
Iran issues warning to US and Israel during protests, Shah Times
ईरान की चेतावनी,अमेरिका के हमले पर इसराइल और यूएस बेस निशाने पर
ईरान ने कहा है कि किसी भी अमेरिकी सैन्य हमले की स्थिति में इसराइल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे वैध लक्ष्य होंगे।
यह बयान ईरान में जारी बड़े विरोध प्रदर्शनों और अमेरिकी चेतावनियों के बीच आया है।
📍 Tehran ✍️ Asif Khan
तेहरान में संसद से सीधी चेतावनी
ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाक़र ग़लीबाफ़ ने रविवार को कहा कि अगर अमेरिका ईरान पर सैन्य हमला करता है तो इसराइल और पश्चिम एशिया में स्थित सभी अमेरिकी सैन्य अड्डे ईरान के लिए वैध लक्ष्य होंगे। यह बयान ईरानी सरकारी टेलीविज़न पर संसद सत्र के सीधे प्रसारण के दौरान दिया गया।
ग़लीबाफ़ ने कहा कि ईरान केवल जवाबी कार्रवाई ही नहीं करेगा बल्कि अगर किसी संभावित हमले के संकेत भी मिलते हैं तो भी कार्रवाई की जा सकती है। उनके बयान को क्षेत्र में बढ़ते तनाव के रूप में देखा जा रहा है।
विरोध प्रदर्शनों के बीच सख़्ती
ईरान में बीते कई दिनों से सरकार विरोधी प्रदर्शन चल रहे हैं। संसद सत्र में ग़लीबाफ़ ने पुलिस और इरानियन रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कोर और उसके बासिज स्वयंसेवी बलों की कार्रवाई की सराहना की। उन्होंने कहा कि ये बल प्रदर्शनों से सख़्ती से निपटेंगे और गिरफ्तार किए गए सभी लोगों के खिलाफ क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी मीडिया के अनुसार सुरक्षा बलों को कानून व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। कई शहरों में अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं।
ईरान और इसराइल का विवाद
ईरान इसराइल को एक राज्य के रूप में मान्यता नहीं देता और उसे कब्ज़ाई गई फलस्तीनी भूमि मानता है। ग़लीबाफ़ ने अपने बयान में कहा कि इसराइल के नियंत्रण वाले क्षेत्र और वहां मौजूद सैन्य ठिकाने भी किसी भी संघर्ष की स्थिति में निशाने पर होंगे।
ईरानी समाचार एजेंसी तसनीम के मुताबिक ग़लीबाफ़ ने कहा कि ईरान इस समय अमेरिका और इसराइल के खिलाफ चार मोर्चों पर संघर्ष कर रहा है जिनमें आर्थिक, बौद्धिक, सैन्य और आतंकवाद से जुड़े पहलू शामिल हैं।
अमेरिका में विकल्पों पर चर्चा
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान में हो रहे जानलेवा विरोध प्रदर्शनों के बाद कई संभावित कदमों पर विचार कर रहे हैं। सीएनएन को दिए गए बयान में दो अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रपति को ईरान में दखल से जुड़े अलग अलग विकल्पों पर जानकारी दी गई है।
इन विकल्पों में ईरान की सुरक्षा एजेंसियों को निशाना बनाना भी शामिल है, जिन पर आरोप है कि वे प्रदर्शनों को दबाने में भूमिका निभा रही हैं। हालांकि अमेरिकी प्रशासन के भीतर इस बात को लेकर भी चिंता है कि सैन्य कार्रवाई उलटा असर डाल सकती है और ईरान के भीतर जनता सरकार के समर्थन में एकजुट हो सकती है।
साइबर और आर्थिक विकल्प
अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ट्रंप के सामने रखे गए कुछ विकल्पों में सैन्य कार्रवाई शामिल नहीं है। इनमें साइबर ऑपरेशन, ईरानी शासन से जुड़े ढांचों को निशाना बनाना और बैंकिंग तथा ऊर्जा क्षेत्रों पर नए प्रतिबंध लगाना शामिल हैं।
इसके अलावा ईरान में इंटरनेट कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए स्टारलिंक जैसी तकनीक देने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि प्रदर्शनकारियों को ब्लैकआउट से बचने में मदद मिल सके।
प्रदर्शनों में हताहत और गिरफ्तारियां
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों में अब तक करीब 500 लोगों की मौत का दावा किया गया है। अमेरिका स्थित संगठन एचआरएएनए के मुताबिक कम से कम 490 लोग मारे गए हैं।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के एक समूह के डिप्टी डायरेक्टर स्काईलर थॉम्पसन ने बताया कि पिछले 15 दिनों में 10,675 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है जिनमें 169 बच्चे भी शामिल हैं।
ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आज़ाद ने कहा है कि जो लोग प्रदर्शनों में शामिल हैं उन्हें राज्य का दुश्मन माना जाएगा और उनके खिलाफ सख़्त क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी।
व्हाइट हाउस की स्थिति
व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि फिलहाल ईरान में ज़मीनी सेना भेजने का कोई विकल्प नहीं है। अमेरिकी प्रशासन आने वाले दिनों में अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ आगे की रणनीति पर चर्चा करेगा।
ईरान की चेतावनी और अमेरिका की संभावित कार्रवाइयों ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है, जबकि ज़मीन पर स्थिति लगातार बदल रही है।




