
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण चरम पर, दिवाली से पहले संकट
Delhi-NCR की हवा में ज़हर, AQI पहुँचा 390 तक
दिल्ली-एनसीआर की हवा दिवाली से पहले ज़हरीली हो चुकी है. आनंद विहार, वज़ीरपुर और गाज़ियाबाद में AQI 350 से ऊपर दर्ज हुआ. WHO मानकों से कई गुना अधिक PM 2.5 और PM 10 स्तर ने राजधानी को गैस चेंबर बना दिया है. पराली जलने, वाहनों के धुएं और धीमी हवाओं ने मिलकर हालात और बिगाड़ दिए हैं.
📍दिल्ली-एनसीआर 🗓️18 अक्टूबर 2025 ✍️आसिफ़ ख़ान
बढ़ता स्मॉग, घटती सेहत – दिल्ली की हवा पर खतरा
दिल्ली की सुबह धुंध से ढकी है, लेकिन यह प्राकृतिक कोहरा नहीं, बल्कि स्मॉग है — धुआं और धूल का खतरनाक मिश्रण. राजधानी की हवा आज फिर ज़हर उगल रही है. शनिवार को दिल्ली का औसत AQI 254 रहा, जबकि आनंद विहार (390), वज़ीरपुर (351) और जहांगीरपुरी (342) ‘बहुत खराब’ श्रेणी में हैं।
सुबह 8 बजे तक औसत AQI 225 से ऊपर था, जो बताता है कि हवा ‘गंभीर’ स्थिति की ओर बढ़ रही है. हवा में मौजूद PM 2.5 कण 149 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर और PM 10 कण 239 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर पाए गए — जो विश्व स्वास्थ्य संगठन की सीमा से कई गुना ज़्यादा हैं.
धीमी हवा की रफ़्तार (सिर्फ़ 5 किमी/घंटा) के कारण प्रदूषित कण शहर में फंसे रहे और स्मॉग की मोटी परत बन गई. नतीजा — आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ़ और आसमान में पीली धुंध।
दिल्ली-एनसीआर की हवा पर संकट क्यों?
पंजाब और हरियाणा में पराली जलने की घटनाएँ बढ़ गई हैं. खेतों से उठता धुआं हवा के साथ दिल्ली की ओर बहकर आता है. ऊपर से वाहन प्रदूषण और निर्माण कार्यों से उठती धूल ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है.
मौसम विभाग के अनुसार, हवा की गति धीमी और तापमान कम होने से प्रदूषक तत्व ज़मीन के करीब फंस जाते हैं. यही वजह है कि दिवाली से पहले ही शहर का वातावरण दमघोंटू बन गया है।
विशेषज्ञों की राय:
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ़ मौसमी समस्या नहीं बल्कि मानव व्यवहार का परिणाम है. सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों की अनुमति दी है, लेकिन ज़मीन पर पालन की स्थिति अलग है. नियमों की अनदेखी से हवा और ज़्यादा जहरीली हो सकती है.
AIIMS के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. शरद जोशी के मुताबिक —
“इस हवा में सांस लेना ऐसा है जैसे रोज़ाना 5 से 6 सिगरेट पीना। इससे अस्थमा, COPD और हार्ट डिजीज़ के मामले तेज़ी से बढ़ते हैं।”
दिल्ली की हवा बनाम NCR शहरों की हालत:
नोएडा में AQI 288, गाज़ियाबाद 306, ग्रेटर नोएडा 272, और गुरुग्राम 266 दर्ज हुआ. गाज़ियाबाद देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार हो गया है. हवा में ज़हर का असर सिर्फ़ दिल्ली तक सीमित नहीं, पूरा NCR इसका शिकार है।
वायु प्रदूषण से बचाव कैसे करें:
घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें, खिड़कियाँ बंद रखें।
बाहर जाते समय N95 मास्क पहनना ज़रूरी है।
अधिक से अधिक पौधे लगाएं, जो हवा को शुद्ध करें।
कारपूलिंग अपनाएं और बेवजह वाहन का उपयोग न करें।
पानी ज़्यादा पिएं ताकि शरीर हाइड्रेट रहे।
याद रखें, दिवाली रोशनी का त्योहार है, धुएँ का नहीं।
मौसम का हाल:
दिल्ली और नोएडा में दिन का तापमान 32°C और रात का 19°C के बीच बना हुआ है. आने वाले दिनों में पश्चिमी विक्षोभ के कारण हल्के बादल छा सकते हैं और कोहरा बढ़ेगा. इसका असर प्रदूषण के फैलाव पर भी पड़ेगा।
दिल्ली की फिज़ा में अब वो सुकून नहीं रहा
दिल्ली की फिज़ा में अब वो सुकून नहीं रहा जो कभी जामुन और चंपा की खुशबू में मिलता था। अब हवाओं में जहर घुल चुका है — एक ऐसा जहर जो हमारी सांसों से होते हुए दिल और दिमाग़ तक पहुँच रहा है।
शहर में लोग अब सवेरे के सूरज को धुंध के पर्दे के पीछे से देखते हैं। बच्चे खेल के मैदानों में कम और अस्पतालों में ज़्यादा दिखाई देते हैं।
अगर हमने अब भी कदम न उठाए, तो ये शहर सिर्फ़ इमारतों का जंगल रह जाएगा, इंसानी ज़िंदगी का नहीं।
नज़रिया
वायु प्रदूषण किसी सरकार या राज्य की नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। जब तक हम अपने स्तर पर बदलाव नहीं लाएँगे — वाहन कम चलाना, पौधे लगाना, नियमों का पालन करना — तब तक हर दिवाली के बाद हम वही सवाल पूछते रहेंगे:
“क्या हमारी आने वाली पीढ़ी साँस ले पाएगी?”






