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BRICS Summit से पहले दिल्ली में कूटनीतिक हलचल, Xi-Putin पर नजर

Apurva Choudhary 2026-09-10 19:59:58
BRICS Summit से पहले दिल्ली में कूटनीतिक हलचल, Xi-Putin पर नजर
नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को 18वां BRICS Summit होगा। चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping और रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin की मौजूदगी से भारत-चीन, भारत-रूस संबंधों पर नजर है। West Asia संकट, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, वित्तीय सहयोग और शासन सुधार के बीच संयुक्त घोषणा पर सहमति बनाना चुनौती रहेगी।

LOCATION | DATE | BYLINE
📍 New Delhi | 📰 10 September 2026 | ✍️ Apurva Choudhary 

दिल्ली में BRICS Summit से पहले बढ़ी कूटनीतिक हलचल
नई दिल्ली इस सप्ताह दुनिया की बड़ी कूटनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनने जा रही है। भारत 12 और 13 सितंबर को Bharat Mandapam में 18वें BRICS Summit की मेज़बानी करेगा। भारत की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में वैश्विक राजनीति, आर्थिक सहयोग और बहुपक्षीय व्यवस्था से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा।
Summit से ठीक पहले चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping की भारत यात्रा की पुष्टि ने बैठक की अहमियत बढ़ा दी है। Xi Jinping 12 सितंबर को New Delhi पहुंचेंगे और यह 2020 के India-China border clash के बाद उनकी पहली भारत यात्रा होगी। Reuters के मुताबिक उनकी यात्रा दोनों देशों के बीच हाल के कूटनीतिक thaw को आगे बढ़ाने की संभावना के बीच हो रही है, हालांकि bilateral economic ties में अब भी कई अड़चनें मौजूद हैं।
रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin की मौजूदगी भी पहले ही स्पष्ट हो चुकी है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने 31 अगस्त को Putin के साथ Bishkek में मुलाकात के दौरान उन्हें 12–13 सितंबर के BRICS Summit के लिए भारत आने पर स्वागत की बात कही थी। दोनों नेताओं ने उस दौरान energy, defence, trade और दूसरे क्षेत्रों में bilateral cooperation की समीक्षा की थी।

Xi Jinping की वापसी से India-China समीकरण पर नजर
Xi Jinping का New Delhi दौरा केवल BRICS बैठक तक सीमित नजरिए से नहीं देखा जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में India-China relations में security concerns और border tensions के कारण अविश्वास बढ़ा था। हालांकि हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच diplomatic engagement में कुछ सकारात्मक संकेत दिखाई दिए हैं।
Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने Chinese investment से जुड़े कुछ restrictions में नरमी दिखाई है और कुछ sectors में joint ventures को मंजूरी भी मिली है। इसके बावजूद कई Chinese कंपनियां भारत में बड़े investment फैसलों को लेकर अभी सतर्क हैं। Visa procedures, technology transfers, regulatory scrutiny और security concerns जैसे मुद्दे दोनों देशों के economic relationship को प्रभावित कर रहे हैं।
ऐसे में Modi-Xi बातचीत अगर होती है तो उसका महत्व केवल BRICS तक सीमित नहीं रहेगा। Border stability, trade और investment से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक स्तर की बातचीत आने वाले समय में bilateral relationship की दिशा प्रभावित कर सकती है।
फिलहाल किसी संभावित bilateral meeting के सभी नतीजों को पहले से तय मानना उचित नहीं होगा। लेकिन दोनों नेताओं की एक ही मंच पर मौजूदगी diplomatic signalling के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी।

