प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑटो इंडस्ट्री से नई तकनीक, बेहतर गुणवत्ता, ईवी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक बाजार में भारतीय वाहनों की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दिया।
📍 नई दिल्ली
🗓️ 3 सितंबर 2026
✍️ By Wasi Siddiqui
ऑटो सेक्टर को लेकर पीएम मोदी का बड़ा संदेश
भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ते हुए उद्योग की भूमिका को अहम बताया है। 3 सितंबर 2026 को सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स के वार्षिक सम्मेलन 2026 के लिए प्रधानमंत्री का संदेश पढ़कर सुनाया गया। यह संदेश संगठन के अध्यक्ष शैलेश चंद्र ने कार्यक्रम में प्रस्तुत किया।
प्रधानमंत्री के संदेश का केंद्रीय फोकस घरेलू बाजार से आगे बढ़कर वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारतीय ऑटो इंडस्ट्री की स्थिति मजबूत करने पर रहा। उन्होंने उद्योग से नई तकनीक, बेहतर गुणवत्ता और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप रणनीति तैयार करने की अपील की।
2047 के लक्ष्य से ऑटो इंडस्ट्री को जोड़ने की वजह
भारत सरकार के विकसित भारत@2047 विजन में औद्योगिक विकास, तकनीकी क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को अहम माना गया है। ऑटोमोबाइल उद्योग इस दृष्टिकोण में इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका संबंध विनिर्माण, कलपुर्जों, रोजगार, लॉजिस्टिक्स, परिवहन और निर्यात जैसे कई क्षेत्रों से है।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि भारत के विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य में ऑटोमोबाइल सेक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। उनके मुताबिक उद्योग को तकनीकी बदलाव और बाजार के विस्तार के साथ अपनी क्षमता बढ़ानी होगी।
सरकार ने ऑटो सेक्टर के लिए ऑटोमोटिव मिशन प्लान 2047 की प्रक्रिया भी शुरू की है। भारी उद्योग मंत्रालय के अनुसार इसका उद्देश्य भारतीय ऑटोमोटिव उद्योग को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना, नवाचार को बढ़ावा देना और टिकाऊ विकास पर ध्यान केंद्रित करना है।
घरेलू बाजार से ग्लोबल बाजार तक पहुंच
प्रधानमंत्री के संदेश में भारतीय कंपनियों के लिए विदेशी बाजारों में विस्तार को महत्वपूर्ण अवसर के रूप में पेश किया गया। उन्होंने हाल के मुक्त व्यापार समझौतों का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे भारतीय कंपनियों को दूसरे देशों के बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।
ऑटो सेक्टर के लिए इसका सीधा मतलब निर्यात क्षमता बढ़ाने से जुड़ा है। भारतीय कंपनियां अगर वैश्विक बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहती हैं तो उन्हें कीमत के साथ गुणवत्ता, सुरक्षा, तकनीक और उत्पाद की विश्वसनीयता पर भी लगातार काम करना होगा।
भारत में बने वाहनों को दूसरे देशों में प्रतिस्पर्धा करनी होती है। ऐसे में केवल उत्पादन की मात्रा बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। वैश्विक ग्राहकों की जरूरत, अलग-अलग बाजारों के नियामक मानक और नई ऊर्जा आधारित वाहनों की मांग उद्योग के सामने अहम मुद्दे बने रहेंगे।
आर्थिक विकास के साथ बढ़ेगी मोबिलिटी की जरूरत
प्रधानमंत्री ने भारत की आर्थिक वृद्धि और मोबिलिटी की बढ़ती जरूरत के बीच संबंध की ओर भी ध्यान दिलाया। जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ता है और लोगों की आय में इजाफा होता है, व्यक्तिगत परिवहन और माल ढुलाई की जरूरत भी बढ़ती है।
देश में हाईवे और सड़क संपर्क के विस्तार से यात्री और माल परिवहन की क्षमता में सुधार हुआ है। बेहतर कनेक्टिविटी लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में भी मदद करती है।
