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सत्य निकेतन रेस्क्यू साइट पर मोबाइल जैमर का दावा गलत, दिल्ली पुलिस ने दी सफाई

Mohammad Naved 2026-09-09 12:56:03
सत्य निकेतन रेस्क्यू साइट पर मोबाइल जैमर का दावा गलत, दिल्ली पुलिस ने दी सफाई

सत्य निकेतन हादसे के बाद रेस्क्यू साइट पर मोबाइल जैमर लगाए जाने की अफवाह फैली। दिल्ली पुलिस ने दावे को खारिज करते हुए कहा कि नेटवर्क सामान्य थे और रेस्क्यू एजेंसियां मोबाइल के जरिए संपर्क में थीं।

📍 नई दिल्ली
🗓️ 09 सितंबर 2026
✍️ Mohd Naved

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत हादसे के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन को लेकर सोशल मीडिया पर मोबाइल जैमर लगाए जाने का दावा चर्चा में आ गया। इस दावे के बाद दिल्ली पुलिस ने सार्वजनिक तौर पर स्थिति स्पष्ट की और इसे गलत बताया।

पुलिस के मुताबिक रेस्क्यू साइट पर मोबाइल नेटवर्क सामान्य रूप से काम कर रहे थे। पुलिस ने यह भी कहा कि दिल्ली पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और दमकल विभाग की टीमें मोबाइल संचार के जरिए आपस में समन्वय कर रही थीं।

क्या है पूरा मामला

दक्षिण दिल्ली के मोती बाग के पास स्थित सत्य निकेतन कॉलोनी में 6 सितंबर को एक इमारत हादसे का शिकार हुई थी। हादसे के बाद इलाके में राहत और बचाव अभियान चलाया गया। इसके बाद सोशल मीडिया पर यह दावा सामने आया कि रेस्क्यू वाली जगह पर मोबाइल जैमर लगाए गए हैं।

मोबाइल जैमर ऐसी तकनीक है जिसका इस्तेमाल किसी निश्चित क्षेत्र में मोबाइल संचार संकेतों को बाधित करने के लिए किया जाता है। इसी वजह से जैमर से जुड़ा दावा सामने आने के बाद मामला संवेदनशील हो गया, क्योंकि रेस्क्यू ऑपरेशन में संचार व्यवस्था की अहम भूमिका होती है।

दिल्ली पुलिस ने क्या कहा

दिल्ली पुलिस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट में मोबाइल जैमर लगाए जाने की खबरों को गलत बताया। पुलिस के अनुसार सत्य निकेतन रेस्क्यू साइट पर नेटवर्क पूरी तरह सक्रिय थे।

पुलिस ने यह भी कहा कि दिल्ली पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और दमकल विभाग की टीमें मोबाइल नेटवर्क के जरिए समन्वय कर रही थीं। इसके अलावा मीडिया और स्थानीय लोग भी घटनास्थल से लाइव प्रसारण कर रहे थे। पुलिस ने लोगों से अपुष्ट जानकारी फैलाने से बचने और आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की।

दावे और आधिकारिक जवाब में फर्क

इस मामले में सबसे अहम तथ्य यह है कि मोबाइल जैमर लगाए जाने का दावा आधिकारिक तौर पर दिल्ली पुलिस ने स्वीकार नहीं किया है। इसके उलट पुलिस ने इसे पूरी तरह गलत बताया है।

इसलिए जैमर लगाए जाने को स्थापित तथ्य के तौर पर पेश करना उचित नहीं होगा। उपलब्ध आधिकारिक स्पष्टीकरण के आधार पर फिलहाल रिपोर्टिंग का आधार यही है कि पुलिस ने रेस्क्यू साइट पर नेटवर्क सामान्य रहने की बात कही है।

हादसे के बाद प्रशासनिक कार्रवाई

इमारत हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम की तरफ से आसपास की कुछ इमारतों को असुरक्षित और खतरनाक बताया गया। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक हादसे वाली इमारत से सटी कुछ इमारतों को गिराने की कार्रवाई भी शुरू की गई और इसके लिए विशेषज्ञों की निगरानी का उल्लेख किया गया है।

यह पहल रेस्क्यू ऑपरेशन से आगे बढ़कर सुरक्षा और भवनों की स्थिति की जांच के सवाल को सामने लाती है। ऐसे हादसों के बाद आसपास की संरचनाओं की सुरक्षा का आकलन राहत कार्य का अहम हिस्सा बन जाता है।

सोशल मीडिया पर अफवाहों का असर

आपदा या हादसे की स्थिति में संचार व्यवस्था से जुड़ी अपुष्ट खबरें तेजी से फैलती हैं। ऐसी सूचनाएं लोगों में भ्रम पैदा कर सकती हैं और आधिकारिक राहत अभियान के बारे में गलत धारणा बना सकती हैं।

सत्य निकेतन मामले में भी जैमर को लेकर दावा सामने आने के बाद पुलिस को सार्वजनिक फैक्ट चेक जारी करना पड़ा। पुलिस ने लोगों से गलत सूचना प्रसारित नहीं करने की अपील की है।

क्या अभी साबित हुआ है

उपलब्ध जानकारी के आधार पर मोबाइल जैमर लगाए जाने का दावा साबित नहीं हुआ है। दिल्ली पुलिस ने इसका स्पष्ट खंडन किया है।

वहीं, रेस्क्यू साइट पर मोबाइल नेटवर्क के सामान्य रूप से काम करने और बचाव एजेंसियों के मोबाइल के जरिए समन्वय करने की बात पुलिस ने कही है। इसलिए इस मामले में आधिकारिक स्थिति फिलहाल पुलिस के इसी स्पष्टीकरण पर आधारित है।

आगे क्या महत्वपूर्ण होगा

सत्य निकेतन हादसे के संदर्भ में आगे की जांच में इमारत की सुरक्षा, निर्माण संबंधी मानकों और प्रशासनिक कार्रवाई जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण रहेंगे। आसपास की असुरक्षित इमारतों पर कार्रवाई भी इसी व्यापक सुरक्षा समीक्षा का हिस्सा है।

मोबाइल जैमर से जुड़ा विवाद फिलहाल दिल्ली पुलिस के खंडन के बाद शांत होता दिख रहा है। हालांकि किसी भी नए आधिकारिक दस्तावेज, तकनीकी जांच या प्रशासनिक बयान से स्थिति में बदलाव होता है तो उसे अलग से सत्यापित करना जरूरी होगा।

पाठकों के लिए जरूरी बात

सत्य निकेतन रेस्क्यू साइट पर मोबाइल जैमर लगाए जाने की खबर को फिलहाल प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। दिल्ली पुलिस ने इसे गलत बताया है और मोबाइल नेटवर्क के चालू रहने की बात कही है। ऐसे संवेदनशील हादसों में सोशल मीडिया दावों के बजाय आधिकारिक और स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी पर भरोसा करना ज्यादा जिम्मेदार पत्रकारिता और सार्वजनिक सूचना व्यवस्था के लिए जरूरी है।

वीडियो देखें

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Mohammad Naved

Mohammad Naved

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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