Delhi NCR
दिल्ली में हॉस्टल की इमारत गिरी, कई छात्र मलबे में फंसे; रेस्क्यू जारी
Asif Khan
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2026-09-06 17:55:19
दिल्ली के सत्य निकेतन में हॉस्टल की बहुमंजिला इमारत ढही। आठ लोगों को बचाया गया, तीन गंभीर हैं। मलबे में अन्य लोगों के फंसे होने की आशंका के बीच रेस्क्यू जारी है।
📍New Delhi 🗓️ 6 Septmber 2026✍️ Asif Khan
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक बहुमंजिला इमारत अचानक ढह गई। इमारत में छात्रों के लिए पीजी और हॉस्टल संचालित होने की जानकारी सामने आई है। हादसे के बाद मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई गई और राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया गया। ताजा उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक आठ लोगों को मलबे से निकाला जा चुका है, जबकि तीन की हालत गंभीर बताई गई है।
घटना दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन, मोती बाग इलाके में शिव मंदिर के पास हुई। दिल्ली अग्निशमन सेवा को दोपहर करीब डेढ़ बजे घटना की सूचना मिली। इसके बाद दमकल की कई गाड़ियां, पुलिस और अन्य बचाव दल मौके पर पहुंचे। बाद में एनडीआरएफ समेत कई एजेंसियों को भी राहत अभियान में लगाया गया।
मलबे में छात्रों के फंसे होने की आशंका
सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिण परिसर के नजदीक स्थित छात्र बहुल इलाका है। हादसे वाली इमारत में लड़कों के लिए पीजी चलने की जानकारी विभिन्न रिपोर्टों में सामने आई है।
चश्मदीदों ने दावा किया कि इमारत गिरने के समय अंदर छात्र मौजूद थे और मलबे के भीतर से लोगों की आवाजें सुनाई दे रही थीं। हालांकि, मलबे में कुल कितने लोग फंसे हैं, इसका सटीक आंकड़ा अभी आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं किया गया है।
कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने बड़ी संख्या में छात्रों के दबे होने की आशंका जताई है, लेकिन ऐसी संख्या को आधिकारिक पुष्टि के बिना निश्चित आंकड़े के तौर पर नहीं माना जा सकता। बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ ही स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
आठ लोगों का रेस्क्यू, तीन गंभीर
हादसे के बाद राहत दलों ने मलबा हटाकर लोगों को बाहर निकालना शुरू किया। शाम तक उपलब्ध रिपोर्टों में आठ लोगों को बचाए जाने और तीन की हालत गंभीर होने की जानकारी सामने आई। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है।
हालांकि, घटना में एक व्यक्ति की मौत होने का दावा कुछ शुरुआती सूचनाओं में सामने आया है, लेकिन उपलब्ध ताजा विश्वसनीय रिपोर्टों में इसकी स्वतंत्र और स्पष्ट पुष्टि नहीं मिली है। इसलिए मौत का आंकड़ा फिलहाल निश्चित रूप से प्रकाशित करना उचित नहीं होगा।
बेसमेंट में काम की बात, लेकिन वजह अभी जांच का विषय
हादसे के कारण को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। कुछ चश्मदीदों ने बताया कि इमारत में काम चल रहा था और बेसमेंट से संबंधित निर्माण या खुदाई की गतिविधि भी हो रही थी।
लेकिन यह अभी स्पष्ट नहीं है कि इमारत गिरने की वास्तविक वजह क्या थी। संरचनात्मक कमजोरी, निर्माण कार्य, मौसम या किसी अन्य कारण की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
इसलिए बेसमेंट में खुदाई को हादसे की निश्चित वजह बताना अभी जल्दबाजी होगी। प्रशासन और संबंधित जांच एजेंसियों की रिपोर्ट इस मामले में महत्वपूर्ण होगी।
बारिश के बीच हुआ हादसा
दिल्ली में रविवार को बारिश के बीच यह हादसा सामने आया। कुछ रिपोर्टों में लगातार बारिश को भी घटनाक्रम के संदर्भ में बताया गया है, लेकिन अभी तक किसी आधिकारिक जांच ने बारिश को इमारत गिरने का प्रत्यक्ष कारण घोषित नहीं किया है।
ऐसे में मौसम की स्थिति को केवल घटनास्थल की परिस्थितियों के हिस्से के तौर पर देखा जाना चाहिए, न कि हादसे की प्रमाणित वजह के तौर पर।
