चीन में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के पुराने शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच जनरल झाओ जोंगकी पर भी बड़ी कार्रवाई हुई है। झाओ जोंगकी वही सैन्य अधिकारी हैं, जिन्होंने 2017 के डोकलाम गतिरोध और 2020 के गलवान टकराव के दौर में चीन के वेस्टर्न थिएटर कमांड की कमान संभाली थी। चीनी सरकारी व्यवस्था के तहत झाओ को नेशनल कमेटी ऑफ चाइनीज पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस यानी सीपीपीसी से हटा दिया गया है। उनके 2 अन्य पद भी खत्म किए गए हैं। हालांकि बीजिंग ने इस कार्रवाई की कोई आधिकारिक वजह सार्वजनिक नहीं की है। झाओ जोंगकी का नाम भारत-चीन सीमा पर पिछले दशक के 2 बड़े सैन्य टकरावों से जुड़ा रहा है। डोकलाम में 2017 के दौरान भारत और चीन की सेनाएं करीब 72 दिनों तक आमने-सामने रही थीं। इसके 3 साल बाद पूर्वी लद्दाख में तनाव बढ़ा और जून 2020 में गलवान घाटी में हिंसक झड़प हुई।
बीजिंग, चीन|29 अगस्त 2026|शाह टाइम्स
By Mohd Haris
झाओ जोंगकी फरवरी 2016 में पुनर्गठित वेस्टर्न थिएटर कमांड के पहले कमांडर बने थे। यह कमांड चीन के तिब्बत और शिनजियांग क्षेत्रों के साथ भारत से लगी सीमा के बड़े हिस्से में पीएलए की सैन्य गतिविधियों के लिए अहम है। 2017 में डोकलाम क्षेत्र में चीन की सड़क निर्माण गतिविधि के बाद भारत और चीन की सेनाएं आमने-सामने आ गई थीं। भारत ने भूटान के साथ अपने सुरक्षा संबंधों और क्षेत्रीय स्थिति को देखते हुए वहां सैन्य हस्तक्षेप किया था। इसके बाद दोनों देशों के सैनिक लंबे समय तक आमने-सामने रहे। उस समय झाओ जोंगकी वेस्टर्न थिएटर कमांड के प्रमुख थे। भारतीय और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में उन्हें चीन की सैन्य रणनीति और डोकलाम में पीएलए की कार्रवाई से जुड़े प्रमुख अधिकारियों में गिना गया था।
2020 में पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ने के दौरान भी झाओ उसी कमांड के प्रमुख थे। 15 जून 2020 को गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक संघर्ष हुआ। इस संघर्ष में भारत के 20 सैनिक मारे गए थे। चीन ने बाद में अपने 4 सैनिकों की मौत की आधिकारिक पुष्टि की थी। चीनी हताहतों की संख्या को लेकर अलग-अलग आकलन सामने आए हैं, इसलिए आधिकारिक चीनी आंकड़े और बाहरी आकलन अलग रहे हैं। झाओ की भूमिका को लेकर अमेरिकी खुफिया आकलन का भी हवाला दिया गया था। 2020 में एएनआई की एक रिपोर्ट में एक अमेरिकी आकलन के आधार पर दावा किया गया था कि झाओ ने गलवान ऑपरेशन को मंजूरी दी थी। इस दावे की स्वतंत्र सार्वजनिक पुष्टि चीन की ओर से नहीं हुई है। इसलिए इसे स्थापित तथ्य के बजाय रिपोर्टेड इंटेलिजेंस असेसमेंट के तौर पर देखना उचित है।
चीनी राजनीतिक सलाहकार संस्था ने 26 अगस्त को झाओ जोंगकी को 14वीं नेशनल कमेटी की स्टैंडिंग कमेटी से हटाने का फैसला किया। इसके साथ उनकी सीपीपीसी सदस्यता खत्म की गई और एथनिक एंड रिलिजियस अफेयर्स कमेटी के डिप्टी डायरेक्टर का पद भी उनसे ले लिया गया। महत्वपूर्ण बात यह है कि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यह कार्रवाई उनकी पूर्व सैन्य कमान से संबंधित नहीं है। झाओ दिसंबर 2020 में वेस्टर्न थिएटर कमांड से हट चुके थे और उनकी जगह नया कमांड नेतृत्व आया था। उस समय वे सेवानिवृत्ति की आयु तक पहुंच चुके थे। बीजिंग ने अभी तक यह नहीं बताया है कि झाओ को हटाने के पीछे भ्रष्टाचार, अनुशासनात्मक कार्रवाई या कोई दूसरा कारण है। इसलिए उनकी कार्रवाई को सीधे भ्रष्टाचार मामले से जोड़ना फिलहाल जल्दबाजी होगी।
