नोएडा एयरपोर्ट वीडियो पर पुलिस की जांच शुरू
एयरपोर्ट वीडियो विवाद में ‘सच बोलो’ अकाउंट पर केस
जलभराव वाले वीडियो पर एफआईआर, पुलिस खंगालेगी पूरा सच
ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश
17 अगस्त 2026
By Mohd Naved
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के कथित भ्रामक वीडियो पर जेवर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की है। एयरपोर्ट प्रबंधन ने वीडियो को वास्तविक स्थिति से अलग बताया है। पुलिस फेसबुक अकाउंट, वीडियो के स्रोत और प्रसार की पड़ताल कर रही है। हालांकि 11 अगस्त को एयरपोर्ट क्षेत्र में जलभराव की स्वतंत्र रिपोर्ट भी सामने आई थी।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़े एक सोशल मीडिया वीडियो ने पुलिस जांच शुरू करा दी है। एयरपोर्ट प्रबंधन की शिकायत पर जेवर थाना पुलिस ने ‘सच बोलो’ नाम से संचालित फेसबुक अकाउंट के खिलाफ मामला दर्ज किया है। शिकायत में वीडियो को कथित तौर पर गलत और भ्रामक बताते हुए कहा गया है कि इससे यात्रियों और आम लोगों के बीच एयरपोर्ट की स्थिति को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है।
मामले की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एनसीआर की एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना है। ऐसे में सोशल मीडिया पर एयरपोर्ट से संबंधित किसी वीडियो की प्रामाणिकता का सवाल सीधे सार्वजनिक सूचना और यात्रियों के भरोसे से जुड़ता है।
उपलब्ध शिकायत के मुताबिक 14 अगस्त 2026 को ‘सच बोलो’ नाम के फेसबुक अकाउंट पर एक वीडियो अपलोड किया गया। वीडियो में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट परिसर में जलभराव जैसी स्थिति दिखाई गई थी।
एयरपोर्ट प्रबंधन ने शिकायत में इस वीडियो को गलत, भ्रामक और वास्तविक परिस्थितियों को तोड़-मरोड़कर पेश करने वाला बताया है। प्रबंधन का आरोप है कि वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने से लोगों के बीच एयरपोर्ट की वास्तविक स्थिति को लेकर गलत धारणा बन सकती है।
शिकायत मयंक कुमार, शिफ्ट इंचार्ज, सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन-एन की ओर से जेवर पुलिस को दी गई है।
अब पुलिस का फोकस वीडियो के मूल स्रोत, फेसबुक अकाउंट, अपलोड की परिस्थितियों और डिजिटल प्रसार की कड़ी पर है।
इस मामले में एक अहम तथ्य को अलग-अलग रखना जरूरी है। एयरपोर्ट प्रबंधन ने संबंधित वीडियो को भ्रामक बताया है, लेकिन स्वतंत्र रिपोर्टिंग से यह भी सामने आया है कि 11 अगस्त को भारी बारिश के बाद नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल और पार्किंग क्षेत्र के आसपास जलभराव हुआ था। टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस घटना की रिपोर्टिंग की है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि ‘सच बोलो’ अकाउंट पर अपलोड किया गया वही वीडियो वास्तविक था। दोनों घटनाओं को एक ही मानना जल्दबाजी होगी।
पुलिस की जांच का मूल सवाल यही होगा कि वीडियो में दिखाई गई तस्वीरें कब, कहां और किस परिस्थिति में रिकॉर्ड की गई थीं। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि वीडियो को संपादित किया गया था या नहीं और क्या उसमें किसी दूसरे स्थान या समय की फुटेज इस्तेमाल की गई।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जेवर, गौतम बुद्ध नगर में स्थित है और एनसीआर के लिए एक प्रमुख एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना के रूप में विकसित किया गया है। जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर एयरपोर्ट से संबंधित परियोजना और भूमि अधिग्रहण से जुड़े कई सरकारी नोटिस उपलब्ध हैं।
एयरपोर्ट से जुड़ी सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर पहले भी फर्जी सूचनाओं और संदिग्ध ऑनलाइन सामग्री के मामले सामने आते रहे हैं। अप्रैल 2026 में मीडिया रिपोर्टों में एयरपोर्ट के नाम पर फर्जी नौकरी के विज्ञापनों और सोशल मीडिया अकाउंट्स का भी उल्लेख किया गया था।
इस पृष्ठभूमि में नए वीडियो विवाद को केवल सोशल मीडिया पोस्ट के स्तर पर देखना पर्याप्त नहीं होगा। डिजिटल सामग्री की उत्पत्ति, संपादन और संदर्भ की जांच महत्वपूर्ण होगी।
एयरपोर्ट प्रबंधन का रुख स्पष्ट है। शिकायत में वीडियो को कथित तौर पर भ्रामक बताया गया है और पुलिस से कानूनी कार्रवाई का अनुरोध किया गया है।
