क्यों संसद में नेता-प्रतिपक्ष राहुल का सामना नहीं कर पा रहें मोदी

संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा में भाग लेते हुए जननायक की भूमिका में आए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने किस तरह मोदी सरकार को घेरा वह काबिले तारीफ़ है

~Tauseef Qureshi

आजकल सियासत की सियासी मंडी में बस एक ही सियासत का नायाब हीरा उभर कर सामने आया है जिसकी चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा में भाग लेते हुए जननायक की भूमिका में आए नेता-प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने किस तरह मोदी सरकार को घेरा वह काबिले तारीफ़ है।

2014 से 2019 तक 2019 से 2024 तक जिस हिटलर शाही से मोदी ने सरकार को चलाया यह किसी से छिपा नहीं है विपक्ष को तो छोड़ दीजिये भाजपा के नेताओं सहित RSS के लोगों का भी बुरा हाल था यह हम सबने देखा है इस दौरान सब कुछ मोदी थे मोदी की गारंटी मोदी ही मोदी एक अकेला सब भारी और कोई कुछ नहीं था।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 10 सालों बाद यानी अपने तीसरे प्रधानमंत्री के तीसरे कार्यकाल में पहली बार नेता विपक्ष का सामना करना पड़ रहा है जो उनके लिए अप्रत्याशित है क्योंकि मोदी जी की रणनीति हमेशा यह रही है कि सत्ता विपक्ष रहित सरकार होनी चाहिए और वह कामयाब भी रहे चाहे गुजरात में रहे या दिल्ली में उनका रवैया एक जैसा रहा है ।

लेकिन इस कार्यकाल में मजबूत विपक्ष का सामना करना पड़ रहा है और भी जननायक नेताप्रतिपक्ष राहुल गांधी का जो उनसे नहीं हो पा रहा है।मोदी सरकार ने विपक्ष के साथ जो रवैया अख्तियार किया गया उसे भी हम सबने ही देखा है कैसे विपक्ष के नेताओं को ईडी का भय दिखाकर उनको अपनी पार्टी में शामिल किया गया विपक्ष की सरकारों को गिरा कर मोदी की भाजपा की सरकारें बनाईं गईं भ्रष्टाचारी बता कर उन पर दबाव बनाया गया और मोदी की भाजपा में शामिल होते ही उनके द्वारा किए गए भ्रष्टाचार को ऐसे साफ़ मान लिया गया कि वह भ्रष्टाचारी था ही नहीं जबकि वह भ्रष्टाचारी था या नहीं था यह हम नहीं कह रहे है यह मोदी की भाजपा में शामिल होने से पहले मोदी खुद या उनकी पार्टी के नेता ही शोर मचाते थे लेकिन मोदी की भाजपा में शामिल होने के बाद उस नेता के बारे में कुछ नहीं कहते है जैसे उनके नाम लेने पर उनके मुँह में दही जम गई हो।

यह सब देखने के बाद क्या नही कहा जा सकता हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भ्रष्टाचार का जो राग अलापते है वह बस कोरी लफ़फाजी है और कुछ नहीं है मोदी की भाजपा की बुनियाद सिर्फ झूठ और प्रोपेगेंडे पर टिकी हुई है जिसे गोदी मीडिया के द्वारा सेट किया जाता है।जननायक की भूमिका में उभरे सियासत के उस नायाब हीरे नेताप्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी सरकार के झूठ के पर्दाफ़ाश की ऐसी सियासी फिल्डिंग लगाईं कि उनके झूठ की बुनियाद हिलने लगी प्रधानमंत्री मोदी को इस चीज़ का अहसास हो चुका है कि जननायक की भूमिका में उभरे सियासत के खिलाड़ी राहुल गांधी ने हमारे झूठ की कलई खोल दी है।

पेपर लीक को लेकर नीट और नेट सहित अन्य नौकरियों का जो हश्र हो रहा है उसको लेकर गंभीर रूप से चर्चा करने को लेकर सरकार को घेरा। इसके बाद जब प्रधानमंत्री मोदी का नंबर आया बोलने का तो ऐसी घटिया भाषा का इस्तेमाल प्रधानमंत्री पद पर बैठा कोई व्यक्ति संसद में करेगा ये अकल्पनीय था।प्रधानमंत्री के भाषण के कुछ शब्द देखिए-मां की गाली, आदमखोर एनीमल, मुंह पर लहू लग जाता है, कांग्रेस के मुंह खून लग गया है, श्राप, तबाह, संविधान सर पर रखकर नाच रहे हैं, ड्रामा, तमाचा, गालियां,चोर, चोरी, अरे मौसी, परजीवी, आंखें मारते हैं, तुमसे न हो पाएगा,वगैरह। जननायक नेताप्रतिपक्ष राहुल गांधी के लिए कई बार बालकबुद्धि शब्द का प्रयोग।