ऑटो सेक्टर के लिए इसका अर्थ केवल कार और दोपहिया वाहनों की बिक्री तक सीमित नहीं है। कमर्शियल वाहन, माल ढुलाई, सार्वजनिक परिवहन और उससे जुड़े कलपुर्जों का बाजार भी आर्थिक गतिविधियों के विस्तार से प्रभावित होता है।
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर बढ़ता जोर
ऑटो इंडस्ट्री में सबसे बड़ा बदलाव इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को लेकर हो रहा है। प्रधानमंत्री ने इलेक्ट्रिक वाहनों और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार को भी महत्वपूर्ण बताया।
इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ बैटरी तकनीक, चार्जिंग नेटवर्क, ऊर्जा उपलब्धता और वाहन निर्माण की नई प्रक्रियाओं पर ध्यान बढ़ना स्वाभाविक है। इससे पारंपरिक ऑटोमोबाइल निर्माण के साथ नई तकनीकी क्षमताओं की मांग भी बढ़ती है।
भारत के लिए चुनौती यह है कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विस्तार को मजबूत विनिर्माण आधार से जोड़ा जाए। वाहन निर्माण के साथ बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और दूसरे महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स की सप्लाई चेन मजबूत करना भी अहम रहेगा।
सरकार का ऑटोमोटिव मिशन प्लान 2047
ऑटो सेक्टर के लिए दीर्घकालिक नीति दिशा तय करने की कोशिश के तहत भारी उद्योग मंत्रालय ने जुलाई 2025 में ऑटोमोटिव मिशन प्लान 2047 की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य 2047 तक भारत को वैश्विक ऑटोमोटिव नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाना है।
सरकारी जानकारी के मुताबिक इस पहल में उद्योग संगठनों, वाहन निर्माताओं, ऑटो कंपोनेंट क्षेत्र, नीति विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और परीक्षण एजेंसियों को शामिल किया गया है। योजना के लिए 7 उप-समितियां बनाई गई हैं, जिनके जरिए 2030, 2037 और 2047 के लिए लक्ष्य और रणनीति पर काम किया जा रहा है।
इस पहल से संकेत मिलता है कि ऑटो सेक्टर को केवल एक उपभोक्ता उद्योग के रूप में नहीं देखा जा रहा। इसे विनिर्माण क्षमता, निर्यात, तकनीकी आत्मनिर्भरता और टिकाऊ परिवहन के बड़े ढांचे से जोड़ने की कोशिश है।
तकनीक और गुणवत्ता पर दबाव
प्रधानमंत्री के संदेश में नई तकनीक और बेहतर गुणवत्ता को प्राथमिकता देने की बात महत्वपूर्ण है। वैश्विक ऑटो बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार तकनीकी क्षमता पर निर्भर हो रही है।
वाहनों में सुरक्षा तकनीक, कनेक्टेड फीचर्स, ऊर्जा दक्षता, इलेक्ट्रिक ड्राइवट्रेन और डिजिटल सिस्टम की भूमिका बढ़ रही है। भारतीय कंपनियों के सामने चुनौती होगी कि वे इन बदलावों के साथ अपनी रिसर्च और डेवलपमेंट क्षमता को मजबूत करें।
गुणवत्ता का मुद्दा भी उतना ही अहम है। निर्यात बाजारों में वाहन सुरक्षा, उत्सर्जन और तकनीकी मानकों से जुड़े सख्त नियम होते हैं। भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में लंबे समय तक टिके रहने के लिए इन मानकों के अनुरूप लगातार सुधार करना होगा।
ऑटो कंपोनेंट उद्योग की अहम भूमिका
भारत का ऑटो उद्योग केवल वाहन निर्माता कंपनियों तक सीमित नहीं है। इसके पीछे बड़ा ऑटो कंपोनेंट नेटवर्क काम करता है। इंजन और ट्रांसमिशन से लेकर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और दूसरे पुर्जों तक व्यापक सप्लाई चेन इसमें शामिल है।
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के बढ़ने से इस सप्लाई चेन की प्रकृति भी बदल रही है। कुछ पारंपरिक कंपोनेंट्स की मांग घटने के साथ बैटरी, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर और सॉफ्टवेयर आधारित तकनीक की अहमियत बढ़ रही है।
