नेपाल और चीन के बीच हिमालयी सीमा क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने के बाद आई विनाशकारी बाढ़ से तबाही का दायरा बढ़ता जा रहा है। शनिवार तक नेपाल और तिब्बत में मृतकों की संख्या 626 पार पहुंच गई, जबकि हजारों लोग अब भी लापता हैं। खराब मौसम और भारी मलबे के बीच बचाव दलों ने अभियान दोबारा तेज किया है। आपदा के बाद एक नई झील बनने से दोबारा बाढ़ का खतरा पैदा हो गया था। इसी आशंका के कारण नेपाल और चीन में बचाव अभियान कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। बाद में जलस्तर और जोखिम का आकलन करने के बाद अभियान फिर शुरू किया गया। नेपाल के अधिकारियों के अनुसार हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। लेकिन रासुवा जिले में एक जलविद्युत परियोजना की सुरंग में 100 से ज्यादा लोगों के फंसे होने की आशंका है। राहत दलों के सामने कई जगह 4 से 5 फीट तक जमा कीचड़ और क्षतिग्रस्त रास्ते बड़ी रुकावट बने हुए हैं।
काठमांडू, नेपाल|29 अगस्त 2026|शाह टाइम्स
By Mohd Haris
शनिवार को सामने आए अलग-अलग आधिकारिक आंकड़ों में संख्या में अंतर रहा। नेपाल पुलिस ने नेपाल में मृतकों की संख्या 626 बताई, जबकि चीन के तिब्बत क्षेत्र में 7 मौतों की सूचना दी गई। संयुक्त आंकड़ा 633 तक पहुंच गया। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने 2,426 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है। चीन की ओर से तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में 554 लोगों के लापता होने की सूचना दी गई। इन आंकड़ों में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। आंकड़ों में लगातार बदलाव हो रहा है क्योंकि बचाव दल दूरदराज के इलाकों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। मलबे में दबे लोगों और बाढ़ में बह गए लोगों की तलाश के साथ मृतकों और लापता लोगों की सूची भी अपडेट की जा रही है।
आपदा की शुरुआत 26 अगस्त की सुबह हुई। हिमालय में करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई पर ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटकर नीचे गिरा। इसके साथ बड़ी मात्रा में चट्टान, बर्फ और मलबा नीचे आया और ल्हेंदे नदी में अचानक भारी जलप्रवाह पैदा हुआ। बाढ़ का पानी नेपाल के रासुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों की ओर तेजी से बढ़ा। कई गांवों, सड़कों और पुलों को भारी नुकसान पहुंचा। कुछ इलाकों में नदी का जलस्तर बेहद कम समय में कई मीटर बढ़ गया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने शुरुआती भूकंप संबंधी आकलन को बाद में संशोधित किया और संकेत दिया कि दर्ज की गई भूकंपीय गतिविधि ग्लेशियर और मलबे के खिसकने से जुड़ी थी।
ग्लेशियर और मलबे के गिरने से ऊपरी हिमालय में पानी का एक नया जलाशय बन गया। इसमें पानी लगातार जमा होने लगा और बाद में यह ल्हेंदे खोला और त्रिशूली नदी की ओर बहने लगा। जलस्तर बढ़ने की आशंका ने राहत दलों के लिए नया खतरा पैदा कर दिया। नेपाल में कुछ समय के लिए बचाव अभियान रोकना पड़ा। चीन की ओर मौजूद बचावकर्मियों को भी सुरक्षित स्थानों पर हटाया गया। बाद में अधिकारियों ने जोखिम को नियंत्रित बताया और बचाव अभियान फिर शुरू किया। हालांकि विशेषज्ञों ने चेताया है कि हिमालय में मौजूद अन्य ग्लेशियल झीलें भी भविष्य में खतरा पैदा कर सकती हैं।
नेपाल के रासुवा जिले में एक जलविद्युत परियोजना की सुरंग में 100 से ज्यादा लोगों के फंसे होने की आशंका है। बचावकर्मी मोटी कीचड़ की परतों के बीच सुरंग तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। सेना के हेलीकॉप्टरों और जमीनी टीमों को अभियान में लगाया गया है। लेकिन सुरंग का प्रवेश मार्ग मलबे से ढक गया है और कई जगह हेलीकॉप्टर उतारने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। कुछ लोगों को पहले ही सुरक्षित निकाला जा चुका है। नेपाल में अब तक 3,700 से ज्यादा लोगों को बचाए जाने की जानकारी सामने आई है।
शनिवार को खराब मौसम के कारण नेपाल में हेलीकॉप्टर आधारित बचाव अभियान प्रभावित हुआ। सेना ने मौसम सुधरने तक कुछ हवाई अभियानों को रोक दिया, जबकि जमीन पर बचाव दलों की गतिविधियां जारी रहीं। दुर्गम पहाड़ी इलाके, टूटी सड़कें और पुलों के बह जाने से राहत सामग्री पहुंचाना भी मुश्किल है। कुछ प्रभावित क्षेत्र अभी भी केवल हेलीकॉप्टर के जरिए पहुंचने योग्य हैं। नेपाल के अधिकारियों ने भारत और चीन से तकनीकी सहायता मांगी है। इसमें सुरंगों से लोगों को निकालना, पुल और संचार मार्ग बहाल करना, शवों की पहचान, डीएनए परीक्षण और शवों को सुरक्षित रखने जैसी विशेषज्ञ सेवाएं शामिल हैं।
चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में ग्यिरोंग सीमा क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है। नेपाल से जुड़ा महत्वपूर्ण सीमा मार्ग और आसपास का इलाका मलबे से भर गया है।
चीनी बचाव दलों ने सड़क और सीमा क्षेत्र में मलबा हटाने का काम शुरू किया है। ड्रोन, नाव और अन्य उपकरणों की मदद से उन स्थानों तक पहुंचने की कोशिश हो रही है जहां सामान्य रास्ते पूरी तरह बाधित हो चुके हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अध्यक्षता में हुई बैठक में ग्लेशियल झीलों, भूस्खलन और संभावित बैरियर झीलों की निगरानी मजबूत करने के निर्देश दिए गए। चीन ने नेपाल में आपदा राहत और अंतरराष्ट्रीय आपदा सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया है।
रेड क्रॉस के अनुमान के मुताबिक इस आपदा से 90,000 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। कई परिवारों ने घर खो दिए हैं और हजारों लोग राहत शिविरों, सरकारी इमारतों तथा सुरक्षित स्थानों पर शरण ले रहे हैं। बाढ़ ने सड़क, पुल, बिजली और जलविद्युत ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले के मुताबिक शुरुआती अनुमान में पुनर्निर्माण की लागत 4 से 5 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। यह नेपाल की अर्थव्यवस्था के लगभग 10 प्रतिशत के बराबर होगी।
जलविद्युत क्षेत्र को नुकसान नेपाल के लिए खास चिंता का विषय है। प्रभावित परियोजनाएं देश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता में महत्वपूर्ण हिस्सा रखती हैं।
आपदा क्षेत्र लोकप्रिय ट्रेकिंग और तीर्थयात्रा मार्ग से जुड़ा है। माउंट कैलाश और मानसरोवर जाने वाले कई तीर्थयात्री भी इस क्षेत्र में मौजूद थे। नेपाल और तिब्बत में लापता लोगों में विदेशी नागरिकों की बड़ी संख्या बताई गई है। नेपाल की आपदा एजेंसी ने अपनी लापता सूची में 517 विदेशी नागरिकों को शामिल किया है, जबकि चीन की ओर से 260 विदेशी नागरिकों के लापता होने की जानकारी पहले दी गई थी। भारत के लिए भी यह आपदा महत्वपूर्ण है। नेपाल से बहने वाली नदियों में कुछ शव उत्तर प्रदेश तक पहुंचने की सूचना मिली है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि हिमालयी आपदा का असर सीमा पार निचले इलाकों तक पहुंच सकता है।
नुवाकोट समेत कई प्रभावित जिलों में परिवार राहत केंद्रों और सैन्य शिविरों के बाहर अपने लापता रिश्तेदारों की जानकारी तलाश रहे हैं। अधिकारियों ने बचाए गए लोगों और लापता व्यक्तियों की सूची तैयार की है। कई परिवार मोबाइल फोन में अपने रिश्तेदारों की तस्वीरें लेकर राहत केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। बचाव अभियान जारी रहने के साथ हर बरामद शव और सुरक्षित निकाले गए व्यक्ति की पहचान दर्ज की जा रही है। मानवीय संकट का यह पहलू राहत अभियान की सबसे कठिन चुनौतियों में शामिल है। बड़ी संख्या में लापता लोगों की पहचान और उनके परिवारों तक सूचना पहुंचाने में समय लग सकता है।
बचाव अभियान दोबारा शुरू होने के बावजूद खतरा खत्म नहीं हुआ है। ऊपरी इलाकों में मौजूद ग्लेशियल झीलों और भूस्खलन वाले क्षेत्रों की निगरानी जरूरी बनी हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियरों और झीलों की अस्थिरता भविष्य में अचानक बाढ़ की घटनाओं का जोखिम बढ़ा सकती है। मौजूदा आपदा ने इस क्षेत्र में बेहतर निगरानी, शुरुआती चेतावनी प्रणाली और सीमा पार आपदा सहयोग की जरूरत को सामने ला दिया है। नेपाल और चीन के बचाव दल अब उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं जिनके जीवित होने की उम्मीद अभी बाकी है। हर गुजरते घंटे के साथ अभियान कठिन होता जा रहा है, लेकिन मलबे से लोगों को जिंदा निकालने की कोशिश जारी है। मौतों का आंकड़ा 600 पार पहुंच चुका है और हजारों लोग लापता हैं। ऐसे में मौजूदा प्राथमिकता स्पष्ट है, जीवित लोगों को बचाना, लापता लोगों की तलाश करना, शवों की पहचान करना और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना। इसके बाद ही नेपाल को तबाह बुनियादी ढांचे और अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण की लंबी चुनौती का सामना करना होगा।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।