प्रशासन ने शुरू किया व्यापक राहत अभियान
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हादसे पर चिंता जताई और बताया कि दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, एनडीआरएफ, दिल्ली अग्निशमन सेवा, दिल्ली पुलिस, नगर निगम, कैट्स और नागरिक सुरक्षा की टीमें बचाव अभियान में लगी हैं।
प्रशासन ने एहतियाती कदम के तौर पर हादसे से सटी इमारत को भी खाली कराया है। सरकार की ओर से कहा गया है कि फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना और प्रभावित परिवारों तक तत्काल मदद पहुंचाना प्राथमिकता है।
पुलिस की कार्रवाई भी शुरू
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस ने पीजी संचालक के खिलाफ मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि इमारत को पहले खाली कराया गया था और बाद में वहां दोबारा पीजी संचालित होने की जानकारी सामने आई है।
यह दावा जांच का हिस्सा है और इसकी अंतिम पुष्टि संबंधित पुलिस एवं प्रशासनिक जांच के बाद ही मानी जाएगी। पुलिस द्वारा जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
हादसे ने फिर उठाए छात्र आवासों की सुरक्षा के सवाल
सत्य निकेतन दिल्ली में छात्रों के बीच लोकप्रिय इलाका है और दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिण परिसर के कई कॉलेज इसके आसपास स्थित हैं। ऐसे इलाकों में बड़ी संख्या में छात्र किराये के कमरों, पीजी और हॉस्टल में रहते हैं।
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल ऐसे छात्र आवासों की संरचनात्मक सुरक्षा, निर्माण नियमों और नियमित निरीक्षण को लेकर है। हालांकि, इस विशेष इमारत में सुरक्षा मानकों का उल्लंघन हुआ था या नहीं, इसका निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही निकाला जा सकता है।
राहत अभियान पर टिकी नजर
फिलहाल बचाव अभियान सबसे अहम है। मलबे में किसी अन्य व्यक्ति के फंसे होने की आशंका के कारण राहत दल सावधानी से मलबा हटा रहे हैं। भारी मशीनरी के साथ प्रशिक्षित बचावकर्मी भी अभियान में जुटे हैं।
प्रशासन की ओर से फंसे लोगों की संख्या और अंतिम हताहत आंकड़ा स्पष्ट होने के बाद ही हादसे की पूरी तस्वीर सामने आएगी।
मंजिलों की संख्या पर अलग-अलग दावे
इस हादसे की शुरुआती रिपोर्टिंग में इमारत की ऊंचाई को लेकर अलग-अलग जानकारी सामने आई है। कुछ रिपोर्टों में इसे तीन मंजिला, कुछ में पांच मंजिला और कुछ में छह मंजिला बताया गया है।
इसलिए आधिकारिक पुष्टि के अभाव में इस खबर में केवल बहुमंजिला इमारत का उल्लेख किया गया है। यह संपादकीय सावधानी इसलिए जरूरी है ताकि शुरुआती और परस्पर विरोधी सूचनाओं को तथ्य के रूप में पेश न किया जाए।
आगे क्या होगा?
बचाव अभियान पूरा होने के बाद पुलिस और संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों की जांच से यह पता चल सकेगा कि इमारत की स्थिति क्या थी, वहां किस तरह का निर्माण या मरम्मत कार्य चल रहा था और हादसे के पीछे कौन से कारक जिम्मेदार थे।
यदि नियमों का उल्लंघन या लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। फिलहाल प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और घायलों का इलाज सुनिश्चित करना है।
सम्पादकीय दृष्टिकोण
सत्य निकेतन का हादसा राजधानी में छात्र आवासों और पुरानी या निर्माणाधीन इमारतों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि हादसे की वजह और अंतिम हताहत संख्या अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन आठ लोगों के रेस्क्यू और तीन के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना स्थिति की गंभीरता बताती है।
फिलहाल राहत और बचाव अभियान जारी है। हादसे की वास्तविक वजह, जिम्मेदारी और सुरक्षा संबंधी खामियों का निर्धारण जांच पूरी होने के बाद ही किया जा सकेगा।
Asif Khan
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।