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वेतन और शिक्षा व्यवस्था को लेकर फ्रांस में उबाल, छात्रों की पुलिस से झड़प

Harish Qureshi • 2026-09-30 12:06:05
वेतन और शिक्षा व्यवस्था को लेकर फ्रांस में उबाल, छात्रों की पुलिस से झड़प

फ्रांस में 29 सितंबर को सरकारी कर्मचारियों ने वेतन और सार्वजनिक सेवाओं के मुद्दे पर हड़ताल की। इसी दौरान हाईस्कूल छात्रों के प्रदर्शन में कई जगह हिंसा, आगजनी और गिरफ्तारियां हुईं।


पेरिस, फ्रांस | 29–30 सितंबर 2026

By Mohd Haris


फ्रांस में सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल, छात्रों का प्रदर्शन हिंसक


फ्रांस में सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों की हड़ताल और हाईस्कूल छात्रों के विरोध प्रदर्शन ने सरकार के सामने नया दबाव पैदा किया है। 29 सितंबर 2026 को शिक्षकों, दमकलकर्मियों, स्वास्थ्यकर्मियों और दूसरे सरकारी कर्मचारियों ने वेतन, क्रय शक्ति और प्रस्तावित बजट कटौती के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन किया। इसी दौरान कई हाईस्कूलों में छात्रों ने प्रवेश द्वार बंद किए और कुछ स्थानों पर पुलिस के साथ झड़पें हुईं।


छात्रों की नाराजगी केवल वेतन विवाद से जुड़ी नहीं थी। उनके प्रदर्शन में शिक्षकों की कमी, भीड़भाड़ वाली कक्षाओं, लंबे टाइमटेबल और स्कूलों की भौतिक स्थिति जैसे मुद्दे भी शामिल थे। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार 29 सितंबर को करीब 400 स्कूलों में प्रदर्शन या व्यवधान की स्थिति बनी।


सरकारी कर्मचारी क्यों हड़ताल पर हैं

फ्रांस के सार्वजनिक क्षेत्र के कई कर्मचारी संगठनों ने 2027 में सरकारी कर्मचारियों के वेतन को फ्रीज करने के प्रस्ताव का विरोध किया है। यूनियनों का कहना है कि लंबे समय से बढ़ती जीवन-यापन लागत के बीच वेतन में पर्याप्त सुधार नहीं हुआ है।


शिक्षा क्षेत्र के कर्मचारी भी इस आंदोलन में शामिल हुए। उनकी मांगों में वेतन बढ़ोतरी, करियर प्रगति में सुधार और क्रय शक्ति की रक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं।


29 सितंबर को देशभर में करीब 170 प्रदर्शन आयोजित किए गए। प्रदर्शनकारियों की संख्या को लेकर सरकारी और यूनियन आंकड़ों में अंतर रहा। फ्रांस के गृह मंत्रालय ने देशभर में 206,000 प्रदर्शनकारियों का अनुमान दिया, जबकि CGT यूनियन ने संख्या 300,000 से अधिक बताई। पेरिस में सरकारी अनुमान 30,000 का था।


छात्रों का आंदोलन कैसे फैला


हाईस्कूल छात्रों का आंदोलन सार्वजनिक क्षेत्र की हड़ताल से पहले शुरू हुआ था। शुरुआत पेरिस और आसपास के इलाकों से हुई। बाद में यह देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंच गया।


छात्रों ने स्कूलों के बाहर प्रदर्शन कर प्रवेश द्वारों को अवरुद्ध किया। उनकी प्रमुख शिकायतों में कक्षाओं में अधिक छात्रों की संख्या, शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की कमी तथा पढ़ाई के लिए अपर्याप्त संसाधन शामिल रहे।


29 सितंबर को शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक करीब 400 स्कूल प्रदर्शन से प्रभावित हुए। इनमें लगभग 40 स्कूलों में नाकाबंदी की गई थी और 44 अन्य स्कूलों में नाकाबंदी की कोशिश हुई।


कई शहरों में पुलिस से झड़प


प्रदर्शन के दौरान हालात कई जगह तनावपूर्ण हो गए। लील में एक स्कूल के बाहर कूड़ेदानों में आग लगाए जाने की सूचना मिली। कुछ जगह छात्रों ने पुलिस की ओर वस्तुएं फेंकीं, जिसके बाद पुलिस ने आंसू गैस और बल प्रयोग किया।


रेंस में एक हाईस्कूल के बाहर छात्रों और सुरक्षा बलों के बीच तनाव की सूचना सामने आई। पेरिस क्षेत्र के सेंट-डेनिस में भी पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई गई थी। लियोन और नीस समेत कई अन्य शहरों में भी प्रदर्शन और तनाव की खबरें सामने आईं।


