
चिन्यालीसौड हवाई अड्डे से भारत- चीन अंतरराष्ट्रीय सीमा की दूरी महज 130 किलोमीटर
उत्तरकाशी ,(चिरंजीव सेमवाल )। भारतीय वायुसेना के मल्टीपर्पज भारी विमान एएन-32 ने चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे पर दो बार सफलतापूर्वक लैंडिंग और टेकऑफ कर तीन दिवसीय पायलट ट्रेनिंग अभ्यास पूरा कर लिया है।
शुक्रवार को एयरक्राफ्ट ग्वालियर एयरबेस से चिन्यालीसौड़ एयरपोर्ट पर पायलेट ट्रेनिंग के लिए आया था। इससे पूर्व 2022 में भी इस वायुसेना के मल्टीपर्पज भारी विमान एएन-32 ने लैंडिंग और टेकऑफ का अभ्यास किया था।
बताया दें कि कि 29 जनवरी से 2 फरवरी तक पायलेट ट्रेनिंग कार्यक्रम शुक्रवार को सफलता पूर्वक पूरा हो गया।


एयर पोर्ट का कार्य देख रही निर्माण निगम कंपनी के प्रबंधक घनश्याम सिंह ने बताया कि तीन दिवसीय पायलट ट्रेनिंग का कार्यक्रम 29 जनवरी से 31 जनवरी तक चलना था लेकिन मौसम खराब होने के कारण 31 जनवरी और 1 फरवरी को यह कार्यक्रम नहीं चल पाया जिस कारण यह कार्यक्रम 2 फरवरी को संपन्न हुआ।
गौरतलब है कि चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी से भारत -चीन अंतरराष्ट्रीय सीमा की दूरी महज 130 किमी के बीच है।
भारत-चीन अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब बने चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डा सामरिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है यही वजह रही कि एयरफोर्स काफी सतर्कता से ले रहा है ।
भारतीय वायु सेना यहां पिछले वर्षों से लगातार अपने विमानों का नियमित अभ्यास करवा रही है। वायु सेना इसे अपना एडवांस लैंडिंग ग्राउंड (ALG) बनाने की कवायद में भी लगी हुई है और यहां अभ्यास जारी रखे हुए हैं। इतना ही नहीं वायुसेना उत्तराखंड सरकार से चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे को एयरबेस बनाने के लिए विस्तारीकरण की मांग भी कर रही है।
भारतीय वायु सेना गत वर्षों में चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी में लड़ाकू विमानों के टेक ऑफ और लैंडिंग सहित सामान छोड़ने का ऑपरेशन गगन शक्ति नाम से अभ्यास कर चुकी है। हालांकि किसी भी ऑपरेशन या अभ्यास में चिन्यालीसौड एयर पोर्ट के राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण सेना के अधिकारियों हमेशा मीडिया से दूरी बनाए रखते है।
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सोवियत संघ से खरीदा था ऐंटोनोव एन 32 विमान
भारतीय वायुसेना के एक मल्टीपर्पज भारी विमान
एन 32 (ऐंटोनोव एन 32) विमानों को सोवियत संघ से खरीदा गया थ। ये विमान वायुसेना के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण है, जो छोटे और अस्थायी रनवे पर भी उतर सकता है और सबसे बड़ी बात ये कि ये विमान किसी भी मौसम में उड़ान भर सकता है। भारतीय वायुसेना के पास करीब 100 ए एन32 विमान हैं।
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