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दूसरी बाढ़ का खतरा, चीन ने नेपाल-तिब्बत सीमा पर बचाव अभियान रोका

Shah Times 2026-08-28 11:50:32
दूसरी बाढ़ का खतरा, चीन ने नेपाल-तिब्बत सीमा पर बचाव अभियान रोका

नेपाल-तिब्बत सीमा पर 26 अगस्त की विनाशकारी बाढ़ के बाद अब दूसरी बड़ी बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। चीन ने शुक्रवार को तिब्बत के ग्यिरोंग इलाके में चल रहे बचाव अभियान को अस्थायी रूप से रोक दिया। चीनी सरकारी प्रसारक सीसीटीवी के मुताबिक, बाढ़ और भूस्खलन के बाद मलबे से बनी एक अवरोधक झील का पानी बढ़कर उस दिशा में बहने लगा है, जहां बचाव दल पहुंचने की कोशिश कर रहे थे।


नेपाल-तिब्बत सीमा|28 अगस्त 2026|शाह टाइम्स

By Mohd Haris


चीनी अधिकारियों ने बचाव टीमों को सुरक्षित स्थान पर रुकने और अगले निर्देश का इंतजार करने को कहा है। जो आपात दल पहले ही जोखिम वाले इलाके में पहुंच चुके थे, उन्हें करीब 1 किलोमीटर पीछे हटने का निर्देश दिया गया है।

अवरोधक झील बनी नई चुनौती

26 अगस्त को नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में ग्लेशियर और चट्टानों के ढहने के बाद भारी मात्रा में पानी, बर्फ, कीचड़ और मलबा नदी तंत्र में पहुंचा। इसी प्रक्रिया में नदी के ऊपरी हिस्से में मलबे ने पानी का रास्ता रोक दिया और एक प्राकृतिक अवरोधक झील बन गई। अब इसी झील को लेकर सबसे बड़ा खतरा पैदा हुआ है। चीन के जल संसाधन अधिकारियों के मुताबिक, झील में पहले से करीब 2.5 मिलियन घन मीटर पानी जमा था और अगले कुछ दिनों में लगभग 3 मिलियन घन मीटर अतिरिक्त पानी पहुंचने का अनुमान है। पानी का यह दबाव अगर मलबे से बने प्राकृतिक बांध को कमजोर करता है, तो अचानक पानी नीचे की ओर निकल सकता है। इससे ग्यिरोंग और नदी के निचले इलाकों में दूसरी विनाशकारी बाढ़ का खतरा पैदा होगा।

1 सितंबर के आसपास बढ़ सकता है खतरा

चीनी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में बारिश और ऊपरी हिस्से से पानी आने के कारण झील का जलस्तर बढ़ सकता है। अनुमान के मुताबिक पानी का प्रवाह करीब 1 सितंबर के आसपास चरम पर पहुंच सकता है। इस वजह से चीन के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता अब केवल लापता लोगों की तलाश नहीं, बल्कि बचावकर्मियों को दूसरी आपदा से सुरक्षित रखना भी है। चीन ने झील की स्थिति समझने के लिए 8 सदस्यीय इंजीनियरिंग टीम भेजी है। टीम हवाई सर्वेक्षण और 3डी मॉडलिंग के जरिये झील तथा उसके आसपास बने मलबे के बांध का जायजा ले रही है।

बचाव अभियान क्यों रोकना पड़ा

बचाव दलों के लिए सबसे बड़ा जोखिम यह है कि अगर प्राकृतिक बांध अचानक टूटता है, तो पानी के साथ भारी मलबा और चट्टानें भी नीचे की ओर तेजी से आ सकती हैं। ऐसी स्थिति में नदी घाटी में मौजूद बचावकर्मियों के पास सुरक्षित जगह तक पहुंचने का समय बेहद कम रह सकता है। इसलिए चीनी प्रशासन ने फिलहाल जोखिम वाले क्षेत्र से टीमों को हटाकर सुरक्षित स्थान पर स्टैंडबाय में रखने का फैसला किया है। चीन के सरकारी प्रसारक के अनुसार, झील के आसपास की भौगोलिक स्थिति भी चुनौतीपूर्ण है। कई हिस्सों में खड़ी चट्टानें और अस्थिर ढलान हैं। बारिश से मिट्टी और चट्टानों के और कमजोर होने की आशंका बनी हुई है।

