झू रोंगजी के अंतिम संस्कार पर चीन में कड़ी निगरानी
चीन में पूर्व प्रधानमंत्री की श्रद्धांजलि पर सख्ती क्यों?
झू रोंगजी के निधन पर सार्वजनिक शोक से सरकार क्यों सतर्क?
पूर्व चीनी प्रधानमंत्री झू रोंगजी के अंतिम संस्कार के दौरान बीजिंग में सुरक्षा और निगरानी बढ़ाई गई। राष्ट्रीय झंडे आधे झुके रहे, जबकि सार्वजनिक श्रद्धांजलि को सीमित और नियंत्रित रखने की कोशिश हुई। झू की लोकप्रियता और चीन में पूर्व नेताओं की मौत से जुड़े पुराने राजनीतिक घटनाक्रम इस सतर्कता की पृष्ठभूमि हैं।
बीजिंग, चीन |18 अगस्त 2026 |शाह टाइम्स
By Mohd Haris
झू रोंगजी के अंतिम संस्कार पर चीन में कड़ी निगरानी
चीन ने पूर्व प्रधानमंत्री झू रोंगजी के अंतिम संस्कार के दौरान बीजिंग में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी। 97 वर्षीय झू का निधन 12 अगस्त को हुआ था और 18 अगस्त को उनके अंतिम संस्कार के दौरान सरकारी इमारतों सहित कई स्थानों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाया गया। हालांकि यह कहना अधिक सटीक होगा कि चीन ने सार्वजनिक शोक पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया, इसके बजाय श्रद्धांजलि और सार्वजनिक भावनाओं को कड़ी निगरानी में रखा। रॉयटर्स के मुताबिक तियानआनमेन स्क्वायर और बाबाोशान क्रेमेटोरियम की ओर जाने वाले मार्गों पर सुरक्षा विशेष रूप से बढ़ाई गई थी। झू रोंगजी चीन के उन पूर्व नेताओं में थे जिनकी आर्थिक सुधारों और अपेक्षाकृत स्पष्ट सार्वजनिक शैली के कारण आज भी बड़ी संख्या में लोग याद करते हैं। उनकी मौत ने चीन में एक ऐसे दौर की यादें फिर सामने ला दीं, जब आर्थिक सुधार और वैश्विक एकीकरण मौजूदा दौर की तुलना में अधिक प्रमुख नीति दिशा थे।
झू रोंगजी ने 1998 से 2003 तक चीन के प्रधानमंत्री के तौर पर काम किया। इससे पहले वह उपप्रधानमंत्री और केंद्रीय बैंक के गवर्नर सहित कई अहम आर्थिक पदों पर रहे। उनके कार्यकाल को चीन की अर्थव्यवस्था के बड़े पुनर्गठन से जोड़ा जाता है। उन्होंने महंगाई पर नियंत्रण, टैक्स व्यवस्था में बदलाव और सरकारी कंपनियों के पुनर्गठन जैसी नीतियों को आगे बढ़ाया। इन सुधारों से लाखों नौकरियां भी प्रभावित हुईं, जिससे उनकी आर्थिक विरासत को लेकर समर्थन और आलोचना दोनों मौजूद रहे। झू की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में चीन को विश्व व्यापार संगठन में शामिल कराने की प्रक्रिया में उनकी भूमिका भी मानी जाती है। चीन 2001 में डब्ल्यूटीओ में शामिल हुआ और उसके बाद वैश्विक व्यापार में उसका विस्तार तेजी से हुआ।
18 अगस्त को झू के अंतिम संस्कार के दौरान चीन के राष्ट्रीय ध्वज को तियानआनमेन स्क्वायर, शिनहुआमेन, ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल और अन्य सरकारी संस्थानों पर आधा झुकाया गया। हांगकांग और मकाऊ सहित कई स्थानों पर भी आधिकारिक शोक प्रोटोकॉल लागू किया गया। झू के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार बीजिंग के बाबाोशान क्रेमेटोरियम में हुआ। यह स्थान चीन के प्रमुख सरकारी अधिकारियों और क्रांतिकारी हस्तियों के अंतिम संस्कार के लिए जाना जाता है। बीजिंग के केंद्रीय इलाकों में सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ी रही। खास तौर पर तियानआनमेन स्क्वायर और झोंगनानहाई के आसपास सुरक्षा पर अधिक ध्यान दिया गया, क्योंकि अंतिम संस्कार का मार्ग इन संवेदनशील इलाकों से जुड़ा था।
