7.7 तीव्रता का भूकंप, इंडोनेशिया में 51 लोगों की मौत
इंडोनेशिया में भूकंप से तबाही, 5 हजार लोग विस्थापित
फ्लोरेस में भूकंप के बाद मंजर भयावह, राहत अभियान जारी
इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत में 7.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। अधिकारियों के मुताबिक कम से कम 51 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 36 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं और 77 लोगों को मामूली चोटें आई हैं। करीब 5 हजार लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है।
भूकंप शनिवार को फ्लोरेस द्वीप के आसपास आया। इसके बाद भूस्खलन हुए, सड़कें बंद हो गईं और कई इलाकों में राहत एवं बचाव टीमों की पहुंच मुश्किल हो गई। शुरुआती आकलन में 1,300 से अधिक मकानों को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है।
भूकंप के बाद शुरुआती रिपोर्टों में मृतकों की संख्या कम थी, लेकिन बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ आंकड़ा बढ़ता गया। ताजा रिपोर्ट में अधिकारियों ने कम से कम 51 मौतों की पुष्टि की है।
घायलों में 36 की हालत गंभीर बताई गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार कुछ अस्पताल खुद भी प्रभावित हुए हैं, जिसके कारण घायलों का इलाज अस्पतालों के बाहर और अस्थायी चिकित्सा केंद्रों में करना पड़ा।
मलबे और क्षतिग्रस्त इलाकों में तलाशी अभियान जारी है। अधिकारियों ने अभी लापता लोगों की अंतिम संख्या सार्वजनिक नहीं की है। इसलिए मृतकों का आंकड़ा आगे बदलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
भूकंप के बाद करीब 5 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। सिका क्षेत्र में 3,300 से अधिक लोग स्पोर्ट्स एरिना और अस्थायी शेल्टर में शरण लेने पहुंचे। कई अन्य लोग आफ्टरशॉक्स के डर से खुले स्थानों में रह रहे हैं।
फ्लोरेस के कई हिस्सों में लोगों को राहत सामग्री और चिकित्सा सहायता का इंतजार है। क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण कुछ दूरदराज इलाकों तक पहुंचना अब भी चुनौती बना हुआ है।
भूकंप के बाद कई जगह भूस्खलन हुए। इससे प्रमुख सड़कें बंद हो गईं और कुछ इलाकों का संपर्क टूट गया। माउमेरे जैसे प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में भी राहत टीमों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
Trans-Flores Highway को नुकसान पहुंचने की खबरों ने हालात और जटिल कर दिए हैं। सड़क संपर्क बाधित होने से भोजन, पानी, मेडिकल सप्लाई और बचाव उपकरण प्रभावित इलाकों तक पहुंचाना कठिन हो गया है।
राहत अभियान में 3,500 से अधिक सैन्य और पुलिसकर्मियों को लगाया गया है। बचाव दल मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचने और क्षतिग्रस्त इलाकों को सुरक्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।
भूकंप ने आवासीय इलाकों के साथ-साथ सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को भी प्रभावित किया है। अधिकारियों के मुताबिक 1,300 से ज्यादा मकानों को नुकसान हुआ है। कुछ स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों पर भी असर पड़ा है।
कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई। बिजली संकट का असर पेट्रोल स्टेशनों पर भी पड़ा और करीब 20 पेट्रोल स्टेशन काम नहीं कर सके। इससे राहत और परिवहन व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।
मुख्य भूकंप के बाद सैकड़ों आफ्टरशॉक्स दर्ज किए गए। रॉयटर्स के मुताबिक 340 से ज्यादा आफ्टरशॉक्स आए हैं। इनमें से कुछ झटकों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी।
आफ्टरशॉक्स के चलते क्षतिग्रस्त इमारतों में वापस लौटना जोखिम भरा है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग अस्थायी शेल्टर या खुले स्थानों में रह रहे हैं।
भूकंप के बाद सुनामी की चेतावनी भी जारी की गई थी। बाद में इसे हटा दिया गया, क्योंकि समुद्र के स्तर में बड़े खतरे वाली स्थिति की पुष्टि नहीं हुई।
इंडोनेशिया दुनिया के सबसे अधिक भूकंपीय सक्रिय क्षेत्रों में स्थित है। यह Pacific Ring of Fire का हिस्सा है, जहां कई टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधि के कारण भूकंप और ज्वालामुखीय घटनाएं आम हैं।
फ्लोरेस और आसपास के द्वीप पहले भी बड़े भूकंपों का सामना कर चुके हैं। इसलिए मौजूदा आपदा में भी स्थानीय प्रशासन के सामने राहत, पुनर्वास और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को बहाल करने की बड़ी चुनौती है।
मौजूदा संकट केवल मौतों और क्षतिग्रस्त मकानों तक सीमित नहीं है। सड़क संपर्क टूटने, बिजली आपूर्ति बाधित होने और स्वास्थ्य सुविधाओं पर असर से राहत अभियान की रफ्तार प्रभावित हुई है।
दूरदराज गांवों तक पहुंच सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। कुछ इलाकों में भूस्खलन के कारण बचाव दलों को वैकल्पिक रास्ते तलाशने पड़ रहे हैं। ऐसे में वास्तविक नुकसान का पूरा आकलन होने में समय लग सकता है।
इसी वजह से अभी सामने आए 51 मौतों के आंकड़े को अंतिम आंकड़ा मानना जल्दबाजी होगी। अधिकारियों की विस्तृत जांच और खोज अभियान के बाद स्थिति ज्यादा स्पष्ट होगी।
अब राहत एजेंसियों का प्राथमिक फोकस मलबे में फंसे लोगों की तलाश, घायलों का इलाज और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने पर है।
इसके साथ ही सड़कों और बिजली व्यवस्था को बहाल करना जरूरी होगा। क्षतिग्रस्त मकानों और सार्वजनिक संस्थानों का सर्वेक्षण भी किया जाएगा।
क्षेत्रीय सरकार आपदा की गंभीरता को देखते हुए इमरजेंसी स्टेटस घोषित करने पर विचार कर रही है। इससे राहत और पुनर्वास के लिए संसाधन तेजी से जुटाने में मदद मिल सकती है।
इंडोनेशिया के फ्लोरेस क्षेत्र में 7.7 तीव्रता के भूकंप ने बड़े मानवीय संकट को जन्म दिया है। कम से कम 51 लोगों की मौत, 113 घायल और करीब 5 हजार लोगों का विस्थापन इस आपदा की गंभीरता दिखाता है।
भूस्खलन, बंद सड़कें, बिजली कटौती और लगातार आफ्टरशॉक्स राहत अभियान के सामने बड़ी रुकावट हैं। फिलहाल बचाव दल दूरदराज इलाकों तक पहुंचने और मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं।
जैसे-जैसे राहत अभियान आगे बढ़ेगा, नुकसान और हताहतों का वास्तविक आंकड़ा सामने आने की उम्मीद है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।