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सत्य निकेतन हादसे के बाद DU कुलपति के कार्यक्रम में NSUI का प्रदर्शन, सुरक्षित हॉस्टल की मांग तेज

Wasi Siddiqui • 2026-09-08 15:44:06
सत्य निकेतन हादसे के बाद DU कुलपति के कार्यक्रम में NSUI का प्रदर्शन, सुरक्षित हॉस्टल की मांग तेज

सत्य निकेतन हादसे में 7 मौतों के बाद डीयू में छात्र आवास और सुरक्षा को लेकर विरोध तेज है। एनएसयूआई ने हॉस्टल विस्तार, पीजी जांच और जवाबदेही की मांग उठाई है।

📍 नई दिल्ली
🗓️ 8 सितंबर 2026
✍️ Wasi Siddiqui

सत्य निकेतन हादसे के बाद छात्र राजनीति गरमाई

दिल्ली के सत्य निकेतन में छात्र आवास वाली 5 मंजिला इमारत ढहने से 7 लोगों की मौत के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रों की सुरक्षा और आवास व्यवस्था बड़ा मुद्दा बन गई है। हादसे के बाद एनएसयूआई समेत कई छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय और प्रशासन से जवाबदेही तय करने तथा सुरक्षित और किफायती हॉस्टल उपलब्ध कराने की मांग उठाई है।

एनएसयूआई की गतिविधियों में डीयू के कुलपति योगेश सिंह की जवाबदेही का मुद्दा भी सामने आया है। संगठन ने आरोप लगाया है कि पर्याप्त हॉस्टल नहीं होने की वजह से बड़ी संख्या में विद्यार्थी निजी पीजी और किराये के आवास पर निर्भर हैं।

कुलपति के कार्यक्रम को लेकर विरोध

सत्य निकेतन हादसे के बाद डीयू प्रशासन से जुड़े कार्यक्रमों और कुलपति की भूमिका को लेकर छात्र संगठनों का विरोध सामने आया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, एनएसयूआई ने कुलपति समेत दिल्ली सरकार और नगर निगम से छात्र आवास तथा सुरक्षा व्यवस्था पर जवाब मांगने का अभियान तेज किया है।

हालांकि, कुलपति के किसी विशेष कार्यक्रम में एनएसयूआई के प्रदर्शन की विस्तृत स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी है। इसलिए इस पहलू को लेकर अंतिम रिपोर्टिंग में कार्यक्रम का स्थान, समय और प्रदर्शन में शामिल छात्रों की संख्या जैसी जानकारी आधिकारिक पुष्टि के बाद ही जोड़ी जानी चाहिए।

सुरक्षित हॉस्टल की मांग

एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने डीयू में पर्याप्त हॉस्टल उपलब्ध कराने की मांग उठाई है। संगठन ने निजी पीजी और हॉस्टल की व्यापक जांच, अवैध रूप से संचालित आवासीय परिसरों पर कार्रवाई और छात्र आवास के लिए अलग नीति की मांग की है।

जाखड़ की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में दिल्ली सरकार से समयबद्ध हॉस्टल नीति तैयार करने और डीयू के प्रत्येक कॉलेज में हॉस्टल सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की गई है। मंगलवार को इस याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कराने का अनुरोध किया गया, लेकिन अदालत ने तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया।

हादसे ने पुराने सवाल फिर सामने रखे

सत्य निकेतन की इमारत डीयू के साउथ कैंपस के करीब स्थित थी और छात्र-बहुल इलाके में पीजी के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी। हादसे के बाद निजी छात्र आवासों की संरचनात्मक सुरक्षा, निर्माण नियमों के पालन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं।

दिल्ली सरकार ने मामले में मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस ने भवन मालिक और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। हादसे के बाद नगर निगम के 5 अधिकारियों को निलंबित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

