नीरज चोपड़ा का एशियन गेम्स से बाहर होना बना भावुक पल, टखने की चोट पर पहली बार खुलकर बोले
Mohammad Naved
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2026-09-19 13:25:16
📍 नई दिल्ली 🗓️ 19 सितंबर 2026 ✍️ मोहम्मद नावेद
टखने की लिगामेंट चोट से एशियन गेम्स से बाहर नीरज चोपड़ा ने भावुक पोस्ट में कहा कि भारत का प्रतिनिधित्व न कर पाना मुश्किल है और दोस्तों का साथ इस दौर में अहम रहा।
एशियन गेम्स से बाहर नीरज का दर्द सामने आया
भारत के स्टार भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा इस बार एशियन गेम्स में मैदान पर नजर नहीं आएंगे। टखने की लिगामेंट चोट के कारण प्रतियोगिता से बाहर होने के बाद उन्होंने पहली बार विस्तार से अपनी भावनाएं साझा की हैं। नीरज ने कहा कि भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका गंवाना उनके लिए तकलीफदेह है।
लिंक्डइन पोस्ट में क्या बोले नीरज
नीरज ने अपने लिंक्डइन पोस्ट में एशियन गेम्स से जुड़ी पुरानी यादों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 2018 में जकार्ता एशियन गेम्स में उन्होंने भारत के ध्वजवाहक के रूप में हिस्सा लिया था। उस समय उनकी उम्र 20 साल थी और उन्होंने भाला फेंक में स्वर्ण पदक जीता था।
2023 के हांगझोऊ एशियन गेम्स में भी नीरज ने अपना खिताब बरकरार रखा। भारत सरकार के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, उन्होंने पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा में लगातार दूसरा एशियन गेम्स स्वर्ण पदक हासिल किया था।
नीरज के मुताबिक, एशियन गेम्स उनके करियर के कुछ सबसे खास मुकाबलों से जुड़े रहे हैं। ऐसे में 2026 के संस्करण में भारत के लिए प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाना उनके लिए आसान नहीं है।
टखने की लिगामेंट चोट बनी वजह
नीरज ने बताया कि वह टखने की लिगामेंट चोट से जूझ रहे हैं। काफी विचार के बाद उन्हें एशियन गेम्स से हटने का फैसला लेना पड़ा। उनकी चोट ने 2026 के एशियन गेम्स के साथ डायमंड लीग फाइनल में उनकी भागीदारी की संभावनाओं को भी खत्म कर दिया।
एशियन गेम्स 2026 का आयोजन 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक जापान के आइची-नागोया क्षेत्र में हो रहा है।
देश की उम्मीदों के साथ मैदान पर उतरना सम्मान है”
नीरज ने अपने संदेश में देश के लिए खेलने को बड़ी जिम्मेदारी और सम्मान बताया। उन्होंने संकेत दिया कि चोट के कारण इस मौके से दूर रहना उनके लिए भावनात्मक रूप से कठिन है।
उन्होंने नागोया पहुंची भारतीय टीम को शुभकामनाएं दीं। नीरज ने कहा कि वह इस बार खिलाड़ियों के साथ चलना मिस करेंगे, लेकिन प्रतियोगिता के दौरान बाहर से भारतीय दल का समर्थन करते रहेंगे।
मुश्किल दौर में दोस्तों का सहारा
नीरज ने अपनी पोस्ट में चोट से ज्यादा उस दौर की मानसिक चुनौती पर बात की। उन्होंने बताया कि खिलाड़ी लंबे समय तक ट्रेनिंग, यात्रा और प्रतियोगिताओं के कारण घर से दूर रहते हैं। ऐसे में करीबी लोगों का साथ अहम हो जाता है।
उनके मुताबिक, मुश्किल समय में हमेशा सलाह की जरूरत नहीं होती। कभी-कभी दोस्त का फोन करना और किसी दूसरे विषय पर बातचीत करना भी राहत देता है।
नीरज ने बताया कि उनके कुछ दोस्त जानते हैं कि वह इस समय अच्छे दौर से नहीं गुजर रहे हैं। इसके बावजूद वे फोन पर उनकी चोट के बारे में लगातार सवाल नहीं करते। वे सामान्य बातचीत करते हैं, पुरानी यादें साझा करते हैं और आगे मिलने की योजनाओं पर बात करते हैं।
चोटों से जूझने का पुराना सिलसिला
नीरज के करियर में चोटों का यह पहला मामला नहीं है। 2019 में उन्हें दाएं हाथ की कोहनी की सर्जरी करानी पड़ी थी। 2022 में ग्रोइन इंजरी के कारण वह कॉमनवेल्थ गेम्स से बाहर रहे थे।
2023 और 2024 में भी उन्हें मांसपेशियों और एडडक्टर से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा। अब टखने की लिगामेंट चोट ने उनके 2026 सीजन को प्रभावित किया है।
नीरज के बिना भारत की एथलेटिक्स चुनौती
नीरज की गैरमौजूदगी भारतीय एथलेटिक्स दल के लिए अहम बदलाव है। वह पिछले दो एशियन गेम्स में भाला फेंक का स्वर्ण जीत चुके हैं और भारतीय दल के प्रमुख पदक दावेदारों में शामिल रहे हैं।
रॉयटर्स के मुताबिक, नीरज की गैरमौजूदगी के बावजूद भारतीय दल को एथलेटिक्स, शूटिंग और तीरंदाजी में मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद है।
उनकी अनुपस्थिति में भारतीय एथलेटिक्स टीम के दूसरे खिलाड़ियों पर ज्यादा निगाहें रहेंगी। हालांकि किसी एक खिलाड़ी की गैरमौजूदगी को पूरे दल के प्रदर्शन का सीधा पैमाना मानना उचित नहीं होगा।
एशियन गेम्स का बड़ा मंच
आइची-नागोया एशियन गेम्स में 43 खेलों के तहत 469 पदक स्पर्धाएं निर्धारित हैं। प्रतियोगिता में 45 देशों और क्षेत्रों के खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं।
भारत ने पिछले हांगझोऊ एशियन गेम्स में 107 पदक जीते थे। इस बार भी भारतीय दल से मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है, हालांकि नीरज की गैरमौजूदगी भाला फेंक स्पर्धा में एक अहम बदलाव है।
अब नीरज की नजर आगे
नीरज ने अपने संदेश में चोट के बीच एक अहम बात कही। खेल में हर परिस्थिति खिलाड़ी के नियंत्रण में नहीं होती, लेकिन उसके प्रति प्रतिक्रिया उसके हाथ में रहती है।
फिलहाल उनका ध्यान प्रतियोगिता में उतरने के बजाय चोट से उबरने पर है। एशियन गेम्स में उनकी गैरमौजूदगी भारतीय खेल प्रशंसकों के लिए निश्चित रूप से एक बड़ा बदलाव है, लेकिन उनका संदेश यह भी बताता है कि अंतरराष्ट्रीय खेल करियर में चोट और वापसी दोनों अहम पड़ाव होते हैं।
नागोया में भारतीय खिलाड़ी प्रतियोगिता में उतर रहे हैं और नीरज मैदान से बाहर रहकर उनका समर्थन करेंगे। उनके लिए यह एशियन गेम्स पदक से ज्यादा उस मंच की यादों और भारत के लिए खेलने से जुड़े रिश्ते का भी हिस्सा रहा है।
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Mohammad Naved
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।