सांसद चन्द्र शेखर आजाद के संसद में उठाए गए मुद्दों को विस्तार से पढ़ें 

चन्द्र शेखर आजाद ने कहा संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान  कम समय होने की वजह से जन सरोकारों से जुड़े सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा नहीं हो पाई। फिर भी कोशिश की कि वंचित तबके के सम्मान-स्वाभिमान से जुड़े मुद्दों के अलावा जातिवार जनगणना, युवा, बेरोजगार, किसान, पुरानी पेंशन, रिजर्वेशन इन प्रमोशन, निजी क्षेत्र में आरक्षण, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा बहने, भोजन माता, NFS, लेटरल एंट्री, MSP, सफाईकर्मियों व पुलिसकर्मियों से जुड़े अहम मुद्दों को उठाया।

New Delhi , (Shah Times)। नगीना लोकसभा, उ.प्र सांसद चन्द्र शेखर आजाद ने कहा संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान  कम समय होने की वजह से जन सरोकारों से जुड़े सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा नहीं हो पाई। फिर भी कोशिश की कि वंचित तबके के सम्मान-स्वाभिमान से जुड़े मुद्दों के अलावा जातिवार जनगणना, युवा, बेरोजगार, किसान, पुरानी पेंशन, रिजर्वेशन इन प्रमोशन, निजी क्षेत्र में आरक्षण, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा बहने, भोजन माता, NFS, लेटरल एंट्री, MSP, सफाईकर्मियों व पुलिसकर्मियों से जुड़े अहम मुद्दों को उठाया। मैं संसद में जो कहना चाहता था उन मुद्दों को आप विस्तार से यहां पढ़ सकते हैं। 

“ माननीय सभापति महोदय, महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलने का आपने मुझे समय दिया है उसके लिए मैं आपका अत्यंत आभारी हूं।

सभापति महोदय, सर्वप्रथम, बहुजन समाज में जन्में सभी महापुरुषों अर्थात् महात्मा ज्योतिबा फूले, भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी एवं मान्यवर कांशीराम साहब को नमन एवं नगीना की महान जनता के साथ-साथ भीम आर्मी व आजाद समाज पार्टी के सभी साथियों का आभार प्रकट करते हुए अपनी बात रखना चाहता हूं।

इसके बाद अपने कुलगुरु जगतगुरु सतगुरु रविदास महाराज जी को नमन करता हूं जिन्होंने दुनिया को लगभग 600 साल पहले बेगमपुरा शहर के रूप में दुनिया का सबसे महान लोकतांत्रिक दर्शन दिया।

सभापति महोदय, सामाजिक न्याय पर कोई भी बात करने से पहले जातीय जनगणना अनिवार्य है उसके बिना सामाजिक न्याय अधूरा है इसलिए हमारी मांग है कि जातीय जनगणना शीघ्र अतिशीघ्र शुरु की जाए ताकि बहुजन समाज से वास्ता रखने वाले वंचित नागरिकों को उनके अधिकार मिल सके। संख्या के आधार पर आरक्षण की सीमा बढ़ाई जाए।

सभापति महोदय, वहीं शहरी एवं ग्रामीण विकास पर बोलते हुए महामहिम राष्ट्रपति जी ने कहा कि “सरकार हमारे शहरों को दुनिया में रहने के लिए सर्वोत्तम स्थान बनाने को प्रतिबद्ध है” जबकि भारत की 70 प्रतिशत आबादी ग्रामीण अंचल में रहती है इसलिए हमें विकसित ग्राम बनाने पर प्रतिबद्ध रहना चाहिए।

सभापति महोदय, आज भी उच्च शैक्षणिक संस्थानों में बहुजन समाज के छात्रों पर जातीय उत्पीड़न के कारण आत्महत्या की घटनाएं बढ़ती जा रही है। ऐसे ही सरकारी दफ्तरों में एससी, एसटी, ओबीसी, मुस्लिम, सिक्ख, बौद्ध, ईसाई, जैन धर्मों से आने वाले कर्मचारी जातिगत व धार्मिक आधार पर भेदभाव के शिकार हो रहे हैं। पुरानी पेंशन को बहाल किया जाए, जो कर्मचारी देश सेवा में लगे हैं उनके बारे में सोचना पड़ेगा।