डीयू में हॉस्टल की कमी बड़ा मुद्दा

सत्य निकेतन हादसे ने डीयू में छात्र आवास की कमी को केंद्र में ला दिया है। उपलब्ध रिपोर्टों में बताया गया है कि विश्वविद्यालय की छात्र संख्या के मुकाबले हॉस्टल क्षमता काफी सीमित है। इसी वजह से बड़ी संख्या में विद्यार्थी निजी पीजी और किराये के मकानों में रहने को मजबूर होते हैं।

यह स्थिति केवल किराये की समस्या नहीं है। निजी आवासों की सुरक्षा, अग्निशमन व्यवस्था, संरचनात्मक मजबूती और आपातकालीन निकासी जैसे सवाल भी इससे जुड़े हैं।

छात्र संगठनों में बढ़ी सक्रियता

हादसे के बाद एनएसयूआई के अलावा एबीवीपी, एसएफआई, एआईएसए और अन्य छात्र संगठनों ने भी छात्र आवास और सुरक्षा को लेकर अलग-अलग मांगें रखी हैं। एबीवीपी ने निष्पक्ष जांच और पीजी तथा किराये के आवासों के सुरक्षा ऑडिट की मांग की है। एआईएसए ने भी जवाबदेही तय करने की मांग की है।

इस बीच डीयू छात्रसंघ चुनाव भी नजदीक हैं। विश्वविद्यालय में 2026-27 सत्र के छात्रसंघ चुनाव के लिए मतदान 18 सितंबर को निर्धारित है। ऐसे में छात्र सुरक्षा और हॉस्टल व्यवस्था चुनावी विमर्श का अहम मुद्दा बनती दिख रही है।

हाईकोर्ट में भी उठा हॉस्टल नीति का मुद्दा

एनएसयूआई अध्यक्ष विनोद जाखड़ की जनहित याचिका में डीयू के हॉस्टल ढांचे को व्यापक स्तर पर मजबूत करने की मांग की गई है। याचिका में विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों और विभागों की आवासीय जरूरतों का आकलन करने तथा चरणबद्ध तरीके से हॉस्टल निर्माण या विस्तार की मांग रखी गई है।

याचिका में यह भी सुझाव दिया गया है कि जिन कॉलेजों में जमीन की कमी है, वहां आसपास के कॉलेजों के विद्यार्थियों के लिए साझा या क्लस्टर हॉस्टल विकसित किए जाएं। इससे निजी और असुरक्षित पीजी पर निर्भरता घटाने की कोशिश की जा सकती है।

जवाबदेही के साथ व्यवस्था सुधारने की जरूरत

सत्य निकेतन हादसे की जांच में अंतिम जिम्मेदारी किसकी बनती है, इसका फैसला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा। फिलहाल सामने आए कदमों में पुलिस कार्रवाई, मजिस्ट्रेट जांच और नगर निगम अधिकारियों का निलंबन शामिल है।

छात्र संगठनों का दबाव इस बात पर है कि कार्रवाई केवल एक हादसे तक सीमित न रहे। उनका जोर दिल्ली के छात्र इलाकों में चल रहे पीजी और किराये के आवासों की व्यापक जांच तथा सुरक्षित, सस्ती और संस्थागत छात्र आवास व्यवस्था विकसित करने पर है।

आगे क्या

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में छात्र आवास की सुरक्षा पर प्रशासनिक और राजनीतिक दबाव बढ़ गया है। डीयू प्रशासन, दिल्ली सरकार और नगर निगम के सामने अब दोहरी चुनौती है, हादसे की जिम्मेदारी तय करना और भविष्य में ऐसे हादसों की रोकथाम के लिए प्रभावी व्यवस्था तैयार करना।

छात्रों के लिए सुरक्षित आवास केवल विश्वविद्यालय प्रशासन का मुद्दा नहीं है। इसमें भवन सुरक्षा, नगर नियोजन, अग्नि सुरक्षा, स्थानीय प्रशासन और किराये के आवासों की निगरानी सभी शामिल हैं। सत्य निकेतन की त्रासदी ने इन व्यवस्थाओं के बीच मौजूद खामियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

वीडियो देखें

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Wasi Siddiqui

Wasi Siddiqui

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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