राज्यसभा दो-तिहाई बहुमत के करीब NDA, विपक्ष क्यों सतर्क?
Asif Khan
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2026-07-02 11:56:00
राज्यसभा में हालिया बदलावों के बाद एनडीए की स्थिति पहले से मजबूत हुई है। हालांकि गठबंधन अभी भी संवैधानिक संशोधन के लिए आवश्यक विशेष बहुमत के गणित पर निर्भर है। विपक्ष इस बदलाव को आगामी संसद सत्र के लिहाज़ से महत्वपूर्ण मान रहा है।
📍 New Delhi
📰 July 2, 2026
✍️ Asif Khan
राज्यसभा दो-तिहाई बहुमत की बहस फिर क्यों तेज हुई?
मानसून सत्र से पहले एक बार फिर राज्यसभा दो-तिहाई बहुमत राष्ट्रीय सियासत का बड़ा मुद्दा बन गया है। हाल में हुए राज्यसभा चुनाव और नए सांसदों के शपथ ग्रहण के बाद सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए की संख्या पहले की तुलना में मजबूत हुई है। इसी बदलाव ने विपक्षी दलों की राजनीतिक रणनीति और संसद के आगामी एजेंडे पर नई चर्चा शुरू कर दी है।
शरद पवार समेत कई विपक्षी नेताओं ने आशंका जताई है कि यदि सरकार विशेष बहुमत के और करीब पहुंचती है तो संवैधानिक संशोधनों से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों पर उसकी स्थिति पहले से अधिक मजबूत हो सकती है। हालांकि अब तक ऐसी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि एनडीए ने दोनों सदनों में आवश्यक विशेष बहुमत हासिल कर लिया है।
राज्यसभा के बदलते समीकरण
हालिया चुनावों में एनडीए ने अधिकांश सीटों पर बढ़त दर्ज की। नए निर्वाचित सांसदों के शपथ लेने के बाद गठबंधन की प्रभावी संख्या बढ़ी है। इससे सरकार की संसदीय स्थिति मजबूत हुई है, लेकिन दो-तिहाई बहुमत का वास्तविक गणित सदन की प्रभावी सदस्य संख्या, उपस्थित सदस्यों और मतदान की स्थिति पर भी निर्भर करता है।
राज्यसभा एक स्थायी सदन है और इसके सदस्य चरणबद्ध तरीके से सेवानिवृत्त होते हैं। इसलिए यहां बहुमत का गणित लोकसभा की तुलना में अलग तरीके से बदलता है। प्रत्येक चुनाव के साथ राजनीतिक दलों की ताकत में क्रमिक परिवर्तन आता है, जिसका असर बड़े विधायी फैसलों पर पड़ सकता है।
राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत क्यों अहम माना जाता है?
राज्यसभा में साधारण बहुमत और विशेष बहुमत के बीच बड़ा अंतर होता है। अधिकांश सामान्य विधेयक साधारण बहुमत से पारित हो सकते हैं, लेकिन संविधान संशोधन जैसे प्रस्तावों के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। ऐसे मामलों में सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन के साथ-साथ संविधान के प्रावधानों के अनुसार अन्य आवश्यक शर्तें भी पूरी करनी होती हैं।
हालिया राज्यसभा चुनावों में एनडीए ने 26 में से 19 सीटों पर जीत दर्ज की। इसके बाद नए सदस्यों के शपथ ग्रहण से गठबंधन की स्थिति पहले की तुलना में और मजबूत हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे सरकार का विधायी एजेंडा आगे बढ़ाने की क्षमता बढ़ी है, हालांकि हर संवैधानिक संशोधन का परिणाम उस समय की वास्तविक उपस्थिति और मतदान पर निर्भर करेगा।
अब तक की प्रमुख टाइमलाइन
मार्च से जून 2026 के बीच विभिन्न राज्यों में राज्यसभा की रिक्त सीटों के लिए चुनाव हुए। इन चुनावों में एनडीए ने अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन किया और कई महत्वपूर्ण सीटें अपने पक्ष में जोड़ीं। इसके बाद जून के अंतिम सप्ताह में निर्वाचित सदस्यों ने शपथ ली, जिससे सदन का नया शक्ति संतुलन सामने आया।
इसी दौरान विपक्ष के वरिष्ठ नेता शरद पवार ने मानसून सत्र से पहले कहा कि यदि सत्तापक्ष दो-तिहाई बहुमत के और करीब पहुंचता है तो विपक्ष को संसद में अधिक समन्वित रणनीति अपनानी होगी। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई। यह बयान एक राजनीतिक आकलन है, न कि किसी संवैधानिक स्थिति की आधिकारिक घोषणा।
विपक्ष का नज़रिया
इंडिया गठबंधन का तर्क है कि संसद में संख्या बढ़ने से सरकार महत्वपूर्ण संवैधानिक विधेयकों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर सकती है। विपक्ष का कहना है कि ऐसे किसी भी प्रस्ताव पर व्यापक चर्चा और सहमति आवश्यक होगी।
विपक्षी दल यह भी दोहरा रहे हैं कि केवल संख्या बल लोकतांत्रिक विमर्श का विकल्प नहीं हो सकता। उनका कहना है कि संविधान संशोधन जैसे मामलों में राजनीतिक संवाद और संघीय ढांचे का सम्मान सर्वोपरि रहना चाहिए।
सरकार का पक्ष
सत्तापक्ष का कहना है कि राज्यसभा में बढ़ती संख्या जनता के जनादेश और राज्यों में उसके राजनीतिक विस्तार का परिणाम है। सरकार समर्थक नेताओं का तर्क है कि यदि संसद में आवश्यक समर्थन मिलता है तो विकास, प्रशासनिक सुधार और लंबित विधायी प्रस्तावों को आगे बढ़ाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
ज़मीनी हकीकत
फिलहाल उपलब्ध संसदीय स्थिति यह संकेत देती है कि एनडीए राज्यसभा में पहले से अधिक मजबूत स्थिति में है, लेकिन प्रत्येक संविधान संशोधन विधेयक का परिणाम उस समय सदन में मौजूद सदस्यों, मतदान के पैटर्न और सहयोगी दलों के रुख पर निर्भर करेगा। इसलिए यह कहना कि सरकार ने हर परिस्थिति में दो-तिहाई बहुमत सुनिश्चित कर लिया है, उपलब्ध तथ्यों के आधार पर सही नहीं होगा।
आगे क्या?
अब सभी की निगाहें आगामी मानसून सत्र पर हैं। यदि सरकार कोई बड़ा संवैधानिक विधेयक लाती है, तो राज्यसभा की नई संख्या का वास्तविक असर पहली बार स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। साथ ही यह भी सामने आएगा कि सहयोगी दल और अन्य गैर-एनडीए सदस्य महत्वपूर्ण मतदान के समय क्या रुख अपनाते हैं।
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Asif Khan
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।