जनता की जरूरत नहीं रही भाजपा को…

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भाजपा कार्पोरेट कल्चर की तरह विज्ञापनों के जरिए खुद को बेंच रही है। यह हमें केवल आश्चर्यचकित ही नहीं करता बल्कि दुखी भी करता है। भाजपा ने सबसे ज्यादा जो नुकसान किया है, वह है देश का, खासकर के हिंदी पट्टी के सामाजिक ताने-बाने का।


पवन सिंह


विगत दस सालों में भाजपा ने जनता के सरोकारों से खुद को अलग कर लिया है। जनता की भावनाओं, संवेदनाओं और उनकी मूलभूत जरूरतों तक से भाजपा ने खुद को विरत कर लिया है। भाजपा कार्पोरेट कल्चर की तरह विज्ञापनों के जरिए खुद को बेंच रही है। यह हमें केवल आश्चर्यचकित ही नहीं करता बल्कि दुखी भी करता है। भाजपा ने सबसे ज्यादा जो नुकसान किया है, वह है देश का, खासकर के हिंदी पट्टी के सामाजिक ताने-बाने का।

विगत दस सालों के भीतर भाजपा की “नफरत पैकिंग फैक्ट्री” यानी आईटी सेल ने भारतीय समाज के बीच वह सब कर डाला है जो पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई तक न कर सकी। हिंदू-मुस्लिम के बीच एक बहुत बड़ी खाईं भाजपा आई टी सेल ने पैदा की और फिर हिंदुओं की विभिन्न जातियों के बीच भी विखंडन का जो बीज जाने-अनजाने बो डाला, वह और भी भयावह है। तथाकथित हिन्दुत्व की आड़ और चुनाव के वक्त प्रशासनिक अधिकारियों की “तकनीकी खेल” के साथ जुगलबंदी कराकर भाजपा भले ही लगातार सत्तारूढ़ हो जा रही हो, लेकिन उसने समूचे भारतीय समाज की समरसता को पूरी तरह से छिन्न-भिन्न कर दिया है।


सामाजिक रिश्तों का समूचा ताना-बाना भाजपा ने बिखेर कर रख दिया है। भाजपा अब अटल और आडवानी के दौर वाली भाजपा नहीं रही…जिसमें लोकतांत्रिक सौहार्द था, अटल जैसे नेताओं के भीतर गोधरा के दंगों के बाद यह कहने का साहस था कि “राजधर्म का निर्वहन करें”।…लेकिन आज हालात एकदम उलटे हैं। पार्टी के भीतर भी किसी की हैसियत नहीं है कि वह शीर्ष नेतृत्व को राजधर्म का आईना दिखा सके। आरएसएस ने भी नहीं सोचा होगा कि 2014 में वो जिस चेहरे को सामने ला रहे हैं, वह एक दिन उन्हें ही अपने मुंह में रख लेगा..!!!

आरएसएस ने इस चेहरे को सामने लाने के लिए क्या-क्या नहीं किया गया…!!! वर्ष 2007-2008 में कुख्यात आईटी सेल का गठन हुआ… अवाम पर बौद्धिक हमले के तीन चरण बनाये गये। पहले चरण में भारतीय इतिहास का गौरव परोसना..दूसरे चरण में मुगलों के अत्याचारों को परिभाषित करते हुए हिन्दुओं के मन में घृणा के भाव भरना और तीसरा चरण तो ब्रह्मास्त्र था, जिसमें सम्पूर्ण तथाकथित भारतीय गौरव को नष्ट करने का कलंक कांग्रेस पर फोड़ना, गांधी और नेहरू को सीधा टार्गेट करते हुए उसे “भ्रष्टाचार की पूतना” बनाने का जबरदस्त खेल खेला गया। बड़ी ही चालाकी से संगठित रूप से कोल स्कैम, स्पैक्ट्रम आवंटन स्कैम खोले गये और इसमें अन्ना हजारे और तत्कालीन महालेखाकार परीक्षक विनोद राय की इंट्री कराई गई। हवा-हवाई आरोप ने अंततः कांग्रेस का सत्यानाश कर डाला। याद करिए ये वही कांग्रेस थी जिस पर एक ओर देश को लूटने के गंभीर आरोप एक के बाद एक लगाये जा रहे थे और वह RTI जैसा हथियार आपको दे रही थी..!!! वह बात अलग है कि RTI के सारे “कटहे दांत” भाजपा ने विगत दस सालों में कुतर डाले हैं….!!!