ऐसी घटिया भाषा कोई प्रधानमंत्री इस्तेमाल करेगा, यह कल्पना से परे है।प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोल रहे थे लेकिन उनका आधे से ज्यादा भाषण कांग्रेस और जननायक राहुल गांधी पर कें​द्रित रहा, बाकी आधे में खुद अपनी तारीफ की।

प्रधानमंत्री मोदी ने देश की समस्याओं पर बात नहीं की। मणिपुर, महंगाई, बेरोजगारी, चीन पर कुछ नहीं बोल पाए। पेपर लीक पर जो कुछ कहा, वह विश्वास योग्य नहीं है क्योंकि केंद्र का कानून पेपर लीक नहीं रोक पाया।मुझे नहीं पता कि यह उनका अब तक का सबसे निकृष्टतम भाषण था ? या वे अपना प्रदर्शन पहले ही कर चुके हैं ?

सरकार नौकरी का न बोलने को और महंगाई का म बोलने को तैयार नहीं है जिसकी वजह से नौजवान बच्चों में और महंगाई को लेकर आमजन में रोष पनप रहा है उसी रोष की वजह से मोदी की भाजपा 2024 के आम चुनाव में बहुत से काफ़ी दूर रह गई है और एनडीए के साथी दलों के रहमो-करम पर चल रही है लेकिन मोदी इस गंभीर समस्या पर विचार करने को तैयार नहीं है। 2014 में जब यह सरकार सत्ता में आई थी तो उसका नारा था कि बहुत हुईं महंगाई की मार अबकी बार मोदी सरकार, दो करोड़ नौकरियां देने का वादा बेरोजगारों से किया था लेकिन हुआ उसके उलट ना महंगाई कम हुईं और ना ही बेरोजगारी पर काम हुआ बल्कि रोजगार को खत्म किया गया पिछले 45 साल में सबसे ज्यादा बेरोजगारी हो गई है, किसानों की हालात को सुधारने का वादा किया गया था उसकी आय दोगुनी करने की बात की गई थी उस दिशा में भी कोई काम नहीं हुआ है।मोदी सरकार में काम की कोई बात नहीं होती सिर्फ इस पर काम होता है कि कैसे देश व प्रदेशों का माहौल साम्प्रदायिक बना रहे हिन्दू मुसलमान में नफ़रत की खाईं बढ़ती जाए जनता इसी में उलझी रहे ताकि सरकार से मुद्दे पर बात ना हो सकें।

सरकार जिस तरीके से उद्योगपतियों के रास्ते हमवार करती हैं अगर उसका कुछ प्रतिशत भी जनता के मुद्दों पर काम कर ले तो बहुत कुछ सुधार किया जा सकता हैं लेकिन मोदी सरकार अपने इस फार्मूले से बाहर निकलने को तैयार नहीं है जैसा जननायक राहुल गांधी आरोप लगाते हैं कि यह मोदी सरकार सिर्फ हम दो हमारे दो पर काम करती है और यह बात सही भी लगती हैं कि अगर उद्योगपतियों के 16 लाख करोड़ माफ़ करने हो तो मोदी सरकार उसमें सैकड़ों के हिसाब से टाइम लगाती हैं और अगर यही मसला किसानों की कर्ज माफी का हो तो मोदी सरकार आर्थिक स्थिति का रोना रोने लगती हैं जब मित्रों की कर्ज़ माफ़ी हो सकती हैं तो किसानों की कर्ज़ माफ़ी में हिला हवेली क्यों करती हैं मोदी सरकार इसके कारण तलाशने की जरूरत है क्या जिस जनता ने आपको सत्ता में बैठाया और आपको इस लायक़ किया कि आप अपने मित्रों का कर्ज़ माफ़ी कर सको तो फिर जनता से जुड़े मामले में आर्थिक स्थिति का हवाला क्यों दिया जाता है।

संसद में हुई पूरी बहस में जिस तरीके से सरकार और विपक्ष में आमना सामना हुआ उसे देख कर यह कहा जा सकता है कि विपक्ष अपनी भूमिका सही निभा रहा है और मोदी सरकार विपक्ष के द्वारा उठाएं गए मुद्दों पर काम करना तो दूर चर्चा भी करना नहीं चाहती है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जननायक नेता-प्रतिपक्ष राहुल गांधी को जिस तरीके से टारगेट कर रहे हैं या करते हैं उससे राहुल गांधी की लोकप्रियता में कईं गुणा बढ़ोतरी हो रही है राहुल गांधी का मतलब अब जनता की आवाज बन गया है इस लिए अब देशभर में सियासत नरेंद्र मोदी बनाम जननायक राहुल गांधी बन गया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here