मुजफ्फरनगर के डासरी में Bio CBG प्लांट का उद्घाटन हुआ। परियोजना जैविक कचरे और कृषि अवशेषों से स्वच्छ ईंधन तैयार करने पर केंद्रित है। इससे कचरा प्रबंधन, वैकल्पिक ऊर्जा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा मिलने की उम्मीद है। हालांकि प्लांट की उत्पादन क्षमता और वाणिज्यिक आपूर्ति से जुड़े आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जरूरी है।
तारीख: 19 अगस्त 2026
By Wasi Siddiqui
मुजफ्फरनगर के जानसठ क्षेत्र में कचरे को ऊर्जा के संसाधन में बदलने की दिशा में एक नई पहल सामने आई है। ग्राम डासरी में श्री राधा रमण ग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के Bio CBG प्लांट का उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किया गया। उपलब्ध कार्यक्रम विवरण के मुताबिक यहां जैविक कचरे और उपयोगी जैविक पदार्थों से गैस तैयार कर उसे स्वच्छ ईंधन के तौर पर इस्तेमाल करने की दिशा में काम होगा।
कार्यक्रम में इन्द्रप्रस्थ गैस लिमिटेड के प्रबंध निदेशक कुमार शंकर मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। कंपनी से जुड़े पदाधिकारियों ने अतिथियों का स्वागत किया। संस्थापक संजय गर्ग के अलावा अमित गर्ग, विनोद गुप्ता और प्रवीण अग्रवाल समेत अन्य लोग कार्यक्रम में मौजूद रहे।
इन्द्रप्रस्थ गैस लिमिटेड के आधिकारिक दस्तावेज के मुताबिक कुमार शंकर ने 5 जून 2026 से कंपनी के प्रबंध निदेशक का पद संभाला है। इससे पहले वह महाराष्ट्र नेचुरल गैस लिमिटेड के प्रबंध निदेशक रहे थे।
डासरी में स्थापित परियोजना Waste to Energy अवधारणा पर आधारित है। इसका मूल विचार जैविक कचरे को केवल निस्तारण की समस्या के रूप में देखने के बजाय उससे उपयोगी ऊर्जा और अन्य उत्पाद तैयार करना है।
उपलब्ध कार्यक्रम सामग्री के अनुसार प्लांट में Bio CBG तकनीक के जरिए जैविक कचरे, कृषि अवशेषों और दूसरे उपयुक्त जैविक पदार्थों को प्रोसेस कर गैस तैयार की जाएगी। इसके बाद गैस को शुद्ध और संपीड़ित कर ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में काम होगा।
प्लांट की वास्तविक उत्पादन क्षमता, प्रतिदिन प्रस्तावित CBG उत्पादन, फीडस्टॉक की मात्रा और वाणिज्यिक आपूर्ति व्यवस्था से जुड़े आंकड़े उपलब्ध सामग्री में स्पष्ट नहीं हैं। इसलिए इन आंकड़ों को बिना आधिकारिक दस्तावेज के प्रकाशित करना उचित नहीं होगा।
Compressed Bio Gas यानी CBG जैविक पदार्थों से तैयार होने वाली गैस है। सामान्य प्रक्रिया में जैविक पदार्थों का ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में अपघटन किया जाता है। इससे कच्ची बायोगैस बनती है, जिसमें मुख्य रूप से मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड मौजूद होते हैं।
इसके बाद शुद्धिकरण प्रक्रिया के जरिए कार्बन डाइऑक्साइड, हाइड्रोजन सल्फाइड, नमी और अन्य अशुद्धियों को हटाया जाता है। उच्च शुद्धता वाली गैस को संपीड़ित करने के बाद CBG के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। पंजाब एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी भी CBG को कृषि अवशेष, पशु अपशिष्ट और अन्य जैविक पदार्थों से तैयार होने वाला वैकल्पिक ईंधन बताती है।
