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ब्रिक्स से पहले जेवर एयरपोर्ट पर रूस के 3 मिलिट्री विमान, पुतिन दौरे से क्या है कनेक्शन?
Mohammad Naved
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2026-09-10 13:08:58
ब्रिक्स से पहले जेवर एयरपोर्ट पर रूस के 3 सैन्य विमान उतरे। रूसी एडवांस टीम और अधिकारी पहुंचे। यह नए एयरपोर्ट की पहली विदेशी विमान लैंडिंग है, जिसे पुतिन दौरे की तैयारी से जोड़ा गया है।
📍 जेवर, उत्तर प्रदेश
🗓️ 10 सितंबर 2026
✍️ Mohd Naved
जेवर एयरपोर्ट पर रूस के 3 सैन्य विमान
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रूस के 3 सैन्य विमान पहुंचने से सुरक्षा और कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। मंगलवार सुबह करीब 5:30 बजे रूसी सैन्य विमान नए एयरपोर्ट के रनवे पर उतरे। रिपोर्टों के मुताबिक इनमें आईएल-76 सैन्य परिवहन विमान भी शामिल था।
इन विमानों के साथ रूसी एडवांस टीम और सैन्य अधिकारी भारत पहुंचे हैं। तीनों विमान बुधवार तक एयरपोर्ट पर खड़े रहे और भारतीय सुरक्षा अधिकारियों के साथ रूसी टीम ने वहां सुरक्षा इंतज़ामों की निगरानी की।
नोएडा एयरपोर्ट पर पहली विदेशी विमान लैंडिंग
इस घटनाक्रम की सबसे अहम बात यह है कि जेवर एयरपोर्ट पर यह किसी विदेशी विमान की पहली लैंडिंग बताई जा रही है। इससे नए एयरपोर्ट की भूमिका केवल नियमित यात्री उड़ानों तक सीमित नहीं रहने का संकेत मिलता है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को मार्च 2026 में एयरोड्रोम लाइसेंस मिला था। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के रिकॉर्ड के मुताबिक यहां 3,900 मीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा रनवे है। एयरपोर्ट को चौबीसों घंटे संचालन के लिए आवश्यक प्रणालियों के साथ लाइसेंस दिया गया है।
एयरपोर्ट ने 15 जून 2026 से व्यावसायिक उड़ान संचालन शुरू किया। पहले चरण में इसकी वार्षिक यात्री क्षमता 1.2 करोड़ है और मास्टरप्लान के तहत आगे इसे बड़े अंतरराष्ट्रीय विमानन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।
फिर IGI के बजाय जेवर क्यों?
रूसी सैन्य विमानों की आमद ने सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा किया है कि दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बजाय जेवर को क्यों चुना गया।
उपलब्ध रिपोर्टों में इसकी एकमात्र आधिकारिक वजह सार्वजनिक तौर पर स्पष्ट नहीं की गई है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि जेवर को केवल पुतिन की सुरक्षा के लिए चुना गया था।
हालांकि, घटनाक्रम का समय महत्वपूर्ण है। 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में होना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी आधिकारिक तौर पर कहा है कि वह इस सम्मेलन के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत में स्वागत करने के इच्छुक हैं।
इसी वजह से रूसी विमानों की लैंडिंग को सम्मेलन और पुतिन के प्रस्तावित दौरे की अग्रिम तैयारियों से जोड़ा जा रहा है। भारत और रूस की ओर से उपलब्ध सार्वजनिक सूचनाओं में इसे एक व्यापक प्रोटोकॉल और लॉजिस्टिक व्यवस्था के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
जेवर का रणनीतिक महत्व क्या है?
