आज़म ख़ान को ईडी गाज़ियाबाद की अदालत लेकर पहुंची है। एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 14 दिन की कस्टडी मांगी है। रिमांड अर्जी पर सुनवाई और अदालत के आदेश का इंतज़ार है।
गाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश
1 नवंबर 2026
By वसी सिद्दीकी
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आज़म ख़ान के खिलाफ़ प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई अब अदालत तक पहुंच गई है। रविवार, 1 नवंबर 2026 को सामने आए ताज़ा इनपुट के मुताबिक, ईडी आज़म ख़ान को गाज़ियाबाद की मनी लॉन्ड्रिंग मामलों से संबंधित अदालत लेकर पहुंची है।
एजेंसी ने अदालत से आज़म ख़ान की 14 दिन की कस्टडी मांगी है। इस अर्जी पर अदालत का रुख़ क्या होगा, इसे लेकर राजनीतिक और कानूनी हलकों में दिलचस्पी बनी हुई है।
हालांकि, उपलब्ध इनपुट में अदालत की तरफ़ से रिमांड मंज़ूर किए जाने या अर्जी खारिज होने की पुष्टि नहीं है।
ईडी की तरफ़ से 14 दिन की कस्टडी मांगने की जानकारी सामने आई है, लेकिन एजेंसी ने अपनी रिमांड अर्जी में किन विशेष आधारों और साक्ष्यों का हवाला दिया है, इसका पूरा विवरण अभी उपलब्ध नहीं है।
आमतौर पर मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में जांच एजेंसी पूछताछ, वित्तीय लेनदेन की पड़ताल और उपलब्ध दस्तावेज़ों के संबंध में स्पष्टीकरण हासिल करने के लिए अदालत से हिरासत मांगती है।
हालांकि, ये सामान्य कानूनी प्रक्रियाएं हैं। इन्हें आज़म ख़ान के मामले में ईडी के वास्तविक तर्कों के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता।
इससे पहले सामने आई जानकारी के मुताबिक, आज़म ख़ान को 31 अक्टूबर को रामपुर जेल से रिहाई के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी हिरासत में लिया था।
उनकी रिहाई इलाहाबाद हाईकोर्ट से 2 पैन कार्ड से जुड़े मामले में मिली राहत के बाद हुई थी। हालांकि, मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित जांच अलग कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है।
अब गाज़ियाबाद की अदालत में कस्टडी की मांग इस मामले की अगली अहम कार्रवाई है।
नहीं। ईडी की तरफ़ से 14 दिन की कस्टडी मांगने का मतलब यह नहीं है कि अदालत ने एजेंसी की मांग स्वीकार कर ली है।
अदालत जांच एजेंसी की दलीलों, उपलब्ध रिकॉर्ड और बचाव पक्ष के तर्कों पर विचार करेगी। इसके बाद कानून के मुताबिक आदेश पारित किया जाएगा।
अदालत पूरी मांगी गई अवधि, उससे कम अवधि की हिरासत या अर्जी पर कोई अन्य उचित आदेश दे सकती है।
मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम यानी पीएमएलए के तहत जांच एजेंसी को गिरफ्तारी और हिरासत के संबंध में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होता है।
आज़म ख़ान के मामले में अदालत का आदेश अगला महत्वपूर्ण घटनाक्रम होगा। अगर एजेंसी को कस्टडी मिलती है, तो पूछताछ की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। यदि अदालत कस्टडी की मांग स्वीकार नहीं करती, तो आगे की न्यायिक प्रक्रिया उसके आदेश के अनुसार चलेगी।
आज़म ख़ान उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में उनकी गिनती होती है।
ऐसे में उनकी गिरफ्तारी और रिमांड से जुड़ी अदालती कार्रवाई का राजनीतिक महत्व भी है। हालांकि, कानूनी तौर पर किसी नेता की राजनीतिक हैसियत, आरोपों के प्रमाण का विकल्प नहीं होती।
फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि अदालत ईडी की 14 दिन की कस्टडी मांग पर क्या फैसला सुनाती है।
आज़म ख़ान के खिलाफ़ आरोपों का अंतिम न्यायिक निर्धारण होना बाकी है। जांच या गिरफ्तारी अपने आप में अपराध सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।