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यूपी में यूसीसी को लेकर भूपेंद्र चौधरी का बड़ा बयान, बोले सरकार लागू करने के लिए तैयार

Wasi Siddiqui • 2026-09-15 13:36:31
यूपी में यूसीसी को लेकर भूपेंद्र चौधरी का बड़ा बयान, बोले सरकार लागू करने के लिए तैयार

उत्तर प्रदेश में समान नागरिक संहिता को लेकर भाजपा नेता भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि योगी सरकार इसे लागू करने के लिए तैयार है। बयान के बाद यूपी की सियासत में यूसीसी को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

📍 लखनऊ, उत्तर प्रदेश
🗓️ 15 सितंबर 2026
✍️ Wasi Siddiqui

उत्तर प्रदेश में समान नागरिक संहिता को लेकर सियासी बहस एक बार फिर तेज हो गई है। योगी सरकार में मंत्री और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने कहा है कि सरकार यूसीसी लागू करने के लिए तैयार है। उनका यह बयान ऐसे वक्त आया है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर गतिविधियां तेज हैं।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि उत्तर प्रदेश में यूसीसी लागू करने की तारीख तय हो चुकी है। भूपेंद्र चौधरी के बयान में तैयारी की बात कही गई है, लेकिन किसी प्रस्तावित विधेयक, समयसीमा या कैबिनेट फैसले का विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है।

भूपेंद्र चौधरी ने क्या कहा

भूपेंद्र चौधरी के मुताबिक भाजपा ने लोकसभा चुनाव के दौरान जारी अपने संकल्प पत्र में समान नागरिक संहिता को प्रमुख मुद्दों में शामिल किया था। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी यूसीसी को लागू करने के पक्ष में है और सरकार इसे लागू करने के लिए तैयार है।

उन्होंने महिलाओं के अधिकारों का भी हवाला दिया। उनके मुताबिक समान नागरिक संहिता लागू होने तक महिलाओं को उनके अधिकारों की पूर्ण सुरक्षा और अधिकार देना संभव नहीं है। यह भूपेंद्र चौधरी का राजनीतिक और नीतिगत दावा है, जिसे इसी रूप में देखा जाना चाहिए।

क्या उत्तर प्रदेश में यूसीसी लागू करने की तैयारी पूरी है

अभी उपलब्ध रिपोर्ट से इतना स्पष्ट है कि सरकार की ओर से यूसीसी के समर्थन में राजनीतिक बयान सामने आया है। लेकिन उत्तर प्रदेश में इसके लिए किस तरह का कानून तैयार किया जा रहा है, उसका प्रारूप क्या होगा और इसे विधानसभा में कब पेश किया जाएगा, इन सवालों पर इस बयान में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।

इसलिए फिलहाल इसे सरकार की ओर से यूसीसी लागू करने की राजनीतिक प्रतिबद्धता और तैयारी के संकेत के तौर पर देखना अधिक सटीक होगा। इसे तत्काल कानून लागू होने की घोषणा मानना उचित नहीं होगा।

यूसीसी क्या है

समान नागरिक संहिता का मकसद विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और परिवार से जुड़े कुछ नागरिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था तैयार करना है। भारत में इन क्षेत्रों से जुड़े कई मामलों में अलग-अलग समुदायों के निजी कानून और परंपराएं प्रभावी रही हैं।

भारतीय संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों में अनुच्छेद 44 राज्य को नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास करने की बात कहता है। हालांकि यह प्रावधान अपने आप में किसी राज्य में यूसीसी लागू नहीं करता।

भाजपा की पुरानी नीति

समान नागरिक संहिता लंबे समय से भाजपा के प्रमुख वैचारिक और राजनीतिक मुद्दों में शामिल रही है। पार्टी के दस्तावेजों में भी यूसीसी को लेकर समर्थन दर्ज रहा है।

हाल के वर्षों में उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों में यूसीसी को लेकर कानून बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। मार्च 2026 में गुजरात विधानसभा ने यूसीसी विधेयक पारित किया था। केंद्र सरकार ने इसे भाजपा की लंबे समय से चली आ रही प्रतिबद्धता से जोड़ा था।

