गुरुवार, 08 October 2026
GOLD ₹0 ▼ 0%
SENSEX 0 ▼ 0%
BITCOIN $0 ▼ 0%
38°C मुजफ्फरनगर
🔔 Google पर Shah Times की खबरें पाने के लिए क्लिक करें
EDITION:
BREAKING
#ShahTimes #Muzaffarnagar #Bijnor #Moradabad #BreakingNews #Politics #Education #Crime #Sports #Business
Advertisement Advertisement
India

मानसून ट्रैकर: भारत में बारिश 41% कम, महाराष्ट्र में ठहराव

Shahana • 2026-06-20 05:28:06
मानसून ट्रैकर: भारत में बारिश 41% कम, महाराष्ट्र में ठहराव

भारत में मानसून की रफ्तार थमी, बारिश में बड़ी गिरावट

भारत में इस साल मानसून की शुरुआत उम्मीदों के विपरीत धीमी और असमान रही है। जून के पहले आधे हिस्से में देशभर में बारिश का आंकड़ा सामान्य से काफी नीचे रहा, जिससे गर्मी और उमस ने लोगों को बेहाल कर दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार 4 जून से 18 जून के बीच देश में औसतन 72.2 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन केवल 42.6 मिमी बारिश ही दर्ज की गई। यह 41% की बड़ी कमी को दर्शाता है, जो कृषि, जल संसाधन और दैनिक जीवन पर गहरा असर डाल सकती है।

महाराष्ट्र में मानसून का ठहराव बना मुख्य कारण

विशेषज्ञों के अनुसार दक्षिण महाराष्ट्र में मानसून की प्रगति रुकने से पूरे देश में बारिश के पैटर्न पर असर पड़ा है। आमतौर पर जून के पहले सप्ताह में महाराष्ट्र में मानसून तेजी से आगे बढ़ता है, लेकिन इस बार अनुकूल हवाओं और समुद्री परिस्थितियों की कमी के कारण इसकी गति धीमी रही। IMD ने स्पष्ट किया है कि "बड़े पैमाने पर अनुकूल मौसमी परिस्थितियों की कमी" इस ठहराव का मुख्य कारण है।

अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश की स्थिति

IMD के क्षेत्रीय आंकड़ों के अनुसार भारत के विभिन्न हिस्सों में बारिश की कमी अलग-अलग स्तर पर देखी गई है। मध्य भारत में सबसे ज्यादा 67% की गिरावट दर्ज हुई है, जो चिंता का विषय है क्योंकि यह क्षेत्र कृषि के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में 42% की कमी, दक्षिणी प्रायद्वीप में 22% और उत्तर-पश्चिम भारत में 6% की कमी दर्ज की गई है। इन आंकड़ों से साफ है कि मानसून का प्रभाव पूरे देश में समान नहीं है।

हीटवेव और मौसम असंतुलन का असर

तेलंगाना और आसपास के राज्यों में मानसून की धीमी प्रगति के कारण हीटवेव जैसे हालात फिर से बन गए हैं। हैदराबाद समेत कई क्षेत्रों में तापमान सामान्य से अधिक बना हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बादलों की कमी और मानसून के धीमे फैलाव ने गर्मी को बढ़ावा दिया है। आमतौर पर मानसून के आने के बाद तापमान में गिरावट आती है, लेकिन इस साल यह पैटर्न टूटता नजर आ रहा है।

‘सुपर अल नीनो’ का बढ़ता खतरा

वैश्विक मौसम विशेषज्ञों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि 2026 में ‘सुपर अल नीनो’ की स्थिति बन सकती है। अल नीनो एक ऐसी जलवायु घटना है जो प्रशांत महासागर के तापमान में वृद्धि के कारण होती है और इसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है। भारत में यह आमतौर पर कमजोर मानसून और कम बारिश का कारण बनता है। यदि यह स्थिति मजबूत होती है, तो आने वाले महीनों में बारिश की कमी और बढ़ सकती है।

ऐतिहासिक संदर्भ और तुलना

भारत में मानसून की अनियमितता कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस साल की शुरुआत विशेष रूप से कमजोर रही है। पिछले वर्षों में भी जून में बारिश की कमी देखी गई है, लेकिन बाद के महीनों में स्थिति सुधर जाती थी। हालांकि, इस बार वैश्विक जलवायु संकेतों को देखते हुए विशेषज्ञ ज्यादा सतर्क हैं।