झाओ के खिलाफ कार्रवाई ऐसे वक्त हुई है जब चीनी सैन्य नेतृत्व में बड़े पैमाने पर फेरबदल चल रहा है। 28 अगस्त को चीन की नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की स्थायी समिति ने झांग यूश्या को सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के वाइस चेयरमैन पद से और लियू झेनली को सीएमसी सदस्य पद से हटाने की घोषणा की। रॉयटर्स के मुताबिक झांग यूश्या और लियू झेनली के खिलाफ गंभीर अनुशासनात्मक और कानूनी उल्लंघनों की जांच का जिक्र किया गया है। इस कार्रवाई के बाद राज्य के सेंट्रल मिलिट्री कमीशन में सक्रिय सदस्यों की संख्या घटकर 2 रह गई, जिनमें राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी शामिल हैं। झाओ का मामला इससे अलग है। उनके खिलाफ सार्वजनिक तौर पर किसी जांच या भ्रष्टाचार के आरोप की घोषणा नहीं हुई है। फिर भी उनकी राजनीतिक सदस्यता खत्म होना इस व्यापक सैन्य पुनर्गठन के बीच महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
शी जिनपिंग लंबे समय से चीनी सेना में अनुशासन और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की नीति पर जोर देते रहे हैं। पिछले वर्षों में पीएलए के कई वरिष्ठ अधिकारी जांच, बर्खास्तगी या राजनीतिक पदों से हटाए जाने की कार्रवाई का सामना कर चुके हैं। अमेरिकी थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के फरवरी 2026 के आकलन के अनुसार, चीन में 101 वरिष्ठ पीएलए अधिकारियों को या तो उनके पदों से हटाया गया या वे सार्वजनिक गतिविधियों से गायब हुए। इस आकलन में इसे चीन के सैन्य नेतृत्व के बड़े हिस्से पर असर डालने वाली प्रक्रिया बताया गया था। हालांकि ऐसे आकलनों को चीन सरकार की आधिकारिक स्थिति के साथ मिलाकर नहीं देखना चाहिए। बीजिंग आमतौर पर सैन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की वजहों को सीमित जानकारी के साथ सार्वजनिक करता है।
झाओ जोंगकी का नाम भारत-चीन सीमा विवाद के 2 संवेदनशील अध्यायों से जुड़ा रहा है। डोकलाम और गलवान दोनों घटनाओं ने भारत की सुरक्षा नीति, सैन्य तैनाती और चीन के साथ कूटनीतिक रिश्तों को प्रभावित किया। उनकी मौजूदा कार्रवाई को भारत के प्रति चीन की नीति में बदलाव का सीधा संकेत मानना अभी उचित नहीं होगा। झाओ अब सक्रिय वेस्टर्न थिएटर कमांडर नहीं हैं और उनकी मौजूदा कार्रवाई राजनीतिक सलाहकार संस्था से जुड़ी है। फिर भी यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चीन के सैन्य नेतृत्व में लगातार हो रही फेरबदल की प्रक्रिया भारत के लिए भी रणनीतिक महत्व रखती है। वेस्टर्न थिएटर कमांड भारत से लगी सीमा पर चीन की सैन्य रणनीति का प्रमुख हिस्सा है।
झाओ को हटाए जाने के बाद चीन की भारत नीति में बदलाव को लेकर अटकलें तेज हो सकती हैं। लेकिन अभी उपलब्ध तथ्यों से ऐसा निष्कर्ष निकालना मुश्किल है।
भारत-चीन संबंध केवल किसी एक सैन्य अधिकारी की भूमिका से तय नहीं होते। सीमा विवाद, सैन्य तैनाती, वास्तविक नियंत्रण रेखा पर बुनियादी ढांचा, कूटनीतिक वार्ता और दोनों देशों की व्यापक विदेश नीति इसका हिस्सा हैं। इसलिए झाओ की राजनीतिक सदस्यता खत्म होने को चीन की पूरी भारत नीति में बदलाव के रूप में पेश करना तथ्यात्मक रूप से कमजोर होगा।
आने वाले दिनों में सबसे अहम सवाल यह रहेगा कि झाओ जोंगकी के खिलाफ कोई औपचारिक जांच शुरू होती है या नहीं। अगर बीजिंग बाद में उनकी कार्रवाई का कारण बताता है, तो इससे मौजूदा घटनाक्रम की तस्वीर अधिक साफ होगी। इसके साथ चीन के सेंट्रल मिलिट्री कमीशन और पीएलए के दूसरे वरिष्ठ पदों पर होने वाले फेरबदल पर भी नजर रहेगी। खास तौर पर वेस्टर्न थिएटर कमांड की नेतृत्व संरचना भारत-चीन सीमा के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगी। झाओ जोंगकी का राजनीतिक पतन इसलिए चर्चा में है क्योंकि वे चीन की उस सैन्य पीढ़ी का हिस्सा रहे हैं जिसने डोकलाम और गलवान जैसे गंभीर सीमा टकरावों के दौरान भारत के खिलाफ पीएलए की रणनीतिक कमान संभाली थी। लेकिन फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक सूचना केवल उनकी सीपीपीसी सदस्यता और 2 संबंधित पदों से हटाए जाने की पुष्टि करती है। कार्रवाई की वजह और किसी संभावित जांच के बारे में बीजिंग की ओर से स्पष्ट जानकारी का इंतजार है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।