ब्रिटेन में ई-बाइक और ई-स्कूटर की लिथियम-आयन बैटरियों से जुड़ी आग ने सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। नए आंकड़ों के मुताबिक 2019 से 2025 के बीच इन वाहनों या उनकी बैटरियों से जुड़ी 2,000 से ज्यादा आग की घटनाएं दर्ज हुईं। इन हादसों में 18 लोगों की मौत हुई और करीब 700 लोग घायल हुए।
ब्रिटेन | 28 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
बीबीसी वेरिफाई ने ब्रिटेन की 49 फायर एंड रेस्क्यू सर्विस से सूचना के अधिकार के तहत आंकड़े मांगे थे। इनमें से 41 सेवाओं ने तुलनीय आंकड़े उपलब्ध कराए। विश्लेषण में आगजनी के स्पष्ट मामलों और मोबिलिटी स्कूटर से जुड़ी घटनाओं को अलग रखा गया।
आंकड़ों में सबसे चिंताजनक रुझान आग की घटनाओं में लगातार वृद्धि है। 2019 में ई-बाइक और ई-स्कूटर से जुड़ी बैटरी आग की 32 घटनाएं दर्ज हुई थीं। 2025 में यह संख्या बढ़कर 605 हो गई। इन घटनाओं का बड़ा हिस्सा घरों और गैरेज में हुआ। ऐसे स्थानों पर आग लगने से लोगों के बाहर निकलने के रास्ते कुछ ही मिनटों में बंद हो सकते हैं। लंदन में 2019 से 2025 के दौरान सबसे ज्यादा 793 घटनाएं दर्ज हुईं। इसके बाद मैनचेस्टर में 128, वेस्ट यॉर्कशायर में 93 और मर्सीसाइड में 74 घटनाएं दर्ज हुईं।
ई-बाइक और ई-स्कूटर में आम तौर पर लिथियम-आयन बैटरी का इस्तेमाल होता है। इन बैटरियों में कम जगह में बड़ी मात्रा में ऊर्जा संग्रहित होती है।
समस्या तब पैदा होती है जब बैटरी खराब, क्षतिग्रस्त या जरूरत से ज्यादा चार्ज हो जाए। असंगत चार्जर या अनधिकृत बदलाव भी जोखिम बढ़ा सकते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक के शोधकर्ता डॉ. साइमन जोन्स ने बीबीसी वेरिफाई को बताया कि खराब या क्षतिग्रस्त बैटरी में जमा ऊर्जा तेजी से बाहर निकल सकती है। इससे आग की लपटें और जलते हुए हिस्से फैल सकते हैं। 2026 में प्रकाशित एक प्रयोगात्मक अध्ययन ने भी ई-स्कूटर बैटरियों में थर्मल रनअवे के दौरान गैस निकलने, आग लगने और जलते कणों के फैलने का जोखिम दर्ज किया। शोध में जहरीले धुएं के गंभीर खतरे की भी पहचान की गई।
ई-बाइक या ई-स्कूटर की बैटरी में आग लगने पर लोगों के पास प्रतिक्रिया के लिए बहुत कम समय रह सकता है। अगर वाहन घर के प्रवेश द्वार, सीढ़ियों या गलियारे में रखा है, तो आग सीधे बाहर निकलने के रास्ते को रोक सकती है। धुआं भी तेजी से कमरे में फैल सकता है। लंदन फायर ब्रिगेड ने मई 2026 में एक घटना के बाद बताया था कि ई-बाइक की लिथियम बैटरी में खराबी से आग लगी थी। दमकलकर्मियों ने 5 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, जबकि 4 अन्य लोग उनके पहुंचने से पहले बाहर निकल चुके थे। ब्रिगेड ने लोगों को ई-बाइक और ई-स्कूटर को दरवाजे या मुख्य निकासी मार्ग के पास रखने से बचने की सलाह दी।
ब्रिटेन की फायर सर्विस के मुताबिक कई घटनाओं में सेकंड-हैंड ई-बाइक, ऑनलाइन खरीदे गए पुर्जों से बदले गए वाहन या conversion kits शामिल रहे हैं। यही वजह है कि विशेषज्ञ केवल बैटरी की तकनीक को जिम्मेदार नहीं मान रहे हैं। उत्पाद की गुणवत्ता, चार्जर की संगतता, बैटरी में बदलाव और इस्तेमाल का तरीका भी अहम कारक हैं। बीबीसी वेरिफाई के आंकड़ों के मुताबिक 2020 के बाद ब्रिटेन की सड़कों पर हर साल औसतन करीब 153,000 नई ई-बाइक जुड़ी हैं। ऐसे में इन वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ सुरक्षा संबंधी घटनाओं पर निगरानी भी जरूरी हो गई है।
