नेपाल में भोटेकोशी नदी की विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान के बीच चीन ने तकनीकी सहायता के लिए अपने सुरंग विशेषज्ञ नेपाल भेजे हैं। नेपाल सरकार के अनुरोध पर भेजी गई टीम का फोकस उन हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने पर है, जहां सामान्य बचाव अभियान बेहद मुश्किल हो रहा है।
चीनी विशेषज्ञों की टीम हेलीकॉप्टर के जरिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में पहुंची है। नेपाल सरकार के मुताबिक विशेषज्ञ नेपाली सेना और स्थानीय तकनीकी टीम के साथ मिलकर सुरंगों की स्थिति का जायजा लेंगे और सुरक्षित रेस्क्यू की संभावनाओं का आकलन करेंगे।
यह सहायता ऐसे समय आई है जब 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल-चीन सीमा से लगे हिमालयी इलाकों में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। बाढ़ और मलबे ने सड़क, पुल, हाइड्रोपावर परियोजनाओं और दूसरे अहम बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है।
रसुवा, नेपाल|29 अगस्त 2026|शाह टाइम्स
By Mohd Haris
नेपाल सरकार ने विदेशी सहायता को सामान्य सर्च एंड रेस्क्यू के बजाय विशेष तकनीकी क्षेत्रों तक सीमित रखा है। नेपाली विदेश मंत्री शिशिर खनाल के मुताबिक देश को सुरंग बचाव, डीएनए परीक्षण, शवों की पहचान और परिवहन व्यवस्था बहाल करने जैसे विशेषज्ञ क्षेत्रों में मदद की जरूरत है। चीन की टीम इसी तकनीकी सहायता का हिस्सा है। अपर त्रिशूली 3 ‘बी’ हाइड्रोपावर परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों के बचाव के लिए चीनी विशेषज्ञों ने नेपाली सेना के विशेषज्ञों के साथ काम शुरू किया है। सरकार के मुताबिक शुरुआती चरण में चीनी और नेपाली विशेषज्ञ सुरंग के भीतर की स्थिति और वहां बचाव अभियान चलाने की व्यवहारिकता का तकनीकी आकलन करेंगे। अगर स्थिति सुरक्षित और रेस्क्यू के अनुकूल पाई जाती है, तो चीन की अतिरिक्त विशेषज्ञ टीम को भी मौके पर बुलाया जा सकता है।
बाढ़ ने नेपाल के उत्तरी जिलों में कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं को प्रभावित किया है। कई परियोजनाओं में कर्मचारियों के संपर्क से बाहर होने की खबर है और कुछ लोगों के सुरंगों में फंसे होने की आशंका जताई गई है। त्रिशूली 3ए हाइड्रोपावर परियोजना में भी बचाव दल मलबा हटाकर सुरंग तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां भारी मलबे के बीच अभियान चला रही हैं। इस तरह के ऑपरेशन में सुरंग की संरचनात्मक स्थिरता, ऑक्सीजन की स्थिति, पानी का दबाव और दोबारा मलबा गिरने का जोखिम बड़ी चुनौती बनते हैं। इसी वजह से नेपाल ने सामान्य राहत टीमों के बजाय विशेष तकनीकी विशेषज्ञता की मांग की है।
बाढ़ के शुरुआती दौर में नेपाल सरकार ने सामान्य विदेशी सर्च एंड रेस्क्यू टीमों को स्वीकार नहीं करने का फैसला किया था। सरकार का कहना था कि नेपाल की अपनी सुरक्षा और बचाव एजेंसियां सामान्य बचाव अभियान संभालने में सक्षम हैं। हालांकि बाद में हालात की गंभीरता और कई देशों के नागरिकों के लापता होने के बीच काठमांडू ने सीमित विदेशी तकनीकी सहायता स्वीकार करने का फैसला किया। भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया के विशेषज्ञों को सुरंग बचाव, डीएनए परीक्षण और फॉरेंसिक कार्य में मदद के लिए अनुमति दी गई। इस व्यवस्था का मकसद विदेशी टीमों को व्यापक अभियान सौंपना नहीं, बल्कि उन क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करना है जहां नेपाल को अतिरिक्त तकनीकी क्षमता की जरूरत है।
नेपाल की तकनीकी सहायता की अपील के बाद भारत ने भी 11 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम भेजी है। इस टीम में सुरंग बचाव से जुड़े विशेषज्ञ और मेडिकल कर्मी शामिल हैं।
इससे स्पष्ट है कि नेपाल ने पड़ोसी देशों से सहायता लेते हुए प्राथमिकता तकनीकी विशेषज्ञता को दी है। भारत और चीन दोनों की टीमों का इस्तेमाल खास तौर पर कठिन सुरंग बचाव और आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्यों में किया जा रहा है।
चीनी विशेषज्ञों के अलावा चीन ने नेपाल को राहत सामग्री और आर्थिक सहायता देने की भी घोषणा की है। नेपाली अधिकारियों के मुताबिक चीन से 2 सैन्य मालवाहक विमान राहत सामग्री लेकर पहुंचने वाले हैं। चीन ने बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए 2 मिलियन डॉलर की नकद सहायता देने की जानकारी भी दी है।
चीन और नेपाल के बीच सीमा क्षेत्र में व्यापार और संपर्क के लिए भी यह आपदा गंभीर असर लेकर आई है। बाढ़ ने सीमावर्ती सड़कों, पुलों और सीमा संपर्क से जुड़े बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है।
26 अगस्त की बाढ़ ने नेपाल के साथ-साथ तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों को भी प्रभावित किया। हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर के ढहने के बाद भारी मात्रा में बर्फ, चट्टान, मलबा और पानी नदी तंत्र में आया, जिससे अचानक विनाशकारी बाढ़ की स्थिति बनी। 29 अगस्त तक नेपाल में मृतकों की संख्या 600 से ऊपर पहुंच चुकी थी और बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता बताए जा रहे थे। राहत एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती दुर्गम पहाड़ी इलाकों तक पहुंचना और क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों के बीच बचाव अभियान जारी रखना है। नेपाल सरकार ने पुनर्निर्माण के लिए 4 से 5 अरब डॉलर की जरूरत का अनुमान भी जताया है। बाढ़ ने सड़क, पुल, ऊर्जा और संचार ढांचे को व्यापक नुकसान पहुंचाया है।
चीनी सुरंग विशेषज्ञों के पहुंचने से नेपाल के तकनीकी बचाव अभियान को अतिरिक्त क्षमता मिली है। हालांकि सुरंगों के भीतर वास्तविक स्थिति का आकलन होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितने लोगों तक पहुंच बनाई जा सकती है। फिलहाल नेपाली सेना, स्थानीय सुरक्षा एजेंसियां और विदेशी तकनीकी विशेषज्ञ मिलकर अभियान चला रहे हैं। प्राथमिकता उन लोगों तक पहुंचने की है जिनके सुरंगों में फंसे होने की आशंका है। नेपाल में आई इस आपदा ने यह भी दिखाया है कि हिमालयी इलाकों में अचानक आने वाली बाढ़ के दौरान सामान्य बचाव तंत्र की सीमाएं कितनी जल्दी सामने आ सकती हैं। ऐसे में भारत और चीन जैसे पड़ोसी देशों से विशेषज्ञ तकनीकी सहायता का इस्तेमाल तत्काल राहत के साथ भविष्य की आपदा तैयारी के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।