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SCO Summit में PM मोदी का आतंकवाद पर कड़ा संदेश, बोले—डबल स्टैंडर्ड की कोई जगह नहीं

Apurva Choudhary 2026-09-01 22:24:10
SCO Summit में PM मोदी का आतंकवाद पर कड़ा संदेश, बोले—डबल स्टैंडर्ड की कोई जगह नहीं

SYNOPSIS


Location: बिश्केक, किर्गिस्तान

Date: 1 सितंबर 2026

Byline: Apurva Choudhary 


किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित 26वें Shanghai Cooperation Organisation (SCO) Summit में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट और एकसमान अंतरराष्ट्रीय रुख अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर किसी भी तरह के double standards की जगह नहीं होनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने आतंकियों की फंडिंग, भर्ती, radicalisation और safe havens समेत पूरे terror ecosystem को खत्म करने पर जोर दिया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदगी में दिया गया यह संदेश भारत के लंबे समय से चले आ रहे counter-terrorism stand के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


बिश्केक में आतंकवाद पर PM मोदी का सख्त संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को बिश्केक में 26वें SCO Summit को संबोधित करते हुए आतंकवाद के खिलाफ एकजुट कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि आतंकवाद मानवता के सामने गंभीर चुनौती है और इससे निपटने के लिए केवल किसी एक घटना के बाद प्रतिक्रिया देना पर्याप्त नहीं होगा। इसके पीछे काम करने वाले पूरे network को खत्म करना जरूरी है।

प्रधानमंत्री के मुताबिक terror financing, recruitment, radicalisation और terrorists को safe haven देने वाली व्यवस्था पर प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने SCO देशों से इस मुद्दे पर एक आवाज में स्पष्ट रुख अपनाने की अपील करते हुए कहा कि आतंकवाद जैसे गंभीर मामले पर double standards की कोई जगह नहीं हो सकती।


आतंकवाद के पूरे ecosystem पर कार्रवाई की बात

PM मोदी के संबोधन का प्रमुख हिस्सा आतंकवाद के उस व्यापक ढांचे पर केंद्रित रहा, जो किसी आतंकी संगठन को लंबे समय तक सक्रिय रहने में मदद करता है।

इसमें केवल हथियार या आतंकी हमले शामिल नहीं हैं, बल्कि funding channels, recruitment networks, radicalisation और safe havens भी अहम हैं।

भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह रुख रखता आया है कि आतंकवाद को किसी राजनीतिक या रणनीतिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

SCO जैसे क्षेत्रीय संगठन के मंच से इस बात को दोहराना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके सदस्य देशों को खुद भी आतंकवाद, कट्टरपंथ और सीमा-पार सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।


पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की मौजूदगी में संदेश

प्रधानमंत्री मोदी के इस संबोधन के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी SCO Summit में मौजूद थे।

हालांकि मोदी ने अपने संबोधन में किसी देश का नाम लेकर आरोप नहीं लगाया, लेकिन आतंकवाद को policy के instrument के तौर पर इस्तेमाल करने वाले देशों और आतंकियों को support या safe haven देने वालों के खिलाफ कड़ा संदेश दिया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद किसी भी देश के लिए strategic asset नहीं बन सकता।

इसका महत्व भारत के लिए इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि नई दिल्ली लंबे समय से सीमा-पार आतंकवाद और उसके समर्थन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समान और निर्णायक कार्रवाई की मांग करता रहा है।


सिर्फ सुरक्षा नहीं, बातचीत और कूटनीति पर भी जोर

प्रधानमंत्री का संदेश केवल counter-terrorism तक सीमित नहीं रहा।

उन्होंने दुनिया में चल रहे conflicts और crises के समाधान के लिए dialogue और diplomacy को प्राथमिकता देने की बात कही।

भारत का रुख रहा है कि लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों का स्थायी समाधान military escalation से नहीं बल्कि बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों से तलाशना चाहिए।

SCO के मंच से यह संदेश ऐसे समय आया है जब West Asia समेत दुनिया के कई हिस्सों में regional tensions और armed conflicts जारी हैं।

प्रधानमंत्री ने संकेत दिया कि किसी एक क्षेत्र का conflict अब केवल उसी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। उसका असर energy security, maritime trade और global supply chains तक पहुंच सकता है।


SCO के लिए भारत के तीन प्रमुख आधार

PM मोदी ने SCO के अगले phase के लिए भारत की प्राथमिकताओं को तीन प्रमुख आधारों से जोड़ा—Security, Connectivity और Opportunity।

Security का मतलब क्षेत्रीय शांति और आतंकवाद, separatism तथा extremism जैसी चुनौतियों के खिलाफ सहयोग मजबूत करना है।

Connectivity के संदर्भ में भारत ने ऐसी परियोजनाओं पर जोर दिया जो देशों की sovereignty और territorial integrity का सम्मान करें।

वहीं Opportunity के तहत व्यापार, निवेश, technology, लोगों के बीच संपर्क और economic cooperation को आगे बढ़ाने की जरूरत बताई गई।

भारत का जोर है कि SCO की गतिविधियां केवल घोषणाओं तक सीमित न रहें बल्कि उनका practical और measurable outcome भी दिखाई दे।


Connectivity पर भारत का अहम रुख

SCO के संदर्भ में connectivity लंबे समय से एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है।

भारत का कहना है कि क्षेत्रीय connectivity projects से व्यापार और विकास को बढ़ावा मिलना चाहिए, लेकिन ऐसे सभी प्रयासों में संबंधित देशों की sovereignty और territorial integrity का सम्मान जरूरी है।