ब्रिटेन सरकार ने माना है कि असुरक्षित ई-बाइक और ई-स्कूटर बैटरियां गंभीर आग का खतरा पैदा कर सकती हैं। सरकार का कहना है कि ऑनलाइन मार्केटप्लेस की जिम्मेदारी मजबूत करने, असुरक्षित उत्पादों की पहचान कर उन्हें बिक्री से हटाने और उपभोक्ताओं को सुरक्षित खरीदारी के बारे में जानकारी देने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। सरकारी अभियान में उपभोक्ताओं से सुरक्षा मानकों का पालन करने वाले उत्पाद खरीदने और सही चार्जर इस्तेमाल करने की अपील की गई है।
ब्रिटेन के ये आंकड़े सीधे भारत पर लागू नहीं किए जा सकते। भारत में ई-बाइक और ई-स्कूटर से जुड़ी बैटरी आग की निगरानी का डेटा अलग तरीके से दर्ज होता है। केंद्र सरकार ने फरवरी 2026 में संसद से जुड़े आधिकारिक सूचना तंत्र के जरिए बताया था कि देश में केवल बैटरी-फायर घटनाओं का अलग केंद्रीय डेटाबेस उपलब्ध नहीं है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के ई-डीएआर आंकड़ों के अनुसार, 14 नवंबर 2022 से इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अलग फील्ड दर्ज की जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों में पिछले 3 वर्षों के दौरान इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़े 23,865 सड़क हादसे दर्ज हुए, जिनमें 26 मामलों में वाहन में आग की सूचना थी। इसलिए ब्रिटेन के 18 मौतों और करीब 700 घायलों के आंकड़ों को भारत की स्थिति का प्रतिनिधि आंकड़ा मानना सही नहीं होगा।
ई-बाइक या ई-स्कूटर खरीदते समय केवल कीमत पर फैसला लेना जोखिम बढ़ा सकता है। आपको बैटरी और चार्जर की अनुकूलता जांचनी चाहिए। क्षतिग्रस्त बैटरी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अनधिकृत परिवर्तनया संशोधित बैटरी पैक से बचना जरूरी है। चार्जिंग के दौरान वाहन को निकासी मार्ग, दरवाजे या ऐसे स्थान पर नहीं रखना चाहिए जहां आग लगने पर घर से बाहर निकलना मुश्किल हो। लंदन फायर ब्रिगेड भी इसी तरह की सावधानियों पर जोर देती है।
ई-मोबिलिटी का विस्तार हो रहा है, लेकिन उसके साथ बैटरी सुरक्षा का सवाल भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है। समस्या केवल तकनीक की मौजूदगी नहीं है। खराब उत्पाद, नकली या अनुपयुक्त चार्जर, क्षतिग्रस्त बैटरी और अनधिकृत modifications आग का जोखिम बढ़ा सकते हैं।
ब्रिटेन में सामने आए आंकड़े इसी चुनौती की गंभीरता बताते हैं। 2019 में 32 से बढ़कर 2025 में 605 बैटरी-आग की घटनाएं दर्ज होना नियमन और उपभोक्ता जागरूकता दोनों के लिए बड़ा संकेत है।
आने वाले समय में ई-बाइक और ई-स्कूटर की संख्या बढ़ने के साथबैटरी प्रमाणीकरण, चार्जिंग अवसंरचना, उत्पाद ट्रेसबिलिटी और अग्नि-सुरक्षा मानक पर ज्यादा सख्ती की जरूरत होगी। फिलहाल सबसे अहम सबक यही है कि ई-बाइक या ई-स्कूटर की बैटरी को सामान्य घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उपकरण समझना जोखिमपूर्ण हो सकता है। सही उत्पाद, सही चार्जर और सुरक्षित charging व्यवस्था आग के खतरे को कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।