
दीपावली पर मुज़फ्फरनगर पुलिस द्वारा की गई सुरक्षा व्यवस्था और जनअपील।
दीपावली पर पुलिस की तैयारी: अमन और भरोसे की मिसाल
रोशनी के साथ जिम्मेदारी: दीपावली पर पुलिस की अपील
दीपावली जैसे बड़े पर्व पर मुज़फ्फरनगर पुलिस ने न सिर्फ सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाई बल्कि जनता में शांति, सद्भाव और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी दिया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा की टीम ने गुड गवर्नेंस की ऐसी मिसाल पेश की, जिसमें कानून, मानवता और जनविश्वास एक साथ नज़र आए।
📍 मुज़फ्फरनगर🗓️ 18 अक्टूबर 2025✍️ Asif Khan
त्यौहार की सुरक्षा में मिशन शक्ति और गुड गवर्नेंस की झलक
दीपावली का पर्व जब रौशनी से गलियों को जगमगाता है, तो पुलिस की वर्दी भी उसी रौशनी में अपनी जिम्मेदारी की चमक लेकर खड़ी होती है।
मुज़फ्फरनगर में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा ने जो अपील की — वो केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं बल्कि एक सामाजिक संदेश है। उन्होंने कहा कि “यह त्योहार प्रकाश, प्रेम, सौहार्द और एकता का प्रतीक है, इसे भाईचारे और शांति के साथ मनाएं।”
यही बात गुड गवर्नेंस की असली पहचान है — जहां प्रशासन सख्ती के साथ नहीं, बल्कि संवाद और सहयोग के साथ लोगों तक पहुंचता है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा की अपील का दूसरा पहलू भी महत्वपूर्ण है — ग्रीन पटाखों के प्रयोग की सलाह। आज जब हवा में ज़हर घुल रहा है, तो दीपावली का असली अर्थ तभी है जब हम अपने वातावरण की रक्षा करें।
“रोशनी से खुशियाँ बाँटिए, धुएँ से नहीं” — यह संदेश सिर्फ पर्यावरण का नहीं, समाज की संवेदनशीलता का प्रतीक है।
आज का शाह टाइम्स ई-पेपर डाउनलोड करें और पढ़ें
पुलिस प्रशासन ने मिशन शक्ति फेज़-5 के तहत महिलाओं, बालिकाओं और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर विशेष अभियान चलाया है। सर्राफ़ा बाज़ार से लेकर मुख्य मार्केट और ट्रैफिक पॉइंट्स तक पुलिस की सक्रियता जनता के भरोसे को मज़बूत करती है।
पुलिस अधीक्षक नगर सत्यनारायण प्रजापत द्वारा किए गए निरीक्षण इस बात का प्रमाण हैं कि दीपावली के उल्लास में कोई भी घटना जनता के सुकून को भंग न कर सके। उन्होंने पुलिस बल को सतर्क रहते हुए जनता से संवादशील व्यवहार अपनाने की हिदायत दी — यह भी अपने आप में एक मानवीय पुलिसिंग का उदाहरण है।
एक नज़र में सोचिए —
अगर पुलिस सख्त हो लेकिन संवादहीन, तो जनता डरती है;
अगर पुलिस विनम्र हो लेकिन निष्क्रिय, तो जनता असुरक्षित महसूस करती है;
मुज़फ्फरनगर पुलिस की पहल इन दोनों के बीच का संतुलित आदर्श मॉडल है —
जहाँ सख़्ती भी है और संवेदनशीलता भी।
त्यौहारों पर पुलिस की भूमिका अक्सर “कानून व्यवस्था” तक सीमित मान ली जाती है,
लेकिन यहाँ यह “सामाजिक जिम्मेदारी” का रूप ले चुकी है।
यह Good Governance का वही चेहरा है,
जहाँ जनता और प्रशासन के बीच दीवार नहीं, संवाद का पुल खड़ा होता है।
दीपावली पर की गई तैयारियाँ —
सभी संवेदनशील क्षेत्रों में CCTV निगरानी, गश्त व्यवस्था, और असामाजिक तत्वों पर पैनी नज़र —
यह सब केवल सुरक्षा का हिस्सा नहीं बल्कि जनता के लिए एक भरोसेमंद माहौल बनाने की कोशिश है।
MUZAFFARNAGAR POLICE की सक्रियता इस पूरे अभियान की पारदर्शिता को दर्शाती है।
सच्ची लोकतांत्रिक व्यवस्था वही होती है जहाँ पुलिस जनता के साथ खड़ी नज़र आए, उसके ऊपर नहीं।
एक विचारणीय प्रश्न:
क्या हम त्यौहारों की भीड़ में अपने नागरिक कर्तव्यों को भूल जाते हैं?
जब पुलिस अपनी पूरी ताकत लगाती है ताकि शहर चैन की साँस ले सके,
तो क्या हमारा फर्ज़ नहीं बनता कि हम उनके काम को आसान बनाएं —
ट्रैफिक नियमों का पालन करें, अफवाहों से बचें, और अपने आस-पास शांति बनाए रखें?
यही Participatory Policing का असली अर्थ है।
जहाँ हर नागरिक एक “अनौपचारिक पुलिसकर्मी” बन जाता है —
अपने आचरण से समाज में कानून, भरोसा और सहयोग की रौशनी फैलाते हुए।
आखिर में, यह दीपावली केवल घरों को रोशन करने की नहीं,
दिलों को रोशन करने की है —
और इस पहल में पुलिस का योगदान किसी दीपक से कम नहीं।
मुज़फ्फरनगर पुलिस की यह सजगता एक उदाहरण है कि
जब शासन और समाज साथ खड़े होते हैं, तो Good Governance सिर्फ नीति नहीं, संस्कृति बन जाता है।