इस दावे को सावधानी से समझना जरूरी है। उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों में ऐसा स्पष्ट प्रमाण नहीं है कि पूरे चीन में झू रोंगजी के लिए हर तरह के सार्वजनिक शोक पर औपचारिक पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था। इसके बजाय रिपोर्टों में सार्वजनिक श्रद्धांजलि पर निगरानी, सुरक्षा जांच और सेंसरशिप का जिक्र है। फाइनेंशियल टाइम्स ने झू के पैतृक गांव हेपिंग में शोक व्यक्त करने पहुंचे लोगों पर सादे कपड़ों में पुलिस की निगरानी और श्रद्धांजलि सामग्री को नियंत्रित किए जाने की रिपोर्ट की। इसलिए संपादकीय रूप से अधिक सटीक शब्द “सार्वजनिक शोक पर सख्त नियंत्रण और निगरानी” है। “पूर्ण प्रतिबंध” कहना उपलब्ध प्रमाण से आगे निकल जाएगा।
चीन का नेतृत्व पूर्व वरिष्ठ नेताओं की मौत के बाद होने वाली सामूहिक भावनात्मक प्रतिक्रिया को राजनीतिक नजरिए से संवेदनशील मानता रहा है। इतिहास में कई मौकों पर किसी नेता की मृत्यु के बाद श्रद्धांजलि सभाएं व्यापक राजनीतिक असंतोष का माध्यम बनी हैं। 1976 में प्रधानमंत्री झोउ एनलाई की मौत के बाद बीजिंग के तियानआनमेन क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग जमा हुए थे। बाद में यह शोक प्रदर्शन तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व और सांस्कृतिक क्रांति के खिलाफ असंतोष से जुड़ गया। 1989 में पूर्व कम्युनिस्ट पार्टी महासचिव हू याओबांग की मौत के बाद भी श्रद्धांजलि गतिविधियां लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों में बदल गई थीं। ये घटनाएं आज भी चीन के राजनीतिक तंत्र में सामूहिक सार्वजनिक शोक के प्रति सतर्कता की एक अहम ऐतिहासिक पृष्ठभूमि मानी जाती हैं।
झू की सार्वजनिक छवि मौजूदा चीनी राजनीतिक नेतृत्व से कई मायनों में अलग थी। वह अपनी स्पष्ट और कभी-कभी कठोर भाषा के लिए जाने जाते थे तथा आर्थिक सुधारों को लेकर उनकी भूमिका ने उन्हें चीन के तेज आर्थिक बदलाव के दौर का प्रमुख चेहरा बनाया। उनकी मौत के बाद चीनी सोशल मीडिया पर कई लोगों ने उनके आर्थिक योगदान और नेतृत्व को याद किया। रॉयटर्स के मुताबिक कुछ लोगों ने उनके दौर को चीन के सुधार और वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ने के समय के रूप में याद किया। हालांकि उनकी विरासत पूरी तरह निर्विवाद नहीं है। सरकारी कंपनियों के पुनर्गठन से बड़े पैमाने पर छंटनी हुई थी और कुछ नागरिक आज भी उन नीतियों को रोजगार संकट से जोड़ते हैं। सोशल मीडिया पर झू की आलोचना करने वाली पोस्ट भी सामने आईं, हालांकि कुछ ऐसी सामग्री बाद में हटा दी गई।