दूसरी तरफ, उपलब्ध सामग्री में ‘सच बोलो’ फेसबुक अकाउंट संचालक का पक्ष या कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है। इसलिए इस चरण में अकाउंट संचालक की मंशा को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
पुलिस भी अभी जांच के चरण में है। इसलिए एफआईआर को आरोपों की कानूनी जांच की शुरुआत के रूप में देखना चाहिए, दोष सिद्ध होने के रूप में नहीं।
अभी उपलब्ध जानकारी तीन अलग-अलग स्तरों पर है। पहला, एयरपोर्ट प्रबंधन की शिकायत है। दूसरा, संबंधित फेसबुक वीडियो है, जिसकी पुलिस तकनीकी जांच कर रही है। तीसरा, 11 अगस्त को एयरपोर्ट क्षेत्र में बारिश के बाद जलभराव की स्वतंत्र मीडिया रिपोर्ट मौजूद है।
यहीं पर खबर की सबसे महत्वपूर्ण तथ्य-जांच सामने आती है। यदि किसी वीडियो में वास्तविक जलभराव दिखाया गया था, तो केवल इस आधार पर उसे फर्जी कहना पर्याप्त नहीं होगा। पुलिस को यह स्थापित करना होगा कि वीडियो उसी स्थान और समय का है या नहीं।
इसके लिए वीडियो का मेटाडेटा, मूल अपलोड, पुराने पोस्ट, फ्रेम-स्तरीय तुलना, लोकेशन संकेत और उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
यदि जांच में वीडियो को जानबूझकर गलत संदर्भ में पेश किया गया पाया जाता है, तो इससे एयरपोर्ट की सार्वजनिक छवि और यात्रियों की धारणा प्रभावित होने का सवाल उठ सकता है।
दूसरी तरफ, यदि वीडियो वास्तविक घटना का था लेकिन उसे अलग संदर्भ में प्रस्तुत किया गया, तो विवाद का स्वरूप अलग होगा। इसलिए पुलिस की तकनीकी जांच का निष्कर्ष इस पूरे मामले में निर्णायक महत्व रखेगा।
यह मामला सीधे किसी राजनीतिक दल या सरकार के खिलाफ निष्कर्ष निकालने का आधार नहीं है। इसका प्रमुख नीतिगत पहलू डिजिटल सूचना की विश्वसनीयता और महत्वपूर्ण सार्वजनिक बुनियादी ढांचे से जुड़ी सोशल मीडिया सामग्री की निगरानी है।
एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील सार्वजनिक संस्थान से जुड़ी गलत सूचना यात्रियों, एयरलाइन कर्मचारियों, निवेशकों और स्थानीय हितधारकों तक असर डाल सकती है। इसलिए आधिकारिक संस्थानों के लिए समय पर तथ्यात्मक स्पष्टीकरण देना भी महत्वपूर्ण है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास पहले से ही जमीन, रोजगार और कारोबारी गतिविधियों को लेकर बड़ा आर्थिक इकोसिस्टम विकसित हुआ है। एयरपोर्ट के नाम पर फर्जी नौकरी और जमीन से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग पहले भी हो चुकी है।
ऐसे माहौल में गलत सूचना का असर केवल यात्रियों तक सीमित नहीं रहता। स्थानीय कारोबार, रियल एस्टेट धारणा और क्षेत्र की निवेश छवि भी प्रभावित हो सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि वीडियो वास्तव में कहां और कब रिकॉर्ड किया गया था।
दूसरा सवाल है कि वीडियो में कोई संपादन, पुरानी फुटेज या दूसरे स्थान की तस्वीरें इस्तेमाल की गई थीं या नहीं।
तीसरा सवाल यह है कि ‘सच बोलो’ अकाउंट ने वीडियो का मूल स्रोत कहां से प्राप्त किया।
चौथा सवाल यह है कि वीडियो को कितने लोगों ने साझा किया और उसके प्रसार के पीछे कोई संगठित गतिविधि थी या नहीं।
इन सवालों का जवाब पुलिस की डिजिटल फॉरेंसिक जांच से मिलने की उम्मीद है।
जेवर पुलिस वीडियो के मूल स्रोत और सोशल मीडिया अकाउंट से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच करेगी। जांच में वीडियो की प्रामाणिकता, अपलोड का समय, मूल रिकॉर्डिंग और प्रसार की परिस्थितियों को देखा जाएगा।
मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगी। फिलहाल किसी व्यक्ति या अकाउंट संचालक को दोषी ठहराना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।
नोएडा एयरपोर्ट वीडियो विवाद में सबसे जरूरी बात आरोप और प्रमाण के बीच फर्क बनाए रखना है। एयरपोर्ट प्रबंधन ने वीडियो को कथित तौर पर भ्रामक बताया है और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। दूसरी तरफ, 11 अगस्त को एयरपोर्ट क्षेत्र में बारिश के बाद जलभराव की स्वतंत्र रिपोर्ट मौजूद है।
इसलिए अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकलना चाहिए। फिलहाल तथ्य इतना है कि एक वीडियो को लेकर शिकायत हुई है, एफआईआर दर्ज हुई है और पुलिस उसकी वास्तविकता तथा डिजिटल स्रोत की पड़ताल कर रही है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।