गुरुवार, 08 October 2026
GOLD ₹0 ▼ 0%
SENSEX 0 ▼ 0%
BITCOIN $0 ▼ 0%
38°C मुजफ्फरनगर
🔔 Google पर Shah Times की खबरें पाने के लिए क्लिक करें
EDITION:
BREAKING
#ShahTimes #Muzaffarnagar #Bijnor #Moradabad #BreakingNews #Politics #Education #Crime #Sports #Business
Advertisement Advertisement
Politics

झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026: क्रॉस वोटिंग से बदले समीकरण, NDA की रणनीति रही सफल

Apurva Choudhary • 2026-06-19 08:15:50
झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026: क्रॉस वोटिंग से बदले समीकरण, NDA की रणनीति रही सफल
रांची: झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में अप्रत्याशित बदलाव का संकेत दिया है। विधानसभा में संख्या बल के आधार पर INDIA गठबंधन को मजबूत माना जा रहा था, लेकिन परिणामों ने राजनीतिक गणित को पूरी तरह बदल दिया। NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी की जीत और कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की हार ने गठबंधन की एकजुटता और राजनीतिक प्रबंधन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस चुनाव का सबसे चर्चित पहलू क्रॉस वोटिंग रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परिणाम केवल एक राज्यसभा सीट का फैसला नहीं, बल्कि झारखंड की गठबंधन राजनीति की वास्तविक स्थिति का प्रतिबिंब है।
राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया कैसे काम करती है?
लोकसभा चुनावों के विपरीत राज्यसभा चुनाव में आम मतदाता सीधे मतदान नहीं करते। राज्यसभा सांसदों का चुनाव संबंधित राज्य की विधानसभा के निर्वाचित विधायक करते हैं।
यह चुनाव "सिंगल ट्रांसफरेबल वोट" प्रणाली के तहत होता है, जिसमें उम्मीदवार की जीत केवल संख्या बल पर नहीं, बल्कि प्रभावी वोट प्रबंधन और रणनीतिक समन्वय पर भी निर्भर करती है।
इसी वजह से कई बार विधानसभा में बहुमत रखने वाले दल भी राज्यसभा चुनाव में अपेक्षित परिणाम हासिल नहीं कर पाते।
झारखंड में क्या था राजनीतिक गणित?
झारखंड विधानसभा में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), कांग्रेस और उनके सहयोगी दलों के पास पर्याप्त संख्या थी। चुनाव से पहले अधिकांश राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना था कि INDIA गठबंधन दोनों सीटों पर मजबूत स्थिति में रहेगा।
JMM ने बैजनाथ राम को उम्मीदवार बनाया, जबकि कांग्रेस ने प्रणव झा को मैदान में उतारा। दूसरी ओर NDA ने रणनीतिक रूप से परिमल नाथवानी का समर्थन किया।
हालांकि, मतदान और परिणामों ने सभी अनुमान बदल दिए।
परिमल नाथवानी की जीत कैसे बनी NDA की रणनीतिक सफलता?
परिमल नाथवानी भारतीय राजनीति और कॉर्पोरेट जगत का जाना-पहचाना नाम हैं। वे पहले भी राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं और झारखंड की राजनीति में उनकी सक्रिय उपस्थिति रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि NDA ने एक ऐसे उम्मीदवार को समर्थन दिया, जिन्हें विभिन्न राजनीतिक दलों के कुछ विधायकों के बीच स्वीकार्यता प्राप्त थी। यही रणनीति उनके पक्ष में निर्णायक साबित हुई।
क्रॉस वोटिंग क्यों बनी चर्चा का केंद्र?
जब कोई विधायक अपनी पार्टी या गठबंधन के आधिकारिक उम्मीदवार के बजाय किसी दूसरे उम्मीदवार को वोट देता है, तो उसे क्रॉस वोटिंग कहा जाता है।
राज्यसभा चुनाव में यह स्थिति अक्सर देखने को मिलती है, क्योंकि यहां मतदान की प्रक्रिया अलग होती है और कई बार राजनीतिक असंतोष, व्यक्तिगत समीकरण या रणनीतिक कारणों से विधायक पार्टी लाइन से अलग निर्णय लेते हैं।
झारखंड चुनाव के नतीजों के बाद भी यही चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है। हालांकि किसी दल ने आधिकारिक रूप से क्रॉस वोटिंग की पुष्टि नहीं की है, लेकिन परिणाम अपेक्षित वोटिंग पैटर्न में बदलाव का संकेत देते हैं।
कांग्रेस की हार क्यों महत्वपूर्ण मानी जा रही है?
कांग्रेस उम्मीदवार की हार को केवल एक सीट का नुकसान नहीं माना जा रहा है। इस परिणाम ने गठबंधन के भीतर समन्वय, विधायकों की एकजुटता और चुनावी रणनीति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गठबंधन के भीतर बेहतर तालमेल होता, तो परिणाम अलग हो सकते थे।
JMM की स्थिति क्या दर्शाती है?
जहां कांग्रेस को झटका लगा, वहीं JMM उम्मीदवार बैजनाथ राम की जीत ने यह संकेत दिया है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में पार्टी का मूल समर्थन आधार अभी भी मजबूत बना हुआ है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह परिणाम JMM की कमजोरी नहीं, बल्कि गठबंधन के भीतर राजनीतिक प्रबंधन की चुनौती को दर्शाता है।
राष्ट्रीय राजनीति पर क्या होगा असर?
राज्यसभा चुनाव सीधे तौर पर सरकार बनाने या गिराने का फैसला नहीं करते, लेकिन संसद की विधायी प्रक्रिया पर उनका महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।
राज्यसभा में संख्या बढ़ने से सरकार को महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में सहूलियत मिलती है। ऐसे में झारखंड का परिणाम राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस चुनाव के बाद झारखंड में गठबंधन दल अपने विधायकों के बीच समन्वय मजबूत करने का प्रयास करेंगे। वहीं NDA इस जीत को अपनी राजनीतिक रणनीति की सफलता के रूप में प्रस्तुत कर सकता है।
आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भी इस परिणाम का प्रभाव देखने को मिल सकता है।
झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026 ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि राजनीति केवल संख्या बल का खेल नहीं है। सही रणनीति, प्रभावी राजनीतिक प्रबंधन और संगठनात्मक मजबूती कई बार स्थापित गणित को भी बदल सकती है।
ADVERTISEMENT
Apurva Choudhary

