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नेपाल में शवों का संकट, अस्पतालों के मुर्दाघर भरे; संक्रमण के खतरे से बढ़ी चिंता

Shah Times • 2026-08-29 11:26:54
नेपाल में शवों का संकट, अस्पतालों के मुर्दाघर भरे; संक्रमण के खतरे से बढ़ी चिंता

नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान के साथ शवों की पहचान और सुरक्षित प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन गया है। भोटेकोशी नदी में अचानक आए भीषण जलप्रवाह से बहकर गए शव अब निचले इलाकों में कई जिलों तक पहुंच रहे हैं। चितवन, नवलपरासी, धादिंग, तनहूं, गोरखा और पोखरा क्षेत्र के अस्पतालों के मुर्दाघरों पर दबाव तेजी से बढ़ा है। कई जगह उपलब्ध क्षमता से ज्यादा शव पहुंचने के बाद प्रशासन को दूसरे जिलों में शव भेजने और अस्थायी शवगृह तैयार करने पड़े हैं। स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने चुनौती केवल शवों को रखने की नहीं है। शवों की पहचान, पोस्टमार्टम, डीएनए नमूने सुरक्षित करना और परिजनों तक जानकारी पहुंचाना भी इसी आपदा प्रबंधन का हिस्सा बन गया है।


चितवन, नेपाल |29 अगस्त 2026|शाह टाइम्स

By Mohd Haris


अस्पतालों में क्षमता से ज्यादा शव

चितवन इस संकट का सबसे गंभीर केंद्र बनकर सामने आया है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार त्रिशूली और नारायणी नदी के किनारे बड़ी संख्या में शव बरामद किए गए हैं। अस्पतालों की मौजूदा क्षमता इन शवों को लंबे समय तक रखने के लिए पर्याप्त नहीं है। भारतपुर अस्पताल की स्थिति विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है। एक रिपोर्ट के मुताबिक अस्पताल के मुर्दाघर में केवल 24 शव रखने की क्षमता है, जबकि बाढ़ के बाद वहां 200 से अधिक शव पहुंचने की स्थिति बन गई थी। इसके चलते कुछ शवों को अस्पताल परिसर के बाहर अस्थायी व्यवस्था में रखना पड़ा। चितवन प्रशासन ने भारतपुर में एक अस्थायी शव प्रबंधन केंद्र तैयार करने का फैसला किया है। इस केंद्र में लगभग 250 शवों को रखने की व्यवस्था की जा रही है। आवश्यकता बढ़ने पर देवघाट स्थित विद्युत शवदाह गृह को भी वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई है।

शवों को दूसरे जिलों में भेजना पड़ा

भोटेकोशी नदी से बहकर आए शव केवल बाढ़ प्रभावित ऊपरी जिलों तक सीमित नहीं रहे। नुवाकोट और धादिंग से बरामद शव चितवन, तनहूं और नवलपरासी तक पहुंचे हैं।

कई जिलों में मुर्दाघरों की क्षमता समाप्त होने के बाद शवों को दूसरे जिलों के अस्पतालों में भेजा गया। पोखरा में भी अलग-अलग जिलों से शव पहुंचने के बाद अस्पतालों की क्षमता पर दबाव बढ़ गया है। नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार 28 अगस्त की शाम तक 579 शव बरामद किए जा चुके थे। इनमें से 511 शव अलग-अलग अस्पतालों में भेजे गए थे। शवों को संबंधित स्थानों तक पहुंचाने और सुरक्षित प्रबंधन की प्रक्रिया जारी है।

पहचान सबसे बड़ी चुनौती

बाढ़ के पानी और मलबे से बरामद कई शव गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हैं। ऐसे मामलों में केवल चेहरे से पहचान करना मुश्किल हो जाता है। अधिकारी शवों की तस्वीरें, फिंगरप्रिंट और डीएनए नमूने सुरक्षित करने की प्रक्रिया अपना रहे हैं। पहचान नहीं होने की स्थिति में शवों को टैग नंबर के साथ सुरक्षित तरीके से प्रबंधित करने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि बाद में परिजनों के दावे की स्थिति में रिकॉर्ड उपलब्ध रहे। नेपाल सरकार ने इस काम में तकनीकी सहायता की जरूरत भी स्वीकार की है। विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने रॉयटर्स से कहा कि नेपाल को शवों की पहचान, डीएनए परीक्षण और लंबे समय तक शवों को सुरक्षित रखने जैसे विशेषज्ञ क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत है।

क्या महामारी का खतरा है?

