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नेपाल में विनाशकारी बाढ़: 669 मौतें, 2,400 से ज्यादा लापता; राहत-बचाव अभियान तेज

Apurva Choudhary 2026-08-30 10:09:04
नेपाल में विनाशकारी बाढ़: 669 मौतें, 2,400 से ज्यादा लापता; राहत-बचाव अभियान तेज

Synopsis


नेपाल में 26 अगस्त को ग्लेशियर ढहने के बाद भोटे कोशी नदी क्षेत्र में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। नेपाल पुलिस के अनुसार 29 अगस्त तक 669 शव बरामद किए जा चुके हैं और 2,362 लोग लापता हैं। बाढ़ से सड़क, पुल, बिजली परियोजनाओं और बस्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है। नेपाल सरकार अब सामान्य राहत अभियान के साथ सुरंग बचाव, शवों की पहचान और परिवहन एवं संचार व्यवस्था बहाल करने के लिए विशेषज्ञ तकनीकी सहायता जुटा रही है।


Location: काठमांडू, नेपाल

Date: 29 अगस्त 2026

Byline: अपूर्वा चौधरी


नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही

26 अगस्त को भोटे कोशी नदी क्षेत्र में आई अचानक बाढ़ ने हिमालयी इलाकों में भारी तबाही मचा दी। ग्लेशियर और चट्टानी मलबे के अचानक नीचे आने से पानी, कीचड़ और debris का तेज बहाव कई बस्तियों और महत्वपूर्ण infrastructure को अपनी चपेट में ले गया।

कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि hydropower projects भी प्रभावित हुए हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और खराब मौसम के कारण राहत तथा recovery operations में लगातार मुश्किलें आ रही हैं।


669 मौतें, हजारों लोग अब भी लापता

नेपाल पुलिस के 29 अगस्त के अपडेट के मुताबिक अब तक 669 शव बरामद किए गए हैं। इनमें स्थानीय लोगों के साथ विदेशी नागरिकों के शव भी शामिल हैं। करीब 2,362 लोग अब भी लापता बताए गए हैं।

लापता लोगों की वास्तविक संख्या आगे बदल सकती है, क्योंकि प्रभावित इलाकों में search operations जारी हैं और कई परिवारों तथा विदेशी नागरिकों की स्थिति का सत्यापन अभी बाकी है।

नेपाल और तिब्बत के प्रभावित क्षेत्रों को मिलाकर लापता लोगों की संख्या करीब 3,000 तक पहुंचती है। चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी सात मौतों और सैकड़ों लोगों के लापता होने की सूचना है।


राहत और बचाव अभियान में बड़ी चुनौती

बाढ़ के बाद नेपाल ने अपनी security और disaster-management agencies को rescue और relief operations में लगाया है। हालांकि पहाड़ी इलाकों में debris, ऊंचे जलस्तर और खराब मौसम के कारण कई स्थानों तक पहुंचना मुश्किल बना हुआ है।

विशेष रूप से hydropower projects की सुरंगों में फंसे लोगों को निकालना एक बड़ी चुनौती है। नेपाल ने इसी वजह से specialist technical assistance की जरूरत बताई है।


नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय तकनीकी मदद मांगी

नेपाल ने स्पष्ट किया है कि उसे केवल सामान्य search-and-rescue teams से ज्यादा विशेष तकनीकी सहायता की जरूरत है। इसमें tunnel rescue, transport और communication infrastructure की बहाली, DNA testing तथा शवों की पहचान और सुरक्षित रखरखाव जैसी विशेषज्ञ सेवाएं शामिल हैं।

भारत और चीन समेत कई देशों ने राहत और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया है। भारत की ओर से राहत सामग्री और specialist assistance भी भेजी गई है।


पुनर्निर्माण पर 4–5 अरब डॉलर का अनुमान

नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले के अनुसार बाढ़ से हुए नुकसान के बाद देश को पुनर्निर्माण के लिए करीब 4 से 5 अरब डॉलर की जरूरत पड़ सकती है। यह फिलहाल प्रारंभिक अनुमान है और damage assessment पूरा होने के बाद इसमें बदलाव संभव है।

बाढ़ ने सड़क और पुलों के साथ hydropower infrastructure को भी नुकसान पहुंचाया है। इससे नेपाल की अर्थव्यवस्था और लंबे समय तक चलने वाली reconstruction प्रक्रिया पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।


भारत और चीन के लिए भी महत्वपूर्ण संकट

नेपाल की यह आपदा केवल घरेलू मानवीय संकट नहीं है। प्रभावित क्षेत्र चीन की सीमा के करीब हैं और बाढ़ ने सीमा-पार transport तथा trade infrastructure को भी प्रभावित किया है।

भारत के लिए भी नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की स्थिति महत्वपूर्ण है। भारतीय अधिकारी राहत, बचाव और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर नेपाली अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहे हैं।


आगे क्या होगा?

अब सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, शवों की पहचान और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना है। इसके साथ ही क्षतिग्रस्त पुलों, सड़कों, बिजली परियोजनाओं और communication networks की बहाली शुरू करनी होगी।

नेपाल के लिए अगला बड़ा चरण reconstruction और rehabilitation का होगा। शुरुआती 4–5 अरब डॉलर का अनुमान बताता है कि इस आपदा का आर्थिक प्रभाव भी काफी व्यापक हो सकता है।


नेपाल में ग्लेशियर से जुड़ी इस विनाशकारी बाढ़ ने हिमालयी क्षेत्र की आपदा-जोखिम की गंभीरता को सामने ला दिया है। 29 अगस्त तक नेपाल में 669 मौतों और 2,362 लोगों के लापता होने की पुष्टि हुई है। राहत और बचाव अभियान जारी है, जबकि सरकार ने सुरंग बचाव, forensic identification और infrastructure restoration के लिए विशेषज्ञ तकनीकी सहायता मांगी है।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल लापता लोगों का पता लगाने और प्रभावित इलाकों में आवश्यक सेवाएं बहाल करने का है। इसके बाद नेपाल के सामने अरबों डॉलर के reconstruction और long-term rehabilitation की चुनौती होगी।

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Apurva Choudhary

Apurva Choudhary

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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