जापान में 2025 में भालुओं की 50,000 से ज्यादा मौजूदगी दर्ज हुई और हमलों में 13 लोगों की मौत हुई। सरकार ने 14,000 से ज्यादा भालुओं को पकड़ने की कार्रवाई की।
टोक्यो | 27 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
जापान में भालू और इंसानों के बीच टकराव ने गंभीर शक्ल ले ली है। 2025 में देशभर में भालुओं के दिखने की 50,000 से ज्यादा घटनाएं दर्ज हुईं, जबकि हमलों में 13 लोगों की मौत और 238 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई। ये दोनों आंकड़े रिकॉर्ड स्तर पर रहे। इसी बढ़ते खतरे के बीच जापानी प्रशासन ने भालुओं को पकड़ने और आबादी नियंत्रित करने की कार्रवाई तेज की। वित्त वर्ष 2025 में 14,000 से ज्यादा भालुओं को पकड़ा गया और मारा गया। यह जापान में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा बताया गया है। लेकिन सवाल यह है कि जापान में भालुओं की संख्या और इंसानी बस्तियों में उनकी मौजूदगी अचानक इतनी क्यों बढ़ गई?
विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे सबसे बड़ी वजह भोजन की उपलब्धता में बदलाव है। 2025 में जंगलों में एकोर्न और दूसरे जंगली खाद्य स्रोतों की पैदावार कमजोर रही। भोजन की कमी ने भालुओं को जंगलों से बाहर निकलकर खेतों और आबादी वाले इलाकों की तरफ जाने के लिए मजबूर किया।
भालुओं के लिए शरद ऋतु बेहद अहम होती है। सर्दियों से पहले उन्हें पर्याप्त ऊर्जा और वसा जमा करनी होती है। जंगल में भोजन कम मिलने पर इंसानी बस्तियों के आसपास मौजूद फल, फसलें और कचरे में बचा भोजन उनके लिए आसान विकल्प बन जाते हैं। यही वजह है कि कई इलाकों में भालू अब उन जगहों पर भी दिखाई दे रहे हैं, जहां पहले उनका दिखना अपेक्षाकृत कम था।
इस संकट में मौसम और जलवायु में हो रहे बदलाव को भी एक संभावित कारक माना जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक गर्म तापमान भालुओं के व्यवहार और शीतनिद्रा के समय को प्रभावित कर सकता है। जंगलों में भोजन की उपलब्धता भी मौसम के बदलाव से प्रभावित होती है। जब एकोर्न, फल और दूसरे प्राकृतिक खाद्य स्रोत कम होते हैं, तो भालुओं के इंसानी इलाकों में पहुंचने का जोखिम बढ़ जाता है। हालांकि इस पूरे संकट को केवल जलवायु परिवर्तन से जोड़ना सही नहीं होगा। जापान में ग्रामीण आबादी का कम होना, खेती वाले इलाकों का खाली होना और जंगलों के आसपास मानवीय गतिविधियों में बदलाव भी अहम भूमिका निभाते हैं।
जापान के पर्यावरण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025 में भालुओं के दिखने की 50,776 घटनाएं दर्ज हुईं। यह 2024 के 20,513 मामलों के मुकाबले करीब 150% की बढ़ोतरी थी। सबसे ज्यादा मामले जापान के उत्तरी और उत्तर-पूर्वी हिस्सों में सामने आए। अकिता में 13,592, इवाते में 9,739, मियागी में 3,559 और निगाता में 3,528 भालू देखे जाने की घटनाएं दर्ज हुईं। यहां एक जरूरी तथ्य यह है कि भालू दिखने की संख्या और भालुओं की वास्तविक आबादी एक ही चीज नहीं है। एक ही क्षेत्र में अलग-अलग समय पर एक ही भालू दिखाई दे सकता है। इसलिए इन आंकड़ों को सीधे कुल भालुओं की संख्या नहीं माना जाना चाहिए।
वित्त वर्ष 2025 में जापान में 14,601 भालुओं को पकड़े जाने और मारे जाने का आंकड़ा सामने आया है। यह पिछले रिकॉर्ड से काफी ज्यादा है।
इससे पहले नवंबर 2025 तक ही 12,659 भालू पकड़े जा चुके थे। उस समय सरकार के आंकड़ों में यह भी सामने आया था कि पकड़ने की कार्रवाई में अकिता सबसे आगे था। पूरे तोहोकू क्षेत्र में देश के कुल पकड़े गए भालुओं का करीब 65% हिस्सा दर्ज हुआ था। इन कार्रवाइयों का उद्देश्य केवल भालुओं की संख्या कम करना नहीं है। स्थानीय प्रशासन का एक बड़ा मकसद उन भालुओं को आबादी वाले इलाकों से हटाना है, जो इंसानों के लिए तत्काल खतरा पैदा करते हैं।
जापान में भालुओं के हमलों ने सरकार पर दबाव बढ़ाया है। वित्त वर्ष 2025 में 216 हमले दर्ज हुए और 238 लोग घायल या मारे गए। इनमें 13 मौतें शामिल थीं। 2026 में भी घटनाएं जारी हैं। मई तक इवाते और यामागाता जैसे क्षेत्रों में ऐसे मामले सामने आए, जिनमें लोगों की मौत को भालू के हमले से जोड़ा गया। यही स्थिति जापान के लिए बड़ा प्रशासनिक और सुरक्षा संकट बन गई है। ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए जंगल और आबादी के बीच की दूरी पहले जैसी सुरक्षित नहीं रह गई है।
