मंगलवार, 01 September 2026
GOLD ₹0 ▼ 0%
SENSEX 0 ▼ 0%
BITCOIN $0 ▼ 0%
38°C मुजफ्फरनगर
EDITION:
BREAKING
#ShahTimes #Muzaffarnagar #Bijnor #Moradabad #BreakingNews #Politics #Education #Crime #Sports #Business
Book Your Ads With Shah Times
World

एससीओ में मोदी का कड़ा संदेश, आतंकवाद पर दोहरे मानदंड मंजूर नहीं

Mohammad Naved 2026-09-01 12:43:10
एससीओ में मोदी का कड़ा संदेश, आतंकवाद पर दोहरे मानदंड मंजूर नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिश्केक एससीओ शिखर सम्मेलन में आतंकवाद पर दोहरे मानदंड खत्म करने की अपील की। उन्होंने फंडिंग, भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित ठिकानों समेत पूरे आतंक तंत्र के खिलाफ एकजुट कार्रवाई पर जोर दिया।

📍 बिश्केक, किर्गिस्तान

🗓️ 1 सितंबर 2026

✍️ Mohd Naved


एससीओ में आतंकवाद पर मोदी का कड़ा संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन के 26वें शिखर सम्मेलन में आतंकवाद के खिलाफ भारत का स्पष्ट रुख दोहराया। उन्होंने सदस्य देशों से आतंकवाद के मुद्दे पर एकजुट होकर कार्रवाई करने और किसी भी तरह के दोहरे मानदंड से बचने की अपील की।

मोदी का यह बयान ऐसे वक्त आया जब शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत एससीओ के प्रमुख नेता मौजूद थे। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में पाकिस्तान का नाम लेकर कोई आरोप नहीं लगाया, बल्कि आतंकवाद को व्यापक क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा चुनौती के रूप में पेश किया।


आतंक के पूरे तंत्र को खत्म करने की अपील

प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को केवल हमलावरों तक सीमित रखने के बजाय उसके पूरे तंत्र को खत्म करने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक आतंकवाद की फंडिंग, आतंकियों की भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित ठिकाने, सभी पर एक साथ कार्रवाई जरूरी है।

उन्होंने एससीओ देशों से इस मुद्दे पर एक आवाज में बोलने की अपील की। प्रधानमंत्री के मुताबिक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मानदंड की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जो देश आतंकवाद को अपनी नीति के औजार के रूप में इस्तेमाल करते हैं या आतंकियों को पनाह और समर्थन देते हैं, उन्हें स्पष्ट संदेश दिया जाना चाहिए कि आतंकवाद किसी के लिए रणनीतिक संपत्ति नहीं बन सकता।


पाकिस्तान का नाम नहीं, लेकिन संदेश अहम

इस संबोधन की एक अहम बात यह रही कि प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान का नाम लेकर कोई सीधा बयान नहीं दिया। हालांकि उनका आतंकवाद पर दोहरे मानदंड और आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने के खिलाफ रुख भारत की लंबे समय से चली आ रही विदेश नीति के अनुरूप है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ उसी सम्मेलन में मौजूद थे। ऐसे में मोदी के बयान का कूटनीतिक महत्व बढ़ जाता है, लेकिन इसे सीधे तौर पर पाकिस्तान पर दिया गया आरोप बताना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा। भारत लगातार सीमा पार आतंकवाद और आतंकवाद को समर्थन देने वाले नेटवर्क के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कार्रवाई की मांग करता रहा है।


एससीओ के मंच पर सुरक्षा भारत की प्राथमिकता

भारत ने एससीओ के साथ अपने जुड़ाव के लिए सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर को प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में रखा है। प्रधानमंत्री की मौजूदा मध्य एशिया यात्रा से पहले जारी आधिकारिक बयान में भी कहा गया था कि भारत ऐसे क्षेत्र की दिशा में काम करना चाहता है जो आतंकवाद, अलगाववाद और चरमपंथ से मुक्त हो।

भारत 2017 से एससीओ का पूर्ण सदस्य है। 2026 का बिश्केक शिखर सम्मेलन संगठन की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित हो रहा है। सम्मेलन 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चल रहा है।


