प्रिचर्ड कोलन का निधन, 221 दिन कोमा में रहे थे
2015 की बॉक्सिंग चोट के बाद प्रिचर्ड कोलन नहीं बच सके
33 साल की उम्र में प्रिचर्ड कोलन का निधन, बॉक्सिंग जगत में शोक
प्यूर्टो रिकन बॉक्सर प्रिचर्ड कोलन का 33 साल की उम्र में निधन हो गया। उनके पिता रिचर्ड कोलन ने 13 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उनके निधन की जानकारी दी। रिपोर्ट के मुताबिक, 2015 की एक बॉक्सिंग फाइट में गंभीर ब्रेन इंजरी के बाद कोलन ने करीब 11 साल स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के बीच बिताए।
कोलन उस समय बॉक्सिंग के उभरते सितारों में गिने जाते थे। अक्टूबर 2015 में टेरेल विलियम्स के खिलाफ मुकाबले ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। फाइट के बाद वे ड्रेसिंग रूम में गिर पड़े और अस्पताल पहुंचने पर उनके दिमाग में सबड्यूरल हेमेटोमा पाया गया। इसके बाद उनकी इमरजेंसी सर्जरी हुई और वे 221 दिनों तक कोमा में रहे।
17 अक्टूबर 2015 को अमेरिका के वर्जीनिया स्थित फेयरफैक्स में कोलन का मुकाबला टेरेल विलियम्स से हुआ था। उस समय कोलन 16-0 के रिकॉर्ड के साथ पेशेवर बॉक्सिंग में अपराजित थे और उन्हें एक बड़ी संभावना माना जा रहा था।
मुकाबले के दौरान कोलन ने सिर के पीछे लगने वाले मुक्कों की शिकायत की थी। बॉक्सिंग में ऐसे प्रहारों को “रैबिट पंच” कहा जाता है और वे अवैध माने जाते हैं। वर्ल्ड बॉक्सिंग काउंसिल ने बाद में कोलन की घटना को बॉक्सिंग में रैबिट पंच के खिलाफ सुरक्षा नियमों को मजबूत करने के उदाहरण के तौर पर इस्तेमाल किया।
रेफरी ने मुकाबले के दौरान विलियम्स के खिलाफ एक रैबिट पंच पर पेनल्टी भी लगाई थी। मुकाबला नौवें राउंड में उस समय खत्म हुआ जब कोलन की टीम ने उनके ग्लव्स उतार दिए। टीम को लगा था कि मुकाबला समाप्त हो चुका है। इसके बाद कोलन को डिसक्वालिफाई कर दिया गया।
रिंग से बाहर निकलने के बाद कोलन की हालत तेजी से बिगड़ी। उन्हें उल्टी और चक्कर आने के बाद ड्रेसिंग रूम में गिरते हुए बताया गया। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने सबड्यूरल हेमेटोमा का पता लगाया।
मेडिकल टीम ने उनके दिमाग पर दबाव कम करने के लिए इमरजेंसी सर्जरी की। इसके बाद कोलन कोमा में चले गए और 221 दिनों तक उसी स्थिति में रहे। वर्ल्ड बॉक्सिंग काउंसिल ने भी उस समय की चोट और 221 दिन के कोमा का रिकॉर्ड दर्ज किया है।
कोमा से बाहर आने के बाद कोलन को गंभीर न्यूरोलॉजिकल क्षति का सामना करना पड़ा। उन्हें लंबे समय तक चौबीसों घंटे देखभाल की जरूरत रही। परिवार ने उनकी रिहैबिलिटेशन और थेरेपी जारी रखी।
वर्ल्ड बॉक्सिंग काउंसिल ने वर्षों पहले कोलन की स्थिति को स्थायी और गंभीर ब्रेन इंजरी से जोड़ा था। संस्था ने बताया था कि वे कंप्यूटर की मदद से संवाद सीख रहे थे। उनकी मां नीवेस मेलेंडेज़ उनकी देखभाल में लंबे समय तक सक्रिय रहीं।
कोलन की चोट ने बॉक्सिंग में सिर के पीछे होने वाले अवैध प्रहारों और रिंगसाइड मेडिकल निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। वर्ल्ड बॉक्सिंग काउंसिल ने उनकी घटना के बाद रैबिट पंच के खिलाफ सख्त कार्रवाई और रेफरी के लिए जीरो-टॉलरेंस दृष्टिकोण पर जोर दिया।
डब्ल्यूबीसी ने बाद में “प्रिचर्ड कोलन रूल” नाम से एक विशेष निर्देश लागू किया। इसका मकसद रैबिट पंच पर रेफरी की कार्रवाई को ज्यादा सख्त बनाना था। संगठन ने कहा कि ऐसे प्रहारों को रोकने के लिए रेफरी और ट्रेनर्स दोनों की जिम्मेदारी अहम है।