सभापति महोदय, भारत के अंदर सबसे ज्यादा पढ़ा लिखा वर्ग ही सबसे ज्यादा बेरोजगार है अतः मैं चाहता हूं कि बेरोजगारी भत्ते में वर्तमान महंगाई दर के हिसाब से बढ़ोतरी की जाए और शिक्षित बेरोजगार युवाओं को बेरोजगारी भत्ता जल्द से जल्द मुहैया कराया जाए। एससी, एसटी, ओबीसी का बैकलॉग को जल्द से जल्द भरा जाए ।

सभापति महोदय, भाजपा के चुनावी लाभ के लिए दिए गए ‘सबका साथ, सबका विश्वास’ जैसे नारे भी खोखले ही साबित हुए हैं। पिछले 10 सालों में दलित, पिछड़ों, आदिवासी, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों पर जो अत्याचार हुए हैं उसे सारे देश ने देखा है। धर्म को राजनीति का हथियार बनाकर वोटों के लिए धार्मिक ध्रुवीकरण किया जा रहा है। यह गलत है।

सभापति महोदय, महामहिम राष्ट्रपति के अभिभाषण में निजी क्षेत्रों में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लोगों को आरक्षण प्रदान करने के बारे में कोई उल्लेख नहीं किया गया है। साथ ही रिजर्वेशन में प्रमोशन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी नही दिया जा रहा है।

सभापति महोदय, आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी वर्करों और भोजन माताओं का वेतन बढ़ाने और उनके लिए कल्याणकारी उपाय करने के बारे में कोई उल्लेख नहीं किया गया है।

सभापति महोदय, नगीना जैसे पिछड़े लोकसभा क्षेत्र में विशेष आर्थिक पैकेज देकर विकास और रोजगार की योजनाएं तैयार की जाएं। IIT, IIM, AIIMS, केंद्रीय विद्यालय, आदि शिक्षा और चिकित्सा के संस्थानों की स्थापना होनी चाहिए एवं नगीना संसदीय निर्वाचन क्षेत्र में प्रत्येक वर्ष मानसून के दौरान बाढ़ एक विकराल रुप धारण कर लेती है जिससे नगीना क्षेत्र के लोगों को अत्यधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है तथा जान-माल का काफी नुकसान होता है। अतः मेरी सरकार से मांग है कि इस स्थिति में सुधार लाने के लिए यथाशीघ्र कदम उठाए जाएं।

सभापति महोदय, चीन हमें आंख दिखा रहा है, लगातार देश की सीमाओं में घुसपैठ करके कब्जा जमाता जा रहा है इसलिए अग्निवीर योजना हटाकर पुनः सेना में भर्ती शुरु की जाए और भारत के सबसे प्रत्चीन व बहादुर रेजिमेंट में से एक चमार रेजिमेंट को पुनः बहाल किया जाए।

सभापति महोदय, पिछले सारे प्रधानमंत्रियों ने मिलकर जितना कर्जा लिया उससे दोगुना से भी ज्यादा कर्जा पिछले 10 सालों में इस सरकार ने लिया है। किसान कर्ज माफी की मांग करें तो उन्हे लाठी-गोली झेलनी पड़ रही हैं परंतु दूसरी तरफ पिछले दस सालों में धन्नासेठों का 15 लाख करोड रुपए से ज्यादा का कर्ज चुपचाप राइट ऑफ यानी माफ कर दिया जाता है। इस कर्जे को हमारी आने वाली पीढ़ियां चुकाने को मजबूर होगी। सभापति महोदय किसानों को M.S.P की लीगल गारंटी मिलनी चाहिए तथा किसानो का कर्जा माफ हो।

अभी तक 2 अप्रैल 2018 के मुकदमें वापस नहीं हुए जबकि सरकार ने माना था कि हम सही लड़ाई लड़ रहे थे। उन मुकदमों को तुरंत वापस लिया जाए।

सभापति महोदय, लोकतंत्र के चौथे स्तंभ प्रेस पर आज शिकंजा कसा हुआ है। सरकार के खिलाफ बोलने पर पत्रकारों को नौकरी से हाथ धोना पड़ रहा है। क्या दिखाया जाए, क्या छापा जाए इसका फैसला ऊपर से किया जाता है। सोशल मीडिया पर तमाम तरह के प्रतिबंध हैं, विरोध करने पर आपके सोशल मीडिया हैंडल्स को सस्पेंड करवा दिया जाता है।

सभापति महोदय, पेपर लीक और परीक्षाओं के कैंसल होने से देश के नौजवानों का भविष्य खतरे में है। नीट, यूपी सिपाही भर्ती, 69000 शिक्षक भर्ती इसका उदाहरण है। 69000 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी खून के आंशू रो रहे है कोई सुनने वाला नही है। बेरोजगारी का दंश झेल रहे युवाओं के लिए कारगर कार्ययोजना बनानी होगी वरना हमारा डेमोग्राफिक डिविडेंट, डेमोग्राफिक डिजास्टर में बदल जाएगा।