यहां यह फर्क रखना जरूरी है कि पूरे छात्र आंदोलन को हिंसक कहना सटीक नहीं होगा। अधिकांश प्रदर्शन स्कूलों के बाहर विरोध, नाकाबंदी और मांगों को लेकर थे। हिंसक घटनाएं कुछ स्थानों तक सीमित रहीं।


गिरफ्तारियों और चोटों को लेकर आंकड़े


29 सितंबर की घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया। उपलब्ध प्रशासनिक जानकारी के अनुसार कम से कम 440 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें बड़ी संख्या में नाबालिग छात्र शामिल थे।


घटनाओं में छात्रों और स्कूल कर्मचारियों समेत कई लोग घायल हुए। उपलब्ध रिपोर्टों में घायलों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं, इसलिए इस संख्या को एकल अंतिम आंकड़े के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।


आंदोलन का बजट विवाद से संबंध


सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल और छात्रों का आंदोलन अलग-अलग मुद्दों से शुरू हुआ, लेकिन दोनों का संबंध सरकार की सार्वजनिक खर्च और बजट नीति से जुड़ गया।

सरकार 2027 के बजट को लेकर खर्च कम करने और वित्तीय दबाव नियंत्रित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी इसका असर वेतन और सेवाओं पर पड़ने की आशंका के रूप में देख रहे हैं।


छात्रों की तरफ से भी शिक्षा व्यवस्था में कर्मचारियों और संसाधनों की कमी को लेकर असंतोष सामने आया है। इस वजह से दोनों आंदोलनों ने एक ही समय में सरकार पर राजनीतिक और सामाजिक दबाव बढ़ाया है।


सरकार का रुख


प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने शिक्षा क्षेत्र की चुनौतियों को स्वीकार किया है, लेकिन विरोध के दौरान हिंसक घटनाओं की आलोचना की है। सरकार का तर्क है कि सार्वजनिक वित्त पर दबाव को देखते हुए खर्च और बजट को नियंत्रित करना जरूरी है।


दूसरी ओर, कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि बजट नियंत्रण का भार सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों की आय और सेवाओं पर नहीं डाला जाना चाहिए।

यही मतभेद इस पूरे विवाद का प्रमुख केंद्र है।


पेरिस में भी बड़ा प्रदर्शन


पेरिस में सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों की बड़ी रैली हुई। गृह मंत्रालय के मुताबिक राजधानी में करीब 30,000 लोगों ने प्रदर्शन किया। इनमें लगभग 8,000 दमकलकर्मी शामिल थे। देशभर के सरकारी कर्मचारियों की संख्या और भागीदारी को लेकर भी सरकार तथा यूनियनों के आंकड़ों में अंतर रहा।


दमकलकर्मियों, शिक्षकों और स्वास्थ्य क्षेत्र के कर्मचारियों की भागीदारी ने आंदोलन को व्यापक रूप दिया। इससे यह केवल वेतन विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति और सरकारी खर्च पर व्यापक बहस का हिस्सा बन गया।


आगे की राह क्या है


अब सरकार के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ उसे 2027 के बजट को आगे बढ़ाना है, दूसरी तरफ सार्वजनिक क्षेत्र की यूनियनों और शिक्षा क्षेत्र की शिकायतों का समाधान तलाशना है।

फ्रांसीसी सरकार की ओर से सार्वजनिक कर्मचारियों के लिए कुछ लक्षित उपायों पर चर्चा की जा रही है, जिनमें अनुभव और करियर प्रगति से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं। हालांकि यूनियनों की मुख्य मांग व्यापक वेतन सुधार से जुड़ी है।


इसलिए आने वाले दिनों में सरकार और यूनियनों के बीच बातचीत महत्वपूर्ण होगी। छात्र आंदोलन भी शिक्षा क्षेत्र में संसाधनों और स्टाफ की कमी जैसे मुद्दों को राजनीतिक बहस के केंद्र में बनाए हुए है।


फ्रांस में बढ़ते सामाजिक दबाव का संकेत


29 सितंबर की घटनाओं ने फ्रांस में सार्वजनिक सेवाओं, वेतन और सरकारी बजट को लेकर गहरे मतभेद सामने रखे हैं। सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल और छात्रों के आंदोलन का एक साथ उभरना बताता है कि विवाद कई सामाजिक वर्गों तक फैल चुका है।


हालांकि प्रदर्शन के बड़े हिस्से शांतिपूर्ण रहे, कुछ शहरों में आगजनी, पुलिस से झड़प और गिरफ्तारियों ने स्थिति को गंभीर बनाया। अब सरकार के लिए चुनौती यह है कि वह बजट अनुशासन और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी मांगों के बीच संतुलन कैसे स्थापित करती है।

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Harish Qureshi

Harish Qureshi

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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