झू के निधन पर लोगों की भावनात्मक प्रतिक्रिया को सीधे राजनीतिक विरोध मानना भी सही नहीं होगा। बहुत से लोग उन्हें आर्थिक सुधारों, भ्रष्टाचार विरोधी रुख और चीन के वैश्विक व्यापार विस्तार के लिए याद कर रहे हैं। दूसरी तरफ सरकार की निगरानी से यह संकेत मिलता है कि बीजिंग किसी भी बड़े अनियंत्रित सार्वजनिक जमावड़े या शोक को राजनीतिक संदेश में बदलने की संभावना को गंभीरता से लेता है। यह एक राजनीतिक जोखिम प्रबंधन रणनीति के तौर पर देखा जा सकता है। इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को केवल “सरकार बनाम जनता” के टकराव के रूप में देखना अधूरा होगा। यहां सरकारी नियंत्रण, सार्वजनिक भावनाएं और पूर्व नेतृत्व की विरासत तीनों एक साथ काम कर रहे हैं।
झू रोंगजी के आर्थिक सुधारों ने चीन को वैश्विक अर्थव्यवस्था में गहराई से जोड़ने में मदद की। सरकारी कंपनियों का पुनर्गठन, टैक्स सुधार और डब्ल्यूटीओ में प्रवेश जैसी नीतियां चीन के आर्थिक परिवर्तन की अहम कड़ियां बनीं। लेकिन उनकी नीतियों की कुछ संरचनात्मक विरासतों पर आज भी बहस होती है। रॉयटर्स के विश्लेषण के मुताबिक चीन की स्थानीय वित्तीय समस्याओं, जमीन बिक्री पर निर्भरता और निर्यात केंद्रित विकास मॉडल से जुड़ी कुछ चुनौतियों की जड़ें झू के दौर के सुधारों तक जाती हैं। आज चीन की अर्थव्यवस्था संपत्ति बाजार की कमजोरी, घरेलू मांग और स्थानीय सरकारी कर्ज जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे में झू की आर्थिक विरासत पर बहस केवल इतिहास का विषय नहीं है, बल्कि वर्तमान आर्थिक नीति से भी जुड़ती है।
झू का राजनीतिक दौर उस समय से जुड़ा था जब चीन में बाजार आधारित सुधार और वैश्विक आर्थिक एकीकरण तेजी से आगे बढ़ रहे थे। मौजूदा राष्ट्रपति शी जिनपिंग के दौर में राज्य की भूमिका, रणनीतिक उद्योगों और राजनीतिक नियंत्रण पर अधिक जोर दिखाई देता है। 17 अगस्त को शी जिनपिंग ने पूर्व राष्ट्रपति जियांग जेमिन की 100वीं जयंती पर एक बड़े आधिकारिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। जियांग और झू ने 1990 के दशक और 2000 के शुरुआती वर्षों में चीन के आर्थिक परिवर्तन में साथ काम किया था। इस क्रम ने झू की मौत को केवल एक पूर्व प्रधानमंत्री के निधन से आगे बढ़ाकर चीन के एक पुराने आर्थिक और राजनीतिक दौर की स्मृति से जोड़ दिया है। लेकिन इसे वर्तमान नेतृत्व के खिलाफ किसी व्यापक राजनीतिक आंदोलन के प्रमाण के रूप में देखना अभी उचित नहीं होगा।
पूर्व नेताओं की मौत के बाद चीन में सार्वजनिक शोक को लेकर सरकार की सतर्कता नई बात नहीं है। 2023 में पूर्व प्रधानमंत्री ली केकियांग की मौत के बाद भी सार्वजनिक श्रद्धांजलि और ऑनलाइन टिप्पणियों पर कड़ी निगरानी की खबरें सामने आई थीं। ली के निधन के बाद लोगों ने फूल और संदेश रखकर श्रद्धांजलि दी थी, लेकिन कई जगहों पर इन श्रद्धांजलियों को नियंत्रित किए जाने की रिपोर्ट आई। इससे यह स्पष्ट होता है कि चीन का राजनीतिक तंत्र वरिष्ठ नेताओं की मौत के बाद अचानक पैदा होने वाली सामूहिक भावनाओं को संवेदनशील मानता है। झू के मामले में भी वही सावधानी दिखाई दे रही है, हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उनकी अंतिम विदाई को आधिकारिक राज्य शोक प्रोटोकॉल के तहत आयोजित किया गया और राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाया गया।