किसानों और अर्थव्यवस्था पर असर

बारिश की कमी का सबसे बड़ा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ता है। खरीफ फसलों की बुवाई मानसून पर निर्भर करती है, और यदि बारिश समय पर नहीं होती तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इससे खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में किसान मानसून की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

शहरी जीवन पर प्रभाव

केवल ग्रामीण ही नहीं, शहरी क्षेत्रों में भी इसका असर देखने को मिल रहा है। जलाशयों का स्तर गिर सकता है, जिससे पानी की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। साथ ही, बिजली की मांग बढ़ने से ऊर्जा संकट भी पैदा हो सकता है।

सरकार और एजेंसियों की तैयारी

सरकार और संबंधित एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। IMD नियमित अपडेट जारी कर रहा है और राज्यों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। यदि बारिश की कमी जारी रहती है, तो जल प्रबंधन और आपूर्ति के लिए विशेष कदम उठाने पड़ सकते हैं।

सार्वजनिक प्रतिक्रिया और चिंता

सोशल मीडिया और जनमानस में मानसून को लेकर चिंता बढ़ रही है। लोग गर्मी और पानी की कमी को लेकर परेशान हैं। किसान संगठनों ने भी सरकार से सहायता और स्पष्ट दिशा-निर्देश की मांग की है।

क्या स्थिति सुधर सकती है?

मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में कुछ क्षेत्रों में बारिश बढ़ सकती है, खासकर पूर्वोत्तर और हिमालयी क्षेत्रों में। हालांकि, पूरे देश में संतुलित बारिश होने में अभी समय लग सकता है। मानसून की प्रगति अगले दो हफ्तों में स्थिति को स्पष्ट करेगी।

अनिश्चित मानसून, बढ़ती चुनौती

भारत के लिए मानसून केवल मौसम नहीं, बल्कि जीवनरेखा है। इस साल इसकी धीमी और असमान शुरुआत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जल्द सुधार नहीं हुआ, तो इसका असर कृषि, अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन पर व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है। आने वाले हफ्ते इस बात का फैसला करेंगे कि 2026 का मानसून सामान्य रहेगा या चुनौतीपूर्ण।

ADVERTISEMENT
Shahana

Shahana

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

BREAKING NEWS

संबंधित खबरें

जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश, एनएच-44 बंद, मरम्मत कार्य जारी

2026-08-01 13:51:12

बारिश ने रोका भारत-अफगानिस्तान क्वार्टर फाइनल, बिना खेले टीम इंडिया सेमीफाइनल में

2026-09-28 12:45:57

मुजफ्फरनगर भारी बारिश, 8वीं तक स्कूल बंद, 26°C तापमान के बीच जलभराव से जनजीवन प्रभावित

2026-07-09 07:11:52

2022 में 5G लॉन्च, 2026 में डिजिटल विस्तार: इंडिया मोबाइल कांग्रेस में पीएम मोदी ने बताया भारत का टेक्नोलॉजी रोडमैप

2026-10-08 13:01:24

प्रवेश वर्मा से जुड़े कथित थप्पड़ मामले में दिल्ली हाई कोर्ट की कार्रवाई, पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट तलब

2026-10-08 12:43:30

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर FIR, दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस से धक्का-मुक्की के आरोप

2026-10-08 12:08:51

नाना पाटेकर नहीं रहे, हिंदी और मराठी सिनेमा में छोड़ी पहचान

2026-10-08 11:44:33

10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान, एकजुटता पर जोर

2026-10-08 11:38:40

TRENDING

ताज़ा ख़बरें
BREAKING NEWS
ADVERTISEMENT

Your Ad Here
TRENDING
आज का ई-पेपर
मुजफ्फरनगर (12 पेज)
बिजनौर (10 पेज)
सहारनपुर (11 पेज)
मुरादाबाद (14 पेज)
Home Video Epaper Reel Menu
Chat With Us
SHAH TIMES
ख़बरें छुपाता नहीं, छापता है
🏠 होम ⚡ ब्रेकिंग न्यूज़ 📰 ताज़ा खबरें 🇮🇳 देश 🌍 दुनिया 🏛 राजनीति 🚔 क्राइम 📈 बिजनेस 🏏 स्पोर्ट्स 🎓 शिक्षा ❤️ स्वास्थ्य 📰 ई-पेपर