Apurva Choudhary

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

BREAKING NEWS

संबंधित खबरें

स्वामी प्रसाद मौर्य की INDIA में एंट्री पर सीटों का पेंच, आराधना मिश्रा के बयान से बढ़ा सस्पेंस

2026-10-05 13:01:49

यूपी राज्यसभा चुनाव में अखिलेश यादव की रणनीति, NDA के कितने विधायक बदले तो बिगड़ेगा पूरा गणित?

2026-10-01 15:04:57

यूपी में सपा-कांग्रेस गठबंधन पर BJP का हमला, राहुल-अखिलेश पर ‘अहंकार’ का आरोप

2026-10-07 12:29:43

यूपी 2027 में किस एजेंडे पर होगा मुकाबला? विकास, पीडीए और गठबंधन का सियासी इम्तिहान

2026-10-05 11:23:28

यूपी में सीट शेयरिंग पर सपा-कांग्रेस आमने-सामने, एसपी सिंह पटेल ने 150 सीटों की मांग पर उठाए सवाल

2026-10-03 16:28:28

राहुल गांधी ने लॉन्च किया ‘सत्याग्रह’ डिजिटल प्लेटफॉर्म, बोले, अन्याय के खिलाफ अकेले मत लड़िए

2026-10-03 12:04:04

कांग्रेस में बदल रहा सत्ता-संतुलन? राहुल गांधी और युवा टीम के बढ़ते असर के बीच पुराने चेहरों की भूमिका पर सवाल

2026-10-01 11:30:46

UP Chunav 2027: ‘जय श्री राम’ के मुकाबले ‘हर हर महादेव’? रेवंत रेड्डी के बयान से कांग्रेस की रणनीति पर बहस

2026-09-30 16:30:11

TRENDING

ताज़ा ख़बरें
BREAKING NEWS
ADVERTISEMENT

Your Ad Here
TRENDING
आज का ई-पेपर
मुजफ्फरनगर (12 पेज)
बिजनौर (10 पेज)
सहारनपुर (11 पेज)
मुरादाबाद (14 पेज)
Home Video Epaper Reel Menu
Chat With Us
SHAH TIMES
ख़बरें छुपाता नहीं, छापता है
🏠 होम ⚡ ब्रेकिंग न्यूज़ 📰 ताज़ा खबरें 🇮🇳 देश 🌍 दुनिया 🏛 राजनीति 🚔 क्राइम 📈 बिजनेस 🏏 स्पोर्ट्स 🎓 शिक्षा ❤️ स्वास्थ्य 📰 ई-पेपर