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बरसात में त्वचा का कैसे रखें ध्यान, जानिए आसान उपाय

Neelam Saini 2026-08-12 15:58:05
बरसात में त्वचा का कैसे रखें ध्यान, जानिए आसान उपाय
बरसात में त्वचा का ऐसे रखें ध्यान, जानिए आसान उपाय

मानसून में त्वचा पर क्यों बढ़ती हैं परेशानियां, ऐसे करें बचाव

बारिश में त्वचा की देखभाल के लिए अपनाएं ये जरूरी तरीके

बरसात में बढ़ी नमी और पसीना मुंहासे, जलन और फंगल संक्रमण जैसी त्वचा संबंधी परेशानियों का जोखिम बढ़ा सकते हैं। ऐसे मौसम में त्वचा को साफ और सूखा रखना, पसीने के बाद चेहरा धोना, हल्के उत्पाद इस्तेमाल करना और बाहर निकलते समय एसपीएफ 30 या अधिक वाला ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन लगाना जरूरी है।

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नई दिल्ली | 12 अगस्त 2026 | ✍️ शाह टाइम्स डेस्क

बरसात में त्वचा की देखभाल क्यों जरूरी है?

बरसात का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन वातावरण में बढ़ी नमी और पसीना त्वचा के लिए कुछ नई परेशानियां पैदा कर सकते हैं। मानसून में त्वचा की देखभाल का सबसे अहम हिस्सा यह है कि त्वचा को साफ, सूखा और अनावश्यक रगड़ या कठोर उत्पादों से सुरक्षित रखा जाए। गर्म और नम मौसम में कुछ फंगल संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार रिंगवर्म और टिनिया वर्सिकलर जैसे फंगल संक्रमण गर्म और नम वातावरण में ज्यादा दिखाई दे सकते हैं। इसलिए बरसात में स्किन केयर का मतलब केवल चेहरे की चमक बनाए रखना नहीं है। इसका मकसद त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत को बनाए रखना, अत्यधिक नमी और पसीने को नियंत्रित करना तथा संक्रमण या जलन के संकेतों को समय रहते पहचानना भी है।

बारिश के मौसम में त्वचा पर क्या असर पड़ता है?

बरसात में तापमान हमेशा बहुत अधिक नहीं होता, लेकिन वातावरण में नमी बढ़ सकती है। पसीना त्वचा पर अधिक समय तक बना रहने पर असहजता, चिपचिपाहट और कुछ लोगों में मुंहासे या अन्य त्वचा संबंधी परेशानियां बढ़ा सकता है। गर्म और नम वातावरण में कुछ यीस्ट और फंगस तेजी से बढ़ सकते हैं। टिनिया वर्सिकलर में त्वचा पर हल्के या गहरे रंग के धब्बे दिखाई दे सकते हैं, जबकि रिंगवर्म में अक्सर गोल या पपड़ीदार चकत्ते बन सकते हैं। हालांकि हर दाने या खुजली को फंगल इंफेक्शन मान लेना सही नहीं है। त्वचा की समस्या के कई कारण हो सकते हैं और लगातार या बढ़ती परेशानी में सही जांच के लिए त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित है।

चेहरा साफ रखें, लेकिन बार-बार न धोएं

बरसात में पसीना और अतिरिक्त तेल चेहरे पर जमा हो सकता है। ऐसे में चेहरा साफ रखना जरूरी है, लेकिन बहुत ज्यादा बार चेहरा धोना भी त्वचा को परेशान कर सकता है। त्वचा विशेषज्ञ मुंहासे वाली त्वचा के लिए हल्के, गैर-घर्षण वाले क्लींजर से दिन में अधिकतम दो बार चेहरा धोने और पसीना आने के बाद सफाई करने की सलाह देते हैं। तेज स्क्रब, कठोर साबुन और जरूरत से ज्यादा सफाई त्वचा में जलन बढ़ा सकती है। घरेलू देखभाल के लिहाज से साफ पानी और हल्के क्लींजर का इस्तेमाल बेहतर विकल्प है। नींबू, बेकिंग सोडा या अन्य तेज घरेलू पदार्थों को चेहरे पर लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि इनसे संवेदनशील त्वचा में जलन हो सकती है।