भारत में CBG को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने Sustainable Alternative Towards Affordable Transportation यानी SATAT पहल शुरू की थी। इसका उद्देश्य निजी उद्यमियों को CBG प्लांट स्थापित करने और तैयार गैस को Oil Marketing Companies तक पहुंचाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक देश में Bio-CNG यानी CBG के लिए पर्याप्त संभावनाएं हैं। इसका इस्तेमाल वाहनों, उद्योगों और अन्य ऊर्जा जरूरतों में किया जा सकता है। CBG उत्पादन के साथ जैव-उर्वरक जैसे सह-उत्पाद भी तैयार होते हैं।
इस मॉडल का एक अहम पहलू कृषि अवशेषों का इस्तेमाल है। खेतों में अवशेष जलाने की समस्या वाले इलाकों में यदि उपयुक्त फीडस्टॉक सप्लाई चेन तैयार होती है तो कचरे को आर्थिक संसाधन में बदलने की गुंजाइश बढ़ती है।
डासरी कार्यक्रम का मुख्य फोकस तकनीक, कचरा प्रबंधन और वैकल्पिक ईंधन पर रहा। कार्यक्रम के दौरान प्लांट की कार्यप्रणाली और Bio CBG से जुड़ी संभावनाओं पर चर्चा की गई।
इन्द्रप्रस्थ गैस लिमिटेड की मौजूदा नेतृत्व संरचना में कुमार शंकर की भूमिका भी इस पहल के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। IGL के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक उन्हें GAIL ने प्रबंध निदेशक के तौर पर नामित किया और उन्होंने 5 जून 2026 को पदभार संभाला।
हालांकि डासरी परियोजना और IGL के बीच किसी दीर्घकालिक CBG खरीद समझौते, ऑफटेक एग्रीमेंट या निश्चित आपूर्ति व्यवस्था की जानकारी उपलब्ध स्रोतों में प्रमाणित नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल एक संभावित कारोबारी या ऊर्जा-सहयोग के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के उपलब्ध रिकॉर्ड में Radha Raman Green Energy Private Limited के नाम से एक Green category Consent to Establish आवेदन दर्ज है, जिसे 10 मई 2025 को स्वीकृत बताया गया है। रिकॉर्ड में आवेदनकर्ता के तौर पर अमित गर्ग का नाम भी दर्ज है।
कंपनी से संबंधित सार्वजनिक कॉरपोरेट रिकॉर्ड में Radha Raman Green Energy Private Limited को 1 अप्रैल 2024 को निगमित निजी कंपनी बताया गया है। उपलब्ध रिकॉर्ड में इसके निदेशकों के तौर पर ऋषु गर्ग, अमित गर्ग, विनोद कुमार गुप्ता और उज्ज्वल गुप्ता के नाम दर्ज हैं।
ये दस्तावेज परियोजना से जुड़ी संस्थागत मौजूदगी और नियामकीय प्रक्रिया का संकेत देते हैं। लेकिन केवल Consent to Establish रिकॉर्ड से प्लांट के संचालन, उत्पादन क्षमता या व्यावसायिक उत्पादन की पुष्टि नहीं होती। इसके लिए Consent to Operate और अन्य प्रासंगिक दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी होगी।
यदि प्लांट नियमित और निर्धारित क्षमता के अनुसार संचालित होता है तो इसका पहला असर जैविक कचरे के प्रबंधन पर पड़ सकता है। कृषि अवशेष और दूसरे जैविक पदार्थ खुले में पड़े रहने या अनुपयुक्त तरीके से निस्तारित होने के बजाय ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया में इस्तेमाल हो सकते हैं।
दूसरा पहलू वैकल्पिक ईंधन का है। CBG के गुण CNG के समान होते हैं और इसे वाहनों तथा औद्योगिक इस्तेमाल के लिए वैकल्पिक गैस ईंधन के रूप में विकसित किया जा रहा है।
तीसरा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ा है। यदि स्थानीय स्तर पर फीडस्टॉक की खरीद, परिवहन, प्रसंस्करण और प्लांट संचालन की व्यवस्था बनती है तो इससे संबंधित रोजगार और सेवा गतिविधियां विकसित हो सकती हैं। हालांकि डासरी परियोजना से संभावित रोजगार या स्थानीय आय के संबंध में अभी कोई प्रमाणित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