उत्तर प्रदेश के लिए इसका क्या मतलब

भूपेंद्र चौधरी का बयान उत्तर प्रदेश में यूसीसी को लेकर राजनीतिक नैरेटिव को फिर सक्रिय करता है। अगर सरकार आगे कानून का प्रारूप तैयार करती है, तो उसके प्रावधानों पर विधानसभा, कानूनी विशेषज्ञों और विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच व्यापक बहस की संभावना रहेगी।

यूसीसी का मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं है। इसका सीधा संबंध विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक अधिकारों जैसे नागरिक मामलों से जुड़ सकता है। इसलिए किसी भी प्रस्तावित कानून की वास्तविक अहमियत उसके घोषित उद्देश्य के साथ-साथ उसके प्रावधानों और उनके क्रियान्वयन से तय होगी।

महिलाओं के अधिकार का सवाल

भूपेंद्र चौधरी ने यूसीसी के समर्थन में महिलाओं के अधिकारों को प्रमुख आधार बनाया है। इस तर्क के केंद्र में यह विचार है कि व्यक्तिगत कानूनों में मौजूद अलग-अलग व्यवस्थाओं के स्थान पर समान नागरिक नियम होने से अधिकारों की कानूनी सुरक्षा को एकरूपता मिल सकती है।

लेकिन किसी भी कानून का महिलाओं पर वास्तविक असर उसके प्रावधानों से तय होगा। इसलिए प्रस्तावित कानून सामने आने के बाद ही यह आकलन संभव होगा कि विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और संपत्ति अधिकारों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।

सियासी संदर्भ भी अहम

उत्तर प्रदेश में यूसीसी का मुद्दा ऐसे समय सामने आया है जब राज्य की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। भाजपा के लिए यूसीसी लंबे समय से एक प्रमुख वैचारिक मुद्दा रहा है।

दूसरी ओर, यूसीसी को लेकर विपक्षी दलों और विभिन्न सामाजिक समूहों की ओर से अलग-अलग आपत्तियां और सवाल उठते रहे हैं। इनमें व्यक्तिगत कानून, धार्मिक स्वतंत्रता, सामाजिक विविधता और कानून के समान अनुप्रयोग से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।

इसलिए आगे की बहस केवल सरकार के राजनीतिक बयान तक सीमित नहीं रहेगी। असली सवाल यह होगा कि उत्तर प्रदेश सरकार यूसीसी का कौन सा प्रारूप सामने रखती है और उसके प्रावधानों में विभिन्न समुदायों तथा नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को किस तरह संबोधित किया जाता है।

अब आगे क्या

फिलहाल भूपेंद्र चौधरी के बयान से यूसीसी पर सरकार की राजनीतिक तैयारी का संकेत मिला है। आगे की तस्वीर किसी आधिकारिक विधेयक, मंत्रिमंडल के फैसले या सरकार की औपचारिक घोषणा से स्पष्ट होगी।

अगर उत्तर प्रदेश सरकार यूसीसी पर विधायी कदम आगे बढ़ाती है, तो प्रस्तावित कानून के प्रावधान सबसे महत्वपूर्ण होंगे। उसके बाद विधानसभा में बहस, कानूनी समीक्षा और संभावित न्यायिक परीक्षण भी इस प्रक्रिया का अहम हिस्सा बन सकते हैं।

उत्तर प्रदेश में यूसीसी को लेकर भूपेंद्र चौधरी का बयान राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे कानून लागू होने की अंतिम घोषणा के रूप में देखना अभी उचित नहीं है। फिलहाल सरकार की ओर से तैयारी और प्रतिबद्धता का दावा सामने आया है।

अब निगाह इस बात पर रहेगी कि क्या यह बयान आगे किसी ठोस विधायी पहल में बदलता है। उत्तर प्रदेश में यूसीसी की वास्तविक तस्वीर प्रस्तावित कानून, उसकी समयसीमा और उसके प्रावधान सामने आने के बाद ही साफ होगी।

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Wasi Siddiqui

Wasi Siddiqui

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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