ECB प्रमुख क्रिस्टीन लेगार्ड ने यूरोप को विदेशी AI पर निर्भरता के जोखिम से आगाह किया। उन्होंने यूरोपीय कंप्यूटिंग क्षमता, डेटा सेंटर और अपने AI मॉडल विकसित करने पर जोर दिया।
वियना, ऑस्ट्रिया | 15 सितंबर 2026
By Mohd Haris
यूरोप के सामने AI निर्भरता का संकट
यूरोपीय सेंट्रल बैंक की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड ने यूरोप की AI रणनीति को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यूरोप विदेशी AI तकनीक पर इतना निर्भर हो रहा है कि भविष्य में इस तकनीक तक पहुंच में कटौती या उसकी शर्तों में बदलाव पूरे यूरोपीय अर्थतंत्र को प्रभावित कर सकता है।
वियना में दिए अपने भाषण में लेगार्ड ने कहा कि यूरोप को केवल AI तकनीक आयात करने वाला क्षेत्र नहीं रहना चाहिए। उनके मुताबिक यूरोप को अपनी AI उत्पादन क्षमता, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर क्षमता तेजी से बढ़ानी होगी।
AI तक पहुंच बंद हुई तो असर व्यापक होगा
लेगार्ड ने AI को भविष्य की अर्थव्यवस्था के लगभग हर अहम क्षेत्र से जोड़ा। उन्होंने सीमा नियंत्रण, कर व्यवस्था, रेल परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं और बैंकिंग जैसे क्षेत्रों का उल्लेख किया।
उनका तर्क है कि अगर यूरोप किसी बाहरी AI आपूर्तिकर्ता पर अत्यधिक निर्भर रहता है और उस तकनीक की उपलब्धता अचानक कम हो जाती है, तो इसका असर केवल टेक कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। कई सार्वजनिक और निजी सेवाएं एक साथ प्रभावित हो सकती हैं।
अमेरिका और चीन से पीछे यूरोप
लेगार्ड के मुताबिक AI के क्षेत्र में अमेरिका और चीन फिलहाल यूरोप से काफी आगे हैं। वर्ष 2025 में अमेरिका में 59 प्रमुख AI मॉडल विकसित हुए, जबकि चीन में 35। फ्रांस और ब्रिटेन से एक-एक प्रमुख मॉडल सामने आया।
AI कंप्यूटिंग क्षमता में भी अंतर बड़ा है। लेगार्ड के भाषण के मुताबिक दुनिया की AI कंप्यूटिंग क्षमता का करीब 75% अमेरिका में है, जबकि यूरोप की हिस्सेदारी लगभग 5% है।
यह अंतर केवल तकनीकी प्रतिस्पर्धा का सवाल नहीं है। इसका सीधा संबंध डेटा, पूंजी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक स्वायत्तता से भी है।
डेटा सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा
लेगार्ड ने विदेशी AI पर निर्भरता से जुड़े डेटा सुरक्षा के जोखिम पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि किसी बाहरी AI मॉडल का इस्तेमाल करने का मतलब कई मामलों में अपने कारोबारी डेटा को ऐसी प्रणाली में भेजना है, जो दूसरे देश के कानून और नियंत्रण के दायरे में हो सकती है।
यूरोपीय कंपनियों के लिए यह संवेदनशील मुद्दा है। AI अपनाने में डेटा सुरक्षा को लेकर चिंता पहले से मौजूद है। यूरोस्टैट के सर्वे का हवाला देते हुए लेगार्ड ने कहा कि AI पर विचार करने के बाद उसे नहीं अपनाने वाली कंपनियों में लगभग आधी ने डेटा सुरक्षा को एक कारण बताया।
डेटा सेंटर की कमी
यूरोप के सामने केवल AI मॉडल विकसित करने की चुनौती नहीं है। कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी बड़ी अड़चन है।
लेगार्ड के मुताबिक यूरोप में मौजूदा डेटा सेंटर क्षमता घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त नहीं है। मौजूदा रुझान जारी रहने पर अगले दशक में यह अंतर 6 गुना से अधिक बढ़ सकता है।
इस कमी को दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत होगी। ECB के आकलन के अनुसार अगले दशक में यूरोप की डेटा सेंटर क्षमता की कमी को दूर करने की लागत चिप्स सहित लगभग 600 अरब यूरो तक पहुंच सकती है।
AI में यूरोप के लिए आर्थिक मौका भी
लेगार्ड की चेतावनी केवल खतरे पर आधारित नहीं है। उन्होंने AI को यूरोप की उत्पादकता बढ़ाने का बड़ा अवसर भी बताया।
उनके अनुसार AI को तेजी से अपनाने और सही ढंग से इस्तेमाल करने से एक दशक में उत्पादकता का स्तर 4% तक बढ़ सकता है। इससे सार्वजनिक वित्त और आर्थिक विकास पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
इसलिए यूरोप के सामने मूल सवाल AI अपनाने या न अपनाने का नहीं है। सवाल यह है कि यूरोप AI का इस्तेमाल करते हुए अपनी रणनीतिक स्वायत्तता कैसे बनाए रखे।
यूरोप को अपने AI मॉडल चाहिए
लेगार्ड ने यूरोप के लिए ऐसे AI मॉडल विकसित करने की जरूरत बताई जो अधिकतर सामान्य कामों के लिए पर्याप्त हों और यूरोपीय इंफ्रास्ट्रक्चर पर चल सकें।