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए एक नया विमानन केंद्र है। इसका निर्माण ऐसे क्षेत्र में हुआ है जहां यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए नोएडा, ग्रेटर नोएडा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से सीधा संपर्क है। एयरपोर्ट की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक इसे आगे घरेलू, अंतरराष्ट्रीय और कार्गो संचालन के बड़े केंद्र के तौर पर विकसित किया जाना है।
एयरपोर्ट का रनवे बड़े विमानों के संचालन के अनुरूप तैयार किया गया है। भारत सरकार के अनुसार यहां चौबीसों घंटे संचालन की सुविधा और बड़े विमानों को संभालने की क्षमता मौजूद है।
ऐसे में किसी विदेशी सैन्य परिवहन विमान का यहां उतरना तकनीकी और परिचालन दृष्टि से एयरपोर्ट की क्षमता का महत्वपूर्ण इस्तेमाल भी माना जा सकता है। लेकिन इसे सीधे तौर पर किसी विशेष सैन्य या सुरक्षा रणनीति का प्रमाण मानना जल्दबाजी होगी।
पुतिन कनेक्शन कितना मजबूत है?
पुतिन कनेक्शन को लेकर सबसे मजबूत तथ्य सम्मेलन की तारीख और रूसी राष्ट्रपति की प्रस्तावित भारत यात्रा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन के बीच अगस्त 2026 में हुई बातचीत में दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी, रक्षा, ऊर्जा और दूसरे क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा हुई थी। प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया था कि मोदी ने 12-13 सितंबर को होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए पुतिन के भारत आने की उम्मीद जताई थी।
इसके अलावा दिल्ली में विदेशी नेताओं के आगमन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पहले से मजबूत की जा रही है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक रूसी और अन्य विदेशी सुरक्षा दल भी सम्मेलन से पहले भारत पहुंच चुके हैं।
इस पृष्ठभूमि में रूसी सैन्य विमानों का जेवर पहुंचना पुतिन के दौरे की अग्रिम तैयारी से संबंधित होना स्वाभाविक संभावना है। लेकिन रूसी राष्ट्रपति के विमान के जेवर में उतरने की अंतिम पुष्टि और उनकी वास्तविक उड़ान व्यवस्था को लेकर उपलब्ध सार्वजनिक सूचनाओं में अभी स्पष्ट आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है।
रूसी सैन्य विमान क्यों भेजे जाते हैं?
किसी उच्चस्तरीय विदेशी नेता की यात्रा से पहले संबंधित देश की एडवांस टीम पहले पहुंचती है। इसमें सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स, संचार और प्रोटोकॉल से जुड़े अधिकारी शामिल हो सकते हैं।
विदेशी सैन्य परिवहन विमान ऐसे दल के साथ विशेष उपकरण, वाहन और अन्य आधिकारिक सामग्री लाने के लिए इस्तेमाल हो सकते हैं। हालांकि जेवर पहुंचे इन विमानों में वास्तव में कौन-कौन सा उपकरण या वाहन था, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे किसी भी ऐसे दावे को तथ्य मानना उचित नहीं होगा जिसमें विमानों के अंदर मौजूद विशेष सुरक्षा उपकरण या किसी गोपनीय मिशन का निश्चित दावा किया जा रहा हो।
दिल्ली में ब्रिक्स की तैयारी तेज
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जा रही है। भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को होने वाले सम्मेलन में कई देशों के शीर्ष नेता शामिल होंगे।
इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी सम्मेलन के मद्देनज़र अंतरराष्ट्रीय यातायात प्रबंधन की तैयारी की गई है। रिपोर्टों के अनुसार टर्मिनल क्षमता बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय यातायात को व्यवस्थित करने के लिए अतिरिक्त परिचालन व्यवस्था लागू की गई है।
ऐसे माहौल में जेवर एयरपोर्ट का इस्तेमाल किसी विदेशी सैन्य विमान के लिए होना नए एयरपोर्ट की परिचालन क्षमता और दिल्ली-एनसीआर के वैकल्पिक विमानन ढांचे के लिहाज से भी अहम है।
भारत-रूस रिश्तों का बड़ा संदर्भ
रूस और भारत के संबंध लंबे समय से रक्षा, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग पर आधारित रहे हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच ऊर्जा व्यापार के साथ रक्षा तकनीक और औद्योगिक सहयोग पर भी बातचीत जारी रही है।
प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक अगस्त 2026 में मोदी और पुतिन ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और लोगों के बीच संपर्क समेत द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की थी। दोनों नेताओं ने रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति जताई।
इसलिए ब्रिक्स सम्मेलन से ठीक पहले रूसी सैन्य विमानों की मौजूदगी केवल एक विमानन घटना नहीं है। यह उस व्यापक कूटनीतिक माहौल का हिस्सा है जिसमें भारत और रूस अपने रणनीतिक रिश्तों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
क्या जेवर से पुतिन उतरेंगे?