पसीना आने के बाद त्वचा को साफ करें

बारिश के मौसम में उमस के कारण पसीना आना सामान्य है। समस्या तब बढ़ सकती है जब पसीना लंबे समय तक त्वचा पर बना रहे और कपड़े या त्वचा लगातार नम रहें। व्यायाम या अधिक पसीना आने वाली गतिविधि के बाद चेहरा और शरीर साफ करना उपयोगी आदत है। फंगल संक्रमण से बचाव में त्वचा को सूखा रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है, खासकर शरीर की उन जगहों पर जहां नमी अधिक समय तक बनी रहती है। चेहरे को साफ करते समय रगड़ने के बजाय हल्के हाथों से धोना चाहिए। साफ तौलिये से त्वचा को थपथपाकर सुखाना बेहतर है।

गीले कपड़े लंबे समय तक न पहनें

बारिश में भीगने के बाद लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहना त्वचा के लिए ठीक नहीं है। नम वातावरण फंगल संक्रमण के लिए अनुकूल हो सकता है, इसलिए भीगे कपड़ों को जल्द बदलना और शरीर को अच्छी तरह सुखाना व्यावहारिक सावधानी है। खासकर पैरों, उंगलियों के बीच, बगल और जांघों के आसपास नमी जमा न होने देना चाहिए। खुजली, लाल चकत्ते, जलन या पपड़ी जैसी समस्या लगातार बनी रहे तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना चाहिए।

मॉइस्चराइजर लगाना बंद न करें

बरसात में त्वचा तैलीय महसूस हो सकती है, इसलिए कई लोग मॉइस्चराइजर पूरी तरह बंद कर देते हैं। लेकिन त्वचा का तैलीय महसूस होना और त्वचा का पर्याप्त रूप से मॉइस्चराइज होना एक ही बात नहीं है। मुंहासे वाली त्वचा के लिए ऐसे मॉइस्चराइजर चुने जा सकते हैं जिन पर ऑयल-फ्री या नॉन-कॉमेडोजेनिक लिखा हो। इन उत्पादों को रोमछिद्र बंद करने की संभावना कम होती है। यदि त्वचा बहुत संवेदनशील है तो खुशबू वाले या ऐसे उत्पादों से बचना बेहतर हो सकता है जो लगाने पर जलन पैदा करते हैं। किसी नए उत्पाद को पूरी त्वचा पर लगाने से पहले छोटी जगह पर उसकी सहनशीलता देखना भी उपयोगी सावधानी है।

बरसात में सनस्क्रीन क्यों जरूरी है?

बादल छाए रहने का मतलब यह नहीं है कि पराबैंगनी किरणों से त्वचा को कोई असर नहीं होगा। इसलिए दिन में बाहर निकलते समय सनस्क्रीन का इस्तेमाल स्किन केयर रूटीन का हिस्सा रहना चाहिए। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी ब्रॉड-स्पेक्ट्रम, एसपीएफ 30 या उससे अधिक और वाटर-रेजिस्टेंट सनस्क्रीन की सलाह देती है। ब्रॉड-स्पेक्ट्रम का अर्थ है कि उत्पाद यूवीए और यूवीबी दोनों तरह की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से सुरक्षा देता है। बारिश के मौसम में वाटर-रेजिस्टेंट विकल्प उपयोगी हो सकता है, लेकिन इसे पानी में पूरी तरह न उतरने वाला उत्पाद नहीं समझना चाहिए। लंबे समय तक बाहर रहने या तैराकी जैसी गतिविधि के दौरान लेबल के निर्देश के अनुसार दोबारा लगाना जरूरी हो सकता है। 

मुंहासों से बचने के लिए क्या करें?

नमी और पसीने के साथ कुछ लोगों में मुंहासे बढ़ सकते हैं। ऐसे में चेहरे को बार-बार धोना, तेज स्क्रब करना या हर सप्ताह नया प्रोडक्ट आजमाना समाधान नहीं है। त्वचा विशेषज्ञ मुंहासे वाली त्वचा के लिए हल्के क्लींजर, गैर-कॉमेडोजेनिक उत्पाद और जरूरत के मुताबिक मॉइस्चराइजर की सलाह देते हैं। मुंहासों को दबाने या फोड़ने से सूजन और दाग का जोखिम बढ़ सकता है। अगर छोटे-छोटे एक जैसे दाने माथे, छाती या पीठ पर बार-बार दिखाई दें और गर्म-नम मौसम में बढ़ जाएं, तो इसे खुद से “फंगल एक्ने” मानकर दवा शुरू नहीं करनी चाहिए। इस तरह की समस्या का सही कारण त्वचा विशेषज्ञ ही निर्धारित कर सकते हैं। 

फंगल इंफेक्शन के संकेतों को नजरअंदाज न करें

मानसून में त्वचा पर गोल चकत्ते, लगातार खुजली, पपड़ी, रंग बदलना या शरीर के नम हिस्सों में लालिमा जैसी समस्या दिखाई दे सकती है। रिंगवर्म फंगस से होने वाला संक्रमण है और गर्म, नम मौसम में इसका जोखिम बढ़ सकता है। टिनिया वर्सिकलर में त्वचा पर हल्के या गहरे धब्बे दिखाई दे सकते हैं और ये धब्बे गर्म तथा नम मौसम में ज्यादा स्पष्ट हो सकते हैं। कई बार इसे दूसरी त्वचा समस्याओं से भ्रमित किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में बिना जांच के स्टेरॉयड युक्त क्रीम या कोई दूसरी दवा इस्तेमाल करना उचित नहीं है। यदि दाने फैल रहे हों, लगातार खुजली हो, दर्द या पस हो, या घरेलू देखभाल के बावजूद समस्या बनी रहे तो त्वचा विशेषज्ञ से जांच कराना चाहिए।

घरेलू उपायों में किन बातों का रखें ध्यान?

बरसात में त्वचा की घरेलू देखभाल के लिए सबसे सुरक्षित कदम सामान्य स्वच्छता से जुड़े हैं। साफ पानी से नहाना, पसीने के बाद त्वचा साफ करना, शरीर को अच्छी तरह सुखाना, साफ कपड़े पहनना और व्यक्तिगत तौलिया साझा न करना उपयोगी आदतें हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हर घरेलू नुस्खा त्वचा के लिए सुरक्षित नहीं होता। नींबू का रस, टूथपेस्ट, बेकिंग सोडा या तेज स्क्रब जैसे पदार्थ त्वचा पर जलन पैदा कर सकते हैं और मौजूदा समस्या को बढ़ा सकते हैं। त्वचा पर किसी प्राकृतिक पदार्थ का इस्तेमाल करना हो तो यह मान लेना भी सही नहीं है कि प्राकृतिक होने के कारण वह हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित होगा। संवेदनशील त्वचा, एलर्जी या पहले से मौजूद त्वचा रोग में विशेष सावधानी जरूरी है।

क्या बारिश में ऑयली त्वचा वालों को अलग रूटीन चाहिए?

ऑयली त्वचा में अतिरिक्त सीबम और पसीने के कारण चिपचिपाहट ज्यादा महसूस हो सकती है। ऐसे में बहुत भारी क्रीम और रोमछिद्र बंद करने वाले उत्पादों से बचना उपयोगी हो सकता है।लेकिन त्वचा को पूरी तरह सुखा देना भी सही रणनीति नहीं है। अत्यधिक सफाई और जलन से त्वचा की स्थिति बिगड़ सकती है, इसलिए हल्की सफाई और त्वचा के अनुरूप मॉइस्चराइजर का संतुलित इस्तेमाल ज्यादा व्यावहारिक है। 

बरसात में स्किन केयर को लेकर आम गलतफहमी

एक आम धारणा है कि बारिश के मौसम में सनस्क्रीन की जरूरत नहीं होती। उपलब्ध त्वचा विशेषज्ञों की सलाह इससे अलग है और दिन में बाहर निकलने पर ब्रॉड-स्पेक्ट्रम, एसपीएफ 30 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन इस्तेमाल करने की सिफारिश की जाती है। 
दूसरी गलतफहमी यह है कि त्वचा पर होने वाला हर दाना घरेलू नुस्खे से ठीक हो सकता है। वास्तविकता यह है कि मुंहासे, एलर्जी, फंगल संक्रमण और दूसरी त्वचा समस्याओं के लक्षण एक-दूसरे से मिल सकते हैं, इसलिए लगातार समस्या में सही निदान जरूरी है।

क्या बारिश में रोज सनस्क्रीन लगाना चाहिए?

अगर दिन में बाहर जाना है तो सनस्क्रीन लगाना चाहिए। त्वचा विशेषज्ञ ब्रॉड-स्पेक्ट्रम, एसपीएफ 30 या उससे अधिक और वाटर-रेजिस्टेंट सनस्क्रीन की सलाह देते हैं। 

क्या बरसात में मॉइस्चराइजर लगाना जरूरी है?

हां, जरूरत के अनुसार लगाया जा सकता है। ऑयली या मुंहासे वाली त्वचा के लिए नॉन-कॉमेडोजेनिक और ऑयल-फ्री विकल्प उपयोगी हो सकते हैं। 

क्या बारिश में फंगल इंफेक्शन बढ़ सकता है?

गर्म और नम वातावरण कुछ फंगल संक्रमणों के जोखिम को बढ़ा सकता है। त्वचा को सूखा रखना और पसीने के बाद साफ करना इससे बचाव की सामान्य सावधानियों में शामिल है। 

क्या नींबू या बेकिंग सोडा चेहरे पर लगाना चाहिए?

नियमित स्किन केयर के तौर पर इसकी जरूरत नहीं है। ऐसे घरेलू पदार्थ संवेदनशील त्वचा में जलन पैदा कर सकते हैं, इसलिए प्रमाणित और त्वचा के अनुरूप उत्पादों को प्राथमिकता देना बेहतर है।

डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?

यदि त्वचा पर चकत्ते फैल रहे हों, लगातार खुजली या दर्द हो, पस बन रही हो, रंग में असामान्य बदलाव हो या समस्या घरेलू देखभाल के बावजूद बनी रहे तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।

निष्कर्ष

मानसून में त्वचा की देखभाल का सबसे भरोसेमंद तरीका किसी एक घरेलू नुस्खे पर निर्भर रहना नहीं, बल्कि नियमित और सरल स्किन केयर रूटीन अपनाना है। त्वचा को साफ और सूखा रखना, पसीने के बाद सफाई करना, जरूरत के मुताबिक हल्का मॉइस्चराइजर लगाना और बाहर निकलते समय एसपीएफ 30 या उससे अधिक वाला ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन इस्तेमाल करना बुनियादी कदम हैं। 
साथ ही, फंगल इंफेक्शन या किसी अन्य त्वचा रोग के संकेतों को केवल मौसम का सामान्य असर समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जहां घरेलू देखभाल मददगार हो सकती है, वहीं लगातार, फैलती या गंभीर समस्या में सही निदान और चिकित्सकीय सलाह ही आगे का उचित रास्ता है।
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Neelam Saini

Neelam Saini

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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