दुनिया भर में प्रेस स्वतंत्रता कमजोर हो रही है।
संयुक्त राष्ट्र ने पत्रकारों की सुरक्षा पर जोर दिया।
नई रिपोर्ट में हालात पहले से ज्यादा गंभीर दिखे।
📍United Nations 🗓️ 3 May 2026 ✍️ Asif Khan
विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर बड़ा संदेश आया।
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख Antonio Guterres ने साफ कहा, प्रेस की आज़ादी के बिना कोई भी स्वतंत्रता पूरी नहीं होती।
उन्होंने वैश्विक स्तर पर पत्रकारों की सुरक्षा की अपील की।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी संदेश में उन्होंने कहा कि सच बोलने वालों को सुरक्षित रखना जरूरी है।
इसी बीच Reporters Without Borders की नई रिपोर्ट सामने आई।
इसमें 2026 के प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक ने गंभीर गिरावट दिखाई।
180 देशों का औसत स्कोर गिरा
52% से ज्यादा देश ‘कठिन’ या ‘गंभीर’ श्रेणी में
भारत 157वें स्थान पर
अमेरिका भी नीचे खिसका
प्रेस सिर्फ खबर नहीं देता।
यह सत्ता पर निगरानी रखता है।
जब पत्रकार डरते हैं:
भ्रष्टाचार छुपता है
मानवाधिकार कमजोर होते हैं
लोकतंत्र कमजोर पड़ता है
यह सिर्फ मीडिया का मुद्दा नहीं।
यह सीधे नागरिकों के अधिकार से जुड़ा है।
पिछले 20 साल में बड़ा बदलाव आया है।
2002 में जहां हालात बेहतर थे, अब स्थिति उलट दिखती है।
रिपोर्ट बताती है:
कानूनों का दुरुपयोग बढ़ा
राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर दबाव
पत्रकारों पर केस और गिरफ्तारी
2025 में 200 से ज्यादा पत्रकारों की मौत भी दर्ज हुई।
500 से ज्यादा जेल में हैं।
यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं।
यह वैश्विक ट्रेंड है।
तीन बड़े कारण दिखते हैं:
सरकारों का बढ़ता नियंत्रण
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गलत सूचना
युद्ध और संघर्ष क्षेत्रों में खतरा
सवाल यह भी है कि टेक कंपनियां और राज्य मिलकर किस दिशा में जा रहे हैं।
क्या सूचना पर नियंत्रण बढ़ेगा?
क्या पत्रकारिता और जोखिम भरी होगी?
क्या लोकतंत्र बिना स्वतंत्र मीडिया टिक पाएगा?
क्या कानून सुरक्षा देंगे या दबाव बढ़ाएंगे?
क्या डिजिटल मीडिया भरोसेमंद रहेगा?
स्थिति साफ है।
प्रेस की आज़ादी कमजोर हो रही है।
अब फैसला सरकारों, संस्थाओं और समाज के हाथ में है।
क्या सच बोलने वालों को सुरक्षा मिलेगी, या खामोशी बढ़ेगी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।