Putin के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी भी अहम
Russia भारत के लिए defence और energy का लंबे समय से महत्वपूर्ण partner रहा है। बदलते geopolitical environment में दोनों देशों के बीच trade, energy, defence, space और अन्य क्षेत्रों में cooperation जारी है।
प्रधानमंत्री मोदी और Putin की 31 अगस्त की बातचीत में दोनों पक्षों ने India-Russia Special and Privileged Strategic Partnership को मजबूत करने पर जोर दिया था। West Asia और Black Sea region में जारी conflicts से maritime trade तथा Indian seafarers की safety पर पड़ने वाले प्रभावों पर भी चर्चा हुई थी।
BRICS Summit के दौरान दोनों नेताओं की संभावित बातचीत इसलिए भी महत्वपूर्ण होगी क्योंकि वैश्विक energy market और supply chains इस समय geopolitical tensions से प्रभावित हैं।
Russia की ओर से BRICS के भीतर national currencies और payment mechanisms को लेकर भी चर्चा जारी है। Kremlin spokesperson Dmitry Peskov ने Summit से पहले कहा था कि Moscow किसी जबरन “de-dollarisation” agenda को आगे नहीं बढ़ा रहा, बल्कि स्वीकार्य payment methods के लिए openness रखता है।
यह बयान BRICS के economic agenda में financial cooperation की दिशा को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

West Asia संकट बना Summit की सबसे बड़ी चुनौती
इस BRICS Summit की timing सामान्य परिस्थितियों से अलग है। West Asia में जारी युद्ध और उससे पैदा हुए geopolitical तनाव का असर BRICS की internal diplomacy पर भी पड़ रहा है।
Reuters के अनुसार Iran BRICS का सदस्य है और मौजूदा conflict ने bloc के भीतर अलग-अलग देशों की स्थितियों के बीच दूरी बढ़ा दी है। Iran और UAE के बीच तनाव तथा क्षेत्रीय security situation के कारण joint declaration पर सहमति बनाना आसान नहीं माना जा रहा।
West Asia crisis का सीधा असर energy security पर भी पड़ रहा है। Strait of Hormuz से जुड़े तनाव के कारण oil trade प्रभावित हुआ है और crude prices में तेज उछाल देखने को मिला है। ऐसे माहौल में energy security और सुरक्षित supply chains BRICS discussions के अहम मुद्दों में शामिल हो सकते हैं।
भारत के लिए यह स्थिति खास तौर पर संवेदनशील है क्योंकि New Delhi को एक तरफ अपने strategic partners के साथ संबंध बनाए रखने हैं और दूसरी तरफ regional stability तथा dialogue और diplomacy की अपनी नीति को आगे बढ़ाना है।

Joint Declaration पर बनेगी निगाह
BRICS Summit में केवल नेताओं की बैठक ही महत्वपूर्ण नहीं होगी, बल्कि उससे निकलने वाला joint statement या declaration भी वैश्विक नजरिए से अहम होगा।
Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक BRICS Sherpas यानी सदस्य देशों के senior negotiators Summit से पहले joint declaration के मसौदे पर काम कर रहे हैं। West Asia conflict को लेकर wording पर मतभेद एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आ रहे हैं।
BRICS के विस्तार के बाद grouping पहले की तुलना में अधिक विविध हो चुकी है। अब इसके भीतर अलग-अलग regional और strategic priorities रखने वाले देश शामिल हैं। इसलिए किसी एक मुद्दे पर सामूहिक रुख तैयार करना पहले की तुलना में अधिक जटिल diplomatic exercise बन गया है।
यही वजह है कि New Delhi Summit की सफलता का आकलन केवल किसी एक bilateral meeting या headline announcement से नहीं होगा। वास्तविक परीक्षा यह होगी कि सदस्य देश कितने संवेदनशील मुद्दों पर साझा भाषा और न्यूनतम सहमति तैयार कर पाते हैं।

ऊर्जा, व्यापार और supply chains पर भी फोकस
BRICS की भूमिका केवल political grouping के तौर पर नहीं देखी जाती। इसके economic और financial cooperation mechanisms भी लंबे समय से चर्चा में रहे हैं।
इस Summit में energy security, trade cooperation और critical supply chains से जुड़े मुद्दों पर खास ध्यान रहने की संभावना है। मौजूदा geopolitical tensions ने देशों को supply chains में resilience बढ़ाने और strategic commodities की सुरक्षित उपलब्धता सुनिश्चित करने की जरूरत को और रेखांकित किया है।
भारत के लिए यह agenda इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश energy imports, manufacturing और technology supply chains के लिहाज से वैश्विक बाजार से गहराई से जुड़ा हुआ है।
BRICS के भीतर local currencies और alternative payment mechanisms की चर्चा भी इसी broader economic conversation का हिस्सा है। हालांकि इसे तत्काल dollar-based global financial system के विकल्प के रूप में देखना अतिशयोक्ति होगी। Russia ने भी हाल में स्पष्ट किया है कि वह सभी स्वीकार्य payment methods के लिए खुला है।

दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
विदेशी राष्ट्राध्यक्षों की मौजूदगी को देखते हुए New Delhi में security arrangements काफी बढ़ा दिए गए हैं। Chanakyapuri के hotels से लेकर Bharat Mandapam और airport routes तक multi-layer security व्यवस्था की जा रही है।
Indian Express के मुताबिक करीब 30,000 security personnel की तैनाती की जा रही है। China और Russia की security teams भी अपने-अपने राष्ट्राध्यक्षों के आगमन से पहले Delhi पहुंच चुकी हैं।
Reports के मुताबिक Putin के 11 सितंबर और Xi Jinping के 12 सितंबर को Delhi पहुंचने की संभावना है। हालांकि arrival schedules में operational बदलाव संभव होते हैं, इसलिए अंतिम movement plan को official confirmation के साथ ही देखा जाना चाहिए।
VIP movement को ध्यान में रखते हुए Delhi Police और अन्य सुरक्षा एजेंसियां traffic management तथा convoy routes पर भी विशेष तैयारी कर रही हैं।

Bharat Mandapam बनेगा वैश्विक कूटनीति का मंच
12 और 13 सितंबर को Bharat Mandapam में होने वाला Summit भारत की diplomatic hosting capacity के लिए भी महत्वपूर्ण है। भारत पहले भी बड़े multilateral events की मेज़बानी कर चुका है और इस बार BRICS के विस्तारित स्वरूप के बीच नई दिल्ली की भूमिका और बढ़ गई है।
Summit के दौरान leaders-level meetings के साथ bilateral discussions भी महत्वपूर्ण रहेंगी। Modi-Putin engagement के साथ Xi Jinping के साथ संभावित बातचीत को सबसे ज्यादा diplomatic attention मिलने की संभावना है।
इसके अलावा West Asia crisis, economic cooperation और global governance reform पर member countries के बीच बातचीत होगी। BRICS का मूल उद्देश्य emerging economies के बीच political, economic और people-to-people cooperation को बढ़ाना रहा है।

भारत के लिए Summit का कूटनीतिक महत्व
भारत के लिए 2026 का BRICS Chairship एक ऐसे समय में आया है जब global order तेजी से बदल रहा है। अमेरिका-चीन rivalry, Russia-West tensions, West Asia conflict और trade तथा technology restrictions ने international diplomacy को अधिक जटिल बना दिया है।
ऐसे माहौल में New Delhi को अलग-अलग strategic partners के साथ engagement बनाए रखते हुए BRICS के भीतर consensus बनाने की कोशिश करनी होगी।
Xi और Putin की मौजूदगी भारत को एक ही मंच पर दो प्रमुख strategic partners के साथ high-level engagement का अवसर देती है। लेकिन इसी के साथ भारत को अपने wider foreign-policy interests और regional concerns के बीच संतुलन भी साधना होगा।

Summit के बाद असली नतीजों का आकलन
BRICS Summit से कई तरह के diplomatic signals सामने आ सकते हैं, लेकिन हर घोषणा को तुरंत किसी बड़े geopolitical realignment के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
India-China relationship में यदि बातचीत आगे बढ़ती है तो उसका प्रभाव bilateral trade और investment पर धीरे-धीरे दिखाई दे सकता है। इसी तरह Russia के साथ energy और strategic cooperation का trajectory भी केवल Summit की एक बैठक से तय नहीं होगा।
सबसे अहम संकेत joint declaration, bilateral meetings और economic cooperation से जुड़े ठोस outcomes में दिखाई देंगे। West Asia conflict पर BRICS कितना साझा रुख तैयार करता है, यह भी Summit की diplomatic credibility के लिए महत्वपूर्ण होगा।
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Apurva Choudhary

Apurva Choudhary

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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