दिल्ली के करोल बाग के रेगरपुरा में डेमोलिशन के दौरान दो मंजिला इमारत गिरने से एक मजदूर की मौत और तीन घायल हुए। पुलिस के मुताबिक, निजी ठेकेदार इमारत गिरा रहा था। प्रारंभिक जांच में जरूरी अनुमति न होने की बात सामने आई है। मालिकों-ठेकेदार से पूछताछ जारी है।
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नई दिल्ली | 21 अगस्त 2026 | Apurva Choudhary
करोल बाग में डेमोलिशन के दौरान बड़ा हादसा
नई दिल्ली के करोल बाग इलाके में शुक्रवार को डेमोलिशन के दौरान दो मंजिला इमारत का हिस्सा अचानक ढह गया। हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य मजदूर घायल हुए हैं। घटना रेगरपुरा इलाके की प्यारे लाल रोड पर हुई, जहां पुरानी इमारत को गिराने का काम चल रहा था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक घटना सुबह करीब 11:15 बजे की है।
हादसे की सूचना मिलने के बाद दिल्ली पुलिस और दिल्ली फायर सर्विस की टीमें मौके पर पहुंचीं और मलबे में फंसे लोगों की तलाश शुरू की। शुरुआती जानकारी में कुछ घायलों को स्थानीय अस्पताल ले जाने की बात सामने आई थी। बाद की रिपोर्टों में पुलिस के हवाले से मृतकों की संख्या एक और घायलों की संख्या तीन बताई गई है।
कैसे हुआ हादसा?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, रेगरपुरा में एक पुरानी दो मंजिला इमारत को गिराने का काम एक निजी ठेकेदार के जरिए कराया जा रहा था। इसी दौरान इमारत का हिस्सा अचानक नीचे आ गिरा और वहां काम कर रहे मजदूर मलबे के नीचे दब गए।
रिपोर्टों के मुताबिक मौके पर चार मजदूरों के फंसे होने की जानकारी सामने आई। इनमें से शेख शमशाद की मौत हो गई। उनके शव को पोस्टमॉर्टम के लिए लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज अस्पताल की मोर्चरी में भेजे जाने की बात रिपोर्टों में कही गई है।
घायल मजदूरों में मोहम्मद अयूब भी शामिल हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार उन्हें सिर में चोट और दाहिने हाथ में फ्रैक्चर हुआ है। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
डेमोलिशन के लिए अनुमति थी या नहीं?
इस हादसे की जांच में सबसे अहम सवाल इमारत को गिराने की अनुमति से जुड़ा है। प्रारंभिक पुलिस जांच के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों में कहा गया है कि इमारत मालिकों ने एक निजी ठेकेदार को डेमोलिशन का काम सौंपा था और संबंधित एजेंसी से जरूरी अनुमति नहीं ली गई थी।
हालांकि इस स्तर पर इसे अंतिम तौर पर लापरवाही या नियमों के उल्लंघन का निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। अनुमति से जुड़े दस्तावेज, जिम्मेदार पक्ष और डेमोलिशन की प्रक्रिया की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन नियमों का पालन हुआ था और कहां कमी रही।
पुलिस ने इमारत के मालिकों और डेमोलिशन से जुड़े ठेकेदार से पूछताछ शुरू की है। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों पर निर्भर करेगी।
राहत और बचाव अभियान
हादसे के तुरंत बाद पुलिस और फायर सर्विस की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। मलबे की तलाशी लेकर यह सुनिश्चित किया गया कि कोई अन्य व्यक्ति उसमें फंसा न रह गया हो।
दिल्ली फायर सर्विस के अधिकारी ने घटना के संबंध में बताया कि टीम को प्यारे लाल रोड पर हादसे की सूचना मिली थी और मौके पर पहुंचने के बाद पता चला कि डेमोलिशन का काम चल रहा था। शुरुआती चरण में कुछ लोगों को बचाकर अस्पताल भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई थी l
डेमोलिशन के दौरान ढहने वाली संरचना में मलबे का फैलाव और कमजोर हिस्सों का अचानक गिरना राहत कार्य को जोखिम भरा बना सकता है। ऐसे मामलों में बचाव टीमों को पहले संरचना की स्थिरता का आकलन करना पड़ता है, ताकि रेस्क्यू के दौरान दूसरा हादसा न हो।
करोल बाग में निर्माण सुरक्षा का सवाल
करोल बाग मध्य दिल्ली का घना और व्यस्त इलाका है। जिला प्रशासन के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार सेंट्रल दिल्ली जिले के प्रशासनिक ढांचे में करोल बाग एक अलग सब-डिविजन है और इलाके में करोल बाग समेत कई पुलिस स्टेशन आते हैं।
ऐसे घने इलाकों में पुरानी इमारतों की मरम्मत, पुनर्निर्माण और डेमोलिशन के दौरान सुरक्षा इंतजाम महत्वपूर्ण हो जाते हैं। आसपास आबादी और व्यावसायिक गतिविधियां होने के कारण किसी संरचना के अनियंत्रित तरीके से गिरने का जोखिम केवल काम कर रहे मजदूरों तक सीमित नहीं रहता।
दिल्ली फायर सर्विस भी अपनी आधिकारिक जानकारी में बताती है कि भवन गिरने की स्थिति में लोगों के मलबे के नीचे फंसने का जोखिम रहता है और संरचना के कमजोर होने की वजह से बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
क्या सिर्फ इमारत गिरना ही हादसे की वजह थी?