CBG परियोजनाएं भारत की ऊर्जा नीति में बड़े बदलाव के व्यापक संदर्भ से जुड़ी हैं। SATAT पहल के जरिए सरकार ने घरेलू स्तर पर CBG उत्पादन बढ़ाने और प्राकृतिक गैस तथा पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने की दिशा में नीति तैयार की है।
इस क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती केवल प्लांट लगाना नहीं है। निरंतर फीडस्टॉक की उपलब्धता, गैस की गुणवत्ता, लॉजिस्टिक्स, बाजार तक पहुंच, वित्तीय व्यवहार्यता और ऑफटेक व्यवस्था परियोजना की कामयाबी तय करती है।
CBG प्लांट की आर्थिक व्यवहार्यता उसके फीडस्टॉक मॉडल पर काफी निर्भर करती है। कृषि अवशेष या अन्य जैविक सामग्री पर्याप्त मात्रा में और उचित लागत पर उपलब्ध नहीं होती तो उत्पादन लागत बढ़ सकती है।
इसके साथ तैयार गैस की बिक्री के लिए स्थिर बाजार जरूरी है। SATAT मॉडल में Oil Marketing Companies के साथ CBG आपूर्ति की व्यवस्था को बढ़ावा दिया गया है। सरकारी नीति में दीर्घकालिक खरीद व्यवस्था और वित्तीय सहायता जैसे प्रावधानों का भी इस्तेमाल हुआ है।
CBG उत्पादन से निकलने वाले जैविक अवशेषों का कृषि उपयोग भी महत्वपूर्ण है। पंजाब की सरकारी एजेंसी के अनुसार CBG परियोजनाओं से Fermented Organic Manure और Liquid Fermented Organic Manure जैसे सह-उत्पाद मिलते हैं।
भारत के लिए घरेलू जैव-ऊर्जा उत्पादन का महत्व आयातित ऊर्जा पर निर्भरता से भी जुड़ा है। केंद्र सरकार ने CBG को प्राकृतिक गैस आयात घटाने, कृषि अवशेषों के बेहतर इस्तेमाल और उत्सर्जन में कमी जैसे लक्ष्यों से जोड़ा है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कृषि गतिविधियों की बड़ी मौजूदगी ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए संभावित फीडस्टॉक आधार तैयार करती है। लेकिन किसी क्षेत्र को CBG हब बनाने के लिए केवल कृषि अवशेष पर्याप्त नहीं हैं। संग्रहण, परिवहन और प्रसंस्करण की पूरी सप्लाई चेन का मजबूत होना जरूरी है।
डासरी प्लांट की प्रतिदिन CBG उत्पादन क्षमता कितनी है? प्लांट में किस तरह का फीडस्टॉक इस्तेमाल होगा? कितनी मात्रा में जैविक कचरा रोजाना चाहिए होगा? तैयार CBG की बिक्री किस माध्यम से होगी? क्या किसी Oil Marketing Company के साथ ऑफटेक समझौता हुआ है?
इसके अलावा प्लांट को Consent to Operate कब मिला, व्यावसायिक उत्पादन कब शुरू होगा और परियोजना से कितनी स्थानीय रोजगार गतिविधि पैदा होने का अनुमान है, इन सवालों के आधिकारिक जवाब अभी सार्वजनिक सामग्री में स्पष्ट नहीं हैं।
डासरी परियोजना की वास्तविक सफलता उसके संचालन के बाद सामने आएगी। नियमित फीडस्टॉक, तकनीकी दक्षता, गैस की गुणवत्ता, लागत और बाजार तक पहुंच इसके प्रमुख पैमाने होंगे।
यदि परियोजना स्थायी रूप से संचालित होती है तो यह क्षेत्र में Waste to Energy मॉडल का स्थानीय उदाहरण बन सकती है। लेकिन इसका आकलन उद्घाटन कार्यक्रम से नहीं, बल्कि उत्पादन, पर्यावरणीय अनुपालन, आर्थिक प्रदर्शन और स्थानीय असर के प्रमाणित आंकड़ों से होना चाहिए।
जानसठ के डासरी में Bio CBG प्लांट का उद्घाटन मुजफ्फरनगर में कचरे से ऊर्जा तैयार करने की दिशा में एक अहम पहल है। उपलब्ध दस्तावेज कंपनी की नियामकीय प्रक्रिया और परियोजना से जुड़ी संस्थागत मौजूदगी की पुष्टि करते हैं, जबकि कार्यक्रम सामग्री Bio CBG उत्पादन की प्रस्तावित दिशा बताती है।
फिलहाल परियोजना की उत्पादन क्षमता, वाणिज्यिक आपूर्ति और वास्तविक पर्यावरणीय प्रभाव से जुड़े आंकड़े सामने आना बाकी हैं। इसलिए इस पहल का अंतिम मूल्यांकन उसके संचालन और प्रमाणित परिणामों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।