उनका कहना है कि अगर यूरोप के पास अपने विकल्प होंगे तो किसी विदेशी आपूर्तिकर्ता द्वारा AI तक पहुंच रोकने या शर्तें बदलने का दबाव कम होगा।
फ्रांस की Mistral जैसी कंपनियों और यूरोप में विकसित ओपन मॉडल को उन्होंने इस दिशा में संभावित आधार के रूप में देखा। हालांकि यूरोप को अभी इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश और विस्तार की जरूरत है।
AI की सप्लाई चेन भी वैश्विक
AI तकनीक में आत्मनिर्भरता हासिल करना आसान नहीं होगा। इसकी वजह AI की वैश्विक सप्लाई चेन है।
लेगार्ड ने बताया कि महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ धातुओं में चीन की बड़ी भूमिका है, उन्नत चिप डिजाइन में अमेरिका महत्वपूर्ण है, चिप निर्माण में ताइवान की भूमिका प्रमुख है और अत्याधुनिक लिथोग्राफी तकनीक में यूरोप की ASML अहम कड़ी है।
इसका अर्थ है कि कोई भी बड़ा क्षेत्र AI की पूरी सप्लाई चेन पर अकेले नियंत्रण नहीं रखता। इसलिए यूरोप के लिए पूरी तरह अलग व्यवस्था खड़ी करने के बजाय अपनी रणनीतिक कड़ियों को मजबूत करना अधिक व्यावहारिक रास्ता हो सकता है।
पूंजी की कमी भी बड़ी चुनौती
AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए केवल तकनीकी विशेषज्ञता पर्याप्त नहीं होगी। बड़े डेटा सेंटर, चिप और मॉडल विकसित करने के लिए भारी पूंजी चाहिए।
लेगार्ड के अनुसार यूरोपीय परिवार हर वर्ष करीब 1.4 ट्रिलियन यूरो की बचत करते हैं। समस्या यह है कि इस पूंजी का पर्याप्त हिस्सा यूरोप की अपनी तकनीकी कंपनियों और रणनीतिक परियोजनाओं तक नहीं पहुंच रहा।
यही वजह है कि ECB प्रमुख यूरोप के पूंजी बाजारों को अधिक एकीकृत करने पर भी जोर देती हैं। उनका मानना है कि AI जैसे बड़े और जोखिम वाले प्रोजेक्ट को वित्तपोषित करने के लिए इक्विटी पूंजी की भूमिका बढ़ानी होगी।
अमेरिका पर आर्थिक निर्भरता का दूसरा पहलू
लेगार्ड ने यूरोप की अमेरिकी टेक कंपनियों में वित्तीय हिस्सेदारी को भी जोखिम से जोड़ा। यूरोपीय पेंशन फंड और निवेशक अमेरिकी टेक कंपनियों में बड़े पैमाने पर निवेश करते हैं।
अगर अमेरिकी AI और टेक कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट आती है, तो उसका असर यूरोपीय बचत और निवेश पर भी पड़ सकता है।
इस तरह AI निर्भरता केवल तकनीक की उपलब्धता का सवाल नहीं है। इसका रिश्ता वित्तीय बाजारों, निवेश और यूरोपीय बचत से भी जुड़ता जा रहा है।
क्या यूरोप आत्मनिर्भर AI बना सकता है?
यूरोप के पास मजबूत विश्वविद्यालय, शोध संस्थान, औद्योगिक आधार और बड़ी उपभोक्ता अर्थव्यवस्था है। लेकिन अमेरिका और चीन की तुलना में AI कंपनियों को बड़े पैमाने पर बढ़ाने और जोखिम पूंजी उपलब्ध कराने में यूरोप पीछे रहा है।
लेगार्ड का जोर इसी अंतर को कम करने पर है। उनका मानना है कि यूरोप को AI को केवल आयात करने के बजाय अपने आर्थिक और औद्योगिक भविष्य के निर्माण की परियोजना के रूप में देखना चाहिए।
आगे की चुनौती
यूरोप के सामने अब तीन समानांतर जरूरतें हैं। पहली, अपनी कंप्यूटिंग और डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाना। दूसरी, यूरोपीय AI मॉडल और कंपनियों को विकसित करना। तीसरी, ऐसी पूंजी व्यवस्था तैयार करना जिससे इन परियोजनाओं को लंबे समय तक वित्तीय समर्थन मिल सके।
इसके साथ यूरोप को अमेरिका, चीन और दूसरे तकनीकी साझेदारों के साथ संबंध भी बनाए रखने होंगे। पूरी तकनीकी आत्मनिर्भरता हासिल करना निकट भविष्य में कठिन है। इसलिए रणनीतिक निर्भरता को कम करना और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विकल्प तैयार करना अधिक व्यावहारिक लक्ष्य है।
निष्कर्ष
क्रिस्टीन लेगार्ड की चेतावनी का मूल संदेश यह है कि AI आने वाले वर्षों में यूरोप की अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं का अहम आधार बन सकता है। ऐसे में विदेशी AI पर अत्यधिक निर्भरता केवल तकनीकी कमजोरी नहीं, बल्कि रणनीतिक और आर्थिक जोखिम भी बन सकती है।
यूरोप के लिए चुनौती अब स्पष्ट है। उसे AI के आर्थिक फायदे हासिल करने हैं, लेकिन साथ ही डेटा, कंप्यूटिंग, मॉडल और पूंजी के मामले में अपनी स्वायत्त क्षमता भी बढ़ानी है। लेगार्ड के मुताबिक AI यूरोप के लिए जोखिम भी है और एक बड़ा आर्थिक अवसर भी। अब फर्क इस बात से पड़ेगा कि यूरोप इस तकनीकी दौड़ में उपभोक्ता बनकर रहता है या अपनी क्षमता विकसित करके सक्रिय निर्माता की भूमिका हासिल करता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।