चिली में प्रस्तावित 2027 शिक्षा बजट कटौती के खिलाफ छात्र प्रदर्शन के दौरान सैंटियागो में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
By Mohd Haris
चिली की राजधानी सैंटियागो में प्रस्तावित शिक्षा बजट कटौती के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन गुरुवार को हिंसक झड़पों में बदल गया। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई जगह टकराव हुआ, जिसके बाद पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शन 2027 के प्रस्तावित बजट में सार्वजनिक शिक्षा के लिए संभावित कटौती के विरोध में आयोजित किया गया था। राष्ट्रपति जोस एंतोनियो कास्त ने इसके एक दिन पहले बजट प्रस्ताव पेश किया था।
छात्र संगठनों की अगुवाई में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सैंटियागो की सड़कों पर उतरे। मार्च का आयोजन चिली के छात्र महासंघ CONFECH ने किया था। शिक्षकों और श्रमिक संगठनों ने भी आंदोलन में भाग लिया।
प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। पुलिस ने रास्ते को नियंत्रित करने और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछार और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
स्थानीय पुलिस के अनुसार प्रदर्शन के दौरान कम से कम 17 लोगों को हिरासत में लिया गया। अन्य स्थानीय रिपोर्टों में बाद में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या अधिक बताई गई है, इसलिए अंतिम आंकड़े को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग
प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा सार्वजनिक शिक्षा के लिए सरकारी फंडिंग है। छात्र संगठन प्रस्तावित 2027 बजट में शिक्षा क्षेत्र के खर्च में संभावित कमी का विरोध कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों का नारा था कि सार्वजनिक शिक्षा के लिए बजट में कटौती स्वीकार नहीं की जाएगी। मार्च में छात्रों के साथ शिक्षक और श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर, बोतल और डंडे फेंके। इसके जवाब में कैराबिनेरोस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
प्रशासन की कार्रवाई का मकसद प्रदर्शन को नियंत्रित करना और प्रमुख सड़कों पर व्यवस्था बनाए रखना बताया गया है। हालांकि, पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के व्यवहार दोनों को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार कॉन्फेच की मार्च को मेट्रोपॉलिटन प्रेसिडेंशियल डेलीगेशन से अनुमति मिली थी। इसके बावजूद मार्च के दौरान कई स्थानों पर अव्यवस्था और पुलिस के साथ टकराव हुआ।
प्रदर्शनकारियों की संख्या को लेकर भी अलग-अलग आंकड़े सामने आए। पुलिस ने करीब 6,000 लोगों की मौजूदगी बताई, जबकि कॉन्फेच की प्रवक्ता ने 20,000 से ज्यादा छात्रों, शिक्षकों और श्रमिकों के शामिल होने का दावा किया। दोनों आंकड़े संबंधित पक्षों के बयान हैं।
प्रदर्शन के दौरान पोंटिफिकल कैथोलिक विश्वविद्यालय के बाहर अलग-अलग छात्र समूहों के बीच भी विवाद हुआ। कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि विरोध मार्च से अलग रुख रखने वाले छात्रों पर पत्थरों और डंडों से हमला किया गया।
सरकार की ओर से इन घटनाओं की आलोचना की गई और कहा गया कि प्रदर्शन का अधिकार दूसरे विचार रखने वाले लोगों के खिलाफ हिंसा का अधिकार नहीं देता।
यह घटना दिखाती है कि शिक्षा बजट को लेकर विवाद केवल सरकार और छात्र संगठनों के बीच नहीं है। विश्वविद्यालय परिसर के भीतर अलग-अलग छात्र समूहों के बीच राजनीतिक मतभेद भी सामने आए हैं।
प्रदर्शन की पृष्ठभूमि चिली सरकार के 2027 बजट प्रस्ताव से जुड़ी है। राष्ट्रपति जोस एंतोनियो कास्त के प्रशासन ने बजट में खर्च कम करने की दिशा में प्रस्ताव रखे हैं।
छात्र संगठनों का कहना है कि शिक्षा पर संभावित कटौती सार्वजनिक विश्वविद्यालयों और शिक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ा सकती है। सरकार की ओर से बजट को व्यापक वित्तीय प्राथमिकताओं और सार्वजनिक खर्च के प्रबंधन के संदर्भ में देखा जा रहा है।
सार्वजनिक परिवहन पर भी असर
प्रदर्शन के दौरान सैंटियागो की कुछ प्रमुख सड़कों पर यातायात प्रभावित हुआ। स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक कैथोलिक विश्वविद्यालय मेट्रो स्टेशन को सुरक्षा कारणों से कुछ समय के लिए बंद किया गया था।
बाद में स्टेशन को दोबारा यात्रियों के लिए खोल दिया गया।
इससे राजधानी में सार्वजनिक परिवहन और सामान्य आवाजाही पर भी प्रदर्शन का असर पड़ा।
राष्ट्रपति कास्त ने प्रदर्शन के दौरान अलग विचार रखने वाले छात्रों के खिलाफ हिंसा की आलोचना की और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का उल्लेख किया। सरकार ने छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसक घटनाओं को लेकर कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया।
सरकार और प्रदर्शनकारी संगठनों के बीच मुख्य मतभेद शिक्षा बजट, सार्वजनिक खर्च और शिक्षा क्षेत्र के लिए भविष्य की वित्तीय प्राथमिकताओं को लेकर है।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं, लेकिन पूरी रैली को हिंसक बताना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा। बड़ी संख्या में लोग मार्च में शामिल हुए और हिंसक घटनाएं प्रदर्शन के कुछ हिस्सों में दर्ज हुईं।
इसी तरह हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। एक सरकारी बयान में 17 हिरासत की जानकारी दी गई, जबकि स्थानीय पुलिस के बाद के आंकड़ों में संख्या अधिक बताई गई।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।