झील का पानी घटाने की तैयारी

चीनी इंजीनियर प्राकृतिक बांध को नियंत्रित तरीके से खोलने की संभावना पर काम कर रहे हैं। इसके तहत निचले हिस्से में जल निकासी चैनल बनाने का विकल्प देखा जा रहा है। लेकिन यह काम जोखिम भरा है। चैनल की चौड़ाई और गहराई इस आधार पर तय करनी होगी कि झील कितनी तेजी से भर रही है और पानी किस रफ्तार से बाहर निकलेगा। गलत आकलन से पानी का बहाव अचानक तेज हो सकता है। इसीलिए फिलहाल निगरानी, हवाई सर्वेक्षण और जलस्तर के आकलन को प्राथमिकता दी जा रही है।

नेपाल में भी जारी है अलर्ट

दूसरी बाढ़ का खतरा केवल तिब्बत तक सीमित नहीं है। नेपाल के अधिकारियों ने भी नदी किनारे रहने वाले लोगों, यात्रियों और बचावकर्मियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। भोटे कोशी नदी तिब्बत से नेपाल में प्रवेश करती है। इसलिए तिब्बत में ऊपरी हिस्से में होने वाला अचानक जलप्रवाह नेपाल के निचले इलाकों को प्रभावित कर सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने नदी किनारे के संवेदनशील इलाकों से दूर रहने की चेतावनी दी है। यह स्थिति सीमा पार आपदा प्रबंधन की गंभीर चुनौती को भी सामने लाती है। एक तरफ चीन को तिब्बत में बढ़ते जलस्तर और प्राकृतिक बांध की निगरानी करनी है, वहीं नेपाल को नीचे की ओर संभावित अचानक बाढ़ के लिए तैयार रहना है।

पहली बाढ़ ने छोड़ी भारी तबाही

26 अगस्त की बाढ़ ने नेपाल और तिब्बत में बड़े पैमाने पर नुकसान किया। नेपाल पुलिस के अनुसार शुक्रवार तक नेपाल में मृतकों की संख्या 469 पहुंच गई थी। दोनों देशों में 1,500 से अधिक लोगों के लापता होने की रिपोर्ट सामने आई है। चीन के ग्यिरोंग इलाके में भी बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। सड़क, संचार और बिजली व्यवस्था को नुकसान पहुंचा है। चीन ने शुरुआती राहत और बचाव के लिए बड़े पैमाने पर संसाधन तैनात किए हैं।

अब दूसरी बाढ़ का खतरा राहत अभियान को और जटिल बना रहा है।

वैज्ञानिकों की नजर में क्यों गंभीर है स्थिति

हिमालयी इलाकों में ग्लेशियर टूटने, भूस्खलन और ग्लेशियल झीलों से अचानक बाढ़ आने का खतरा पहले से मौजूद है। मौजूदा घटना में भी वैज्ञानिकों ने ग्लेशियर और उसके नीचे की चट्टानी संरचना के ढहने को संभावित शुरुआती ट्रिगर बताया है। लेकिन मौजूदा दूसरी बाढ़ का खतरा अलग प्रक्रिया से जुड़ा है। पहली आपदा के बाद नदी में जमा मलबे ने पानी का रास्ता बाधित किया है। इससे बनी झील अब खुद एक संभावित खतरा बन गई है।

यानी एक प्राकृतिक आपदा ने दूसरी संभावित आपदा के लिए परिस्थितियां तैयार कर दी हैं।

आगे क्या होगा

फिलहाल चीन झील के जलस्तर, प्राकृतिक बांध की स्थिरता और बारिश के प्रभाव पर लगातार नजर रख रहा है। इंजीनियरिंग टीम के सर्वे के आधार पर जल निकासी चैनल बनाने जैसे उपायों पर फैसला लिया जा सकता है। बचाव अभियान पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। उसे जोखिम वाले क्षेत्र से हटाकर सुरक्षित दूरी से संचालित किया जा रहा है। स्थिति स्थिर होने पर खोज और बचाव दल फिर से आगे बढ़ सकते हैं। नेपाल और चीन दोनों के लिए अगले कुछ दिन बेहद अहम हैं। पहली बाढ़ के बाद बनी अवरोधक झील यदि नियंत्रित तरीके से खाली होती है, तो नुकसान सीमित रखने की संभावना रहेगी। लेकिन प्राकृतिक बांध अचानक टूटता है, तो निचले इलाकों में दूसरी तेज बाढ़ का खतरा बढ़ जाएगा। फिलहाल सबसे जरूरी संदेश यही है कि नदी घाटियों और संवेदनशील इलाकों में मौजूद लोगों को प्रशासन की चेतावनी का पालन करना चाहिए। दूसरी आपदा का खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है। 

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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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