चांद से धरती पर लाखों वर्ष पुरानी मिट्टी लाने वाला पहला देश बना चीन

चीनी स्पेस मिशन ने जानकारी देते हुए बताया की अब चीन के इस मून लैंडर ने चांद के अंधेरे हिस्से से मिट्टी निकालने में सफलता हासिल की है।

New Delhi , (Shah Times)।चीन ने पिछले महीने 3 मई को चांग’ई-6 मून लैंडर लॉन्च किया था। चीनी स्पेस मिशन ने जानकारी देते हुए बताया की अब इस मून लैंडर ने चांद के अंधेरे हिस्से से मिट्टी निकालने में सफलता हासिल की है।

न्यूज वेबसाइट अलजजीरा के मुताबिक चीन ऐसा करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। चंद्रमा के दक्षिणी हिस्से से मिट्टी का सैंपल लेने के लिए मून लैंडर में ड्रिल कर खोदने और फिर मलबे को उठाने की मैकेनिकल आर्म लगाई गई थी।

चीनी वैज्ञानिकों का अनुमान है कि पृथ्वी पर लाए गए नमूनों में 25 लाख वर्ष पुरानी ज्वालामुखीय चट्टान और अन्य सामग्री शामिल हैं। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इससे चंद्रमा के दोनों छोरों पर भौगोलिक अंतर के बारे में सवालों के जवाब मिल जाएंगे।
आपको बता दे की चांद से मिट्टी इकट्ठा करने के बाद चांग’ई-6 ने पहली बार चांद के दक्षिणी हिस्से में चीन का झंडा फहराया। चीनी स्टेट मीडिया के मुताबिक अब अपने मिशन को अंजाम देने के बाद मून लैंडर चांग’ई-6 वापस लौट रहा है।

चीनी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ ने चीनी स्पेस एजेंसी का हवाला देते हुए बताया कि चांग’ई-6 ने मंगलवार सुबह 7ः38 बजे चांद से उड़ान भरी थी। चांग’ई-6 फिलहाल चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश कर चुका है। योजना के मुताबिक चांग’ई-6 चीन के इनर मंगोलिया इलाके के रेगिस्तान में करीब 25 जून के आसपास लैंड करेगा।

इसे चीन का अब तक का सबसे मुश्किल मून मिशन बताया जा रहा है। अगर 25 जून को चीनी मून लैंडर वापस धरती पर सफलतापूर्वक उतरने में सफल होता है तो चीन के साथ-साथ ये पूरे दुनियां के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। आपको बता दे की इससे पहले बीते रविवार की सुबह चांग’ई-6 ने चांद के अंधेरे वाले हिस्से ऐटकेन बेसिन पर सफल लैंडिंग की थी। चांद के इस हिस्से पर लैंडिंग दूसरे हिस्सों के मुकाबले ज्यादा मुश्किल है। क्योंकि चांद के इस हिस्से में अंधेरा होता है, ये जगह उबड़-खाबड़ है। इसके चलते यहां संपर्क मुश्किल होता है और लैंडिंग में परेशानी आती हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चीन ने 2030 तक इंसान को चांद पर भेजने का लक्ष्य रखा है। यह मिशन भी उसी टारगेट का हिस्सा है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि इस मिशन की सफलता चीन के सपने को सच करने में मील का पत्थर साबित होगी। इसके जरिए चीन स्पेस पावर बनने के और करीब पहुंच गया है। इंसानों को भेजने के अलावा चीन 2030 तक चांद के साउथ पोल पर एक रिसर्च बेस बनाना चाहता है।

इससे पहले चीन ने साल 2004 में अपना लूनर मिशन लॉन्‍च किया था। 2007 से अब तक वह पांच रोबोटिक मिशन शुरू कर चुका है। चांग’- 5, दिसंबर 2020 को चंद्रमा पर उतरा था। इस मिशन के तहत चांद की 1731 ग्राम चट्टानें और मिट्टी को पृथ्वी पर लाया गया था। इसे एक बड़ी उपलब्धि माना जाता है। इससे पहले चीन का ही चाग’ई 4 मिशन साल 2019 में चांद के फार साइड पर जाने वाला पहला मिशन था। विश्व में चीन इकलौता ऐसा देश है जो चांद के दूसरे हिस्से तक अपना लैंडर भेज पाया है।

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