कूटनीति और संवाद पर भी जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख के साथ संघर्षों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति की जरूरत पर भी जोर दिया। एससीओ मंच पर उनका संदेश केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहा। भारत ने क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक सहयोग और संपर्क व्यवस्था को भी महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं के रूप में सामने रखा है।

यह रुख भारत की व्यापक विदेश नीति से मेल खाता है, जिसमें अलग-अलग शक्ति केंद्रों के साथ संवाद बनाए रखने पर जोर दिया जाता है। बिश्केक में मोदी की गतिविधियों में इसका संकेत भी दिखाई दिया।


पुतिन से अहम मुलाकात

एससीओ सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, आवागमन और लोगों के बीच संपर्क समेत कई क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की।

बैठक में पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र के संघर्षों पर भी चर्चा हुई। आधिकारिक बयान के अनुसार, इन संघर्षों का समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर असर पड़ा है। प्रधानमंत्री ने संघर्षों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को आगे बढ़ाने की बात दोहराई।

शी जिनपिंग के साथ मौजूदगी

बिश्केक सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री मोदी दोनों मौजूद रहे। दोनों नेताओं के बीच औपचारिक द्विपक्षीय बैठक की पुष्टि उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में नहीं हुई है। हालांकि सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात और अभिवादन के दृश्य सामने आए।

भारत और चीन के संबंधों में सीमा विवाद और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे अब भी अहम हैं। ऐसे में एक ही बहुपक्षीय मंच पर मोदी और शी की मौजूदगी क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण है।


एससीओ के लिए आतंकवाद क्यों अहम मुद्दा है

एससीओ में मध्य एशिया और यूरेशिया के कई प्रमुख देश शामिल हैं। संगठन की सुरक्षा व्यवस्था में आतंकवाद, अलगाववाद और चरमपंथ से मुकाबला लंबे समय से प्रमुख विषय रहा है।

भारत का तर्क है कि आतंकवाद से निपटने के लिए केवल सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इसके वित्तीय स्रोत, भर्ती नेटवर्क, कट्टरपंथी प्रचार और सुरक्षित ठिकानों पर भी कार्रवाई जरूरी है। इसी वजह से प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को खत्म करने की बात कही।

यह दृष्टिकोण भारत के पिछले कई एससीओ संबोधनों में भी दिखाई देता रहा है। भारत ने पहले भी आतंकवाद पर दोहरे मानदंड के खिलाफ आवाज उठाई है और एससीओ के क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी ढांचे के प्रभावी इस्तेमाल पर जोर दिया है।


क्षेत्रीय सुरक्षा से आगे आर्थिक एजेंडा

एससीओ का एजेंडा केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है। संगठन के सदस्य देश व्यापार, ऊर्जा, परिवहन, डिजिटल सहयोग और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को भी आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

भारत के लिए मध्य एशिया के साथ संपर्क व्यवस्था रणनीतिक महत्व रखती है। बेहतर कनेक्टिविटी से व्यापार और ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा देने की संभावना है। हालांकि सुरक्षा संबंधी तनाव और सदस्य देशों के बीच रणनीतिक मतभेद ऐसे प्रयासों की रफ्तार को प्रभावित कर सकते हैं।

बिश्केक सम्मेलन में भारत की प्राथमिकता इसलिए दो स्तरों पर दिखाई देती है। एक तरफ आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा पर सख्त रुख है। दूसरी तरफ व्यापार, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग के लिए बहुपक्षीय संवाद को आगे बढ़ाने की कोशिश है।


भारत की कूटनीतिक चुनौती

एससीओ में भारत के सामने एक जटिल कूटनीतिक समीकरण है। एक ही मंच पर चीन, रूस और पाकिस्तान जैसे देश मौजूद हैं। इन देशों के साथ भारत के रिश्तों की प्रकृति अलग-अलग है।

रूस के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी पुरानी और व्यापक है। चीन के साथ सीमा और व्यापार से जुड़े मतभेद हैं, जबकि पाकिस्तान के साथ आतंकवाद और सुरक्षा के मुद्दे लंबे समय से रिश्तों पर असर डालते रहे हैं।

