और बाद में कांग्रेस से जुड़े।
2017 में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में जालंधर कैंट से विधानसभा चुनाव जीता।
2021 में पंजाब कांग्रेस संगठन में महासचिव की जिम्मेदारी मिली और बाद में कैबिनेट मंत्री बने।
2022 में जालंधर कैंट से तीसरी बार विधायक चुने गए।
2 अक्टूबर 2026 को राजा वड़िंग के इस्तीफे के बाद पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन हुआ।
3 अक्टूबर 2026 तक कांग्रेस के आधिकारिक रिकॉर्ड में परगट सिंह पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में दर्ज हैं।
अब पंजाब कांग्रेस की कमान
परगट सिंह का नया पद उनके राजनीतिक जीवन का अब तक का सबसे बड़ा संगठनात्मक दायित्व है। इससे पहले वह विधायक, मंत्री और कांग्रेस संगठन में पदाधिकारी रह चुके हैं। अब उन्हें पूरे पंजाब में पार्टी संगठन की कमान संभालनी है।
उनकी सबसे बड़ी परीक्षा संगठन के स्तर पर होगी। उन्हें अलग-अलग क्षेत्रों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय करना होगा। साथ ही 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों को आगे बढ़ाना होगा।
परगट सिंह के लिए यह जिम्मेदारी हॉकी मैदान की कप्तानी से अलग है। खेल में मुकाबला एक निर्धारित मैदान और समय के भीतर होता है। राजनीति में संगठन, नीति, स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवार और मतदाताओं की प्राथमिकताएं लगातार बदलती रहती हैं।
इसी वजह से पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका को उनके खेल रिकॉर्ड से अलग एक स्वतंत्र राजनीतिक जिम्मेदारी के तौर पर देखना होगा।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।