जापान के ग्रामीण इलाकों में आबादी लंबे समय से घट रही है। इसके साथ ही पारंपरिक शिकारी समुदाय की संख्या और उम्र का ढांचा भी बदल रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक कम होते शिकारी और ग्रामीण आबादी में गिरावट ने वन्यजीव प्रबंधन को कठिन बनाया है। जापानी सरकार ने भी नए प्रशिक्षित शिकारियों और स्थानीय प्रशासन की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया है। सरकार की चिंता यह भी है कि आपात स्थिति में भालू को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षित लोग उपलब्ध हों।
सितंबर 2025 से जापान ने ऐसी आपात परिस्थितियों में आबादी वाले इलाकों में भालुओं को गोली मारने की व्यवस्था आसान की, जहां जानवर इंसानों के लिए तत्काल खतरा पैदा कर रहा हो। 2025 के अंत तक ऐसे 54 आपातकालीन मामलों में गोली चलाने की अनुमति दी गई थी।
मार्च 2026 में जापानी सरकार ने भालू प्रबंधन के लिए नया रोडमैप भी मंजूर किया। इसमें अलग-अलग क्षेत्रों के हिसाब से भालुओं की संख्या नियंत्रित करने के लक्ष्य तय किए गए हैं। सरकार ने 2030 तक स्थानीय स्तर पर भालू पकड़ने वाले सरकारी कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर करीब 2,500 करने और उपकरणों की उपलब्धता बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।
जापान का मौजूदा रुख केवल बड़े पैमाने पर पकड़ने तक सीमित नहीं है। सरकार ने भालुओं की वास्तविक आबादी का अधिक सटीक अनुमान लगाने के लिए देशभर में एक समान वैज्ञानिक पद्धति विकसित करने की योजना बनाई है। इसके लिए कैमरा ट्रैप, भालुओं के बालों से डीएनए विश्लेषण और दूसरे वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसका मकसद अलग-अलग इलाकों में भालुओं की वास्तविक संख्या और उनके फैलाव को बेहतर तरीके से समझना है। इससे भविष्य की कार्रवाई को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तय करने में मदद मिलेगी।
यही इस पूरे मामले का सबसे विवादित पहलू है। एक तरफ स्थानीय समुदायों की सुरक्षा का सवाल है। जब भालू आबादी वाले इलाकों में पहुंचते हैं और इंसानों पर हमला करते हैं, तो प्रशासन पर तत्काल कार्रवाई का दबाव स्वाभाविक है। दूसरी तरफ बड़े पैमाने पर भालुओं को मारने से पारिस्थितिकी और संरक्षण को लेकर चिंता पैदा होती है। जापान में एशियाई काले भालू की आबादी भी इस बहस का अहम हिस्सा है। विशेषज्ञों और संरक्षणवादियों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या हर क्षेत्र में एक जैसा नियंत्रण मॉडल अपनाने के बजाय जोखिम पैदा करने वाले भालुओं की लक्षित पहचान, कचरा प्रबंधन, जंगलों में भोजन स्रोतों की बहाली और बस्तियों की सुरक्षा को ज्यादा प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
जापान को दो समानांतर जरूरतों के बीच संतुलन बनाना होगा। पहली जरूरत इंसानी जान की सुरक्षा है। दूसरी जरूरत वन्यजीव और पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण है। सरकार ने 2030 तक क्षेत्रवार भालू प्रबंधन, बेहतर आबादी सर्वेक्षण और स्थानीय प्रशासन की क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार 2026 में भी भालू से जुड़ी घटनाओं की निगरानी जारी है और आंकड़े नियमित रूप से अपडेट किए जा रहे हैं।
मामले का स्थायी समाधान केवल भालुओं की संख्या घटाने से हासिल होगा, ऐसा अभी कहना जल्दबाजी होगी। जंगलों में भोजन की उपलब्धता, ग्रामीण इलाकों में मानवीय गतिविधि, कचरा प्रबंधन, शिकारी और वन्यजीव प्रबंधन की क्षमता, इन सभी पहलुओं को साथ लेकर रणनीति बनानी होगी।
जापान में 14,000 से ज्यादा भालुओं का मारा जाना एक बड़े वन्यजीव संकट की तस्वीर पेश करता है। इसके पीछे केवल भालुओं की बढ़ती संख्या नहीं, बल्कि जंगलों में भोजन की कमी, ग्रामीण क्षेत्रों में बदलाव, इंसानी बस्तियों का विस्तार और वन्यजीव प्रबंधन की बदलती चुनौतियां भी जुड़ी हैं।
2025 के रिकॉर्ड हमलों ने सरकार को सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर किया। लेकिन आने वाले वर्षों में जापान की असली परीक्षा यह होगी कि इंसानी सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण के बीच कितना संतुलित और वैज्ञानिक रास्ता तैयार किया जाता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।