नेपाल में भोटेकोशी बाढ़ के बाद प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में 3 दिनों में 2.295 अरब नेपाली रुपये से अधिक जमा हुए। सरकार ने प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान तेज किया है।
📍 काठमांडू, नेपाल
🗓️ 29 August 2026
✍️ Mohd Naved
नेपाल में भोटेकोशी नदी की विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और पुनर्वास के लिए आर्थिक सहायता का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में 3 दिनों के भीतर 2.295 अरब नेपाली रुपये से अधिक की राशि जमा हुई है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, यह रकम 10 अलग-अलग वाणिज्यिक बैंकों में मौजूद खातों के जरिए जमा की गई।
राहत कोष में बढ़ी आर्थिक मदद
वित्त मंत्रालय के अनुसार, बुधवार दोपहर से गुरुवार आधी रात तक 36 घंटे में करीब 1.918 अरब नेपाली रुपये जमा हुए थे। इसके बाद शुक्रवार को 385.5 मिलियन नेपाली रुपये की अतिरिक्त सहायता मिली। इस तरह कुल योगदान 2.295 अरब नेपाली रुपये से अधिक हो गया।
सरकार की ओर से बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए आर्थिक मदद की अपील के बाद निजी क्षेत्र, संस्थाओं और व्यक्तिगत दानदाताओं की ओर से योगदान शुरू हुआ। वित्त मंत्रालय को राहत कोष के लिए आर्थिक सहायता जुटाने और उसके समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है।
भोटेकोशी बाढ़ के बाद बढ़ी जरूरत
26 अगस्त 2026 की सुबह नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई। सरकारी अपील के मुताबिक, रसुवा के अलावा नुवाकोट, धादिंग और गोरखा के नदी किनारे वाले इलाकों पर भी इसका गंभीर असर पड़ा।
बाढ़ के बाद नेपाल सरकार ने प्रभावित इलाकों में खोज, बचाव और आपात राहत अभियान शुरू किया। सरकार ने लोगों, संस्थाओं और संगठनों से प्रधानमंत्री दैवी प्रकोप उद्धार कोष तथा प्रधानमंत्री राहत कोष में आर्थिक सहायता देने की अपील की।
राहत कोष का इस्तेमाल क्यों अहम
आपदा के बाद शुरुआती दौर में सबसे बड़ी जरूरत भोजन, चिकित्सा सहायता, सुरक्षित निकासी और अस्थायी आश्रय की होती है। इसके बाद क्षतिग्रस्त सड़क, पुल, बिजली और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की बहाली की चुनौती सामने आती है।
वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने कहा था कि सरकार राहत और बचाव अभियान के लिए संसाधनों और लॉजिस्टिक्स की कमी नहीं होने देगी। उन्होंने यह भी कहा कि बचाव और राहत के बाद मध्यम और दीर्घकालिक पुनर्निर्माण पर ध्यान दिया जाएगा।
कोष में पहले से मौजूद रकम भी महत्वपूर्ण है
हालिया योगदान के बाद प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष का कुल बैलेंस करीब 4.09 अरब नेपाली रुपये तक पहुंच गया है। इससे पहले कोष में लगभग 2.17 अरब नेपाली रुपये मौजूद थे।
इस आंकड़े से साफ होता है कि हालिया बाढ़ के बाद राहत कोष में जमा नई रकम ने सरकार के पास उपलब्ध वित्तीय संसाधनों में बड़ा इजाफा किया है। हालांकि, इस रकम का वास्तविक असर राहत और पुनर्वास कार्यों में इसके इस्तेमाल की गति और पारदर्शिता पर निर्भर करेगा।
बड़े संस्थागत योगदान पर विशेष व्यवस्था
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, 10 मिलियन नेपाली रुपये या उससे अधिक का संस्थागत योगदान वित्त मंत्री स्वयं स्वीकार कर रहे हैं। व्यक्तिगत दानदाता भी मंत्रालय के जरिए नकद सहायता देने की व्यवस्था का इस्तेमाल कर सकते हैं।
शुक्रवार को प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार अकेले निजी क्षेत्र से 273.3 मिलियन नेपाली रुपये की सहायता 6 घंटे के भीतर मिली थी। यह रकम विभिन्न निजी संस्थाओं के योगदान से आई थी।
बाढ़ ने छोड़ी व्यापक तबाही
भोटेकोशी और उससे जुड़े नदी तंत्र में आई बाढ़ ने नेपाल के सीमावर्ती पहाड़ी इलाकों में व्यापक नुकसान किया है। बाढ़ में मकान, सड़कें और पुल प्रभावित हुए हैं। जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है।
रॉयटर्स के अनुसार, नेपाल के वित्त मंत्री ने पुनर्निर्माण की लागत का अनुमान 4 से 5 अरब अमेरिकी डॉलर के बीच बताया है। यह नेपाल की अर्थव्यवस्था के आकार का लगभग 10 प्रतिशत तक बैठ सकता है। हालांकि, नुकसान का पूरा आकलन अभी जारी है।
मानवीय संकट भी गंभीर
बाढ़ के बाद बचाव और तलाश अभियान के सामने मौसम और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। 29 अगस्त तक विभिन्न रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 600 से अधिक बताई गई है और बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं।
कई इलाकों में मलबे और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के कारण राहत दलों की पहुंच मुश्किल बनी हुई है। नेपाल की सेना और अन्य सुरक्षा बल बचाव अभियान में तैनात हैं। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और जरूरी सामान उपलब्ध कराने पर प्राथमिकता दी जा रही है।
आगे की चुनौती राहत से पुनर्निर्माण तक
प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में बड़ी रकम का जमा होना तत्काल राहत अभियान के लिए अहम वित्तीय आधार देता है। लेकिन नेपाल के सामने चुनौती केवल प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने तक सीमित नहीं है।
सड़कों, पुलों, बिजली परियोजनाओं और दूसरी सार्वजनिक सुविधाओं की बहाली के लिए लंबे समय तक वित्तीय संसाधनों की जरूरत होगी। बाढ़ से प्रभावित व्यापारिक और पर्यटन गतिविधियों को भी पटरी पर लाना सरकार के लिए बड़ी प्राथमिकता रहेगी।
सरकार ने संकेत दिया है कि आपात बचाव और राहत चरण पूरा होने के बाद व्यापक पुनर्निर्माण अभियान शुरू किया जाएगा। वित्त मंत्री ने 2015 के भूकंप के बाद चलाए गए बड़े पुनर्निर्माण अभियान की तर्ज पर भविष्य की कार्रवाई की बात कही है।
नेपाल में बाढ़ के बाद प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में 3 दिनों में 2.295 अरब नेपाली रुपये से अधिक की राशि जमा होना राहत प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक समर्थन है। अब सरकार के सामने इस धनराशि को जरूरतमंद लोगों तक तेज, पारदर्शी और प्रभावी तरीके से पहुंचाने की चुनौती है।
राहत अभियान के साथ-साथ बुनियादी ढांचे की बहाली और दीर्घकालिक पुनर्निर्माण भी जरूरी होगा। बाढ़ से हुए व्यापक नुकसान का अंतिम आकलन सामने आने के बाद नेपाल की वित्तीय और मानवीय जरूरतों की पूरी तस्वीर और स्पष्ट होगी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।