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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, Birthright Citizenship पर ट्रंप को झटका

Asif Khan 2026-07-01 12:42:18
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, Birthright Citizenship पर ट्रंप को झटका

Birthright Citizenship पर ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका


अमेरिका में जन्मा बच्चा रहेगा नागरिक, ट्रंप ने कांग्रेस से मांगा नया कानून


Birthright Citizenship बरकरार, ट्रंप बोले, अब कांग्रेस बदलेगी नियम



अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जन्मसिद्ध नागरिकता को संवैधानिक संरक्षण देते हुए ट्रंप के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर को खारिज कर दिया। फैसला अमेरिका की इमिग्रेशन पॉलिसी, संवैधानिक व्यवस्था और लाखों प्रवासी परिवारों, खासकर भारतीय H-1B वीज़ा धारकों के लिए महत्वपूर्ण असर रखता है।



📍 वॉशिंगटन डी.सी., अमेरिका

📰 1 जुलाई 2026

✍️ Asif Khan


अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की सबसे बड़ी इमिग्रेशन लड़ाई पर क्या संदेश दिया?


अमेरिका की राजनीति में इमिग्रेशन कई वर्षों से सबसे विवादित मुद्दों में शामिल रहा है। अब इसी बहस के केंद्र में मौजूद Birthright Citizenship पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा फैसला दिया है जिसने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राजनीतिक एजेंडे को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी धरती पर जन्म लेने वाले लगभग सभी बच्चों को संविधान के 14वें संशोधन के तहत नागरिकता मिलेगी और इसे केवल राष्ट्रपति के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर से समाप्त नहीं किया जा सकता।

जन्मसिद्ध नागरिकता क्या है?

Birthright Citizenship का सिद्धांत अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन से जुड़ा है। इसका मूल अर्थ यह है कि अमेरिका में जन्म लेने वाला लगभग हर बच्चा जन्म के साथ अमेरिकी नागरिक माना जाएगा, चाहे उसके माता-पिता की नागरिकता या इमिग्रेशन स्टेटस कुछ भी हो। कुछ सीमित अपवाद, जैसे विदेशी राजनयिकों के बच्चे, इस नियम से बाहर रहते हैं। यह व्यवस्था एक सदी से अधिक समय से अमेरिकी संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा रही है।

ट्रंप का एग्जीक्यूटिव ऑर्डर क्यों विवाद में आया?

अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में राष्ट्रपति ट्रंप ने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी किया था। इसका उद्देश्य उन बच्चों को नागरिकता से वंचित करना था जिनके माता-पिता अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे हों या अस्थायी वीज़ा पर मौजूद हों।

ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि इससे अवैध प्रवासन और तथाकथित "बर्थ टूरिज्म" को बढ़ावा मिलता है। इसके विरोधियों ने इसे संविधान के सीधे उल्लंघन के रूप में देखा और कई राज्यों तथा नागरिक अधिकार संगठनों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत से फैसला देते हुए कहा कि अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन जन्मसिद्ध नागरिकता की स्पष्ट गारंटी देता है। अदालत ने माना कि राष्ट्रपति अपने कार्यकारी आदेश के माध्यम से इस संवैधानिक अधिकार को समाप्त नहीं कर सकते।

मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स की अगुवाई में आए फैसले ने यह भी दोहराया कि इस विषय पर 1898 के ऐतिहासिक निर्णय की संवैधानिक व्याख्या आज भी लागू है।

ट्रंप की प्रतिक्रिया

फैसले के तुरंत बाद डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह निर्णय "देश के लिए अच्छा नहीं" है। उन्होंने दावा किया कि यदि कांग्रेस चाहे तो कानून बनाकर इस व्यवस्था में बदलाव किया जा सकता है और उन्होंने ऐसे किसी विधेयक का समर्थन करने का वादा किया।

हालांकि कई संवैधानिक विशेषज्ञों का मत है कि यदि कोई कानून सीधे 14वें संशोधन की व्याख्या से टकराता है तो उसे भी न्यायिक समीक्षा का सामना करना पड़ सकता है। यही कारण है कि यह बहस अभी समाप्त नहीं मानी जा रही।

भारतीयों के लिए इसका क्या मतलब है?

भारत से हर वर्ष बड़ी संख्या में पेशेवर H-1B, L-1, F-1 और अन्य अस्थायी वीज़ा पर अमेरिका जाते हैं। ऐसे परिवारों के अमेरिका में जन्मे बच्चों की नागरिकता को लेकर लंबे समय से चिंता बनी हुई थी।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद फिलहाल यह स्पष्ट हो गया है कि अमेरिका में जन्मे ऐसे बच्चों की नागरिकता सुरक्षित रहेगी। हालांकि यह नागरिकता उनके माता-पिता को स्वतः ग्रीन कार्ड या अमेरिकी नागरिकता नहीं देती। यह अंतर समझना महत्वपूर्ण है।

क्या यह ट्रंप की अंतिम हार है?

राजनीतिक दृष्टि से शायद नहीं। ट्रंप ने साफ संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को कांग्रेस के माध्यम से आगे बढ़ाएंगे। यदि भविष्य में कांग्रेस कोई नया कानून पारित करती है तो उसके खिलाफ भी संवैधानिक चुनौती लगभग तय मानी जा रही है।

यानी राजनीतिक संघर्ष अब अदालत से निकलकर संसद और आगामी चुनावी बहस तक पहुंच सकता है।

बहस का दूसरा पक्ष

ट्रंप समर्थकों का तर्क है कि मौजूदा व्यवस्था का दुरुपयोग हो रहा है और इससे अवैध प्रवासन को अप्रत्यक्ष प्रोत्साहन मिलता है। दूसरी ओर नागरिक अधिकार संगठन कहते हैं कि संविधान में दर्ज अधिकारों को राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार बदला नहीं जा सकता।

यही वजह है कि यह विवाद केवल इमिग्रेशन का नहीं बल्कि संविधान, संघीय शक्तियों और न्यायपालिका की भूमिका का भी प्रश्न बन गया है।

आगे क्या?

कांग्रेस में इस विषय पर विधायी पहल होती है या नहीं, यह आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा। यदि कोई नया कानून लाया जाता है तो उसके विरुद्ध फिर से न्यायिक चुनौती की संभावना रहेगी।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का फैसला अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता के संवैधानिक संरक्षण को मजबूत करता है। भारतीय समुदाय सहित लाखों प्रवासी परिवारों के लिए यह कानूनी स्पष्टता लेकर आया है, जबकि अमेरिकी राजनीति में इमिग्रेशन का मुद्दा पहले की तरह चुनावी विमर्श के केंद्र में बना रहने की पूरी संभावना है।

वीडियो देखें

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Asif Khan

Asif Khan

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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