अखबार में खाना रखने से सेहत को हो सकता है नुकसान, जानिए वजह
क्या आप भी अखबार में पैक करते हैं खाना? विशेषज्ञ देते हैं चेतावनी
अखबार में भोजन लपेटना क्यों माना जाता है असुरक्षित, जानिए पूरी जानकारी
अखबार में खाना पैक करना वर्षों से चली आ रही एक सामान्य प्रथा है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे सुरक्षित नहीं मानते। अखबार की स्याही और कागज में मौजूद रसायन भोजन में मिल सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका रहती है। सुरक्षित पैकेजिंग का उपयोग करना बेहतर विकल्प माना जाता है।
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📍 Location: भारत
📰 Date: 1 जुलाई 2026
✍️ Neelam Saini
अखबार में खाना पैक करने की आदत क्यों बन सकती है खतरा
भारत के कई घरों, दुकानों और ठेलों पर आज भी खाने-पीने की चीजें अखबार में पैक करके दी जाती हैं। समोसा, पकौड़ी, पराठा, मिठाई या अन्य खाद्य पदार्थों को अखबार में लपेटना एक आम बात है। यह तरीका सस्ता और सुविधाजनक जरूर लगता है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदत सेहत के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। फूड सेफ्टी से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार भोजन का सीधा संपर्क अखबार से नहीं होना चाहिए। इसकी सबसे बड़ी वजह अखबार की छपाई में इस्तेमाल होने वाली स्याही और विभिन्न रासायनिक तत्व हैं, जो भोजन में मिल सकते हैं।
अखबार की स्याही में क्या होता है
अखबार छापने के लिए उपयोग की जाने वाली स्याही केवल रंग नहीं होती। इसमें कई प्रकार के रासायनिक यौगिक मौजूद हो सकते हैं। इनमें रंगद्रव्य, सॉल्वेंट और अन्य औद्योगिक पदार्थ शामिल होते हैं। जब गर्म या तैलीय भोजन अखबार के संपर्क में आता है, तो स्याही के कुछ तत्व भोजन तक पहुंच सकते हैं। कई बार यह प्रक्रिया दिखाई नहीं देती, लेकिन लंबे समय तक ऐसे भोजन का सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्म खाने में रसायनों का स्थानांतरण और तेज हो सकता है। यही कारण है कि गरमा-गरम खाद्य पदार्थों को सीधे अखबार में लपेटना अधिक जोखिमपूर्ण माना जाता है।
फूड सेफ्टी एजेंसियां क्या कहती हैं
फूड सेफ्टी से जुड़े कई संस्थान समय-समय पर इस विषय पर जागरूकता अभियान चलाते रहे हैं। उनका कहना है कि अखबार खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग के लिए नहीं बनाया जाता। अखबार का मुख्य उद्देश्य सूचना पहुंचाना है, भोजन को सुरक्षित रखना नहीं। इसलिए इसे खाद्य संपर्क सामग्री के रूप में इस्तेमाल करना उचित नहीं माना जाता। यही वजह है कि विशेषज्ञ हमेशा फूड-ग्रेड पैकेजिंग सामग्री के उपयोग पर जोर देते हैं।
शरीर पर क्या पड़ सकता है असर
अखबार में पैक भोजन खाने से हर व्यक्ति को तुरंत कोई समस्या हो जाए, ऐसा जरूरी नहीं है। लेकिन लगातार ऐसा भोजन खाने पर जोखिम बढ़ सकता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि दूषित रसायनों का लंबे समय तक सेवन पाचन तंत्र पर असर डाल सकता है। इसके अलावा शरीर में अनावश्यक रासायनिक पदार्थों का प्रवेश भी चिंता का विषय बन सकता है। बच्चे, बुजुर्ग और पहले से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोग ऐसे जोखिमों के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। इसलिए उनके भोजन की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है।
गर्म और तैलीय भोजन में क्यों बढ़ जाता है खतरा
