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भारत आएंगे शी जिनपिंग, 12 सितंबर को पीएम मोदी से होगी अहम द्विपक्षीय मुलाकात

Mohammad Naved • 2026-09-10 11:32:00
भारत आएंगे शी जिनपिंग, 12 सितंबर को पीएम मोदी से होगी अहम द्विपक्षीय मुलाकात

भारत में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय मुलाकात होगी। सीमा, व्यापार और रिश्तों को स्थिर करने की कोशिशों पर नज़र रहेगी।

📍 नई दिल्ली
🗓️ 10 सितंबर 2026
✍️ Mohd Naved

भारत-चीन रिश्तों के लिए अहम मुलाकात

भारत और चीन के रिश्तों में शनिवार, 12 सितंबर को एक अहम कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आने वाला है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब दोनों देश सीमा विवाद के बाद रिश्तों को धीरे-धीरे सामान्य करने की कोशिश कर रहे हैं।

भारत 12 और 13 सितंबर को 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। नई दिल्ली में होने वाली इस बैठक में विस्तारित BRICS समूह के सदस्य देशों के नेता हिस्सा लेंगे। चीन की ओर से शी जिनपिंग की मौजूदगी इस सम्मेलन को भारत-चीन कूटनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बनाती है।

सात साल बाद भारत आएंगे शी जिनपिंग

शी जिनपिंग का प्रस्तावित भारत दौरा करीब 7 साल बाद हो रहा है। इससे पहले उन्होंने 2019 में भारत का दौरा किया था। इसके बाद दोनों देशों के रिश्तों पर 2020 में पूर्वी लद्दाख में सीमा तनाव का गहरा असर पड़ा।

हालांकि पिछले कुछ समय में दोनों पक्षों के बीच संवाद बढ़ा है। अगस्त 2026 में भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों की सीमा संबंधी वार्ता का 25वां दौर बीजिंग में हुआ। दोनों पक्षों ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने तथा मौजूदा तंत्रों के जरिए मतभेदों को संभालने पर सहमति जताई।

मोदी-शी बैठक क्यों अहम है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच प्रस्तावित बैठक केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं होगी। दोनों देशों के बीच रिश्तों में सुधार की प्रक्रिया अभी शुरुआती और संवेदनशील दौर में है।

भारत की प्राथमिकताओं में सीमा क्षेत्रों में शांति, वास्तविक नियंत्रण रेखा से जुड़े लंबित मुद्दों का प्रबंधन और आर्थिक रिश्तों में संतुलन प्रमुख विषय हैं। चीन के साथ व्यापार और निवेश संबंध भी दोनों देशों के व्यापक रिश्तों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

अगस्त में हुई विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता में दोनों देशों ने सीमा प्रबंधन से जुड़े संवाद को आगे बढ़ाने, अतिरिक्त सैन्य संवाद तंत्र स्थापित करने और सीमा व्यापार तथा लोगों के आवागमन से जुड़े सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई थी।

सीमा विवाद अब भी सबसे संवेदनशील मुद्दा

भारत और चीन के संबंधों में सबसे बड़ा संवेदनशील मुद्दा सीमा विवाद है। 2020 के बाद पूर्वी लद्दाख में तनाव ने दोनों देशों के राजनीतिक और सैन्य संबंधों को प्रभावित किया।

भारत ने लगातार यह रुख रखा है कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता द्विपक्षीय रिश्तों में सामान्य स्थिति के लिए जरूरी है। प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग ने अगस्त 2025 में तियानजिन में मुलाकात के दौरान भी सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने और मतभेदों को विवाद में बदलने से रोकने की जरूरत पर जोर दिया था।

इसके बाद दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद और विभिन्न द्विपक्षीय तंत्रों को सक्रिय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है।

व्यापार और आर्थिक रिश्तों पर भी निगाह

मोदी-शी बातचीत में आर्थिक और कारोबारी रिश्ते भी अहम मुद्दा बन सकते हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार का आकार बड़ा है, लेकिन व्यापार असंतुलन, बाजार पहुंच और तकनीकी क्षेत्र में प्रतिबंध जैसे मुद्दे लंबे समय से चर्चा में रहे हैं।

सितंबर की शुरुआत में भारत के वाणिज्य सचिव और चीन के राजदूत के बीच आर्थिक और व्यापारिक रिश्तों को लेकर बातचीत हुई। चीनी पक्ष ने आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया, जबकि भारतीय पक्ष ने व्यावहारिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की बात कही।

यह संकेत देता है कि सीमा से जुड़े मतभेदों के साथ आर्थिक संवाद को भी समानांतर रूप से आगे बढ़ाने की कोशिश जारी है।

