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प्रधानमंत्री मोदी ने बिश्केक में महात्मा गांधी को दी श्रद्धांजलि

Mohammad Naved • 2026-08-31 12:37:53
प्रधानमंत्री मोदी ने बिश्केक में महात्मा गांधी को दी श्रद्धांजलि

📍 स्थान: बिश्केक, किर्गिस्तान

🗓️ दिनांक: 31 अगस्त 2026

✍️ रिपोर्ट:Mohd Naved


प्रधानमंत्री मोदी ने बिश्केक में महात्मा गांधी को दी श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री इन दिनों किर्गिस्तान की यात्रा पर हैं, जहां वे 26वें शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं।

मोदी किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर झापारोव के निमंत्रण पर बिश्केक पहुंचे हैं। उनका यह दौरा 31 अगस्त से 1 सितंबर तक आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन और संगठन के सदस्य देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय संवाद के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

बिश्केक में गांधी प्रतिमा पर पुष्पांजलि

प्रधानमंत्री मोदी ने बिश्केक स्थित महात्मा गांधी मेमोरियल पार्क में गांधी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। यह कार्यक्रम उनके किर्गिस्तान दौरे के पहले दिन आयोजित हुआ। इससे पहले उन्होंने बिश्केक में भारत से जुड़े विभिन्न समूहों के प्रतिनिधियों और ‘फ्रेंड्स ऑफ इंडिया’ से भी संवाद किया।

किर्गिस्तान पहुंचने पर प्रधानमंत्री का आधिकारिक स्वागत भी किया गया। किर्गिस्तान के मंत्रिमंडल के अध्यक्ष आदिलबेक कासिमालियेव ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर पारंपरिक किर्गिज सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया।

महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने का कार्यक्रम प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं में भारतीय सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से जुड़े स्थलों के प्रति उनके सार्वजनिक कार्यक्रमों का हिस्सा रहा है। मौजूदा दौरे में भी गांधी स्मृति से जुड़ा यह कार्यक्रम भारत और मध्य एशिया के बीच लोगों के स्तर पर संपर्क को रेखांकित करता है।

एससीओ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे मोदी

प्रधानमंत्री मोदी 26वें एससीओ शिखर सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। यह सम्मेलन 31 अगस्त और 1 सितंबर को बिश्केक में आयोजित किया जा रहा है। भारत 2017 से एससीओ का पूर्ण सदस्य है। इस वर्ष संगठन अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर रहा है।

प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, मोदी सम्मेलन में भारत की प्राथमिकताओं को सामने रखेंगे। इनमें सुरक्षा, संपर्क और अवसर को प्रमुख आधार के रूप में रेखांकित किया गया है। प्रधानमंत्री ने अपनी यात्रा से पहले जारी बयान में एससीओ देशों के साथ मिलकर आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से मुक्त क्षेत्र की दिशा में काम करने की बात कही थी।

एससीओ का गठन 2001 में हुआ था। संगठन में भारत के अलावा चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, पाकिस्तान, ईरान और बेलारूस शामिल हैं। भारत और पाकिस्तान 2017 में पूर्ण सदस्य बने थे, जबकि ईरान 2023 और बेलारूस 2024 में संगठन के पूर्ण सदस्य बने।

सदस्य देशों के नेताओं से द्विपक्षीय मुलाकातें

किर्गिस्तान में प्रधानमंत्री मोदी का कार्यक्रम केवल एससीओ के बहुपक्षीय सम्मेलन तक सीमित नहीं है। वे सम्मेलन से इतर संगठन के सदस्य देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कर रहे हैं। सरकारी प्रसारक आकाशवाणी के अनुसार, उनके कार्यक्रम में रूस, ईरान और किर्गिस्तान समेत कई देशों के नेताओं के साथ मुलाकातें शामिल हैं।

ऐसी बैठकों में भारत के लिए क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, संपर्क और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े विषयों पर बातचीत का अवसर मिलता है। हालांकि, किसी बैठक में किन विशिष्ट मुद्दों पर अंतिम रूप से चर्चा हुई, इसकी जानकारी संबंधित आधिकारिक बयानों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

प्रधानमंत्री ने अपने दौरे से पहले कहा था कि वे किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर झापारोव और अन्य एससीओ नेताओं से मिलने को लेकर उत्सुक हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि यात्रा का उद्देश्य मध्य एशिया के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत करना और क्षेत्र के साथ सभ्यतागत संबंधों को आगे बढ़ाना है।

मध्य एशिया पर भारत का बढ़ता फोकस

प्रधानमंत्री मोदी की किर्गिस्तान यात्रा उनके व्यापक मध्य एशिया दौरे का हिस्सा है। इससे पहले वे 29 और 30 अगस्त को उज्बेकिस्तान की यात्रा पर थे। इसके बाद वे बिश्केक पहुंचे। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, डिजिटल संपर्क, ऊर्जा, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई।

किर्गिस्तान में एससीओ सम्मेलन भारत को मध्य एशिया और व्यापक यूरेशियाई क्षेत्र के देशों के साथ बहुपक्षीय संवाद का अवसर देता है। भारत के लिए एससीओ सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग के अलावा मध्य एशिया के साथ अपने संपर्क को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण मंच है।

भारत लंबे समय से मध्य एशिया के देशों के साथ राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर देता रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री की मौजूदा यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों और बहुपक्षीय कूटनीति, दोनों दृष्टिकोणों से देखा जा रहा है।

विश्व नोमाड खेलों के उद्घाटन में भी शामिल होंगे

प्रधानमंत्री मोदी अपने किर्गिस्तान दौरे के दौरान 6वें विश्व नोमाड खेलों के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इसे मध्य एशिया की समृद्ध जीवंत सांस्कृतिक विरासत के उत्सव के रूप में रेखांकित किया है।

इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री की भागीदारी भारत और मध्य एशिया के बीच केवल राजनीतिक और आर्थिक रिश्तों के बजाय सांस्कृतिक एवं जन-स्तरीय संपर्क को भी महत्व देने का संकेत देती है।

आगे क्या होगा?

प्रधानमंत्री मोदी 1 सितंबर को एससीओ शिखर सम्मेलन को संबोधित करेंगे। सम्मेलन में सदस्य देशों के नेता क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के साथ-साथ संगठन के सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर विचार-विमर्श करेंगे।

भारत की ओर से सुरक्षा, संपर्क और अवसर को प्राथमिकता दिए जाने की बात पहले ही स्पष्ट की जा चुकी है। प्रधानमंत्री का संबोधन और सम्मेलन के दौरान होने वाली द्विपक्षीय बैठकें यह संकेत देंगी कि भारत मध्य एशिया और एससीओ के साथ अपने संबंधों को किस दिशा में आगे बढ़ाना चाहता है।

फिलहाल प्रधानमंत्री की किर्गिस्तान यात्रा का पहला दिन महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि, भारतीय समुदाय और मित्र समूहों के साथ संवाद तथा एससीओ नेताओं के साथ द्विपक्षीय संपर्क पर केंद्रित रहा है। आने वाले चरण में शिखर सम्मेलन में भारत की प्राथमिकताओं और सदस्य देशों के साथ होने वाली बातचीत पर विशेष नजर रहेगी।

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Mohammad Naved

Mohammad Naved

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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