हालांकि, विनोद राय को कुछ सालों बाद अपनी गलती का एहसास हुआ और वह माफी मांगकर इति श्री कर गये। अन्ना हजारे जिस उद्देश्य के लिए आया था, वह भी अपना काम पूरा करके वापस रालेगांव सिद्धि निकल गया और सिरे से गायब हो गया। उसका लोकायुक्त को झंडा केवल डंडा बन गया… परिणाम आज आपके सामने है।
भ्रष्टाचार और खुली लूट किसे कहते हैं वह तो अब हो रहा है। नोट बंदी भ्रष्टचार का सबसे बड़ा उदाहरण है अगर कभी खुला तो पैरों के नीचे से जमीन सरक जायेगी। अडानी के कोयले का खेल, 28 उद्योगपतियों का आराम से देश का खरबों रूपए लेकर निकल जाना, चंद व्यापारियों को अनाज भंडारण की खुली छूट, औने-पौने दामों पर सरकारी उपक्रमों को बेंच देना, एअरपोर्ट जैसी बेहद संवेदनशील जगह से सरकारी सुरक्षाबलों को हटाकर अडानी को दे देना, खास उद्योगपति के पोर्ट पर अरबों-खरबों की ड्रग्स का आना और चर्चा तक न होना, केयर फंड, अरबों रूपए इलेक्ट्रोरियल बांड घोटाला, चीनी कब्जे पर खामोशी….ऐसे सैंकड़ों विषय हैं जो सीधे जनता, समाज, अर्थव्यवस्था और भारतीय सम्प्रभुता से जुड़ते हैं। दुर्भाग्यवश भाजपा ने जनता या देश के प्रति किसी भी जवाबदेही से खुद को अलग कर लिया है।


नार्थ ईस्ट में 4 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र से ज्यादा चीन बिना युद्ध लड़े जमीन ले गया, लेकिन कोई जवाब नहीं? देश के मेन स्ट्रीम मीडिया की हैसियत “घर के टामी” जैसी बना दी गई है… नौकरियां सिरे से गायब कर दी गई हैं और सरकार की कोई जवाब देही नहीं बनती? नीट जैसी बड़ी इंट्रेंस परीक्षा में जो हुआ सरकार की कोई जवाबदेही नहीं… अर्थव्यवस्था रसातल में जा चुकी है लेकिन सरकार की कोई जवाबदेही नहीं है? रूपिया आखिरकार इस कदर क्यों गिरा और खाद्य सामग्रियों से लेकर ईंधन तक इतना मंहगा क्यों, इस पर कोई जवाबदेही नहीं? प्रदेश से लेकर केन्द्रीय नौकरियों में 45% से अधिक संविदा कर्मचारी हैं…वेतन 12‌ हजार से 25 हजार…!!! कोई जवाबदेही नहीं? अब रिटायर्ड आईएएस और पीसीएस भी संविदाकर्मियों जैसे काम पर लगाये जाने हैं…कोई जवाबदेही नहीं?…जब मर्जी हो किसी बड़े सक्षम बिल्डर या कंपनी के लिए किसी भी सालों-साल पुरानी बस्ती को धूलधूसरित करके बराबर कर देना। भले ही सरकार उनसे हाऊस टैक्स, वाटर टैक्स, बिजली बिल वसूलती आ रही हो, भले ही उनके पास रजिस्ट्री हो…कोई जवाबदेही नहीं..? मीडिया सवाल पूछेगा नहीं क्योंकि वह सरकार के घर के बाहर बंधा टामी है और संवैधानिक संस्थाएं सरकार की जेब में हैं। सबकी रीढ़ की हड्डी निकाली जा चुकी है..।


जब चुनाव सब कुछ सेट करके लड़े और जीते जा सकते हैं तो जनता गई तेल बेचने। जनता की बहुत जरूरत रही नहीं…क्योंकि सारी गणित पहले से सेट है…कुछ कमी रह गई तो पैसा बोलता है….जीतेगा किसी पार्टी से समां जायेगा भाजपा में…फिर जनता की चिंता क्यों?
सामाजिक ताना-बाना तो ऐसे छिन्न-भिन्न कर दिया गया है कि इसे देखना हो तो सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों पर जाकर देख लें…। क्या शानदार गाली-गलौज चलती है..!!! दुख तब होता है जब युवाओं के ही भविष्य के सवालों पर, देश के मुद्दों पर बात करो और फिर भी गालियां…!!! जूठन की तरह बचा-खुचा, खुरचन जैसा विपक्ष, वह भी देख रहा है कि वह सड़क पर भी निकले तो मीडिया में जगह नहीं और सोशल मीडिया पर आपके ही मुद्दे उठाए तो गालियां…तो वह भी किनारे है..!!!


ऐसा लगता है ये निजी हित के सवाल हैं…NEET जैसे कि Exam बताते हैं कि आपका वर्ग, संप्रदाय, जाति, धर्म कोई भी हो…सरकार को घंटा कोई फर्क नहीं पड़ता…मत देना वोट..!!! नहीं जरूरत है तुम्हारे वोटों की…चुनाव कैसे जीते जाते हैं यह भाजपा अच्छे से जानती है। …फिर तुम्हारे मुद्दों से सरोकार कैसा…!!!! भाड़ में जाओ…!!!!

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