BRICS बनेगा बड़ी कूटनीतिक पृष्ठभूमि

नई दिल्ली में होने वाला BRICS सम्मेलन भारत और चीन के लिए केवल द्विपक्षीय मंच नहीं है। यह वैश्विक दक्षिण, बहुपक्षीय व्यवस्था, व्यापार, ऊर्जा, तकनीक और वैश्विक शासन जैसे व्यापक मुद्दों पर चर्चा का मंच भी है।

भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। चीन अगले वर्ष समूह की अध्यक्षता संभालेगा। दोनों देशों ने BRICS के भीतर सहयोग को आगे बढ़ाने और समूह की गतिविधियों को मजबूत करने के लिए समर्थन की बात कही है।

चीन के विदेश मंत्रालय ने 8 सितंबर की नियमित प्रेस वार्ता में भारत में होने वाले BRICS सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए समर्थन दोहराया था। हालांकि उस समय चीनी विदेश मंत्रालय ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भागीदारी को लेकर विस्तृत जानकारी देने से इनकार किया था।

अब उपलब्ध कूटनीतिक रिपोर्टों के अनुसार शी जिनपिंग के सम्मेलन में शामिल होने और मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत की तैयारी है।

रिश्तों में सुधार, लेकिन चुनौतियां बरकरार

भारत और चीन के बीच पिछले दो वर्षों में संवाद का स्तर बढ़ा है। सीधी उड़ानों की बहाली, सीमा व्यापार और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में प्रगति हुई है। दोनों पक्षों ने उच्चस्तरीय संवाद को भी दोबारा सक्रिय किया है।

इसके बावजूद रिश्तों में पूर्ण सामान्य स्थिति अभी दूर है। सीमा विवाद, व्यापार असंतुलन, निवेश नियम और रणनीतिक अविश्वास जैसे मुद्दे दोनों देशों के बीच मौजूद हैं।

इसलिए मोदी और शी की बैठक को रिश्तों में अंतिम समाधान के तौर पर देखना जल्दबाजी होगी। इसे संवाद और तनाव प्रबंधन की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखना अधिक सटीक होगा।

2024 से आगे बढ़ता संवाद

अक्टूबर 2024 में कज़ान में BRICS सम्मेलन के दौरान नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात हुई थी। उस बैठक में दोनों नेताओं ने 2020 के बाद सीमा क्षेत्रों में पैदा हुए मुद्दों को संभालने और द्विपक्षीय संबंधों में स्थिरता लाने की जरूरत पर सहमति जताई थी।

अगस्त 2025 में दोनों नेताओं की तियानजिन में फिर मुलाकात हुई। भारत ने उस दौरान सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को द्विपक्षीय रिश्तों के लिए जरूरी बताया था।

अब नई दिल्ली में होने वाली बैठक इसी क्रम की अगली कड़ी होगी।

शनिवार की बैठक पर क्यों रहेगी नजर

12 सितंबर की मुलाकात से सबसे अहम सवाल यह होगा कि दोनों नेता रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए किस तरह का राजनीतिक संकेत देते हैं।

सीमा पर शांति बनाए रखने के उपाय, आर्थिक रिश्तों में व्यावहारिक प्रगति, व्यापार और निवेश से जुड़े अवरोध तथा दोनों देशों के बीच नियमित संवाद की गति बैठक के प्रमुख संदर्भ बन सकते हैं।

हालांकि बैठक के अंतिम एजेंडे और संभावित समझौतों की आधिकारिक जानकारी बातचीत के बाद ही स्पष्ट होगी। इसलिए किसी भी संभावित घोषणा को पहले से तय नतीजे के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।

भारत-चीन रिश्तों के लिए अगला चरण

शी जिनपिंग का नई दिल्ली दौरा भारत और चीन के रिश्तों में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पड़ाव है। दोनों देशों ने पिछले कुछ समय में तनाव कम करने और संवाद बढ़ाने के संकेत दिए हैं, लेकिन सीमा और आर्थिक मुद्दों पर मतभेद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।

BRICS का बहुपक्षीय मंच दोनों नेताओं को द्विपक्षीय संबंधों पर सीधे संवाद का अवसर देता है। अगर बातचीत से सीमा पर स्थिरता, आर्थिक संपर्क और राजनीतिक संवाद को आगे बढ़ाने के ठोस संकेत मिलते हैं, तो इससे रिश्तों में भरोसा बहाल करने की प्रक्रिया को गति मिल सकती है। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि दोनों पक्ष संवाद को जारी रखते हुए मतभेदों को नियंत्रित रखने की दिशा में कितना आगे बढ़ते हैं।

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Mohammad Naved

Mohammad Naved

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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