इस सवाल का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल उपलब्ध जानकारी से इतना स्थापित है कि डेमोलिशन का काम चल रहा था और इसी दौरान दो मंजिला इमारत का हिस्सा ढह गया।
यह कहना जल्दबाजी होगी कि केवल अनुमति की कथित कमी ही दुर्घटना की वजह बनी। संरचना की हालत, डेमोलिशन की तकनीक, मजदूरों के लिए सुरक्षा व्यवस्था, काम का तरीका और साइट पर मौजूद अन्य परिस्थितियां भी जांच का हिस्सा हो सकती हैं।
इसी वजह से इस घटना को लेकर किसी व्यक्ति या संस्था पर अंतिम जिम्मेदारी तय करने से पहले आधिकारिक जांच के निष्कर्ष का इंतजार जरूरी है।
डेमोलिशन में सुरक्षा क्यों अहम है?
किसी पुरानी इमारत को गिराने का काम सामान्य निर्माण कार्य से अलग होता है। इसमें पहले से कमजोर संरचना को नियंत्रित तरीके से हटाना पड़ता है और यह सुनिश्चित करना होता है कि भार अचानक किसी ऐसे हिस्से पर न आए, जिससे अनियंत्रित ढहाव हो जाए।
विशेषज्ञ मानकों के मुताबिक ऐसे काम में साइट का आकलन, संरचना की स्थिति, आसपास की इमारतों की सुरक्षा और काम करने वाले लोगों के लिए उपयुक्त सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है। हादसे के बाद यह भी जांच का विषय होगा कि मौके पर सुरक्षा प्रोटोकॉल किस स्तर तक लागू किए गए थे।
यह पहलू खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि घटना में प्रभावित सभी लोग काम कर रहे मजदूर बताए गए हैं। निर्माण और डेमोलिशन साइट पर काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा किसी भी परियोजना की बुनियादी जिम्मेदारी का हिस्सा है।
मालिक और ठेकेदार से पूछताछ क्यों महत्वपूर्ण?
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार इमारत मालिकों ने डेमोलिशन का काम निजी ठेकेदार को सौंपा था। ऐसे में जांच एजेंसियों के लिए यह पता लगाना जरूरी होगा कि काम किस समझौते या व्यवस्था के तहत दिया गया था और साइट पर किसकी निगरानी थी।
इसके साथ यह भी देखा जा सकता है कि क्या संबंधित अनुमति, सुरक्षा मूल्यांकन और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गई थीं। यदि जांच में किसी नियम के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित कानूनों के तहत जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
फिलहाल पूछताछ को जांच की प्रक्रिया के तौर पर देखा जाना चाहिए। केवल पूछताछ या हिरासत के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी मानना उचित नहीं होगा।
क्या यह सिर्फ स्थानीय हादसा है?
प्रत्यक्ष तौर पर यह करोल बाग की एक स्थानीय दुर्घटना है, लेकिन इसके पीछे शहरी सुरक्षा का व्यापक सवाल भी जुड़ा है। दिल्ली के पुराने और घनी आबादी वाले इलाकों में कई इमारतें लगातार मरम्मत, पुनर्निर्माण या बदलाव के दौर से गुजरती हैं।
ऐसे इलाकों में किसी इमारत का डेमोलिशन केवल निजी संपत्ति का मामला नहीं रहता। आसपास पैदल चलने वाले लोगों, पड़ोसी इमारतों, दुकानदारों और मजदूरों की सुरक्षा भी उससे जुड़ जाती है।
इसलिए इस हादसे की जांच का महत्व केवल यह पता लगाने तक सीमित नहीं है कि उस दिन क्या हुआ। इससे यह भी पता चल सकता है कि डेमोलिशन से जुड़े सुरक्षा नियमों की निगरानी और पालन किस स्तर पर हो रहा है।
आगे की जांच पर नजर
करोल बाग हादसे में तत्काल प्राथमिकता घायलों का इलाज और घटनास्थल की सुरक्षा रही। इसके बाद जांच का केंद्र यह पता लगाने पर रहेगा कि इमारत को गिराने का काम किस अनुमति और प्रक्रिया के तहत किया जा रहा था।
मौजूदा जानकारी के आधार पर एक मजदूर की मौत और तीन के घायल होने की पुष्टि करने वाली कई रिपोर्टें सामने आई हैं। वहीं अनुमति नहीं होने की बात अभी प्रारंभिक जांच से जुड़ी सूचना है, इसलिए इसे अंतिम कानूनी निष्कर्ष के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा