बेसन, दही और हल्दी का घरेलू फेस पैक त्वचा को मुलायम और साफ महसूस करा सकता है, लेकिन इसे प्राकृतिक ब्लीच मानना सही नहीं। संवेदनशील त्वचा वालों को पहले पैच टेस्ट करना चाहिए।
ब्यूटी पार्लर के बजाय घरेलू फेस पैक का चलन क्यों बढ़ा?
नई दिल्ली। चेहरे की चमक और त्वचा की देखभाल के लिए लोग अक्सर महंगे कॉस्मेटिक उत्पादों और ब्यूटी पार्लर का सहारा लेते हैं। वहीं घरेलू नुस्खों में बेसन, दही और हल्दी जैसे आसानी से उपलब्ध खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल भी लंबे समय से किया जाता रहा है। सोशल मीडिया पर इन तीनों से बने मिश्रण को कई बार ‘प्राकृतिक ब्लीच’ बताकर चेहरे का रंग निखारने का दावा किया जाता है।
लेकिन यहां एक जरूरी फर्क समझना चाहिए। बेसन, दही और हल्दी से बने फेस पैक को रासायनिक ब्लीच का प्राकृतिक विकल्प या त्वचा का रंग बदलने वाला प्रमाणित उपचार नहीं कहा जा सकता। इससे त्वचा कुछ समय के लिए साफ, मुलायम या चमकदार दिखाई दे सकती है, लेकिन इसका मतलब त्वचा का वास्तविक रंग बदलना नहीं है।अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के अनुसार, चेहरे पर किसी भी नए मास्क या त्वचा संबंधी उत्पाद को इस्तेमाल करने से पहले छोटे हिस्से पर परीक्षण करना बेहतर होता है, क्योंकि कुछ उत्पाद त्वचा में जलन या दूसरी प्रतिक्रिया पैदा कर सकते हैं।
बेसन त्वचा पर क्या कर सकता है?
बेसन यानी चने के आटे का इस्तेमाल भारतीय घरेलू त्वचा देखभाल में काफी पुराना है। इसे पानी या दूसरे पदार्थों के साथ मिलाकर चेहरे पर लगाया जाता है।बेसन का महीन पाउडर त्वचा की सतह से अतिरिक्त तेल और जमा पदार्थों को हटाने में मदद कर सकता है। फेस पैक सूखने के बाद जब इसे धोया जाता है तो त्वचा कुछ लोगों को अस्थायी रूप से साफ और चिकनी महसूस हो सकती है।हालांकि, इसे त्वचा की गहराई से सफाई करने वाला चिकित्सकीय उपचार या पिगमेंटेशन दूर करने की प्रमाणित विधि कहना उचित नहीं होगा।इसके अलावा, चेहरे पर बेसन का लेप लगाकर जोर से रगड़ना भी सही तरीका नहीं है। अधिक घर्षण से त्वचा में जलन और रूखापन बढ़ सकता है।
दही का इस्तेमाल क्यों किया जाता है?
दही में लैक्टिक एसिड पाया जाता है। लैक्टिक एसिड एक प्रकार का अल्फा हाइड्रॉक्सी एसिड है, जिसका इस्तेमाल त्वचा देखभाल के कई उत्पादों में किया जाता है।लेकिन घर में इस्तेमाल किए जाने वाले दही में लैक्टिक एसिड की मात्रा, अम्लता और अन्य घटक निश्चित नहीं होते। इसलिए इसे बाजार में मिलने वाले नियंत्रित त्वचा देखभाल उत्पाद के बराबर मानना सही नहीं है।दही लगाने के बाद त्वचा कुछ लोगों को मुलायम और नम महसूस हो सकती है। लेकिन यदि किसी व्यक्ति की त्वचा संवेदनशील है, पहले से जलन है या त्वचा पर कोई बीमारी है तो घरेलू फेस पैक भी परेशानी बढ़ा सकता है।
हल्दी से चेहरे पर क्या असर पड़ सकता है?
हल्दी में करक्यूमिन नामक प्रमुख यौगिक पाया जाता है और इसके सूजनरोधी गुणों पर वैज्ञानिक अध्ययन हुए हैं। इसी वजह से हल्दी का इस्तेमाल पारंपरिक घरेलू नुस्खों में भी किया जाता है।लेकिन त्वचा पर हल्दी लगाने को लेकर किए जाने वाले हर दावे को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं माना जा सकता। उदाहरण के लिए, क्लीवलैंड क्लिनिक की त्वचा विशेषज्ञ संबंधी जानकारी में हल्दी को सीधे त्वचा पर लगाने को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है, क्योंकि इससे कुछ लोगों में जलन हो सकती है और त्वचा पर पीला दाग भी रह सकता है। इसलिए हल्दी को फेस पैक में शामिल करने का मतलब यह नहीं कि इससे तुरंत त्वचा का रंग निखर जाएगा या दाग-धब्बे खत्म हो जाएंगे।
क्या यह सचमुच प्राकृतिक ब्लीच है?
नहीं, इसे प्राकृतिक ब्लीच कहना सही नहीं होगा। ब्लीचिंग का अर्थ आम तौर पर त्वचा के रंगद्रव्य पर असर डालना या त्वचा को हल्का दिखाने वाली प्रक्रिया से होता है। बेसन, दही और हल्दी का घरेलू मिश्रण ऐसा प्रमाणित उपचार नहीं है। फेस पैक लगाने और धोने के बाद त्वचा की ऊपरी सतह पर मौजूद तेल या गंदगी कम होने से चेहरा कुछ समय के लिए अधिक साफ और चमकदार दिखाई दे सकता है। त्वचा में नमी बढ़ने से भी वह मुलायम लग सकती है। लेकिन इसे “पहली बार में ही रंग साफ” या “गोरा करने वाला प्राकृतिक ब्लीच” कहना भ्रामक हो सकता है।
घर पर लगाना हो तो कैसे रखें सावधानी?
अगर कोई व्यक्ति अपनी त्वचा पर यह घरेलू फेस पैक आजमाना चाहता है तो सबसे जरूरी बात है कि इसे तुरंत पूरे चेहरे पर न लगाएं।अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी नए त्वचा उत्पादों को पहले छोटे हिस्से पर परीक्षण करने की सलाह देती है। उसके अनुसार किसी नए उत्पाद से लालिमा, खुजली या सूजन जैसी प्रतिक्रिया हो सकती है। घरेलू मिश्रण के मामले में भी सावधानी बरतना बेहतर है।
सामान्य तरीका:
बेसन की थोड़ी मात्रा में सादा दही और बहुत कम मात्रा में हल्दी मिलाकर पतला लेप तैयार किया जा सकता है। इसे चेहरे पर हल्की परत में लगाया जाए और सूखने के बाद बिना जोर से रगड़े पानी से धो लिया जाए। लेकिन यह किसी चिकित्सकीय उपचार की विधि नहीं है। हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है, इसलिए एक व्यक्ति को अनुकूल लगने वाला मिश्रण दूसरे व्यक्ति की त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है।
पैच टेस्ट क्यों जरूरी है?
किसी भी नए त्वचा उत्पाद या फेस मास्क के इस्तेमाल से पहले पैच टेस्ट करना एक महत्वपूर्ण सावधानी है।अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के मुताबिक नए त्वचा उत्पाद को छोटे हिस्से पर परीक्षण करने से संभावित नकारात्मक प्रतिक्रिया का अंदाजा लगाने में मदद मिल सकती है। यदि परीक्षण वाले हिस्से पर जलन, खुजली, लालिमा, सूजन या किसी अन्य तरह की परेशानी दिखाई दे तो चेहरे पर इसे नहीं लगाना चाहिए।विशेष रूप से संवेदनशील त्वचा, एक्जिमा या पहले से किसी त्वचा संबंधी समस्या वाले लोगों को घरेलू प्रयोगों में अतिरिक्त सावधानी रखनी चाहिए।
किन लोगों को घरेलू फेस पैक से बचना चाहिए?
जिन लोगों की त्वचा पहले से लाल, जली हुई, छिली हुई या संक्रमित है, उन्हें बिना चिकित्सकीय सलाह के घरेलू फेस पैक नहीं लगाना चाहिए।अगर चेहरे पर लगातार खुजली, लाल चकत्ते, सूजन या जलन रहती है तो इसका कारण केवल त्वचा का रूखापन नहीं हो सकता। कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस जैसी स्थिति में किसी पदार्थ के संपर्क से त्वचा में प्रतिक्रिया हो सकती है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा के अनुसार कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस में चेहरे पर खुजली, सूखापन, दरार या अन्य लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे मामलों में घरेलू नुस्खों के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना अधिक उचित है।
क्या रोजाना यह फेस पैक लगाना चाहिए?
जरूरी नहीं।
किसी भी फेस मास्क को बहुत ज्यादा बार लगाने से त्वचा में रूखापन या जलन हो सकती है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी भी फेस मास्क को निर्देश से अधिक समय तक लगाए रखने या बहुत बार इस्तेमाल करने से बचने की सलाह देती है। इसलिए चेहरे की चमक के लिए बार-बार अलग-अलग घरेलू नुस्खे आजमाने के बजाय त्वचा के प्रकार के अनुसार सरल त्वचा देखभाल दिनचर्या अपनाना बेहतर है।
चेहरे की प्राकृतिक चमक के लिए क्या ज्यादा जरूरी है?
चेहरे की त्वचा का स्वास्थ्य केवल किसी एक फेस पैक पर निर्भर नहीं करता। पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी, धूम्रपान से दूरी और धूप से त्वचा की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है।दिन के समय त्वचा को सूरज की पराबैंगनी किरणों से बचाना विशेष रूप से जरूरी है। त्वचा की समस्याओं या दाग-धब्बों के मामले में चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित उत्पाद और विशेषज्ञ की सलाह घरेलू नुस्खों से अधिक भरोसेमंद विकल्प हो सकते हैं।
जलन हो जाए तो क्या करें?
अगर फेस पैक लगाने के बाद जलन या खुजली महसूस हो तो उसे तुरंत धो देना चाहिए। इसके बाद त्वचा को रगड़ने या दूसरा घरेलू नुस्खा लगाने से बचना बेहतर है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के अनुसार त्वचा पर किसी उत्पाद से प्रतिक्रिया होने पर उसे धोकर इस्तेमाल बंद करना चाहिए। हल्की परेशानी में ठंडी पट्टी या पेट्रोलियम जेली मदद कर सकती है। गंभीर प्रतिक्रिया होने पर त्वचा विशेषज्ञ की सलाह जरूरी हो सकती है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा के अनुसार यदि कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस के लक्षण लगातार बने रहें, बार-बार लौटें या गंभीर हों तो चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
निष्कर्ष
बेसन, दही और हल्दी से बना फेस पैक घरेलू त्वचा देखभाल का एक पारंपरिक विकल्प हो सकता है। इससे कुछ लोगों की त्वचा अस्थायी रूप से साफ, मुलायम और तरोताजा महसूस कर सकती है। लेकिन इसे प्राकृतिक ब्लीच, त्वचा का रंग बदलने वाला उपाय या किसी त्वचा रोग का इलाज कहना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है।
हल्दी और दूसरे घरेलू पदार्थ भी संवेदनशील त्वचा में जलन पैदा कर सकते हैं। इसलिए चेहरे पर लगाने से पहले छोटे हिस्से पर परीक्षण करना और किसी भी प्रतिकूल प्रतिक्रिया पर तुरंत इस्तेमाल रोकना जरूरी है। खूबसूरत त्वचा का मतलब त्वचा का रंग बदलना नहीं, बल्कि स्वस्थ और सुरक्षित त्वचा बनाए रखना है। अगर दाग-धब्बे, मुंहासे, अत्यधिक पिगमेंटेशन या लगातार जलन जैसी समस्या है तो घरेलू नुस्खों के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है।
Note: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य और त्वचा देखभाल संबंधी जानकारी के लिए है। किसी गंभीर या लगातार बनी रहने वाली त्वचा समस्या में योग्य त्वचा विशेषज्ञ की सलाह को प्राथमिकता दें।