गर्म समोसे, कचौड़ी, पकौड़े या पराठे अक्सर अखबार में लपेटकर दिए जाते हैं। यही वह स्थिति है जिसमें जोखिम बढ़ सकता है। गर्मी और तेल स्याही के कुछ तत्वों को भोजन तक पहुंचाने में मदद कर सकते हैं। यही कारण है कि विशेषज्ञ विशेष रूप से तैलीय और गर्म खाद्य पदार्थों को अखबार से दूर रखने की सलाह देते हैं। यह केवल सड़क किनारे मिलने वाले भोजन तक सीमित नहीं है। कई घरों में भी बचा हुआ खाना अखबार पर रख दिया जाता है, जो उचित नहीं माना जाता।
क्या केवल स्याही ही समस्या है
मामला केवल स्याही तक सीमित नहीं है। अखबार कई चरणों से गुजरकर लोगों तक पहुंचता है। छपाई, परिवहन, भंडारण और वितरण के दौरान यह विभिन्न प्रकार की धूल, गंदगी और सूक्ष्म जीवों के संपर्क में आ सकता है।अखबार को लोग हाथों में लेकर पढ़ते हैं, अलग-अलग जगहों पर रखते हैं और कई बार यह लंबे समय तक खुले वातावरण में पड़ा रहता है। ऐसे में इसकी स्वच्छता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। जब भोजन सीधे ऐसे कागज के संपर्क में आता है, तो दूषित होने की संभावना बढ़ सकती है।
लोग आज भी अखबार का उपयोग क्यों करते हैं
अखबार आसानी से उपलब्ध होता है और इसकी लागत भी बहुत कम होती है। यही कारण है कि कई छोटे विक्रेता इसे पैकिंग सामग्री के रूप में इस्तेमाल करते हैं। दूसरी ओर, कुछ लोगों को इस बात की जानकारी ही नहीं होती कि अखबार में भोजन रखना स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। जागरूकता की कमी भी इस समस्या का एक महत्वपूर्ण कारण है। हालांकि अब धीरे-धीरे लोगों में फूड सेफ्टी को लेकर जागरूकता बढ़ रही है और सुरक्षित पैकेजिंग की मांग भी बढ़ी है।
क्या सभी दावे पूरी तरह साबित हैं
इस विषय पर चर्चा करते समय संतुलित दृष्टिकोण भी जरूरी है। कई लोग वर्षों से अखबार में रखा भोजन खाते आए हैं और उन्हें कोई स्पष्ट समस्या महसूस नहीं हुई। लेकिन सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियां केवल तत्काल नुकसान पर आधारित नहीं होतीं। इनका उद्देश्य संभावित जोखिमों को कम करना भी होता है। इसलिए जब सुरक्षित विकल्प उपलब्ध हों, तो जोखिम वाले तरीकों से बचना बेहतर माना जाता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ और नियामक संस्थाएं सावधानी बरतने की सलाह देती हैं।
भोजन पैक करने के सुरक्षित विकल्प
विशेषज्ञों के अनुसार भोजन को रखने और पैक करने के लिए फूड-ग्रेड पेपर, बटर पेपर, एल्यूमिनियम फॉयल, स्वच्छ स्टील के बर्तन या प्रमाणित फूड कंटेनर बेहतर विकल्प हो सकते हैं। इन सामग्रियों को विशेष रूप से खाद्य पदार्थों के संपर्क के लिए तैयार किया जाता है। इसलिए इनमें भोजन की सुरक्षा अपेक्षाकृत अधिक होती है। घरों में भी बचा हुआ खाना साफ और ढक्कन वाले कंटेनरों में रखना अधिक सुरक्षित माना जाता है।
बदलती आदतें, बेहतर स्वास्थ्य
आज के दौर में फूड सेफ्टी केवल बड़ी कंपनियों या रेस्तरां की जिम्मेदारी नहीं है। यह हर व्यक्ति की व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी है। छोटी-छोटी आदतें लंबे समय में स्वास्थ्य पर बड़ा असर डाल सकती हैं। अखबार में खाना पैक करना भले ही एक पुरानी और सामान्य प्रथा हो, लेकिन आधुनिक स्वास्थ्य मानकों के अनुसार इसे सुरक्षित नहीं माना जाता। यदि हम अपने भोजन को स्वच्छ और सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो बेहतर होगा कि खाद्य पदार्थों को अखबार के बजाय फूड-ग्रेड सामग्री में रखा जाए।
निष्कर्ष
अखबार में खाना पैक करना सुविधा का विकल्प हो सकता है, लेकिन स्वास्थ्य सुरक्षा के लिहाज से यह सही तरीका नहीं माना जाता। अखबार की स्याही, रसायन और स्वच्छता से जुड़े जोखिम भोजन को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए विशेषज्ञों की राय है कि सुरक्षित पैकेजिंग अपनाकर हम अपने और परिवार के स्वास्थ्य की बेहतर रक्षा कर सकते हैं। आखिरकार, स्वस्थ जीवन की शुरुआत सुरक्षित भोजन से ही होती है।