अभी ऐसा निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं। सार्वजनिक स्तर पर झू के प्रति सम्मान और पुरानी आर्थिक नीतियों के प्रति नॉस्टेल्जिया जरूर दिखाई दिया है, लेकिन रॉयटर्स की रिपोर्ट में भी ऐसे संकेत नहीं मिले कि उनकी मौत के आसपास व्यापक सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए हों। फाइनेंशियल टाइम्स ने भी बताया कि उनके पैतृक गांव में श्रद्धांजलि देने वालों के बीच झू के प्रति सम्मान प्रमुख था और वहां शी सरकार के खिलाफ सार्वजनिक असंतोष के संकेत नहीं दिखे। इसलिए फिलहाल सबसे सटीक आकलन यही है कि झू की मौत ने राजनीतिक रूप से संवेदनशील सार्वजनिक स्मृति को सक्रिय किया है, लेकिन इसे व्यापक राजनीतिक आंदोलन कहना प्रमाणित नहीं है।
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि झू की विरासत को चीनी सरकार किस तरह आधिकारिक इतिहास में प्रस्तुत करती है। आधिकारिक शोक संदेशों में उन्हें पार्टी और राज्य के प्रति निष्ठावान नेता के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जबकि उनके आर्थिक सुधारों और स्वतंत्र सोच की सार्वजनिक छवि भी लोगों की स्मृति में मौजूद है। दूसरा महत्वपूर्ण पहलू चीन में सार्वजनिक स्मृति और डिजिटल सेंसरशिप का है। सोशल मीडिया पर झू से जुड़ी सकारात्मक और आलोचनात्मक दोनों तरह की सामग्री सामने आई है, लेकिन संवेदनशील पोस्ट हटाए जाने की रिपोर्ट भी मिली है। अगर सार्वजनिक श्रद्धांजलि लंबे समय तक नियंत्रित रहती है, तो झू की विरासत को लेकर चर्चा मुख्य रूप से निजी नेटवर्क, सीमित ऑनलाइन मंचों और आधिकारिक इतिहास लेखन तक सिमट सकती है। इसके विपरीत, यदि स्मृति और चर्चा को अधिक जगह मिलती है तो यह चीन के सुधार युग की नीतियों पर व्यापक सार्वजनिक बहस को जन्म दे सकती है।
चीन ने पूर्व प्रधानमंत्री झू रोंगजी के अंतिम संस्कार के दौरान सार्वजनिक शोक को पूरी तरह प्रतिबंधित करने के बजाय श्रद्धांजलि और सार्वजनिक भावनाओं को कड़ी निगरानी और नियंत्रण में रखा। बीजिंग में सुरक्षा बढ़ाई गई, राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाया गया और अंतिम संस्कार राज्य प्रोटोकॉल के तहत हुआ। झू की लोकप्रियता, आर्थिक सुधारों की उनकी विरासत और चीन के अतीत में पूर्व नेताओं की मौत के बाद हुए बड़े सार्वजनिक प्रदर्शनों ने इस सतर्कता को राजनीतिक संदर्भ दिया है। 1976 और 1989 के अनुभवों के बाद बीजिंग सामूहिक शोक को संभावित राजनीतिक लामबंदी के नजरिए से देखता रहा है। फिलहाल उपलब्ध प्रमाण यह नहीं दिखाते कि झू की मौत के बाद चीन में कोई व्यापक सरकार विरोधी आंदोलन उभरा है। लेकिन उनकी अंतिम विदाई ने एक अहम सवाल जरूर सामने रखा है, चीन अपने सुधार युग की विरासत और उससे जुड़ी सार्वजनिक यादों को मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था के भीतर कितनी जगह देता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।