
Shah Times Special Report on alleged interstate subsidized urea black-market network exposed in Muzaffarnagar.
15 लाख किलो यूरिया की कालाबाजारी करने वाला अंतरराज्यीय गिरोह पकड़ा
किसानों की खाद से कमाई का खेल बेनकाब, 20 हजार किलो यूरिया समेत 8 आरोपी गिरफ्तार
📍 Muzaffarnagar ✍️ Wasi Siddiqui
मुजफ्फरनगर पुलिस का बड़ा खुलासा, छह महीने में 15.12 लाख किलो यूरिया की कालाबाजारी का आरोप
किसानों के लिए सरकारी अनुदान पर उपलब्ध कराई जाने वाली यूरिया खाद की बड़े पैमाने पर कालाबाजारी का खुलासा करते हुए मुजफ्फरनगर पुलिस ने एक अंतरराज्यीय गिरोह के आठ सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 20,430 किलोग्राम अनुदानित यूरिया, चार वाहन और फर्जी बिल बरामद किए हैं। बरामद माल और वाहनों की कुल अनुमानित कीमत करीब 60 लाख रुपये बताई गई है।
पुलिस जांच के अनुसार यह गिरोह पिछले छह महीनों के दौरान करीब 15.12 लाख किलोग्राम अनुदानित यूरिया की अवैध खरीद-फरोख्त कर चुका है। इस कार्रवाई को पुलिस ने “ऑपरेशन किसान प्रहरी” नाम दिया है।
मुखबिर की सूचना पर हुई कार्रवाई
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के निर्देशन में थाना जानसठ पुलिस और एसओजी देहात की संयुक्त टीम सोमवार रात कवाल पुल के पास वाहन चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि एक कार आगे चलकर रैकी कर रही है जबकि उसके पीछे तीन वाहनों में किसानों के लिए निर्धारित अनुदानित यूरिया ले जाया जा रहा है।
सूचना मिलते ही पुलिस ने हाईवे पर बैरियर लगाकर वाहनों की जांच शुरू की। कुछ समय बाद एक कार, एक कैंटर और दो पिकअप वाहनों को रोक लिया गया। तलाशी के दौरान कुल 454 कट्टे यूरिया बरामद हुए।
जिला कृषि अधिकारी राहुल तेवतिया द्वारा जांच में आरोपियों के पास मौजूद बिलों को फर्जी पाया गया।




हरियाणा की फैक्ट्रियों तक पहुंच रही थी किसानों की खाद
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि किसानों के लिए निर्धारित यूरिया को अधिक कीमत देकर खरीदा जाता था और बाद में हरियाणा के यमुनानगर स्थित प्लाईवुड उद्योगों में सप्लाई किया जाता था।
पुलिस के अनुसार प्लाईवुड उद्योगों में ग्लू तैयार करने के लिए तकनीकी ग्रेड यूरिया की जगह सस्ती अनुदानित यूरिया का इस्तेमाल किया जा रहा था। इससे उत्पादन लागत में भारी कमी आती थी, जिसके कारण इसकी मांग लगातार बनी हुई थी।
ऐसे चलता था पूरा नेटवर्क
जांच में सामने आया कि गिरोह किसानों और अन्य स्रोतों से निर्धारित मूल्य से अधिक रकम देकर यूरिया खरीदता था। माल ढोने वाले वाहनों के आगे एक कार चलती थी, जो रास्ते में पुलिस या जांच एजेंसियों की गतिविधियों की जानकारी देती थी।
गिरोह ने पकड़े जाने से बचने के लिए फर्जी बिलों का भी सहारा लिया। जांच के दौरान भोपा क्षेत्र के तीन खाद विक्रेताओं की संलिप्तता सामने आने पर उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तार आरोपी
पुलिस ने जिन आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है उनमें सहारनपुर निवासी तनवीर तेली और रियासत, हरियाणा के यमुनानगर निवासी राहिल राणा, मोहित और मनीष तथा मुजफ्फरनगर के भोपा क्षेत्र निवासी सौरभ उर्फ हिमांशु, रोहन उर्फ प्रियांशु और सूर्य प्रताप उर्फ तुषार शामिल हैं।
क्या-क्या बरामद हुआ
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से:
• 350 कट्टे HURL ब्रांड यूरिया
• 103 कट्टे KRIBHCO ब्रांड यूरिया
• 1 कट्टा RCF ब्रांड यूरिया
• एक ह्युंडई औरा कार
• एक कैंटर
• दो पिकअप वाहन
• फर्जी बिल और दस्तावेज
बरामद किए हैं।
पुलिस टीम को मिलेगा पुरस्कार
इस कार्रवाई को अंजाम देने वाली थाना जानसठ और एसओजी देहात की संयुक्त टीम को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने 25 हजार रुपये नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है।
अहम सवाल
यह मामला केवल कालाबाजारी का नहीं बल्कि कृषि क्षेत्र में सरकारी सब्सिडी के दुरुपयोग का भी है। जांच आगे बढ़ने पर यह स्पष्ट हो सकता है कि इस नेटवर्क से और कितने कारोबारी, खाद विक्रेता या औद्योगिक इकाइयाँ जुड़ी हुई थीं। यदि पुलिस के 15.12 लाख किलो यूरिया की कालाबाजारी के दावे की पुष्टि होती है तो यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े खाद घोटालों में से एक माना जा सकता है।







