भारत की अध्यक्षता में BRICS 2026 नई दिल्ली शिखर सम्मेलन की तैयारियों के साथ वैश्विक कूटनीति के केंद्र में है। आर्थिक सहयोग, डिजिटल परिवर्तन, जलवायु वित्त, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक संस्थागत सुधार जैसे विषय इस वर्ष के एजेंडे में प्रमुख हैं। उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए यह सम्मेलन भविष्य की रणनीति तय करने वाला महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है।
📍 Location: नई दिल्ली
📰 Date: 27 जुलाई 2026
✍️ Apurva Choudhary
भारत की BRICS अध्यक्षता: वैश्विक मंच पर नई जिम्मेदारी
वर्ष 2026 में भारत BRICS समूह की अध्यक्षता कर रहा है। ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से शुरू हुआ यह समूह अब कई नए सदस्य देशों के शामिल होने के बाद दुनिया की सबसे प्रभावशाली उभरती अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है। भारत की अध्यक्षता ऐसे समय में आई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था, भू-राजनीति, जलवायु परिवर्तन और तकनीकी प्रतिस्पर्धा नई चुनौतियां पेश कर रही हैं।
नई दिल्ली में प्रस्तावित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर तैयारियां तेज़ हैं और सदस्य देशों के बीच लगातार मंत्रीस्तरीय तथा अधिकारियों की बैठकें हो रही हैं।
आर्थिक सहयोग रहेगा सबसे बड़ा एजेंडा
भारत की प्राथमिकता सदस्य देशों के बीच व्यापार, निवेश और विनिर्माण सहयोग को मजबूत बनाना है। स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने, आपूर्ति शृंखलाओं को अधिक मजबूत बनाने और निवेश को प्रोत्साहित करने पर भी चर्चा हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच BRICS देशों के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी उभरती अर्थव्यवस्थाओं को नई स्थिरता प्रदान कर सकती है।
डिजिटल अर्थव्यवस्था और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर विशेष जोर
डिजिटल परिवर्तन इस वर्ष के एजेंडे का प्रमुख विषय है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा, डिजिटल भुगतान, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टार्टअप सहयोग जैसे क्षेत्रों में संयुक्त पहल पर विचार किया जा रहा है।
भारत अपने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल और तकनीकी अनुभव को अन्य सदस्य देशों के साथ साझा करने की दिशा में भी काम कर रहा है।
जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा सुरक्षा पर चर्चा
जलवायु वित्त, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित प्रौद्योगिकी, सतत कृषि और आपदा प्रबंधन पर भी BRICS देशों के बीच व्यापक विचार-विमर्श प्रस्तावित है।
ऊर्जा सुरक्षा के संदर्भ में तेल, गैस, हरित हाइड्रोजन, परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग और बिजली अवसंरचना को लेकर सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हो रही है।
न्यू डेवलपमेंट बैंक की बढ़ती भूमिका
BRICS द्वारा स्थापित न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) विकासशील देशों में आधारभूत ढांचे और सतत विकास परियोजनाओं के लिए वित्त उपलब्ध कराने का कार्य जारी रखे हुए है।
परिवहन, नवीकरणीय ऊर्जा, जल प्रबंधन, शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में बैंक की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
वैश्विक शासन सुधार की मांग
BRICS लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में विकासशील देशों के बेहतर प्रतिनिधित्व की मांग करता रहा है।
भारत का कहना है कि वैश्विक संस्थाओं की संरचना वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप होनी चाहिए ताकि निर्णय प्रक्रिया अधिक संतुलित और प्रतिनिधिक बन सके।
स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि सहयोग
स्वास्थ्य सुरक्षा, वैक्सीन अनुसंधान, चिकित्सा तकनीक, छात्र आदान-प्रदान, संयुक्त शोध परियोजनाओं और खाद्य सुरक्षा जैसे विषय भी BRICS सहयोग के महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुके हैं।
जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए टिकाऊ कृषि और जल संरक्षण पर भी सदस्य देशों का विशेष ध्यान है।
चुनौतियां भी कम नहीं
BRICS के सामने अलग-अलग राजनीतिक व्यवस्थाएं, सदस्य देशों की भिन्न आर्थिक प्राथमिकताएं, भू-राजनीतिक मतभेद और नए सदस्यों के हितों के बीच संतुलन बनाना जैसी चुनौतियां मौजूद हैं।
इन चुनौतियों के बावजूद संगठन लगातार अपने सहयोग के दायरे का विस्तार कर रहा है।
नई दिल्ली शिखर सम्मेलन से क्या उम्मीदें?
सितंबर 2026 में प्रस्तावित BRICS शिखर सम्मेलन से व्यापार, डिजिटल सहयोग, जलवायु वित्त, निवेश, तकनीकी साझेदारी और वैश्विक शासन सुधार से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों की उम्मीद की जा रही है।
भारत की अध्यक्षता को ग्लोबल साउथ की आवाज़ को मजबूत करने और व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
BRICS अब केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं, बल्कि वैश्विक नीति निर्माण में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की सामूहिक आवाज़ बन चुका है। भारत की अध्यक्षता के दौरान होने वाला 2026 शिखर सम्मेलन भविष्य की वैश्विक साझेदारियों, व्यापारिक संबंधों और संस्थागत सुधारों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।