सभापति महोदय, नारी सम्मान की बात करने वाली यह सरकार महिलाओं का कितना सम्मान करती है यह देश देख चुका है। मणिपुर में कैसे महिलाओं को नग्न अवस्था में सड़कों पर घुमाया गया उससे कलेजा कांप जाता है। एक पूर्व भाजपा सांसद कैसे हमारी पहलवान बेटियों का शोषण करता रहा और सारी सरकार मौन धारण किए बैठी रही। हाथरस की बेटी के साथ हुआ अन्याय और परिवार को जो सरकार ने वादा किया वह अभी तक पूरा नहीं हुआ। साथ ही महिलाओं में भी दलित, आदिवासी, पिछड़े, मुस्लिम वर्ग की महिलाओं पर लगातार हिंसा जारी है और सरकारों के दबाव में थानों में कोई सुनवाई भी नहीं होती है।

सभापति महोदय, कोविड में तैरती लाशों से पटी हुई गंगा क्या देश भूल जायेगा।

सभापति महोदय, नोटबंदी से छोटे मंझोले उद्योगों की कमर तोड़ डाली।

सभापति महोदय, शैक्षणिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों व चिकित्सा संस्थानों में OBC/SC/ST के योग्य अभ्यर्थियों को नन फाउंड सूटेबल (NFS) दिखाकर सीटों को नहीं भरा जाता है। अतः सरकार से मेरी मांग है कि इस तरह के खेल को तत्काल प्रभाव से रोका जाए और लेटेरल इंट्री, संविदा, ठेकेदारी की व्यवस्था को बंद कर पक्की नौकरी दी जाए। देश कितना आगे बढ़ा है इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि आज भी हमारे लोग सीवर में मर रहे हैं और आज भी हमारे परिवार की महिलाएं सर पर मैला उठाती हैं। समान काम समान वेतन पॉलिसी लागू हो। सफाईकर्मियों को इस समस्या से मुक्ति दिलाई जाए

सभापति महोदय, हमें प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों के बारे में भी गंभीरता से सोचना चाहिए। कई प्राइवेट संस्थानों में कर्मचारियों को 8 घंटे की बजाए 10 से 12 घंटे काम करना पड़ता है। सबसे पहले तो देश भर में कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 20,000 रुपए होना चाहिए। साथ ही साथ किसी भी कर्मचारी से 8 घंटे से ज्यादा काम न कराया जाए। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश में पुलिस के कर्मचारियों को 24-24 घंटे ड्यूटी करनी पड़ती है। न समय पर अवकाश मिलती है और बॉर्डर स्कीम जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। उनके वेतन की विसंगतियों को भी दूर नहीं किया गया है।

सभापति महोदय, महामहिम राष्ट्रपति जी ने धर्म और आस्था की बात की है, लेकिन इस देश में वंचितों की आस्था का कोई सम्मान नहीं है। इसका उदाहरण है, राम मंदिर के फैसले से पहले दिल्ली के तुगलकाबाद स्थित हमारे प्राचीन सतगुरु रविदास जी के गुरु घर का फैसला माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आदेश होने के बावजूद भी अभी तक हमारा गुरु घर नहीं बना है और चंडीगढ़ में स्थापित प्राचीन गुरुघर को तोड़ने की तैयारी चल रही है।

सभापति महोदय, अपनी बात को समाप्त करते हुए मैं यह कहना चाहता हूं कि यह देश जितना दूसरों का है, उतना ही हमारा भी है। हम मरने के लिए पैदा नहीं हुए हैं, हमें भी जीने का अधिकार है। सब कुछ होते हुए भी दलित, पिछड़े, आदिवासी, मुसलमानों पर हिंसा की घटनाएं नहीं रुक रही हैं)। मूछें रखने पर, घोड़ी पर बैठने पर और मटकी छूने पर हत्या हो रही है इसलिए, मेरा आपसे आग्रह है कि इन घटनाओं को रोकने के लिए इन पर केंद्र एवं राज्य सरकारों से संज्ञान लेना अति आवश्यक है।

सभापति जी, यह देश किसी की बपौती नहीं है, यह देश संविधान से चलता आया है और संविधान से ही चलेगा ।

जय भीम, जय भारत । पुनः आपका धन्यवाद ।”

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