फिलहाल उपलब्ध विश्वसनीय सूचनाओं के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि पुतिन का मुख्य विमान निश्चित रूप से जेवर एयरपोर्ट पर ही उतरेगा।
तीन रूसी सैन्य विमानों की लैंडिंग और रूसी एडवांस टीम की मौजूदगी जरूर सामने आई है। इसे पुतिन के भारत दौरे और ब्रिक्स सम्मेलन की तैयारी से जोड़ा जा रहा है। लेकिन अंतिम उड़ान मार्ग, विमान की लैंडिंग और सुरक्षा प्रोटोकॉल की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं है।
यही अंतर इस खबर में सबसे महत्वपूर्ण है। विमान पहुंचे हैं, एडवांस टीम आई है और ब्रिक्स सम्मेलन सामने है। लेकिन इससे आगे के हर दावे को आधिकारिक पुष्टि के बिना तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
जेवर एयरपोर्ट के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम?
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने जून 2026 में व्यावसायिक संचालन शुरू किया था। कुछ ही महीनों में यहां विदेशी सैन्य विमान का पहुंचना एयरपोर्ट के लिए एक महत्वपूर्ण परिचालन पड़ाव है।
यह घटनाक्रम यह भी दिखाता है कि दिल्ली-एनसीआर में विमानन ढांचा अब एक से अधिक बड़े एयरपोर्ट पर आधारित हो रहा है। भविष्य में इससे यात्री, कार्गो और विशेष विमान संचालन के लिए विकल्प बढ़ सकते हैं।
लेकिन जेवर के इस इस्तेमाल को स्थायी नीति या भविष्य के वीवीआईपी संचालन की शुरुआत कहना अभी उचित नहीं होगा। उसके लिए नागरिक उड्डयन और सुरक्षा एजेंसियों की औपचारिक जानकारी जरूरी होगी।
आगे क्या होगा?
अगले कुछ दिनों में सबसे ज्यादा निगाहें पुतिन के भारत आगमन, उनके विमान की लैंडिंग व्यवस्था और भारत-रूस वार्ता पर रहेंगी।
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था, रणनीतिक सहयोग और मौजूदा भू-राजनीतिक संकटों से जुड़े मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं। भारत और रूस के बीच रक्षा और ऊर्जा सहयोग भी द्विपक्षीय एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
जेवर एयरपोर्ट पर रूसी सैन्य विमानों की मौजूदगी फिलहाल एक स्पष्ट तथ्य है। इसका व्यापक सुरक्षा और प्रोटोकॉल संदर्भ सम्मेलन के दौरान और अधिक साफ हो सकता है।
जेवर एयरपोर्ट पर रूस के 3 सैन्य विमानों की लैंडिंग ने नए एयरपोर्ट को अचानक अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गतिविधि के केंद्र में ला दिया है। सबसे अहम तथ्य यह है कि यह जेवर पर पहली विदेशी विमान लैंडिंग बताई जा रही है और यह घटनाक्रम ब्रिक्स सम्मेलन तथा पुतिन के प्रस्तावित भारत दौरे से ठीक पहले हुआ है।
लेकिन अभी उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर इतना ही कहा जा सकता है कि रूसी एडवांस टीम और सैन्य अधिकारी भारत पहुंचे हैं तथा विमानों की मौजूदगी सम्मेलन से जुड़ी तैयारियों के संदर्भ में है। पुतिन के विमान के जेवर से उतरने या किसी विशेष गुप्त सुरक्षा मिशन से जुड़े दावों के लिए अभी अतिरिक्त आधिकारिक पुष्टि की जरूरत है।
Mohammad Naved
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।