इस वजह से कोलन की कहानी केवल एक बॉक्सर की व्यक्तिगत त्रासदी तक सीमित नहीं रही। उनका नाम बॉक्सिंग सेफ्टी और सिर की चोटों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बन गया।
2015 की उस फाइट से पहले कोलन का पेशेवर रिकॉर्ड 16 जीत और कोई हार नहीं था। उनकी 13 जीत नॉकआउट के जरिए आई थीं। उन्हें बॉक्सिंग के उभरते हुए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों में माना जा रहा था।
वर्ल्ड बॉक्सिंग काउंसिल ने 2021 में उन्हें मानद चैंपियन का सम्मान दिया। उस समय संगठन ने उनकी बहादुरी और लंबे स्वास्थ्य संघर्ष को बॉक्सिंग समुदाय के लिए प्रेरणा बताया था।
उनका करियर उस मुकाबले के बाद आगे नहीं बढ़ सका। लेकिन उनकी कहानी बॉक्सिंग रिंग से बाहर भी दुनिया भर के खेल प्रशंसकों तक पहुंची।
कोलन के पिता रिचर्ड कोलन ने 13 अगस्त को सोशल मीडिया पर उनके निधन की जानकारी दी। उन्होंने अपने बेटे को याद करते हुए परिवार और समर्थकों के वर्षों के प्यार तथा दुआओं के लिए आभार जताया।
उनके निधन के बाद बॉक्सिंग जगत में श्रद्धांजलियों का सिलसिला शुरू हुआ। डब्ल्यूबीसी और अन्य बॉक्सिंग संस्थाओं ने कोलन के संघर्ष और उनकी कहानी को याद किया।
उपलब्ध रिपोर्टिंग कोलन की मौत को उनकी 2015 की गंभीर ब्रेन इंजरी और उसके बाद के लंबे स्वास्थ्य संघर्ष के संदर्भ में रखती है। उनकी मौत को उसी बॉक्सिंग चोट से जोड़कर रिपोर्ट किया है।
हालांकि एएस की रिपोर्ट के मुताबिक उनकी मृत्यु की सटीक मेडिकल वजह सार्वजनिक रूप से विस्तृत नहीं की गई है। इसलिए संपादकीय तौर पर यह कहना अधिक सटीक है कि कोलन की जिंदगी 2015 की गंभीर ब्रेन इंजरी के बाद बदल गई और करीब 11 साल बाद उनका निधन हुआ।
कोलन की कहानी ने बॉक्सिंग में सुरक्षा को लेकर लंबे समय तक चर्चा को प्रभावित किया। रैबिट पंच पर कार्रवाई, रेफरी की निगरानी और मेडिकल स्टाफ की भूमिका जैसे मुद्दे उनके मामले के बाद ज्यादा प्रमुख हुए। डब्ल्यूबीसी ने उनके नाम पर नियम तैयार करना इसी बदलाव का एक अहम उदाहरण है।
उनकी विरासत का दूसरा पहलू उनकी फैमिली का वर्षों तक चला संघर्ष है। कोमा से बाहर आने के बाद भी उन्हें लगातार देखभाल और रिहैबिलिटेशन की जरूरत रही। इस दौरान उनकी मां और परिवार उनके साथ रहे।
कोलन की कहानी यह सवाल सामने रखती है कि बॉक्सिंग में गंभीर सिर की चोट के संकेत मिलने पर मुकाबला रोकने की प्रक्रिया कितनी प्रभावी है। रैबिट पंच पहले से प्रतिबंधित हैं, लेकिन नियमों का सख्त और समय पर पालन उतना ही अहम है।
डब्ल्यूबीसी का प्रिचर्ड कोलन रूल इसी दिशा में एक संस्थागत प्रतिक्रिया था। लेकिन किसी नियम की असली कामयाबी उसके कागज पर होने से नहीं, बल्कि रिंग में उसके लगातार और निष्पक्ष अमल से तय होती है।
प्रिचर्ड कोलन का 33 साल की उम्र में निधन बॉक्सिंग जगत के लिए एक दर्दनाक खबर है। 2015 में टेरेल विलियम्स के खिलाफ मुकाबले के बाद गंभीर ब्रेन इंजरी, 221 दिनों का कोमा और उसके बाद वर्षों तक चला स्वास्थ्य संघर्ष उनकी जिंदगी का हिस्सा बना रहा।
उनकी कहानी ने बॉक्सिंग सेफ्टी पर भी असर डाला। डब्ल्यूबीसी ने रैबिट पंच के खिलाफ सख्त नियमों की वकालत की और उनके नाम पर विशेष नियम बनाया। कोलन की जिंदगी और संघर्ष अब खेल इतिहास में उस चेतावनी के रूप में दर्ज रहेंगे कि रिंग में एक गंभीर चोट का असर मुकाबला खत्म होने के बाद भी दशकों तक रह सकता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।