यह रुख भारत की उस broader foreign policy approach से जुड़ा है जिसमें infrastructure और connectivity को economic development का माध्यम माना जाता है, लेकिन उन्हें strategic pressure या sovereignty concerns से अलग नहीं देखा जाता।


Afghanistan को भी बताया क्षेत्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा

प्रधानमंत्री मोदी ने Afghanistan की स्थिति को Eurasian security से जोड़ते हुए कहा कि शांतिपूर्ण और सुरक्षित Eurasia की साझा आकांक्षा Afghanistan की stability से भी जुड़ी है।

उन्होंने Afghanistan के लोगों के लिए भारत की humanitarian assistance और development support का उल्लेख किया।

भारत के लिए Afghanistan इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वहां की instability का असर terrorism, extremism, drug trafficking और regional security पर पड़ सकता है।

SCO के कई सदस्य देश Afghanistan के पड़ोसी या उसके आसपास के strategic क्षेत्र में स्थित हैं। इसलिए संगठन के security agenda में Afghanistan की स्थिति का महत्व लगातार बना हुआ है।


West Asia संकट का भी उल्लेख

प्रधानमंत्री ने West Asia में जारी संकट को global security और economic stability से जोड़ते हुए कहा कि एक क्षेत्र में होने वाला conflict दूसरे क्षेत्रों को भी प्रभावित कर सकता है।

इसके असर energy supplies, maritime routes और supply chains पर पड़ सकते हैं।

भारत के लिए यह मुद्दा विशेष महत्व रखता है क्योंकि देश की energy security और international trade दोनों Middle East की स्थिरता से प्रभावित होते हैं।

इसलिए भारत का जोर केवल conflict management पर नहीं बल्कि broader regional stability और सुरक्षित व्यापारिक मार्गों पर भी है।


SCO के मंच से भारत का broader message

PM मोदी का पूरा संबोधन तीन interconnected priorities के आसपास दिखाई दिया—security, economic connectivity और development opportunities।

आतंकवाद के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्टता की मांग की, जबकि conflicts के लिए dialogue और diplomacy को रास्ता बताया।

Connectivity को लेकर sovereignty और territorial integrity की शर्त रखी गई और economic cooperation को practical outcomes से जोड़ने की बात सामने आई।

इससे भारत की SCO policy का broader framework भी स्पष्ट होता है कि संगठन को केवल security grouping के तौर पर नहीं बल्कि regional economic और developmental cooperation के मंच के रूप में भी आगे बढ़ाया जाए।


भारत के लिए यह संदेश क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत के लिए SCO एक महत्वपूर्ण Eurasian multilateral platform है।

इस संगठन में China, Russia, Iran, Pakistan और Central Asian countries समेत कई प्रमुख regional powers शामिल हैं।

ऐसे मंच पर आतंकवाद के खिलाफ भारत का संदेश केवल bilateral concern नहीं रह जाता, बल्कि उसे broader regional security agenda से जोड़ने का अवसर मिलता है।

विशेष रूप से आतंकवाद की financing, recruitment और safe havens जैसे मुद्दों को एक साथ उठाने से भारत यह संकेत देता है कि केवल आतंकी हमले के बाद कार्रवाई करने के बजाय उसके पूरे support structure को target करना जरूरी है।


क्या SCO एकजुट रुख अपना पाएगा?

यह आगे का सबसे अहम सवाल है।

SCO के सदस्य देशों के strategic interests कई मामलों में अलग-अलग हैं। आतंकवाद और regional security को लेकर भी सभी देशों की प्राथमिकताएं एक जैसी नहीं हैं।

ऐसे में किसी साझा framework पर सहमति बनाना आसान नहीं होगा।

फिर भी भारत के लिए SCO का महत्व इस बात में है कि यहां regional security challenges पर सीधे संवाद का एक institutional platform मौजूद है।

यदि सदस्य देश terror financing, radicalisation और extremist networks के खिलाफ practical cooperation बढ़ाते हैं, तो इसका प्रभाव केवल घोषणात्मक नहीं बल्कि operational भी हो सकता है।


आगे की दिशा क्या होगी?

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि SCO के स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ cooperation किस तरह आगे बढ़ता है।

खास तौर पर intelligence sharing, terror financing पर निगरानी, radicalisation रोकने की कोशिशों और cross-border networks के खिलाफ coordination अहम रहेंगे।

इसी के साथ connectivity projects, regional trade और supply chains से जुड़े भारत के प्रस्ताव भी SCO के broader agenda को प्रभावित कर सकते हैं।

भारत के लिए चुनौती यह होगी कि वह अपनी security concerns को मजबूती से रखते हुए economic cooperation और diplomatic engagement के लिए भी space बनाए रखे।


आतंकवाद पर एकसमान रुख की मांग

बिश्केक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का SCO संबोधन भारत के counter-terrorism stand का स्पष्ट विस्तार रहा।

उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ selective approach को खारिज करते हुए terror financing, recruitment, radicalisation और safe havens समेत पूरे ecosystem को खत्म करने की जरूरत बताई।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की मौजूदगी में दिया गया यह संदेश राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है, हालांकि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में किसी देश का नाम लेकर सीधा आरोप नहीं लगाया।

इसके साथ ही dialogue और diplomacy, regional connectivity और economic opportunities पर जोर देकर भारत ने SCO के लिए अपना broader vision भी सामने रखा।

अब अहम सवाल यह होगा कि SCO के सदस्य देश आतंकवाद के खिलाफ इस collective approach को कितनी गंभीरता से practical cooperation में बदल पाते हैं। फिलहाल भारत का संदेश स्पष्ट है—आतंकवाद के खिलाफ अलग-अलग मानदंड नहीं, बल्कि एकसमान और निर्णायक अंतरराष्ट्रीय रुख जरूरी है।

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Apurva Choudhary

Apurva Choudhary

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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