ऐसे माहौल में भारत के लिए एससीओ को केवल राजनीतिक टकराव का मंच बनाने के बजाय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग के लिए इस्तेमाल करना महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री का मौजूदा संदेश इसी संतुलन की ओर संकेत करता है।


अब आगे क्या

बिश्केक शिखर सम्मेलन से भारत की प्राथमिकताओं में आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई, क्षेत्रीय स्थिरता, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग प्रमुख रहेंगे। सम्मेलन के दौरान विभिन्न देशों के नेताओं के बीच द्विपक्षीय बातचीत भी जारी है।

भारत के लिए असली चुनौती बयान से आगे बढ़कर ठोस अंतरराष्ट्रीय सहयोग हासिल करने की है। आतंकवाद की फंडिंग, भर्ती नेटवर्क और सुरक्षित ठिकानों पर साझा कार्रवाई तभी प्रभावी होगी जब सदस्य देश राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर समान मानदंड अपनाएं।


निष्कर्ष

बिश्केक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश स्पष्ट था। आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में चयनात्मक रवैया नहीं होना चाहिए। उन्होंने आतंक के पूरे नेटवर्क को खत्म करने और एससीओ देशों से एकजुट रुख अपनाने की अपील की।

महत्वपूर्ण यह भी है कि प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान का नाम लेकर कोई सीधा आरोप नहीं लगाया। इसलिए इस बयान को भारत की व्यापक आतंकवाद विरोधी कूटनीति के संदर्भ में देखना अधिक सटीक होगा।

एससीओ के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर बिश्केक सम्मेलन भारत के लिए अपनी सुरक्षा प्राथमिकताओं को रखने के साथ-साथ चीन, रूस, मध्य एशिया और अन्य सदस्य देशों के साथ संवाद आगे बढ़ाने का अहम मंच बना हुआ है। आने वाले समय में इस सम्मेलन की असली अहमियत इस बात से तय होगी कि आतंकवाद विरोधी सहयोग और क्षेत्रीय आर्थिक संपर्क पर कितनी ठोस प्रगति होती है।

वीडियो देखें

ADVERTISEMENT
Mohammad Naved

Mohammad Naved

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

BREAKING NEWS

संबंधित खबरें

SCO Summit में पुतिन-शी जिनपिंग की मुलाकात, दुनिया की नजरें बिश्केक पर

2026-08-31 12:09:49

सिंधु जल संधि पर भारत का बड़ा रुख, हेग कोर्ट का फैसला ठुकराया; कहा- अधिकार नहीं

2026-09-01 07:21:19

प्रधानमंत्री मोदी ने बिश्केक में महात्मा गांधी को दी श्रद्धांजलि

2026-08-31 12:37:53

ईरान के चाबहार पोर्ट पर अमेरिकी हमला, भारत की रणनीतिक चिंता बढ़ी

2026-07-17 08:51:30

PM मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा से रिश्तों को नई रणनीतिक मजबूती, यूरेनियम सप्लाई पर अहम समझौता

2026-08-30 19:55:41

पीएम मोदी उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान के 4 दिवसीय दौरे पर रवाना, SCO समिट पर नजर

2026-08-29 11:48:18

सिंधु जल संधि पर भारत अडिग, पाकिस्तान की बयानबाज़ी से रुख नहीं बदलेगा

2026-07-02 06:32:14

PM मोदी ने पुतिन से कहा—‘अंतहीन युद्ध नहीं, अब युद्ध का अंत जरूरी’

2026-08-31 22:07:20

TRENDING

ताज़ा ख़बरें
BREAKING NEWS
ADVERTISEMENT

Your Ad Here
TRENDING
आज का ई-पेपर
मुजफ्फरनगर (12 पेज)
बिजनौर (10 पेज)
सहारनपुर (11 पेज)
मुरादाबाद (14 पेज)
Home Video Epaper Reel Menu
Chat With Us
SHAH TIMES
ख़बरें छुपाता नहीं, छापता है
🏠 होम ⚡ ब्रेकिंग न्यूज़ 📰 ताज़ा खबरें 🇮🇳 देश 🌍 दुनिया 🏛 राजनीति 🚔 क्राइम 📈 बिजनेस 🏏 स्पोर्ट्स 🎓 शिक्षा ❤️ स्वास्थ्य 📰 ई-पेपर