इस बदलाव में भारतीय कंपोनेंट निर्माताओं के लिए नए अवसर हैं, लेकिन इसके साथ तकनीकी निवेश और वैश्विक गुणवत्ता मानकों को पूरा करने की चुनौती भी जुड़ी है।
रोजगार और औद्योगिक असर
ऑटो सेक्टर का प्रभाव वाहन बिक्री से आगे जाता है। विनिर्माण इकाइयों, डीलर नेटवर्क, सर्विस सेंटर, परिवहन, बीमा, वित्त और कंपोनेंट सप्लाई जैसे कई क्षेत्रों पर इसका असर पड़ता है।
यदि भारतीय ऑटो उद्योग निर्यात और उत्पादन दोनों में विस्तार करता है तो इससे औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों पर असर पड़ सकता है। हालांकि रोजगार में वास्तविक बढ़ोतरी कितनी होगी, यह भविष्य के निवेश, उत्पादन क्षमता और तकनीकी बदलाव की गति पर निर्भर करेगा।
चुनौतियां भी कम नहीं
ऑटो सेक्टर के सामने कई चुनौतियां हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए पर्याप्त चार्जिंग नेटवर्क, नई तकनीक में निवेश, बैटरी की लागत, सप्लाई चेन की मजबूती और वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा प्रमुख मुद्दे हैं।
इसके अलावा अलग-अलग देशों के व्यापार नियम और तकनीकी मानक भी निर्यात रणनीति को प्रभावित करते हैं। मुक्त व्यापार समझौतों से बाजार पहुंच में सुविधा मिल सकती है, लेकिन इसका फायदा उठाने के लिए भारतीय कंपनियों को प्रतिस्पर्धी उत्पाद और मजबूत निर्यात ढांचा तैयार करना होगा।
वैश्विक बाजार में बढ़त के लिए क्या जरूरी होगा
भारतीय ऑटो उद्योग के सामने आने वाला अगला चरण मात्रा से ज्यादा गुणवत्ता और तकनीक पर केंद्रित दिखाई देता है। कंपनियों को रिसर्च, डिजाइन, सॉफ्टवेयर, इलेक्ट्रिक ड्राइवट्रेन और उन्नत विनिर्माण क्षमता में निवेश बढ़ाना होगा।
इसके साथ भारतीय कंपनियों को अपने ब्रांड और उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता मजबूत करनी होगी। केवल घरेलू मांग पर निर्भर रहने के बजाय निर्यात बाजारों में लंबे समय की रणनीति जरूरी होगी।
सरकार और उद्योग की साझेदारी भी अहम रहेगी। नीति, इंफ्रास्ट्रक्चर, परीक्षण सुविधाओं, तकनीकी मानकों और निवेश के माहौल से जुड़े फैसले ऑटो सेक्टर की दिशा प्रभावित करेंगे।
आगे क्या होगा
ऑटोमोटिव मिशन प्लान 2047 की प्रक्रिया के तहत 2030, 2037 और 2047 के लिए दीर्घकालिक दिशा तय करने पर काम हो रहा है। सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक इसमें तकनीकी बदलाव और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी चुनौतियों पर भी विचार किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री का ताजा संदेश इसी व्यापक नीति दिशा के साथ जुड़ा दिखाई देता है। संदेश का मुख्य फोकस भारतीय ऑटो सेक्टर को नई तकनीक, बेहतर गुणवत्ता, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और वैश्विक बाजार से जोड़ने पर है।
निष्कर्ष
2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य एक लंबी आर्थिक और औद्योगिक प्रक्रिया है। ऑटो सेक्टर इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, लेकिन इसके लिए उत्पादन बढ़ाने के साथ तकनीकी क्षमता, गुणवत्ता, निर्यात और टिकाऊ मोबिलिटी पर लगातार काम करना होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एसआईएएम सम्मेलन के लिए संदेश उद्योग के सामने इन्हीं प्राथमिकताओं को रखता है। अब वास्तविक कसौटी यह होगी कि नीति और उद्योग के स्तर पर इन लक्ष्यों को कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है। ऑटो इंडस्ट्री की अगली छलांग केवल वाहनों की संख्या से नहीं, बल्कि भारतीय तकनीक, गुणवत्ता और वैश्विक बाजार में उसकी विश्वसनीय मौजूदगी से तय होगी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।