यही सवाल इस समय सबसे अधिक चिंता पैदा कर रहा है। बड़ी संख्या में शवों का एक साथ मिलना, गर्म मौसम, पानी और स्वच्छता व्यवस्था में व्यवधान तथा विस्थापित आबादी के बीच संक्रमण का जोखिम बढ़ा है। लेकिन इसे सीधे महामारी फैलने की पुष्टि के तौर पर पेश करना सही नहीं होगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने नेपाल की मौजूदा स्थिति में संक्रामक बीमारियों के जोखिम बढ़ने की चेतावनी दी है, खासकर डायरिया और सांस से जुड़ी बीमारियों का। संगठन ने दूषित पानी, खराब स्वच्छता, भीड़ और स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान को प्रमुख जोखिम बताया है। नेपाल के महामारी विज्ञान एवं रोग नियंत्रण विभाग ने भी शवों के सुरक्षित और उचित प्रबंधन को जरूरी बताया है। अधिकारियों की चिंता यह है कि बड़ी संख्या में शवों को सीमित क्षमता वाले स्थानों में लंबे समय तक रखना मुश्किल है, खासकर जब कई शव क्षतिग्रस्त अवस्था में मिले हों।

शवों के सुरक्षित प्रबंधन पर जोर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए प्राथमिकता शवों को सम्मानजनक तरीके से सुरक्षित रखना और संक्रमण के संभावित स्रोतों को नियंत्रित करना है। भारतपुर में अस्थायी केंद्र के लिए तापमान नियंत्रित करने की व्यवस्था की जा रही है। शवों को सड़ने की प्रक्रिया धीमी करने के लिए ड्राई आइस के इस्तेमाल की तैयारी भी की गई है। प्रशासन ने इसके लिए स्थानीय औद्योगिक और व्यापारिक संगठनों से सहयोग लिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी नेपाल के लिए आपात स्वास्थ्य सामग्री उपलब्ध कराई है। इसमें बॉडी बैग और अन्य स्वास्थ्य आपूर्ति शामिल हैं। संगठन स्वास्थ्य निगरानी और आपदा के बाद संक्रामक रोगों की रोकथाम से जुड़ी योजना में नेपाली प्रशासन को तकनीकी सहयोग दे रहा है।

अस्पतालों पर दोहरा दबाव

बाढ़ के बाद अस्पतालों पर मरीजों के इलाज और शवों के प्रबंधन का दोहरा दबाव है। प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्र खुद भी नुकसान से जूझ रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार बाढ़ में 3 स्वास्थ्य चौकियां पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुई हैं और 1 अस्पताल को आंशिक नुकसान पहुंचा है। 2 अस्पतालों तक पहुंच भी प्रभावित हुई है। इससे आपदा के बीच स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता बनाए रखना कठिन हो गया है। इसी कारण प्रशासन शवों को केवल अस्पतालों में रखने के बजाय वैकल्पिक केंद्रों की तरफ स्थानांतरित कर रहा है। इसका मकसद अस्पतालों की सीमित क्षमता को मरीजों के इलाज के लिए उपलब्ध रखना भी है।

हजारों लोग अब भी लापता

शवों की बढ़ती संख्या के बीच बड़ी चिंता लापता लोगों की भी है। 29 अगस्त की रिपोर्टों के अनुसार नेपाल और चीन में इस आपदा से मृतकों की संख्या 600 से ऊपर पहुंच चुकी थी और 2,000 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए गए। आंकड़े राहत और बचाव अभियान के साथ बदल रहे हैं। नेपाल के कई इलाकों में परिवार अपने लापता रिश्तेदारों की तलाश में अस्पतालों और अस्थायी शव प्रबंधन केंद्रों तक पहुंच रहे हैं। चितवन में ऐसे परिवारों की संख्या बढ़ी है, जहां नदी के रास्ते बहकर आए शवों की पहचान की जा रही है।

आगे स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने क्या चुनौती

नेपाल के सामने अब राहत और बचाव के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधन की चुनौती भी है। शवों की पहचान और सुरक्षित प्रबंधन जल्द पूरा करना जरूरी है। इसके साथ सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता, स्वास्थ्य केंद्रों की बहाली और विस्थापित लोगों के लिए चिकित्सा सेवाएं भी प्राथमिकता में हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि आपदा के बाद निगरानी व्यवस्था मजबूत करना जरूरी है, ताकि किसी भी संक्रामक बीमारी के संकेत समय रहते सामने आ सकें। अभी उपलब्ध आधिकारिक जानकारी महामारी की पुष्टि नहीं करती, लेकिन संक्रमण के जोखिम को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। नेपाल में जारी संकट यह बताता है कि बड़ी प्राकृतिक आपदा का असर बाढ़ और मौतों तक सीमित नहीं रहता। उसके बाद शवों की पहचान, स्वास्थ्य सुरक्षा, स्वच्छता और मानवीय गरिमा से जुड़े सवाल भी उतने ही अहम हो जाते हैं। फिलहाल प्राथमिकता साफ है। हर बरामद शव की पहचान की जाए, उसे सुरक्षित रखा जाए और परिवार तक सूचना पहुंचाई जाए। साथ ही स्वास्थ्य एजेंसियों को संक्रमण के जोखिम पर लगातार निगरानी रखनी होगी। यही व्यवस्था नेपाल को मौजूदा मानवीय संकट को व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट में बदलने से रोकने में मदद करेगी।

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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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